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टेलीकॉम मंत्रालय ने नए लीगल फ्रेमवर्क को लेकर मांगी जनता की राय
मौजूदा समय में देश टेलीकॉम को लेकर अंग्रेजों के जमाने का कानून टेलीग्राफ एक्ट चला आ रहा है, अब मंत्रालय नए लीगल फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है. जिस पर नियम तय करने के लिए आम आदमी की राय मांगी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
देश में मौजूदा टेलीकॉम लीगल फ्रेमवर्क बदलने जा रहा है। मौजूदा समय में देश टेलीकॉम को लेकर अंग्रेजों के जमाने का कानून टेलीग्राफ एक्ट चला आ रहा है, जिस लेकर अब मंत्रालय नए लीगल फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है. इसी को लेकर सरकार ने इस पर नियम तय करने के लिए आम आदमी की राय मांगी है.
अब नहीं रहेगा टेलीग्राफ एक्ट
मौजूदा समय में देश में टेलीकॉम के लिए टेलीग्राफ एक्ट काम करता है, लेकिन अब सरकार इसे बदलकर भारतीय दूरसंचार कानून लाने की तैयारी कर रही है. इससे पहले जुलाई में सरकार ने इस पर एक कंसल्टेशन पेपर भी लांच किया था, जिस पर उसने अलग अलग सेक्टर के लोगों से राय मांगी थी और कई संस्था ओं ने अपनी राय दी थी.
सरकार ने दिया कानून का ड्राफट
सरकार ने सुझाव देने के लिए कानून का ड्राफट भी जारी किया है। इस कानून में 12 चैप्टर पांच शिडयूल शामिल हैं. इसमें कानून के हर प्रारूप को डिटेल में दिया गया है, जिसमें लाइसेंसिग, रजिस्ट्रे शन, ऑथराइजेशन और असाइनमेंट जैसी चीजें शामिल है, इसमें साफतौर कहा गया है कि दूरसंचार जैसी सुविधाओं को देने का अधिकार केन्द्र् सरकार के पास रहेगा, जिसमें उसे अलॉट करना, उसे मेंटेन करना और देश भर में उसका विस्तार करना ये सभी शामिल रहेगा.
डेटा प्रोटेक्शेन हो सकेगा और मजबूत
सरकार के इस नए कानून के आने के बाद डेटा प्रोटेक्शन के और मजबूत होने की संभावना है. अभी मौजूदा कानून में कई जगहों पर कई चीजों के बारे में जो स्थिति है उसमें भी इस कानून के आने के बाद बदलाव आने की बड़ी संभावना है.
स्पेक्ट्रम की शेयरिंग, लीजिंग और सरेंडर को लेकर नीति
सरकार ने टेलीकॉम के लिए आवंटित किए जाने वाले स्पेक्ट्रम के शेयरिंग, उसके कारोबार, स्पेक्ट्रम की लीज को सरेंडर करने, इन सभी तथ्यों को सेक्शन पांच के सब सेक्शन 2 में अच्छे से डिफाइन किया है. इन सभी के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता की जरूरत होगी.
नेशनल सिक्योरिटी को लेकर भी दिशानिर्देश
सरकार के इस कानून में नेशनल सिक्योररिटी को लेकर साफ कहा गया है कि सरकार राष्ट्र हित में किसी भी टेलीकॉम कंपनी का ऑपरेशन और उस पर रोक लगाने जैसे निर्णय ले सकती है. यही नहीं सरकार उसका नियंत्रण पूरी तरह से अपने हाथ में भी ले सकती है.
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