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मार्च में भारत की ईंधन खपत में जोरदार उछाल, LPG बिक्री 12.8% घटी
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस क्षेत्र में शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं. भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत LPG जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
मार्च महीने में भारत की कुल ईंधन खपत में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, लेकिन रसोई गैस (LPG) की मांग में बड़ी गिरावट देखने को मिली. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जहां पेट्रोल और डीजल की खपत मजबूत रही, वहीं सप्लाई बाधाओं के चलते LPG उपभोग पर असर पड़ा.
आधिकारिक डेटा के अनुसार, मार्च में देश की कुल ईंधन खपत बढ़कर 21.37 मिलियन मीट्रिक टन हो गई, जो दिसंबर के बाद सबसे ऊंचा स्तर है. यह आंकड़ा फरवरी के 20.19 मिलियन टन से ज्यादा है और सालाना आधार पर 3.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है. यह डेटा Petroleum Planning and Analysis Cell (PPAC) द्वारा जारी किया गया है. खपत में यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पेट्रोल और डीजल जैसे परिवहन ईंधनों की मजबूत मांग के कारण हुई, जो देश में बढ़ती आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों का संकेत देती है.
LPG की मांग में बड़ी गिरावट
हालांकि कुल ईंधन खपत बढ़ी, लेकिन LPG की मांग में 12.8 प्रतिशत की सालाना गिरावट दर्ज की गई और यह घटकर 2.38 मिलियन टन रह गई. इस गिरावट की बड़ी वजह स्ट्रेट ऑफ हार्मुज (Strait of Hormuz) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण सप्लाई में आई बाधाएं हैं. यह जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, जहां से दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस गुजरता है.
सप्लाई संकट से बढ़ी चुनौती
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस क्षेत्र में शिपिंग रूट प्रभावित हुए हैं. भारत अपनी लगभग 90 प्रतिशत LPG जरूरतों के लिए मध्य पूर्व पर निर्भर है, ऐसे में सप्लाई में आई रुकावट का सीधा असर घरेलू खपत पर पड़ा है. इसे दशकों के सबसे बड़े LPG सप्लाई संकटों में से एक माना जा रहा है.
घरेलू सप्लाई को प्राथमिकता
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने आपात कदम उठाए हैं. सीमित LPG सप्लाई को घरेलू उपयोग के लिए प्राथमिकता दी जा रही है. साथ ही पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) से जुड़े उपभोक्ताओं के लिए तीन महीने बाद LPG सप्लाई रोकने का फैसला लिया गया है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके.
पेट्रोल-डीजल की मांग में तेजी
दूसरी ओर, पेट्रोल की खपत में तेज उछाल देखा गया. यह महीने-दर-महीने 12.2 प्रतिशत और सालाना आधार पर 7.6 प्रतिशत बढ़ी. डीजल, जो आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख संकेतक माना जाता है, उसकी मांग में भी सालाना 8.1 प्रतिशत और फरवरी के मुकाबले करीब 14 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
कीमतें स्थिर, कंपनियों पर दबाव
वैश्विक स्तर पर ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों को स्थिर रखा है, ताकि उपभोक्ताओं पर बोझ न बढ़े. इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, तेल कंपनियां फिलहाल डीजल पर 50 रुपये प्रति लीटर से ज्यादा और पेट्रोल पर करीब 20 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठा रही हैं.
अन्य ईंधनों का हाल
अन्य ईंधनों की बात करें तो नैफ्था की खपत में सालाना 8.1 प्रतिशत की गिरावट आई. वहीं बिटुमेन की मांग में महीने-दर-महीने 10.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, लेकिन सालाना आधार पर यह कमजोर रही. फ्यूल ऑयल की खपत में हालांकि पिछले साल के मुकाबले 31 प्रतिशत से ज्यादा की तेज वृद्धि दर्ज की गई.
कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारत में आर्थिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं, जिससे परिवहन ईंधनों की मांग बढ़ रही है. वहीं, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का असर घरेलू ऊर्जा आपूर्ति पर साफ दिखाई दे रहा है, खासकर LPG जैसे जरूरी ईंधन पर.
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