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Suzlon Energy: इजरायल युद्ध की वजह से आई गिरावट या बात कुछ और है?

सुजलॉन एनर्जी ने शेयर कल 5 प्रतिशत के लोअर सर्किट में फंस गए. इससे पहले तक कंपनी के शेयरों ने अच्छा-खासा रिटर्न दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

विंडमैन के नाम से विख्यात रहे दिवंगत कारोबारी तुलसी तांती की कंपनी Suzlon Energy ने पिछले कुछ वक्त में अपने निवेशकों को छप्परफाड़ रिटर्न दिया है. कंपनी ने शेयर बीते छह महीनों में 243.48% का रिटर्न दे चुके हैं. पिछले 5 कारोबारी सत्रों में भी इनमें तेजी दर्ज हुई है, लेकिन सोमवार को Suzlon Energy के शेयर बड़ी गिरावट के साथ बंद हुए. वैसे, Israel-Hamas War के चलते कल शेयर बाजार ही भारी गिरावट के बीच कारोबार कर रहा था, तो क्या Suzlon की गिरावट भी उसी का हिस्सा है या फिर बात कुछ और है?

क्या होता है ASM?
कल यानी 9 अक्टूबर को Suzlon Energy में 5 प्रतिशत के लोवर सर्किट लगा और शेयर 27.65 रुपए के भाव पर बंद हुए. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी के शेयरों में ASM स्टेज IV कैटेगरी में शामिल किया गया है. यही वजह है कि उसके शेयरों में सोमवार को गिरावट देखने को मिली. दरअसल, सुजलॉन एनर्जी के स्टॉक को अब डायरेक्ट स्टेज IV 'ASM फ्रेमवर्क' में रखा गया है. ASM का मतलब होता है - एडिशनल सर्विलांस मेजर. जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि अब कंपनी के शेयरों पर स्टॉक एक्सचेंज की अतिरिक्त निगरानी रहेगी.

क्यों किया गया ऐसा?
स्टॉक मार्किट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब किसी स्टॉक को ASM लिस्ट के तहत रखा जाता है, तो आमतौर पर वो ट्रेडर्स के लिए कम आकर्षक हो जाता है. लिहाजा, ASM स्टेज IV कैटेगरी में आने वाले शेयरों में मुनाफावसूली की संभावना बढ़ जाती है. यह भी संभव है कि मुनाफावसूली खत्म होने पर स्टॉक की कीमतें कुछ दिनों में स्थिर भी हो जाएं. जहां तक बात सुजलॉन एनर्जी की है, तो इस पर बारीकी से नजर रखनी होगी. गौरतलब है कि इस शेयर में उतार चढ़ाव की गति बेहद असामान्य रही है. कभी एक ही झटके में यह ऊपर चढ़ गया, तो कभी उम्मीदों के विपरीत गोता लगा गया. यही वजह है कि इस शेयर पर अतिरिक्त निगरानी रखी जाएगी. दरअसल, कीमतों में असामान्य उतार-चढ़ाव के चलते एक्सचेंज और रेगुलेटर को यह निर्णय लेना पड़ता है.

2003 में मिला पहला ऑर्डर
तुलसी तांती को भारत का विंड मैन कहा जाता था. उन्होंने अपनी कपड़ा कंपनी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए 1995 में पवन ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में कदम रखा और सुजलॉन एनर्जी की स्थापना की. तांती ने रिन्यूएबल एनर्जी की कल्पना ऐसे समय में की थी, जब इस सेक्टर में इंटरनेशनल प्लेयर्स का दबदबा था. 2003 में सुजलॉन को 24 टर्बाइनों की आपूर्ति के लिए डैनमार एंड एसोसिएट्स से अपना पहला ऑर्डर मिला था. फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप 8,535.90 करोड़ रुपए है. सुजलॉन एनर्जी पुणे बेस्ड इंडियन मल्टीनेशनल विंड टर्बाइन मैन्युफैक्चरर है.

ऐसे हुई थी शुरुआत  
तुलसी तांती मूल रूप से कपड़ा व्यवसायी थे, लेकिन बिजली की कमी के चलते उत्पादन में आने वाली कठनाइयों की वजह से उन्होंने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में कदम रखा. उन्होंने 1995 में कपड़ा कंपनी की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पवन ऊर्जा उत्पादन शुरू करने का फैसला लिया और सुजलॉन एनर्जी अस्तित्व में आई. इसके बाद उन्होंने 2001 में कपड़ा व्यवसाय को बेच दिया.
 


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