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स्विगी जुटाएगी ₹10,000 करोड़ का फंड, मजबूत करेगी बैलेंस शीट और बढ़ाएगी क्विक-कॉमर्स में पकड़
स्विगी का यह कदम प्रतिस्पर्धी बाजार में अपनी स्थिति को मजबूत करने और निवेशकों के विश्वास को बढ़ाने की दिशा में बड़ा प्रयास माना जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
फूड डिलीवरी कंपनी स्विगी ने अपने विस्तार और वित्तीय स्थिरता को मजबूत करने के लिए 10,000 करोड़ रुपये तक की राशि जुटाने की योजना को मंजूरी दी है. कंपनी इस फंड को योग्य संस्थागत प्लेसमेंट (QIP) या अन्य स्वीकृत माध्यमों से जुटा सकती है.
बोर्ड ने दी बड़ी मंजूरी
स्विगी लिमिटेड के निदेशक मंडल ने 7 नवंबर 2025 को आयोजित बैठक में फंड जुटाने की इस योजना को हरी झंडी दे दी. कंपनी ने कहा कि यह कदम भारत के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स और फूड डिलीवरी मार्केट में अपनी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से उठाया गया है. फंड जुटाने की प्रक्रिया सार्वजनिक या निजी पेशकश के जरिये की जा सकती है. स्विगी ने सेबी के दिशा-निर्देशों के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से असाधारण आम बैठक (ईजीएम) बुलाकर शेयरधारकों से मंजूरी लेने की बात कही है.
कंपनी का बयान
स्विगी ने स्टॉक एक्सचेंज को दी जानकारी में कहा कि कंपनी एक या एक से अधिक चरणों में योग्य संस्थानों के प्लेसमेंट या अन्य माध्यमों से फंड जुटाने की योजना बना रही है. कंपनी इस राशि का उपयोग विस्तार, तकनीकी निवेश और बैलेंस शीट को मजबूत करने में करेगी. बता दें कि घाटे में चल रही स्विगी अपने प्रतिद्वंद्वी ब्लिंकिट और जेप्टो जैसी कंपनियों के साथ मार्केट शेयर की दौड़ में भारी निवेश कर रही है.
ब्रोकरेज फर्म का नजरिया
तेज प्रतिस्पर्धा के बावजूद ब्रोकरेज हाउस स्विगी के शेयर को लेकर आशावादी हैं. मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी के शेयर पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखी है और 550 रुपये का लक्ष्य मूल्य तय किया है. यह मौजूदा स्तर 401 रुपये से लगभग 35% अधिक है. ब्रोकरेज को उम्मीद है कि वित्त वर्ष 2026-27 तक स्विगी की आय में 20-22% की वृद्धि होगी.
वित्तीय प्रदर्शन में मिला-जुला रुख
स्विगी का घाटा वित्त वर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही में बढ़कर 1,092 करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में यह 626 करोड़ रुपये था. हालांकि, कंपनी की परिचालन आय बढ़कर 5,561 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वर्ष 3,601 करोड़ रुपये थी. कंपनी ने बताया कि खर्च में भी इजाफा हुआ है और यह 6,711 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही में 4,309 करोड़ रुपये था.
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