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टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकाल सौंपा, सेवानिवृत्ति नीति में ऐतिहासिक छूट
65 वर्ष की सेवानिवृत्ति नीति में पहली बार औपचारिक छूट
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
टाटा ट्रस्ट्स (Tata Trusts) ने टाटा संस (Tata Sons) के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को तीसरा कार्यकारी कार्यकाल सौंपमे की मंजूरी दे दी है, जो टाटा समूह की सेवानिवृत्ति नीति से एक बड़ी छूट मानी जा रही है. बता दें, यह पहली बार है जब समूह ने 65 वर्ष की आयु में कार्यकारी पद छोड़ने के अपने नियम से औपचारिक रूप से छूट दी है.
एन चंद्रशेखरन फरवरी 2027 में 65 वर्ष के हो जाएंगे, और सामान्य नियमों के तहत उन्हें कार्यकारी पद से हटना पड़ता. हालांकि, टाटा संस में 66 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली टाटा ट्रस्ट्स ने इस नीति में छूट देते हुए उनके कार्यकाल को जारी रखने का समर्थन किया है. इसका कारण समूह की सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन बैटरियों और एयर इंडिया के पुनरुद्धार जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में विस्तार को बताया गया है.
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, टाटा संस फरवरी 2026 में चंद्रशेखरन के वर्तमान कार्यकाल की समाप्ति पर इस विस्तार को औपचारिक रूप से लागू करेगा. यह प्रस्ताव नोएल टाटा और टीवीएस ग्रुप के चेयरमैन एमेरिटस वेणु श्रीनिवासन द्वारा 11 सितंबर को हुई टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में पेश किया गया था, जिसे सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया. यह निर्णय न केवल एन चंद्रशेखरन की समूह में बढ़ती साख को दर्शाता है, बल्कि उनके नेतृत्व में बोर्ड के विश्वास को भी प्रकट करता है.
2017 में कार्यभार संभालने के बाद से उन्होंने समूह की कई कंपनियों में व्यापक बदलाव किए हैं. उनके कार्यकाल में टाटा समूह की आय लगभग दोगुनी और लाभ तीन गुना हुआ है. वित्त वर्ष 2024-25 में समूह का राजस्व ₹15.34 लाख करोड़ और मुनाफा ₹1.13 लाख करोड़ दर्ज किया गया.
यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब टाटा संस को सार्वजनिक (IPO) करने को लेकर समूह के भीतर मतभेद की खबरें हैं. जुलाई में पारित एक बोर्ड प्रस्ताव ने कंपनी के निजी रूप में बने रहने की प्राथमिकता को दोहराया था, लेकिन अब इसकी समीक्षा की जा रही है. ऐसे में चंद्रशेखरन का नेतृत्व समूह के लिए स्थिरता का प्रतीक माना जा रहा है.
टाटा समूह की परंपरा के अनुसार, कार्यकारी पदधारी अधिकारियों को 65 वर्ष की उम्र में सक्रिय पदों से हटना होता है, हालांकि वे 70 वर्ष तक गैर-कार्यकारी भूमिकाओं में बने रह सकते हैं. उदाहरण के लिए, नोएल टाटा ने भी 65 की उम्र में गैर-कार्यकारी भूमिका अपना ली थी. चंद्रशेखरन के मामले में लिया गया यह निर्णय इस परंपरा से हटकर है.
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