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स्ट्रीट-फाइटर CFO: जुगेशिंदर “रॉबी” सिंह, वह फायरफाइटर जिसने फोन और रोडशो दोनों संभाले

जुगेशिंदर “रॉबी” सिंह सिर्फ एक मुख्य वित्त अधिकारी (CFO) नहीं हैं, बल्कि एक ऐसे कॉरपोरेट योद्धा हैं जो संकट को चुनौती की तरह लेते हैं और तर्क, आंकड़ों व आत्मविश्वास के मेल से उसे अवसर में बदल देते हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 10 months ago

पलक शाह

“कितने गाजी आए, कितने गाजी गए,” जुगेशिंदर (“रॉबी”) सिंह ने उस सुबह X पर लिखा, जब अमेरिकी शॉर्ट-सेलर हिन्डनबर्ग रिसर्च ने घोषणा की कि वह स्थायी रूप से अपना काम बंद कर रहा है. यह रॉबी की ओर से अडानी समूह की जीत का जश्न था. लगभग अनुवाद में, यह पोस्ट कहती थी “कई विजेता आए, कई विजेता गए.” यह पोस्ट भारत के बिजनेस फीड्स पर गूंज उठी. रॉबी वह कॉरपोरेट CFO हैं जो स्प्रेडशीट नहीं, बल्कि तीखे तंज़ पोस्ट करते हैं, हर बार जब अरबपति गौतम अडानी और उनका समूह वामपंथी धड़े के हमले में होता है.

सिंह ने अपने करियर को फंडिंग गैप्स भरने में और अपनी पहचान को निर्णायक तर्क देने में बनाया है. जब जनवरी 2023 में एक शॉर्ट-सेलर की रिपोर्ट ने अदाणी के शेयरों से अरबों डॉलर मिटा दिए, तो उन्होंने भारत के तिरंगे के साथ कैमरे के सामने आकर आरोपों को “चयनात्मक भ्रामक जानकारी का दुष्ट संयोजन” कहा और इसके बाद 400-पन्नों की विस्तृत जवाबी रिपोर्ट पेश की.

यदि गौतम अडानी इस साम्राज्य के वास्तुकार हैं, तो रॉबी सिंह संकट के समय इसके मुख्य निर्माण प्रमुख बन चुके हैं. हिन्डनबर्ग झटके के कुछ ही हफ्तों में, अदाणी ने GQG पार्टनर्स से चार लिस्टेड कंपनियों में ब्लॉक डील के ज़रिए 1.87 अरब डॉलर का निवेश हासिल किया, एक शुरुआती लाइफ़लाइन जिसने गिरावट को थाम दिया. आधिकारिक तौर पर सिंह ने इसे “ऐतिहासिक सौदा” कहा; परदे के पीछे उन्होंने निवेशक कूटनीति संभाली, दुबई, लंदन और अमेरिकी शहरों में फिक्स्ड-इनकम रोडशो कराए ताकि भरोसा बहाल हो सके.

यह शुरुआती निवेश यहीं नहीं रुका. बाद में GQG ने 500 मिलियन डॉलर के अंबुजा सीमेंट्स शेयर बिक्री में सबसे बड़ा खरीदार बनकर यह दिखाया कि इस बुटीक मैनेजर का पैसा और विस्तार में, अदाणी की पहुँच जरूरत के वक्त हमेशा मौजूद रही.

वह CFO जो आंकड़ों में और बहस में दोनों में लड़ता है

सिंह पारंपरिक ग्रे-फ्लैनल CFO नहीं हैं. उनका X फीड पूंजीगत व्यय के मार्गदर्शन के साथ तीखे जवाबों का मिश्रण है.

16 मार्च 2023 को, हिन्डनबर्ग विवाद के बीच, महुआ मोइत्रा ने विनोद अदाणी की भूमिका को लेकर अदाणी के रुख में बदलाव पर तंज कसा, ट्वीट किया “जनवरी में अदाणी ने कहा ‘विनोद अदाणी का कोई प्रबंधकीय पद नहीं है... आज कह रहे हैं ‘विनोद अदाणी प्रमोटर समूह का हिस्सा हैं...’” रॉबी ने तुरंत पलटवार किया: “दुखद. भारतीय संसद की माननीय सांसद द्वारा अनभिज्ञ और जानबूझकर गुमराह करने का प्रयास.” उन्होंने इसके बाद एक थ्रेड में “प्रमोटर” और “मैनेजमेंट” के कानूनी अंतर को समझाया मुद्दे को कॉरपोरेट सेमांटिक्स का मास्टरक्लास बना दिया.

आगे बढ़ते हुए, 19 सितंबर 2025 को, जब SEBI ने हिन्डनबर्ग आरोपों पर अदाणी को क्लीन चिट दी, मोइत्रा ने तंज़ कसा: “वाह. @SEBI_India ने @AdaniOnline को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया? सच में? उम्मीद नहीं थी.” रॉबी ने उत्सव भरे अंदाज में जवाब दिया: “आपको आनंदमय और सुखद पूजा की शुभकामनाएं माननीय सांसद.” दुर्गा पूजा के दौरान किया गया यह शिष्ट व्यंग्य वायरल हो गया, एक मखमली दस्ताने में छिपा प्रहार, जिसने बिजनेस फीड्स पर हलचल मचा दी और साथ ही अदाणी के शेयर चढ़ गए.

उन्होंने आलोचकों को नाम लेकर भी निशाना बनाया है. एक पोस्ट में उन्होंने पत्रकार रवि नायर का जिक्र करते हुए आलोचकों के एक समूह का मज़ाक उड़ाया; दूसरे में मुद्रा और मैक्रो-इकॉनॉमिक दावों पर बहस की. यह है कॉरपोरेट कम्युनिकेशन, सिंह-शैली में तथ्यों के साथ व्यंग्य, CFO के हैंडल से प्रस्तुत.

यह बहादुरी सख्त वित्तीय तथ्यों के साथ जुड़ी है. जून 2024 में सिंह ने कहा कि अडानी FY25 में पूंजीगत व्यय लगभग दोगुना कर ₹1.3 ट्रिलियन ($15.6 बिलियन) करेगा, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार शामिल है, और साथ ही Paytm हिस्सेदारी के अफ़वाहों को भी खारिज किया. उन्होंने कुछ SEBI नोटिसों को “तुच्छ” कहकर नजरअंदाज किया, यह दिखाते हुए कि समूह का रुख़ “आंख न झपकने वाली अनुपालन” का है.

नया क्रॉसफ़ायर: LIC, वॉशिंगटन पोस्ट और सिंह की पलट-कथा

पिछले हफ्ते, वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि अमेरिकी रिश्वत और धोखाधड़ी के आरोपों के बाद भारतीय अधिकारियों ने राज्य-स्वामित्व वाली बीमा कंपनी LIC के ज़रिए 3.9 अरब डॉलर की योजना बनाई थी ताकि अडानी को सहायता दी जा सके. यह रिपोर्ट भारत में “क्रोनी कैपिटलिज़्म” पर सांस्कृतिक युद्ध का कारण बनी.

रॉबी की प्रतिक्रिया क्या थी: “वॉशिंगटन पोस्ट का फाइनेंस पर लिखना ऐसा है जैसे @JeffBezos या मैं बालों की पूर्णता पर लिखें. 100% मूर्खता. जैसा वोल्फगैंग पॉली ने कहा था, ‘यह तो गलत भी नहीं है.’” इस पोस्ट को कुछ ही दिनों में 2,800 से ज़्यादा लाइक्स और 1,00,000 व्यूज़ मिले “क्रोनी कैपिटलिज्म” की कहानियों को मूर्खतापूर्ण करार देने की कला का नमूना.

बाद में, LIC ने भी जवाब दिया कि रिपोर्ट “झूठी” और “सच से कोसों दूर” है, यह कहते हुए कि उसके निवेश निर्णय स्वतंत्र हैं, एक और मोर्चा, जिसे सिंह ऑनलाइन लड़ने में पीछे नहीं रहते.

और अमेरिकी मामलों पर जब 2024 के अंत में अमेरिकी अधिकारियों ने सोलर-पावर अनुबंध से जुड़े आरोप लगाए, सिंह ने स्पष्ट कहा, ये आरोप केवल अडानी ग्रीन के एक अनुबंध से संबंधित हैं, जो उस व्यवसाय का लगभग 10 प्रतिशत है; समूह उचित मंच पर उत्तर देगा. उन्होंने व्यापक कथा को सिरे से खारिज कर दिया.

भाषण के पीछे का रिज्यूमे

यह नाटकीयता उनके करियर को नहीं छिपा सकती. अडानी एंटरप्राइजेज ने 2019 में सिंह को CFO नियुक्त किया, इससे पहले वह ऑस्ट्रेलिया और अन्य देशों में इंफ्रास्ट्रक्चर-केंद्रित निवेश बैंकिंग में कार्यरत थे. उनके पास इंजीनियरिंग और एप्लाइड फाइनेंस की डिग्रियाँ हैं. यह वैश्विक अनुभव अब उनके राष्ट्रवादी रूप को मजबूती देता है, फ्रेम में झंडा, कैप्शन में देसी मुहावरे.

वह X पर अपनी पहचान को भी रेखांकित करते हैं: “1996 से मुझे US/Aus/EU/CAN में काम करने की पूरी स्वतंत्रता रही है. आज, मैं भारत में हूँ, एक सहस्राब्दि में मिलने वाला अवसर.” संदेश साफ है, उन्होंने पक्ष चुन लिया है, और वह इसे सार्वजनिक रूप से बचाने वाले हैं.

क्यों महत्वपूर्ण हैं सिंह

हर कॉरपोरेट संकट में एक ऐसा अनुवादक होता है जो अराजकता को नकदी प्रवाह में बदलता है. अडानी के सबसे अंधेरे दौर में, सिंह वही अनुवादक बने, बॉन्ड डेस्क के लिए 413-पन्नों की जवाबी रिपोर्ट और टाइमलाइन के लिए एक-लाइनर के साथ. उन्होंने निवेशक रोडशो का नेतृत्व किया, GQG को रणनीतिक सहारा बनाया, और अदालतों व आलोचकों के बीच भी भविष्य की पूंजीगत योजनाएँ प्रस्तुत करते रहे.

यह एक संतुलन भरा प्रदर्शन है, एक CFO जो सुबह पंजाबी सिनेमा के डायलॉग उद्धृत करता है और दोपहर में अरबों के सौदे करता है. लेकिन एक ऐसे समूह में जो साहसी इंफ्रास्ट्रक्चर दांव पर बना है, वहाँ आंकड़े और कहानी एक ही बैलेंस शीट के दो पहलू हैं और रॉबी सिंह ने तय कर लिया है कि दोनों पर अधिकार उन्हीं का होगा.

पलक शाह, BW रिपोर्टर्स

(पलक शाह एक अनुभवी खोजी पत्रकार हैं और *The Market Mafia: Chronicle of India’s High-Tech Stock Market Scandal & The Cabal That Went Scot-Free के निडर लेखक हैं. मुंबई में लगभग दो दशकों की ग्राउंड रिपोर्टिंग के अनुभव के साथ, पालक ने खुद को एक अडिग सच की खोज करने वाले पत्रकार के रूप में स्थापित किया है, जो पैसे, सत्ता और नियमन के गठजोड़ की तहों में गहराई तक जाते हैं. उनके लेख भारत के सबसे प्रतिष्ठित वित्तीय अखबारों जैसे The Economic Times, Business Standard, The Financial Express और The Hindu Business Line में प्रकाशित हुए हैं जहां उनकी तीखी रिपोर्टिंग ने नरेटिव गढ़े और कॉर्पोरेट बोर्डरूम्स को हिला कर रख दिया.

19 साल की उम्र में ही अपराध पत्रकारिता की ओर खिंचाव महसूस करने वाले पालक ने जल्द ही समझ लिया कि 1980 के दशक के मुंबई के गिरोह युद्ध अब एक और अधिक चिकने, लेकिन कहीं अधिक खतरनाक संगठित अपराध यानी कॉर्पोरेट टावरों में रची जाने वाली सफेदपोश साजिशों में बदल चुके हैं. यह अहसास ही उन्हें फाइनेंशियल जर्नलिज्म की ओर ले गया, जहां उन्होंने भारत की ‘सफेद धन’ अर्थव्यवस्था की जटिल चालों को वर्षों तक समझा और उजागर किया है. शेयर बाजार में हेरफेर से लेकर नियामक खामियों तक, पलक का काम हाई-फाइनेंस की चमक-दमक से पर्दा हटाकर दिखाता है कि असली धागे खींच कौन रहा है.)

 

 

 


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