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सप्लाई की कमी के चलते कड़वी हुई शुगर, दामों में हुआ इजाफा
दरअसल शुगर के दामों जो इजाफा हुआ है उसके पीछे गन्ने के एक्सपोर्ट में हुई कमी और गन्ने के बायोफ्यूल के लिए बढ़ते इस्तेमाल को वजह बताया जा रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
पहले से ही महंगाई का सामना कर रहे आम आदमी के लिए अब एक बुरी खबर चाय को मीठा बनाने वाली शुगर की ओर से आई है. शुगर के दामों में 10 प्रतिशत तक का इजाफा हो गया है. इसके पीछे की जो वजह बताई जा रही है वो ये है कि शुगर की आपूर्ति पर लगी लिमिटेशन और मार्च में बिक्री कोटा समाप्त होने को इसकी प्रमुख वजह बताया जा रहा है. इसके कारण चीनी की कीमत पिछले एक दशक के उच्च स्तर पर पहुंच गई है. जबकि कच्ची चीनी छह वर्षों में अपने सबसे महंगे स्तर पर पहुंच रही है.
इस बढ़ोतरी के और भी हैं कारण
शुगर के दामों में हुई बढ़ोतरी के लिए सिर्फ यही दो वजह नहीं हैं. इस बढ़ोतरी के पीछे गन्ने की फसल को बारिश के कारण हुआ नुकसान, बायोफ्यूल (जैव ईंधन) उत्पादन के लिए गन्ने के अधिक उपयोग और चीनी निर्यात में भारत की कमी के कारण हुई थी. महाराष्ट्र में मस्कोवैडो चीनी (एम चीनी) का स्पॉट रेट वर्तमान में 3,620 रुपये से 3,800 रुपये प्रति क्विंटल के बीच है. मस्कोवैडो चीनी (एम चीनी) एक अपरिष्कृत गन्ना चीनी है जिसमें प्राकृतिक शीरा बड़ी मात्रा में होता है. वहीं दूसरी ओर कच्चे तेल के दामों में हुआ इजाफा, जो कि पिछले दो हफ्ते के उच्च्तम स्तर पर पहुंच गया है, यही नहीं इसके साथ-साथ गैसोलीन और निर्जल इथेनॉल पर ब्राजील के स्टेट कर में हुई बढ़ोतरी ने भी कीमतों को बढ़ाने में बड़ी भूमिका अदा की है.
कितना हो सकता है चीनी उत्पादन
2022-23 में चीनी उत्पादन को लेकर कई संस्थाएं अलग-अलग अनुमान लगा रही हैं. ट्रॉपिकल रिसर्च ने जहां 1.6 मिलियन टन सरप्लस की भविष्यवाणी की है वहीं एस एंड पी ग्लोबल ने 600,000 टन सरप्लस की भविष्यवाणी की है, और अंतर्राष्ट्रीय चीनी संगठन ने 4.15 मिलियन टन सरप्लस की भविष्यवाणी की है. 2022-23 सीज़न में, भारत को 6 मिलियन टन निर्यात के साथ 34 मिलियन टन चीनी का उत्पादन करने का अनुमान है. वहीं इथेनॉल के लिए इस्तेमाल होने के कारण यह उत्पादन 4.5-5 मिलियन टन होने का अनुमान है. इस बीच, यूरोप में चीनी उत्पादन 7 प्रतिशत गिरकर 15.5 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि ब्राजील में उत्पादन 4.7 प्रतिशत बढ़कर 33.58 मिलियन टन रहने का अनुमान है.
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