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अमेरिका में “मेड इन इंडिया” स्मार्टफोन की जोरदार मांग, एक्सपोर्ट 3 गुना बढ़कर 1.47 अरब डॉलर पार
“मेड इन इंडिया” स्मार्टफोन अब न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रहे हैं. अमेरिका सहित अन्य देशों में निर्यात में लगातार बढ़ोतरी इस क्षेत्र के लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोल रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
भारत में बने स्मार्टफोन अमेरिका में तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. ताजा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 में भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात तीन गुना बढ़कर 1.47 अरब डॉलर तक पहुंच गया. इस वृद्धि ने अप्रैल-अक्टूबर की कुल अवधि के एक्सपोर्ट को 10.78 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 3.60 अरब डॉलर के आंकड़े से काफी अधिक है. ग्लोबल मार्केट में आर्थिक अनिश्चितताओं और टैरिफ दबावों के बावजूद इस उछाल ने भारत की मजबूत प्रोडक्शन क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन में पकड़ को स्पष्ट किया है.
अक्टूबर में अमेरिका को निर्यात में जबरदस्त बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात 0.46 अरब डॉलर से बढ़कर 1.47 अरब डॉलर हो गया. यह तीन गुना से अधिक की वृद्धि दर्शाता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह वृद्धि ऐसे समय आई है जब वैश्विक बाजार कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन भारत के स्मार्टफोन निर्माताओं ने निर्यात में महत्वपूर्ण छलांग लगाई.
साल की शुरुआत में उतार-चढ़ाव, अब स्थिर रिकवरी
इस साल की शुरुआत में स्मार्टफोन निर्यात में उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अप्रैल में निर्यात 1.65 अरब डॉलर, मई में 2.29 अरब डॉलर तक बढ़ा. इसके बाद जून में 1.99 अरब, जुलाई में 1.52 अरब, अगस्त में 0.96 अरब और सितंबर में 0.88 अरब डॉलर तक गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, साल-दर-साल तुलना में हर महीने निर्यात में सकारात्मक वृद्धि रही, जो भारत की सप्लाई चेन की स्थिरता और उत्पादन क्षमता को दर्शाती है.
वैश्विक बाजार में भी भारत की पकड़ मजबूत
दुनियाभर में भारत के स्मार्टफोन निर्यात ने अप्रैल-अक्टूबर 2025 में 10.68 अरब डॉलर से बढ़कर 15.95 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया, यानी लगभग 49.35% की ग्रोथ. मई में 66.54%, जून में 66.61% और सितंबर में 82.27% की तेजी दर्ज की गई. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार यह वृद्धि भारत की रणनीतिक मजबूती, स्केल इफिशिएंसी, बेहतर PLI योजनाओं और ग्लोबल ब्रांड्स के बढ़ते निवेश के कारण संभव हो पाई.
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