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NCLAT के खिलाफ जांच करवाएगा Supreme Court, रद्द किया Finolex Cables को दिया आदेश!
हाल ही में देश के सर्वोच्च न्यायलय द्वारा राष्ट्रीय कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (NCLAT) के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
राष्ट्रीय कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (NCLAT) को लेकर इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है. देश के सर्वोच्च्च न्यायलय द्वारा NCLAT के खिलाफ जांच का आदेश दिया गया है और साथ ही NCLAT ने फिनोलेक्स केबल्स (Finolex Cables) की वार्षिक सामान्य बैठक (AGM) के संबंध में दिए गए अपने आदेश को भी रद्द कर दिया है.
सुप्रीम कोर्ट ने NCLAT के खिलाफ क्यों दिए जांच के आदेश?
देश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिए गए आदेशों को न मानने के संबंध में अदालत ने राष्ट्रीय कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (NCLAT) की एक न्यायपीठ के खिलाफ जांच का आदेश दिया है. 13 अक्टूबर 2023 को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा NCLAT के चेयरपर्सन जस्टिस अशोक भूषण को आदेश दिया गया था कि NCLAT की एक न्यायपीठ के खिलाफ जांच बैठाएं और खोजें कि क्या न्यायपीठ द्वारा एपेक्स कोर्ट (Apex Court) द्वारा सुनाये गए फैसले को नजरअंदाज किया गया है या नहीं?
NCLAT और Finolex Cables
जस्टिस अशोक भूषण को जांच की रिपोर्ट जमा करवाने के लिए 16 अक्टूबर 2023 को शाम 5 बजे तक का समय दिया गया है. सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अगर कही गई बात सच निकलती है तो यह अदालत को चुनौती देने जैसा मना जाएगा. राष्ट्रीय कंपनी लॉ अपील ट्रिब्यूनल (NCLAT) ने 21 सितंबर को फिनोलेक्स (Finolex Cables) की वार्षिक सामान्य बैठक (AGM) के आयोजन पर यथास्थिति का निर्देश दिया था. आपको बता दें कि NCLAT द्वारा उस वार्षिक सामान्य बैठक तक जांच का आदेश दिया गया था जब तक प्रकाश छाबरिया और दीपक छाबरिया के बीच विवाद की बात सामने नहीं आई थी.
सुप्रीम कोर्ट पहुंचे प्रकाश छाबरिया
दूसरी तरफ 26 सितंबर को देश के सर्वोच्च न्यायलय द्वारा इस आदेश को रद्द कर दिया गया था और कहा गया था कि एग्जीक्यूटिव चेयरपर्सन की नियुक्ति जैसे जरूरी फैसलों का निश्चय NCLAT में जारी मामले के फैसले के आधार पर लिया जाएगा. वार्षिक सामान्य बैठक के बाद भी फिनोलेक्स (Finolex Cables) के नतीजे जारी नहीं किये गए थे. इसके बाद प्रकाश छाबरिया द्वारा सर्वोच्च न्यायालाय में अवमानना की अर्जी दर्ज करवाई गई थी और इस अर्जी पर 13 अक्टूबर 2023 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुनवाई भी की गई थी.
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