चुनावी माहौल में बड़े निवेश से बच रहे इन्वेस्टर्स, लेकिन आप आज इन शेयरों पर बेधड़क लगा डालिए दांव!

शेयर बाजार के लिए आज सप्ताह का आखिरी कारोबारी दिन है और आज कुछ शेयरों में तेजी के संकेत मिले हैं.

Last Modified:
Friday, 10 May, 2024
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लोकसभा चुनाव के परिणाम भले ही लगभग स्पष्ट हों, लेकिन इसके बावजूद निवेशक कोई जोखिम मोल लेना नहीं चाहते. वह बड़े निवेश से फिलहाल बच रहे हैं. घरेलू के साथ-साथ विदेशी निवेशक भी खरीदारी में ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखा रहे. यही वजह है कि हमारा शेयर बाजार (Stock Market) लगातार गिर रहा है. गुरुवार को बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली. इस दौरान, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाले सेंसेक्स 1,062.22 अंक फिसलकर 72,404.17 पर बंद हुआ. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी भी 345 अंक लुढ़ककर 1,957.50 पर पहुंच गया. चलिए जानते हैं कि सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी आज कौनसे शेयर ट्रेंड में रह सकते हैं.

MACD से मिले ये संकेत
मोमेंटम इंडिकेटर मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डिवर्जेंस (MACD) ने आज के लिए केवल 4 शेयरों पर तेजी का रुख दर्शाया है. इसमें Bosch के साथ-साथ Zydus Wellness, Nesco और Mahaan Foods का नाम शामिल है. इसका मतलब है कि इन शेयरों के भाव आज चढ़ सकते हैं और ऐसे में आपके लिए मुनाफा कमाने की गुंजाइश भी बन सकती है. हालांकि, BW हिंदी आपको सलाह देता है कि स्टॉक मार्केट में निवेश से पहले किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से परामर्श ज़रूर कर लें, अन्यथा आपको नुकसान भी उठाना पड़ सकता है. इसी तरह, MACD ने आज Inox Wind Energy, Apar Industries, Eicher Motors, SKF India और Linde India में मंदी के संकेत दिए हैं.

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इन पर बनाए रखें नजर  
अब उन शेयरों के बारे में भी जान लेते हैं, जिनमें मजबूत खरीदारी देखने को मिल रही है. इस लिस्ट में SBI, M&M, राधाकिशन दमानी की कंपनी Avenue Supermart, Vijaya Diagnostic, Timken India, Jupiter Wagons और Eicher Motors शामिल हैं. इनमें से कुछ शेयरों ने अपना 52 हफ्ते का उच्च स्तर पार कर लिया है. SBI के शेयर कल के गिरावट वाले बाजार में भी एक प्रतिशत से अधिक की बढ़त हासिल करने में कामयाब रहे थे. वहीं, Berger Paints, Asian Paints, Syngene International, Ramco Cements, HDFC Life, Zee Entertainment Enterprises और Dalmia Bharat उन शेयरों में शुमार हैं जिनमें बिकवाली का दबाव नजर आ रहा है. लिहाजा इनमें निवेश को लेकर सावधानी बरतें.


भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी में बड़ा निवेश प्लान, 15 साल में 100 अरब डॉलर और 10 लाख नौकरियों का लक्ष्य

निवेश, रोजगार और टेक्नोलॉजी से लेकर EV, इंफ्रास्ट्रक्चर और रिसर्च तक 6 अहम समझौते; भारत में स्विस कंपनियों के निवेश को बढ़ावा देने पर जोर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
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भारत और स्विट्जरलैंड ने आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई गति देने के लिए कई अहम फैसले किए हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन के बीच सोमवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में हुई बैठक में निवेश, रोजगार, निर्यात, टेक्नोलॉजी, रिसर्च, EV और इंफ्रास्ट्रक्चर समेत कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी. दोनों देशों के बीच हुई इस साझेदारी के तहत अगले 15 वर्षों में भारत में 100 अरब डॉलर के निवेश और करीब 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है.

भारत और यूरोपीय देशों के समूह EFTA के बीच हुए ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट (TEPA) के तहत यह निवेश लक्ष्य तय किया गया है. भारत स्विट्जरलैंड से खास तौर पर बायोटेक, लाइफ साइंसेज, बैंकिंग, इंश्योरेंस, फूड प्रोसेसिंग, सस्टेनेबिलिटी और एडवांस टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में निवेश आकर्षित करना चाहता है. इससे नए उद्योगों के साथ मौजूदा कंपनियों के विस्तार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

6 अहम समझौतों से बढ़ेगा सहयोग

युवा प्रोफेशनल्स और रोजगार के अवसर: भारत और स्विट्जरलैंड ने यंग प्रोफेशनल्स स्कीम (YPS) के तहत समझौता किया है. इसके तहत दोनों देशों से हर साल 300 युवा प्रोफेशनल्स एक-दूसरे के देश में जाकर काम और अनुभव हासिल कर सकेंगे. जरूरत और आपसी सहमति के आधार पर यह संख्या बढ़ाकर 500 तक की जा सकती है. छात्रों और युवाओं के लिए वीजा और रोजगार से जुड़े अवसरों को भी आसान बनाने पर जोर दिया गया है.

EV और इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी: दोनों देशों ने परिवहन तकनीक, मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता किया है. इसके दायरे में इलेक्ट्रिक वाहन, रोपवे, सर्कुलर इकोनॉमी, टनल और परिवहन बुनियादी ढांचा शामिल हैं. इस साझेदारी से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, इंडस्ट्री-अकादमिक सहयोग और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप को बढ़ावा देने की योजना है.

विज्ञान और रिसर्च में साझेदारी: भारत के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (DST) और स्विस नेशनल साइंस फाउंडेशन (SNSF) के बीच वैज्ञानिक सहयोग बढ़ाने के लिए लेटर ऑफ इंटेंट पर सहमति बनी है. इसका उद्देश्य दोनों देशों के शोधकर्ताओं के बीच संयुक्त रिसर्च परियोजनाओं के लिए सहयोग का आधार तैयार करना है.

स्टार्टअप और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर: DST और Zurich University of Applied Sciences के बीच इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और एंटरप्रेन्योरशिप को बढ़ावा देने के लिए इम्प्लिमेंटेशन एग्रीमेंट हुआ है. इसके तहत शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स के लिए Indo-Swiss Academia-Industry Training शुरू की जाएगी. इससे स्टार्टअप्स को नई तकनीक और कारोबारी कौशल हासिल करने में मदद मिल सकती है.

इंडो-स्विस रिसर्च फ्लैगशिप: दोनों देशों ने Indo-Swiss Research Flagship कार्यक्रम का पहला सत्र भी शुरू किया है. इसका फोकस युवा शोधकर्ताओं की क्षमता बढ़ाने, नई तकनीक और रिसर्च मेथडोलॉजी के आदान-प्रदान तथा दोनों देशों के वैज्ञानिकों के बीच सहयोग को मजबूत करने पर है.

माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप: दोनों देशों ने माइग्रेशन और मोबिलिटी के क्षेत्र में भी समझौता किया है. इसके तहत पांच साल तक के मल्टीपल-एंट्री वीजा और छात्रों के लिए एक साल के रिन्यूएबल परमिट जैसी सुविधाओं का प्रावधान है. इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच छात्रों, युवाओं और प्रोफेशनल्स की आवाजाही को आसान बनाना है.

भारतीय उत्पादों के निर्यात को भी मिलेगा बढ़ावा

भारत और स्विट्जरलैंड ने बाजार पहुंच बढ़ाने और दोनों देशों के बीच निवेश को आसान बनाने पर भी जोर दिया है. इससे कृषि, फार्मा, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों के भारतीय उत्पादों के स्विस बाजार में निर्यात के अवसर बढ़ सकते हैं. निर्यात बढ़ने से घरेलू उत्पादन और रोजगार को भी समर्थन मिलने की उम्मीद है.

रक्षा और परमाणु ऊर्जा में भी सहयोग

आर्थिक और तकनीकी सहयोग के साथ भारत और स्विट्जरलैंड ने रक्षा क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की है. प्रधानमंत्री मोदी के मुताबिक, दोनों देशों ने सैन्य आदान-प्रदान, रक्षा उत्पादन और रक्षा सहयोग के नए रास्तों की पहचान की है. परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी संयुक्त प्रयास बढ़ाने पर सहमति बनी है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और स्विट्जरलैंड के रिश्ते अब सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं. निवेश, रोजगार, निर्यात, टेक्नोलॉजी, रिसर्च और युवाओं के अवसर दोनों देशों की साझेदारी के महत्वपूर्ण हिस्से बन रहे हैं.

 


टाटा ग्रुप के अंदरूनी विवाद पर सरकार की नजर, 14 अरब डॉलर के निवेश पर असर की चिंता

सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग में टाटा ग्रुप के प्रस्तावित 14 अरब डॉलर के निवेश का भारत के लिए रणनीतिक महत्व, सरकार ने दखल से किया इनकार

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
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Tuesday, 06 October, 2026
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टाटा ग्रुप में नेतृत्व और कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर चल रहे विवाद पर सरकार की नजर है. सरकार को चिंता है कि ग्रुप के अंदरूनी मतभेदों का असर सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी करीब 14 अरब डॉलर की निवेश योजनाओं पर पड़ सकता है. हालांकि, सरकार ने टाटा ग्रुप के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने की कोई योजना नहीं बनाई है. सरकार का भरोसा है कि ग्रुप खुद अपने मतभेदों को सुलझाएगा और प्रस्तावित निवेश योजनाएं तय समय के अनुसार आगे बढ़ेंगी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार को भरोसा दिलाया गया है कि ये निवेश योजनाएं तय कार्यक्रम के मुताबिक जारी रहेंगी. इन परियोजनाओं को भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया पहले से मजबूत स्थिति में हैं. ऐसे में भारत इन क्षेत्रों में अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है.

टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच बढ़ा विवाद

टाटा ग्रुप में विवाद अब टाटा ट्रस्ट्स के भीतर मतभेदों से आगे बढ़कर टाटा संस के प्रशासन और उसके भविष्य के ढांचे तक पहुंच गया है. टाटा संस टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है.

विवाद का ताजा केंद्र टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति है. 17 सितंबर को हुई टाटा संस बोर्ड की बैठक में चंद्रशेखरन को पांच साल का एक और कार्यकाल देने को मंजूरी दी गई. हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस फैसले का विरोध किया था.

टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. नोएल टाटा ने इस बैठक की वीडियो रिकॉर्डिंग और बैठक के मिनट्स मांगे हैं, ताकि वह यह देख सकें कि बैठक में प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी और प्रस्ताव को मंजूरी देने का आधार क्या था.

इस मांग से टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस बोर्ड के बीच दोनों संस्थाओं की भूमिका और अधिकारों को लेकर मतभेद और स्पष्ट हुए हैं. साथ ही, टाटा संस के नेतृत्व को लेकर भी विवाद गहराता दिखाई दे रहा है.

पिछले साल भी सरकार ने जताई थी चिंता

टाटा ग्रुप के विवाद को लेकर सरकार की चिंता हालिया घटनाक्रम से पहले की है. पिछले साल अक्टूबर में टाटा ग्रुप के वरिष्ठ नेताओं ने कथित तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर मुलाकात की थी. यह बैठक टाटा ट्रस्ट्स के भीतर बढ़ते मतभेदों के बीच हुई थी. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उस समय सरकार की ओर से संबंधित पक्षों को अपने मतभेद जल्द सुलझाने और ग्रुप में स्थिरता बनाए रखने का संदेश दिया गया था.

सेमीकंडक्टर निवेश भारत के लिए क्यों अहम

टाटा ग्रुप की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी निवेश योजनाओं को भारत की मैन्युफैक्चरिंग रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. सरकार देश में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करने और आयात पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रही है.

ऐसे में टाटा ग्रुप की प्रस्तावित परियोजनाओं में किसी तरह की देरी का असर सिर्फ कंपनी की निवेश योजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की इस रणनीतिक इंडस्ट्री में क्षमता बढ़ाने की योजनाओं पर भी पड़ सकता है. यही वजह है कि सरकार विवाद पर नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल ग्रुप के आंतरिक मामलों में सीधे हस्तक्षेप से बच रही है.


भारत तैयार कर रहा नया निवेश संधि मॉडल, जल्द मिल सकती है कैबिनेट की मंजूरी: निर्मला सीतारमण

कनाडा, रूस और सऊदी अरब समेत कई देशों के साथ निवेश समझौतों पर चल रही बातचीत, नए मॉडल में निवेशकों को ज्यादा सुरक्षा देने पर जोर

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
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भारत ने द्विपक्षीय निवेश संधियों (BIT) के लिए नया मॉडल तैयार कर लिया है और इसे जल्द ही केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिलने की उम्मीद है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को यह जानकारी दी. करीब डेढ़ साल से तैयार किए जा रहे इस नए मॉडल का उद्देश्य विदेशी और भारतीय निवेशकों को ज्यादा सुरक्षा देना और 2016 के मौजूदा मॉडल में सामने आई कमियों को दूर करना है.

सीतारमण ने कहा कि नया ढांचा दोनों देशों के निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा पर केंद्रित होगा. उन्होंने बताया कि नए मॉडल पर काम जारी रहने के बावजूद भारत ने दूसरे देशों के साथ निवेश सुरक्षा समझौतों पर बातचीत को रोका नहीं है.

सऊदी अरब के साथ समझौता नए मॉडल से आगे

म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि सऊदी अरब के साथ भारत का हालिया निवेश समझौता 2016 के मॉडल से आगे जाता है. इसमें दोनों देशों के निवेशकों की सुरक्षा पर ज्यादा स्पष्ट रूप से ध्यान दिया गया है.

भारत संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान और मध्य एशिया के कुछ देशों के साथ भी इसी तरह के निवेश समझौते कर चुका है. वहीं कनाडा और रूस समेत कई अन्य देशों के साथ बातचीत चल रही है. सरकार का लक्ष्य भारत के निवेश सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना है.

सीतारमण ने कहा कि अगर बातचीत अपेक्षित गति से आगे बढ़ती है तो भारत दिसंबर तक कम से कम तीन और देशों के साथ समझौते कर सकता है. कनाडा के साथ बातचीत दिसंबर या अगले साल की शुरुआत तक पूरी होने की संभावना है, हालांकि यह वार्ता की गति पर निर्भर करेगा.

पांच साल की शर्त में बदलाव की तैयारी

2016 के मॉडल द्विपक्षीय निवेश समझौते ने पुराने ढांचे की जगह ली थी और इसके बाद यही मॉडल भारत की कई निवेश संधियों के लिए आधार बना. मौजूदा व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों को भारत के खिलाफ निवेश संधि के तहत मध्यस्थता की प्रक्रिया शुरू करने से पहले पांच साल तक घरेलू कानूनी उपायों का इस्तेमाल करना पड़ता है.

पिछले कुछ वर्षों में इस पांच साल की शर्त को लेकर आपत्ति जताई जाती रही है और इसे कम करने की मांग भी उठती रही है. सीतारमण ने कहा कि सरकार का मानना है कि पुराना ढांचा भारत के हितों को पर्याप्त रूप से पूरा नहीं करता. इसी वजह से नया मॉडल तैयार किया जा रहा है.

यह बदलाव ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब भारत से विदेशों में होने वाला प्रत्यक्ष निवेश भी बढ़ रहा है. संशोधित ढांचे का उद्देश्य विदेशों में कारोबार करने वाली भारतीय कंपनियों और निवेशकों को भी पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराना हो सकता है.

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर बातचीत जारी

भारत-अमेरिका प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर सीतारमण ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है और दोनों पक्षों ने इस पर गंभीरता से चर्चा की है. उन्होंने संकेत दिया कि बातचीत ऐसे चरण में पहुंच गई है जहां आगे अतिरिक्त रियायत देना दोनों पक्षों के लिए मुश्किल हो सकता है.

हालांकि, अगर दोनों देश ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर लेते हैं जहां अतिरिक्त रियायत की गुंजाइश है तो बातचीत आगे बढ़ सकती है. वार्ता में व्यापार असंतुलन एक प्रमुख मुद्दा है. अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करना चाहता है.

सीतारमण ने कहा कि पारंपरिक रूप से व्यापार असंतुलन को बातचीत के जरिए दूर करने की कोशिश की जाती रही है, जिसमें देश अपने सामान और सेवाओं के लिए ज्यादा बाजार पहुंच हासिल करने का प्रयास करते हैं. हालांकि, अब व्यापार असंतुलन को दूर करने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल भी तेजी से बढ़ रहा है.

उन्होंने चीन के साथ भारत के बढ़ते व्यापार असंतुलन का भी उल्लेख किया. सीतारमण ने सवाल उठाया कि 2014 के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार घाटे में बड़ी वृद्धि को देखते हुए भारत चीन के मामले में इसी तरह का रुख अपना सकता है या नहीं. उनके मुताबिक, बढ़ता व्यापार असंतुलन यह सवाल उठाता है कि व्यापार घाटे को दूर करने के लिए देश बातचीत से आगे किस हद तक कदम उठा सकते हैं.


शेयर बाजार में आज भी तेजी के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 22,650 के पार; इन शेयरों पर रहेगी नजर

बीते कारोबारी सत्र यानी सोमवार को सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 फीसदी की बढ़त के साथ 72,382.47 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 फीसदी चढ़कर 22,555.75 पर पहुंच गया.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Tuesday, 06 October, 2026
Last Modified:
Tuesday, 06 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में तेजी की उम्मीद है. बीते कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 473 अंक और निफ्टी करीब 134 अंक चढ़कर बंद हुए थे. मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी 22,650 के पार कारोबार कर रहा है, जबकि एशियाई बाजारों में भी हल्की मजबूती है. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बाजार की धारणा को सहारा मिल रहा है. हालांकि, निफ्टी की वीकली एक्सपायरी, पश्चिम एशिया का तनाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ा सकती है.

चार दिन की गिरावट के बाद कल बाजार में लौटी तेजी

बीते कारोबारी सत्र यानी सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया. सेंसेक्स 472.77 अंक यानी 0.66 फीसदी की बढ़त के साथ 72,382.47 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 133.80 अंक यानी 0.60 फीसदी चढ़कर 22,555.75 पर पहुंच गया. इस तेजी के साथ निफ्टी ने 22,500 का अहम स्तर फिर हासिल कर लिया.

सोमवार की तेजी को कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, अमेरिकी मौद्रिक नीति को लेकर चिंताओं में कमी और कुछ कंपनियों के मजबूत कारोबारी अपडेट से सहारा मिला. आईटीसी करीब 5 फीसदी की बढ़त के साथ निफ्टी का टॉप गेनर रहा. इसके अलावा बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स समेत कई शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली.

गिफ्ट निफ्टी 22,650 के पार, मजबूत शुरुआत के संकेत

मंगलवार सुबह गिफ्ट निफ्टी करीब 22,650 के स्तर के ऊपर कारोबार कर रहा था. यह निफ्टी के सोमवार के बंद स्तर से करीब 30 अंकों का प्रीमियम है. ऐसे में सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत बढ़त के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं. वैश्विक बाजारों से भी संकेत फिलहाल सकारात्मक हैं. एशियाई बाजारों में शुरुआती कारोबार के दौरान जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी बढ़त में हैं. अमेरिकी बाजार भी सोमवार को मजबूती के साथ बंद हुए थे और नैस्डैक ने रिकॉर्ड क्लोजिंग दर्ज की.

कच्चे तेल में नरमी से बाजार को राहत

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारतीय शेयर बाजार के लिए राहत का संकेत है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 100 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 90 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है. तेल की कीमतों में नरमी से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव कम होने की उम्मीद रहती है, जिससे बाजार की धारणा को सहारा मिल सकता है. हालांकि, पश्चिम एशिया में तनाव अभी भी बाजार के लिए जोखिम बना हुआ है. क्षेत्र में तनाव बढ़ने या तेल आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी आ सकती है, जिसका असर भारतीय बाजार पर पड़ सकता है.

निफ्टी के लिए 22,600 का स्तर अहम

आज निफ्टी के लिए 22,600 का स्तर अहम रेजिस्टेंस माना जा रहा है. अगर इंडेक्स इस स्तर को पार कर इसके ऊपर टिकता है, तो 22,800 और फिर 23,000 के स्तर की ओर बढ़ने की गुंजाइश बन सकती है. वहीं, नीचे की ओर 22,400 पहला अहम सपोर्ट है, जबकि 22,200 का स्तर भी महत्वपूर्ण रहेगा. अगर निफ्टी 22,200 से नीचे जाता है, तो हालिया सुधार कमजोर पड़ सकता है और बाजार में बिकवाली बढ़ सकती है.

आज निफ्टी 50 की वीकली एक्सपायरी भी है. ऐसे में इंडेक्स में उतार-चढ़ाव बढ़ने की संभावना है. हालिया गिरावट के बाद बाजार में राहत की तेजी जरूर दिखी है, लेकिन व्यापक ट्रेंड में अभी पूरी तरह मजबूती के संकेत नहीं हैं.

FII बिकवाली के बीच DII का सहारा

विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. सोमवार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने करीब 4,699 करोड़ रुपये की भारतीय इक्विटी बेची. इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों ने करीब 5,182 करोड़ रुपये की खरीदारी की. इस तरह घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी ने विदेशी बिकवाली के दबाव को कुछ हद तक कम किया. आज बाजार की दिशा वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वीकली एक्सपायरी के साथ-साथ कंपनियों से जुड़े ताजा अपडेट से तय होगी.

इन शेयरों पर रखें नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मंगलवार को निवेशकों की नजर वेदांता, एक्सिस बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, ट्रेंट, मैरिको, जेएसडब्ल्यू एनर्जी, एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस और गेल इंडिया समेत कई शेयरों पर रहेगी. वेदांता के निदेशक मंडल की 8 अक्टूबर को बैठक प्रस्तावित है, जिसमें वित्त वर्ष 2027 के पहले अंतरिम लाभांश पर फैसला लिया जा सकता है और रिकॉर्ड तारीख 14 अक्टूबर प्रस्तावित है. एक्सिस बैंक का दूसरी तिमाही में सकल कर्ज तिमाही आधार पर 8.8 फीसदी और सालाना आधार पर 22.7 फीसदी बढ़कर 13.84 लाख करोड़ रुपये रहा, जबकि कुल जमा 5.8 फीसदी तिमाही और 20.7 फीसदी सालाना बढ़कर 14.52 लाख करोड़ रुपये हो गई. कोटक महिंद्रा बैंक का दूसरी तिमाही में शुद्ध कर्ज सालाना 24.7 फीसदी बढ़कर 5.77 लाख करोड़ रुपये और कुल जमा 23.2 फीसदी बढ़कर 6.51 लाख करोड़ रुपये रही. ट्रेंट की दूसरी तिमाही की स्टैंडअलोन आय 23 फीसदी बढ़कर 5,788 करोड़ रुपये रही और कंपनी ने वेस्टसाइड की 10 तथा जूडियो की 17 नई दुकानें खोलीं. मैरिको ने प्लिक्स की मूल कंपनी सत्या न्यूट्रास्यूटिकल्स में 24.09 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी 1,012.03 करोड़ रुपये में खरीदी, जिससे उसकी संभावित कुल हिस्सेदारी 84.09 फीसदी हो गई है. जेएसडब्ल्यू एनर्जी ने अप्रैल 2026 से अब तक 1,694 मेगावाट क्षमता जोड़ी है, जिसमें करीब 1,400 मेगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता शामिल है और उसकी कुल स्थापित क्षमता 15,147 मेगावाट हो गई है. एडब्ल्यूएल एग्री बिजनेस की दूसरी तिमाही में बिक्री मात्रा 12 फीसदी और आय 24 फीसदी बढ़ी, जबकि गेल इंडिया के बोर्ड में राजीव कुमार को सरकार की ओर से नामित निदेशक नियुक्त किया गया है. 

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


UPI पर MDR का असर! ट्रांजैक्शन वैल्यू 10% और वॉल्यूम 4% तक घटने का अनुमान

15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होने का प्रस्ताव है. सर्वे के मुताबिक, अतिरिक्त शुल्क लगने पर 76% यूजर्स बड़े भुगतान के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का रुख कर सकते हैं.

Last Modified:
Monday, 05 October, 2026
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यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) भुगतान पर 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू होने के बाद UPI ट्रांजैक्शन की कुल वैल्यू में करीब 10% और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की गिरावट आ सकती है. LocalCircles के मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है. सर्वे के मुताबिक, MDR लागू होने के बाद अधिक राशि वाले UPI भुगतान का एक हिस्सा कैश, क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड और बैंक ट्रांसफर की ओर जा सकता है.

₹2,000 से अधिक के भुगतान UPI वैल्यू का 67%

LocalCircles के CEO सचिन तापड़िया के मुताबिक, यह अनुमान MDR लागू होने से पहले किए गए अलग-अलग मर्चेंट और कंज्यूमर सर्वे पर आधारित है. अगस्त में ₹2,000 से अधिक के भुगतान मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का केवल करीब 4% थे, लेकिन इनका हिस्सा कुल मर्चेंट UPI भुगतान की वैल्यू में 67% था. इन भुगतानों की कुल राशि करीब ₹6 लाख करोड़ प्रति माह बैठती है.

अगस्त 2026 में UPI के जरिए कुल 24.51 अरब ट्रांजैक्शन हुए, जिनकी वैल्यू ₹29.82 लाख करोड़ रही. इनमें मर्चेंट भुगतान की संख्या 15.51 अरब और वैल्यू ₹8.95 लाख करोड़ रही. ऐसे में ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट भुगतान संख्या में कम होने के बावजूद UPI की कुल वैल्यू पर बड़ा असर डाल सकते हैं.

MDR लगने पर 76% यूजर्स बदल सकते हैं भुगतान का तरीका

2 अक्टूबर को जारी LocalCircles के कंज्यूमर सर्वे में 76% लोगों ने कहा कि अगर UPI इस्तेमाल करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो वे बड़े भुगतानों के लिए कैश, कार्ड या बैंक ट्रांसफर का इस्तेमाल कर सकते हैं. केवल 14% लोगों ने कहा कि अगर मर्चेंट MDR का बोझ उन पर डालता है तो वे अतिरिक्त राशि देकर भी UPI का इस्तेमाल जारी रखेंगे.

अगर ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर मर्चेंट ग्राहक से अतिरिक्त शुल्क लेता है, तो 27% लोग कैश का इस्तेमाल करेंगे, जबकि 26% क्रेडिट कार्ड की ओर जाने की बात कही. 14% डेबिट कार्ड और 4% बैंक ट्रांसफर, NEFT या IMPS का इस्तेमाल कर सकते हैं.

भविष्य में ₹2,000 से अधिक के भुगतान के लिए 26% लोगों ने क्रेडिट कार्ड और इतने ही लोगों ने कैश को पसंदीदा विकल्प बताया. 13% ने डेबिट कार्ड और 11% ने बैंक ट्रांसफर को प्राथमिकता दी. वहीं, केवल 20% लोगों ने कहा कि अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद UPI उनका सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला माध्यम रहेगा.

UPI वॉल्यूम पर 4% असर का अनुमान

LocalCircles के मुताबिक, MDR लागू होने के पहले पूरे महीने में UPI की कुल वैल्यू में करीब 10% की गिरावट आ सकती है. वहीं, ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में करीब 4% की कमी का अनुमान है.

इस 4% गिरावट में करीब 1% सीधा असर उन ट्रांजैक्शन पर पड़ सकता है जिन पर MDR लागू होगा. बाकी करीब 3% गिरावट उपभोक्ताओं के भुगतान व्यवहार में बदलाव से हो सकती है. यानी जहां मर्चेंट अतिरिक्त शुल्क लगाएंगे, वहां ग्राहक UPI के बजाय दूसरे भुगतान माध्यमों का इस्तेमाल कर सकते हैं.

### ₹2,000 तक UPI भुगतान पर नहीं लगेगा शुल्क

MDR एक तरह का शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के लिए मर्चेंट की ओर से बैंक और भुगतान कंपनियों को दिया जाता है. प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर से ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति से मर्चेंट (P2M) UPI भुगतान पर 0.4% MDR लागू होगा.

सरकार ने 14 सितंबर को ₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर जीरो चार्ज जारी रखने का फैसला किया था. UPI QR कोड के जरिए हर महीने ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे मर्चेंट भी प्रस्तावित MDR से बाहर रहेंगे. LocalCircles का अनुमान है कि मर्चेंट UPI ट्रांजैक्शन का करीब 96% हिस्सा इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होगा.

सरकार ने कहा- ग्राहकों से MDR नहीं वसूला जाएगा

सरकार का कहना है कि MDR का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सितंबर में कहा था कि इस शुल्क की जिम्मेदारी ग्राहकों की नहीं है. सरकार भारतीय बैंक संघ (IBA) के साथ मिलकर ऐसा तंत्र तैयार कर रही है, जिसके जरिए बैंक मर्चेंट्स की निगरानी कर सकें और यह सुनिश्चित किया जा सके कि MDR ग्राहकों से न वसूला जाए.

ज्यादातर मर्चेंट MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं

LocalCircles के 32,796 मर्चेंट्स के सर्वे में 41% ने कहा कि वे ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर कोई MDR नहीं देंगे. वहीं, 9% मर्चेंट UPI भुगतान स्वीकार ही नहीं करते. सिर्फ 17% मर्चेंट 0.4% या उससे अधिक MDR वहन करने के लिए तैयार दिखे. 15% ने कहा कि वे अधिकतम 0.04% MDR ही स्वीकार करेंगे.

LocalCircles के मुताबिक, MDR का बोझ उठाने को तैयार नहीं होने वाले मर्चेंट कीमत बढ़ा सकते हैं, अलग से शुल्क लगा सकते हैं या ग्राहकों को कैश, कार्ड और बैंक ट्रांसफर जैसे विकल्पों की ओर भेज सकते हैं.

जीरो MDR व्यवस्था में हो रहा बदलाव

प्रस्तावित MDR व्यवस्था UPI पर लंबे समय से चली आ रही जीरो-MDR व्यवस्था में बड़ा बदलाव है. UPI के विस्तार में इस व्यवस्था की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. अगस्त में संसद ने Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन किया था. इससे RuPay डेबिट कार्ड और UPI ट्रांजैक्शन पर शुल्क लगाने पर लगी व्यापक रोक हट गई और केंद्र को यह तय करने की अनुमति मिली कि किन भुगतान माध्यमों को शुल्क मुक्त रखा जाएगा.

सरकार ने UPI सिस्टम को बनाए रखने की लागत का भी हवाला दिया है. UPI ट्रांजैक्शन के लिए प्रोत्साहन राशि वित्त वर्ष 2023-24 में बढ़कर ₹3,631 करोड़ पहुंच गई थी, जबकि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹2,000 करोड़ का प्रावधान किया गया है. वित्तीय सेवा विभाग ने संसदीय समिति को बताया है कि लंबे समय तक जीरो MDR व्यवस्था को बनाए रखना वित्तीय रूप से टिकाऊ नहीं हो सकता.

नई व्यवस्था में ₹2,000 तक के भुगतान और व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) UPI ट्रांसफर पर कोई शुल्क नहीं होगा. ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR अधिकतम ₹300 तक सीमित रहेगा. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, ईंधन और कृषि इनपुट से जुड़े भुगतान पर ₹5 का फ्लैट शुल्क होगा, जबकि कैपिटल मार्केट से जुड़े भुगतान पर 0.02% MDR लगेगा.

कारोबारी संगठनों ने किया विरोध

प्रस्तावित MDR का कारोबारी संगठनों ने भी विरोध किया है. उनका कहना है कि मर्चेंट बिल को अलग-अलग हिस्सों में बांट सकते हैं, ग्राहकों को बैंक ट्रांसफर की ओर भेज सकते हैं या अतिरिक्त लागत की भरपाई के लिए कीमतों में बदलाव कर सकते हैं.

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) ने इस व्यवस्था का विरोध किया है, जबकि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने इसे वापस लेने की मांग की है. 30 सितंबर को CAIT के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने वित्त मंत्री से मुलाकात की थी, जिसके बाद प्रस्तावित 'नो UPI डे' प्रदर्शन वापस ले लिया गया.

LocalCircles ने सुझाव दिया है कि शुरुआत में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर 0.4% MDR सिर्फ बड़े कॉरपोरेट मर्चेंट्स पर लागू किया जाए और MSMEs को इससे बाहर रखा जाए. संगठन का अनुमान है कि इससे संभावित MDR राजस्व का करीब 98% हासिल किया जा सकता है, जबकि छोटे कारोबारियों पर असर भी सीमित रहेगा.
 


अगस्त में कपड़ा उत्पादन 13.1% बढ़ा, परिधान उत्पादन 7.4% गिरा; दोनों क्षेत्रों में बढ़ा अंतर

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 8% बढ़ा, जो जुलाई के 6.7% की तुलना में अधिक है.

Last Modified:
Monday, 05 October, 2026
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भारत के कपड़ा उद्योग में अगस्त में उत्पादन के स्तर पर अलग-अलग रुझान देखने को मिले. एक ओर कपड़ा उत्पादन में सालाना आधार पर 13.1% की बढ़ोतरी हुई, वहीं तैयार परिधानों यानी कपड़ों के उत्पादन में 7.4% की गिरावट दर्ज की गई. इससे उद्योग के कच्चे माल और मध्यवर्ती उत्पादों वाले हिस्से तथा तैयार परिधानों के कारोबार के बीच अंतर और बढ़ गया है.

सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 8% बढ़ा, जो जुलाई के 6.7% की तुलना में अधिक है. विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 18 ने अगस्त में सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की.

अप्रैल-अगस्त में कपड़ा उत्पादन 11.9% बढ़ा

चालू वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-अगस्त के दौरान कपड़ा उत्पादन में 11.9% की संचयी वृद्धि दर्ज की गई. इसके विपरीत, इसी अवधि में तैयार परिधानों का उत्पादन 5.6% घट गया. इससे संकेत मिलता है कि कपड़ा क्षेत्र के शुरुआती चरणों में उत्पादन मजबूत रहने के बावजूद तैयार कपड़ों की मांग और उत्पादन में कमजोरी बनी हुई है.

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक में कपड़ा क्षेत्र का भार 3.27 और तैयार परिधानों का भार 1.97 है. पूरे IIP में विनिर्माण क्षेत्र का भार 76.062 है. शेष भार खनन एवं उत्खनन, बिजली एवं गैस आपूर्ति तथा जल आपूर्ति, सीवरेज और कचरा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों का है.

परिधान उत्पादन में लगातार उतार-चढ़ाव

पिछले एक साल में तैयार परिधानों के उत्पादन में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. सितंबर 2025 में उत्पादन 2% और अक्टूबर में 7.3% घटा था. इसके बाद नवंबर में 6.7% और दिसंबर में 17% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई.

2026 की शुरुआत में यह सुधार टिक नहीं पाया. जनवरी में परिधान उत्पादन 8.6% और फरवरी में 3.4% घटा. मार्च में उत्पादन 4.8% बढ़ा, लेकिन अप्रैल में 10% से अधिक की गिरावट आई. इसके बाद मई में 3.6% और जून में 2.3% की वृद्धि दर्ज की गई.

जुलाई में परिधान उत्पादन फिर 2.3% घटा और अगस्त में 7.2% की गिरावट दर्ज की गई. यानी कुल औद्योगिक उत्पादन में अगस्त में तेज वृद्धि के बावजूद तैयार परिधानों का उत्पादन कमजोर रहा.

इसके उलट, कपड़ा उत्पादन में अगस्त से दिसंबर 2025 के बीच अक्टूबर को छोड़कर लगातार मासिक वृद्धि दर्ज की गई. अक्टूबर 2025 में इसमें 7.7% की गिरावट आई थी. इसके बाद जनवरी 2026 में कपड़ा उत्पादन 5.7% और फरवरी में 24.2% घटा. हालांकि, मार्च में इसमें करीब 48% की जोरदार वृद्धि हुई और अगस्त तक मजबूत उत्पादन का रुझान बना रहा.

यार्न और कपड़े की मांग अलग, परिधान कारोबार पर निर्यात का असर

अपैरल एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (AEPC) के चेयरमैन ए. शक्तिवेल के मुताबिक, कपड़ा और तैयार परिधान IIP की अलग-अलग श्रेणियां हैं और ये उत्पादन प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों को दर्शाती हैं. कपड़ा क्षेत्र में यार्न और फैब्रिक जैसे शुरुआती चरण शामिल होते हैं, जिनका उत्पादन कच्चे माल की कीमतों, इन्वेंटरी और मध्यवर्ती मांग से प्रभावित होता है.

उन्होंने कहा कि तैयार परिधान उत्पादन मूल्यवर्धन की अंतिम कड़ी है और यह निर्यात ऑर्डर, खरीदारों के पास मौजूद इन्वेंटरी और वैश्विक खुदरा मांग से ज्यादा सीधे तौर पर जुड़ा है. हाल में यार्न की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा भू-राजनीतिक और व्यापार संबंधी अनिश्चितताओं का असर भी परिधान उत्पादन पर तेजी से पड़ सकता है, क्योंकि यह बाहरी मांग पर अधिक निर्भर है.

घरेलू बाजार भी बड़ा सहारा

भारत के कपड़ा और परिधान उद्योग के लिए घरेलू बाजार भी काफी महत्वपूर्ण है. कपड़ा मंत्रालय के नेशनल हाउसहोल्ड सर्वे 2024 के अनुसार, भारत का कुल कपड़ा बाजार करीब 14.95 लाख करोड़ रुपये का था. इसमें घरेलू बाजार की हिस्सेदारी करीब 12.02 लाख करोड़ रुपये यानी लगभग 80% थी.

भारत ने 2030 तक परिधान निर्यात को बढ़ाकर 40 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है. फिलहाल यह करीब 16 अरब डॉलर है. उद्योग नए मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) और दूसरे देशों में बाजार पहुंच बढ़ाकर निर्यात बाजार में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है.

नेशनल अकाउंट्स स्टैटिस्टिक्स 2025 के अनुसार, पिछले तीन वर्षों के औसत आधार पर कपड़ा और परिधान क्षेत्र का देश की GDP में करीब 2% और विनिर्माण सकल मूल्यवर्धन (GVA) में करीब 11% योगदान रहा है.

शक्तिवेल ने कहा कि परिधान विनिर्माण में लंबे समय तक गिरावट रहने से विनिर्माण, मूल्यवर्धन, निर्यात, निवेश और रोजगार प्रभावित हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि मौजूदा IIP आंकड़ों पर करीब से नजर रखने की जरूरत है. साथ ही उद्योग नए बाजारों में पहुंच बढ़ाने और निर्यात के लिए नए अवसर तलाश रहा है.

अप्रैल-अगस्त में परिधान निर्यात 9.1% घटा

वित्त वर्ष 2026-27 के अप्रैल-अगस्त के दौरान भारत का परिधान निर्यात 9.1% घटा है. यह वैश्विक बाजार में चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को दर्शाता है. हालांकि, शक्तिवेल के मुताबिक हाल के महीनों में गिरावट की रफ्तार कुछ कम हुई है.

उद्योग को आगामी त्योहारी सीजन से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार की उम्मीद है. कंपनियां विदेशों में त्योहारी सीजन और क्रिसमस से जुड़े ऑर्डर पर भी नजर रख रही हैं. नए FTA और व्यापक बाजार पहुंच से निर्यात बाजार में विविधता बढ़ने की उम्मीद है, जबकि घरेलू बाजार अतिरिक्त मांग का आधार उपलब्ध कराता है.

उद्योग को अगले 2-3 महीनों में सुधार की उम्मीद

मुंबई स्थित निर्यातक और Technocraft Industries के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक शरद सराफ ने मौजूदा विनिर्माण सुस्ती को चक्रीय बताया. उन्होंने अगले दो से तीन महीनों में वृद्धि में सुधार की उम्मीद जताई. उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी फिलहाल क्रिसमस से जुड़े ऑर्डर पर काम कर रही है, जिससे निर्यात बाजार में गतिविधि जारी रहने का संकेत मिलता है.

सराफ के मुताबिक, विनिर्माण इकाइयों को स्थायी आधार पर कुशल कर्मचारियों की जरूरत होती है. ऑर्डर बुक के आधार पर कंपनियों को अतिरिक्त कर्मचारियों की भर्ती भी करनी पड़ती है. ऐसे में उत्पादन और ऑर्डर के स्तर के अनुसार श्रम की जरूरत में बदलाव आता रहता है.

कुल मिलाकर, चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों के IIP आंकड़े कपड़ा और तैयार परिधान क्षेत्र के बीच स्पष्ट अंतर दिखाते हैं. कपड़ा उत्पादन में शुरुआती गिरावट के बाद मजबूत सुधार हुआ है, जबकि तैयार परिधान उत्पादन अभी भी पिछले साल के स्तर से नीचे है. अब उद्योग की नजर आगामी निर्यात ऑर्डर, त्योहारी मांग, नए व्यापार समझौतों और नए बाजारों में पहुंच बढ़ाने पर है.
 


IPO बाजार में इस हफ्ते रहेगी सुस्ती, सिर्फ एक नया इश्यू खुलेगा; 29 कंपनियों की होगी लिस्टिंग

इस सप्ताह नया इश्यू लाने वाली एकमात्र कंपनी R K Fashion Accessories है. कोलकाता स्थित यह कंपनी नकली आभूषणों के वितरण का कारोबार करती है. कंपनी आईपीओ के जरिए 34.99 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है.

Last Modified:
Monday, 05 October, 2026
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भारत के प्राथमिक बाजार में इस सप्ताह गतिविधियां अपेक्षाकृत धीमी रहने वाली हैं. 5 अक्टूबर से शुरू हो रहे सप्ताह में सिर्फ एक नया आईपीओ खुलने जा रहा है, जबकि 29 कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध होंगी. खास बात यह है कि इस सप्ताह एक भी नया मेनबोर्ड आईपीओ बाजार में नहीं आएगा.

R K Fashion Accessories खोलेगी आईपीओ

इस सप्ताह नया इश्यू लाने वाली एकमात्र कंपनी R K Fashion Accessories है. कोलकाता स्थित यह कंपनी नकली आभूषणों के वितरण का कारोबार करती है. कंपनी आईपीओ के जरिए 34.99 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही है. इसके तहत 42.67 लाख नए शेयर जारी किए जाएंगे. आईपीओ के लिए मूल्य दायरा 77 से 82 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है.

9 महीने में 1.21 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा जुटे

2026 के पहले नौ महीनों में भारतीय प्राथमिक बाजार में आईपीओ गतिविधियां काफी मजबूत रही हैं. जनवरी से सितंबर के बीच 275 कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 1.21 लाख करोड़ रुपये से अधिक जुटाए हैं. इनमें 96 मेनबोर्ड कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने करीब 1.13 लाख करोड़ रुपये जुटाए. अकेले अगस्त और सितंबर में कंपनियों ने आईपीओ के जरिए 65,175 करोड़ रुपये जुटाए हैं.

इस साल अब तक बड़े आईपीओ में National Stock Exchange of India का 22,563 करोड़ रुपये का आईपीओ सबसे बड़ा रहा. इसके अलावा SBI Funds Management ने 9,795 करोड़ रुपये, Manipal Health Enterprises ने 9,275 करोड़ रुपये, Indo-MIM ने 3,812 करोड़ रुपये, Clean Max Enviro Energy Solutions ने 3,080 करोड़ रुपये और Dhoot Transmission ने 3,067 करोड़ रुपये जुटाए.

इस सप्ताह 10 आईपीओ होंगे बंद

सप्ताह के शुरुआती दो दिनों में पहले से खुले 10 आईपीओ बंद होंगे. मेनबोर्ड सेगमेंट में Vishal Nirmiti और Nityas Gems & Jewellery के आईपीओ 5 अक्टूबर को बंद होंगे. वहीं, एसएमई सेगमेंट में Dove Soft, EverestIMS Technologies, Omara Ventures India, Eventions, SJP Ultrasonics और Sollfege Smart Electronics के आईपीओ 5 अक्टूबर को बंद होंगे. Acme India Industries, Paramount Syntex और TNA Solutions के आईपीओ 6 अक्टूबर को बंद होंगे.

29 कंपनियों की होगी शेयर बाजार में एंट्री

इस सप्ताह कुल 29 कंपनियां शेयर बाजार में सूचीबद्ध होंगी. इनमें 8 मेनबोर्ड और 21 एसएमई कंपनियां शामिल हैं. 5 अक्टूबर को Orient Cables India, Runwal Enterprises, Acevector और German Green Steel & Power के शेयर BSE और NSE पर सूचीबद्ध होंगे. इसके बाद 6 अक्टूबर को Shah Investor's Home और SRIT India की लिस्टिंग होगी. Vishal Nirmiti और Nityas Gems & Jewellery के शेयर 8 अक्टूबर को बाजार में सूचीबद्ध होंगे.

एसएमई सेगमेंट में Himalayan Solar और Bench Mark Infotech Services के शेयर 5 अक्टूबर को NSE Emerge पर सूचीबद्ध होंगे. वहीं Sai Urja Indo Ventures और Dudani Retail की लिस्टिंग BSE SME पर होगी.

6 अक्टूबर को Acme Universal Safezone 9, Pind Hospitality और Shivchem Agro की लिस्टिंग प्रस्तावित है. 7 अक्टूबर को Green Asia Impex, Papadmalji Agro Foods, Black Opal Consultants और Vans Electroengineerings बाजार में दस्तक देंगी.

8 अक्टूबर को 8 एसएमई कंपनियों की लिस्टिंग होगी, जबकि Acme India Industries, Paramount Syntex और TNA Solutions के शेयर 9 अक्टूबर को सूचीबद्ध होने की उम्मीद है.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


FSSAI का एवरेस्ट पर बड़ा एक्शन, कीटनाशक तय सीमा से ज्यादा मिलने पर जीरा पाउडर का बैच रिकॉल

एवरेस्ट को वापस मंगाए गए उत्पाद का पूरा रिकॉर्ड रखने और तय समय-सीमा के भीतर जरूरी जानकारी तथा स्टेटस रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है.

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Monday, 05 October, 2026
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फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने एवरेस्ट के पैक्ड जीरा पाउडर के एक बैच को बाजार से तुरंत वापस मंगाने का आदेश दिया है. रेगुलेटरी जांच में इस उत्पाद में एजोक्सीस्ट्रोबिन और थियामेथोक्सम नामक कीटनाशकों के अंश तय अधिकतम सीमा से ज्यादा पाए गए, जिसके बाद सैंपल को 'असुरक्षित' घोषित किया गया. इसके अलावा, FSSAI ने खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई से जुड़े गंभीर उल्लंघनों के चलते 'क्रिएटिव बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स प्राइवेट लिमिटेड' का लाइसेंस भी तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

जीरा पाउडर के सैंपल में मिले कीटनाशक

FSSAI के मुताबिक, गोवा में M/s रिवरसाइड रिसॉर्ट्स एंड हॉलिडे होम्स प्राइवेट लिमिटेड के परिसर से एवरेस्ट के पहले से पैक किए गए जीरा पाउडर का रेगुलेटरी सैंपल लिया गया था. फूड एनालिस्ट की जांच में एजोक्सीस्ट्रोबिन और थियामेथोक्सम के अंश तय अधिकतम अवशेष सीमा से अधिक पाए गए. इसके बाद फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006 के तहत सैंपल को 'असुरक्षित' घोषित किया गया.

एवरेस्ट को इस रिपोर्ट के खिलाफ अपील का मौका दिया गया, जिसके बाद सैंपल को रेफरल फूड लेबोरेटरी भेजा गया. FSSAI के अनुसार, रेफरल लेबोरेटरी ने भी सैंपल को असुरक्षित पाया और कीटनाशकों की मात्रा तय सीमा से अधिक होने की पुष्टि की.

पूरे बैच को वापस मंगाने का निर्देश

रेफरल लेबोरेटरी की रिपोर्ट के बाद FSSAI ने संबंधित जीरा पाउडर के पूरे बैच को तुरंत बाजार से वापस मंगाने का निर्देश दिया. एवरेस्ट को वापस मंगाए गए उत्पाद का पूरा रिकॉर्ड रखने और तय समय-सीमा के भीतर जरूरी जानकारी तथा स्टेटस रिपोर्ट जमा करने को कहा गया है. रेगुलेटर ने कंपनी को भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो, इसके लिए सुधारात्मक कदम उठाने और रिकॉल प्रक्रिया पूरी होने के बाद रिपोर्ट जमा करने का भी निर्देश दिया है.

क्रिएटिव बेकर्स का लाइसेंस भी निलंबित

एक अलग कार्रवाई में FSSAI ने 'क्रिएटिव बेकर्स एंड कन्फेक्शनर्स प्राइवेट लिमिटेड' का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. यह कंपनी पूर्वी भारत में 'द शुगर एंड स्पाइस' नाम से रिटेल चेन चलाती है. निरीक्षण के दौरान खाद्य पदार्थ बनाने और संभालने वाली जगहों पर साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़ी गंभीर कमियां पाई गईं.

रेगुलेटर के मुताबिक, परिसर में गंदगी, ग्रीस, धूल, मकड़ी के जाले और मक्खियां पाई गईं. खराब होने वाले कच्चे माल को खुले में रखा गया था, जबकि कच्चे और अर्ध-तैयार उत्पादों के लिए जंग लगे तथा ठीक से साफ नहीं किए गए कंटेनरों का इस्तेमाल किया जा रहा था.

कीड़े-मकौड़ों से बचाव के इंतजाम भी अपर्याप्त

FSSAI के निरीक्षण में कीड़े-मकौड़ों का काफी प्रकोप और उन्हें रोकने के अपर्याप्त इंतजाम भी सामने आए. इनमें मक्खियों को रोकने के प्रभावी उपायों की कमी, चूहों से बचाव के उचित इंतजाम नहीं होना और खिड़कियों तथा खुले स्थानों पर कीटरोधी जालियों का अभाव शामिल था.

इसके अलावा, खाद्य पदार्थ संभालने वाले क्षेत्रों में कचरा, पुराना स्टॉक, रिजेक्टेड लॉट और कबाड़ जमा पाया गया. परिसर में जंग लगे उपकरण, उखड़ता पेंट, सीलन और टूटी हुई फर्श की टाइलें भी मिलीं.

जरूरी खाद्य सुरक्षा रिकॉर्ड नहीं मिले

FSSAI ने कहा कि कंपनी की ओर से पानी और तैयार उत्पादों की टेस्टिंग, समय-तापमान की निगरानी, उपकरणों का कैलिब्रेशन, प्रिवेंटिव मेंटेनेंस, मॉक रिकॉल, ग्राहकों की शिकायतों, छानने और ऑडिट से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड और सिस्टम भी उचित तरीके से बनाए नहीं गए थे. लाइसेंस निलंबित किए जाने के बाद कंपनी को निलंबन की अवधि के दौरान खाद्य कारोबार से जुड़ी सभी गतिविधियां बंद करने का निर्देश दिया गया है.

 


शेयर बाजार में आज तेजी के संकेत, गिफ्ट निफ्टी 130 अंक चढ़ा; इन शेयरों पर रहेगी नजर

बीते कारोबारी सत्र यानी 1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 फीसदी गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 फीसदी टूटकर 22,421.95 पर बंद हुआ था.

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Monday, 05 October, 2026
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भारतीय शेयर बाजार में सोमवार, 5 अक्टूबर को सकारात्मक शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी करीब 130 अंक की बढ़त के साथ 22,650 के पार कारोबार कर रहा है. एशियाई बाजारों में भी जोरदार तेजी है, जबकि कच्चे तेल की कीमतों में ऊपरी स्तरों से नरमी से घरेलू बाजार को कुछ राहत मिल सकती है. हालांकि, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की बिकवाली बाजार की तेजी को सीमित कर सकती है. इससे पहले 1 अक्टूबर को सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 फीसदी गिरकर 71,909.70 पर और निफ्टी 198.50 अंक यानी 0.88 फीसदी टूटकर 22,421.95 पर बंद हुआ था.

गिफ्ट निफ्टी से सकारात्मक संकेत

सोमवार सुबह गिफ्ट निफ्टी में करीब 130 अंकों की तेजी रही और यह 22,650 के पार कारोबार करता दिखा. इससे घरेलू बाजार में खरीदारी के साथ शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. बाजार की नजर अब वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और आगामी आर्थिक घटनाक्रम पर रहेगी.

एशियाई बाजारों में तेजी

अमेरिका के कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद एशियाई बाजारों में सोमवार को तेजी देखने को मिल रही है. कमजोर रोजगार आंकड़ों से अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी का दबाव कुछ कम होने की उम्मीद है. MSCI एशिया पेसिफिक इंडेक्स करीब आधे फीसदी ऊपर है, जबकि जापान का निक्केई करीब 2.5 फीसदी चढ़ा है. दक्षिण कोरिया का बाजार नेशनल फाउंडेशन डे की छुट्टी के कारण बंद है.

कच्चे तेल में नरमी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में ऊपरी स्तरों से नरमी आई है. ब्रेंट क्रूड करीब आधे फीसदी की गिरावट के साथ 101 डॉलर प्रति बैरल के आसपास और WTI क्रूड करीब 90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे आयात लागत और महंगाई के दबाव को कुछ राहत मिल सकती है.

RBI MPC बैठक पर नजर

निवेशकों की नजर आज से शुरू हो रही RBI की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की बैठक पर भी रहेगी. बैठक 7 अक्टूबर को खत्म होगी. ब्याज दरों पर RBI के फैसले और उसके रुख से बाजार की दिशा प्रभावित हो सकती है.

इन शेयरों पर रहेगी नजर

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, सोमवार को भारत कोकिंग कोल, DLF, HDFC Bank, अरबिंदो फार्मा, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, बजाज फाइनेंस, TCS, यस बैंक और हिंदुस्तान जिंक समेत कई शेयर चर्चा में रहेंगे. भारत कोकिंग कोल को झारखंड सरकार की ओर से 3,816.83 करोड़ रुपये की कथित बकाया राशि की वसूली से जुड़ा नोटिस मिला है. DLF की गुरुग्राम स्थित लग्जरी आवासीय परियोजना 'द ऑरेवा' की सभी इकाइयां करीब 1,985 करोड़ रुपये की बिक्री के साथ बिक चुकी हैं. HDFC Bank को अनुप बागची को तीन साल के लिए प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी नियुक्त करने की RBI से मंजूरी मिली है. बजाज फाइनेंस के बोर्ड ने शेयर जारी करने और परिवर्तनीय वारंट के जरिए कुल 17,500 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी दी है. TCS ने Best Buy के साथ समझौता किया है, जिसके तहत भारत में Best Buy का ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर TCS को हस्तांतरित किया जाएगा. अरबिंदो फार्मा को अमेरिका में पेराम्पैनल दवा के निर्माण और बिक्री के लिए FDA की अंतिम मंजूरी मिली है. हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और अलुकेम ने प्रस्तावित अधिग्रहण का समझौता आपसी सहमति से समाप्त कर दिया है. वहीं, नैक पैकेजिंग को 150 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है, जबकि रेल विकास निगम का ईस्ट कोस्ट रेलवे से मिला ऑर्डर रद्द हो गया है. यस बैंक के ऋण और अग्रिम सालाना आधार पर 24 फीसदी बढ़कर 3.1 लाख करोड़ रुपये हो गए हैं. हिंदुस्तान जिंक का खनन से प्राप्त धातु उत्पादन 5 फीसदी बढ़कर 2.71 लाख टन और बिक्री योग्य धातु उत्पादन 7 फीसदी बढ़कर 2.64 लाख टन रहा.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


 


विजय माल्या से अभी ₹8,751 करोड़ की वसूली बाकी, SBI ने बॉम्बे HC को दी जानकारी

बैंकों ने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में अटैच की गई कुछ शेयर होल्डिंग्स अभी भी बरकरार हैं और उनकी बिक्री नहीं हुई है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 03 October, 2026
Last Modified:
Saturday, 03 October, 2026
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विजय माल्या से जुड़े बैंक लोन मामले में SBI की अगुवाई वाले बैंकों के कंसोर्टियम ने बॉम्बे हाई कोर्ट में रिकवरी को लेकर बड़ा अपडेट दिया है. बैंकों के मुताबिक, 31 अगस्त 2026 तक विजय माल्या से करीब ₹8,751.86 करोड़ की रकम अभी वसूल की जानी बाकी है. यह राशि कानूनी और अन्य खर्चों को शामिल किए बिना बताई गई है.

बैंकों ने कोर्ट को बताया कि डेट रिकवरी ऑफिसर (DRO) की प्रक्रिया के जरिए अब तक करीब ₹10,270 करोड़ की राशि अस्थायी रूप से रिकवर की जा चुकी है. इसके अलावा मुकदमा दायर होने से पहले ₹544.58 करोड़ की रिकवरी हुई थी. हालांकि, बैंकों का कहना है कि इन रिकवरी आंकड़ों को बाकी बकाया राशि से अलग करके नहीं देखा जा सकता.

जनवरी में ₹8,135 करोड़ था बकाया

SBI-led कंसोर्टियम की ओर से दाखिल हलफनामे के अनुसार, जनवरी 2026 में विजय माल्या पर करीब ₹8,135.63 करोड़ की देनदारी बकाया बताई गई थी. इसके बाद ब्याज और अन्य देनदारियों के जुड़ने से 31 अगस्त 2026 तक यह रकम बढ़कर ₹8,751.86 करोड़ हो गई. इससे साफ है कि बैंकों की ओर से अब तक हजारों करोड़ रुपये की रिकवरी किए जाने के बावजूद मामले में पूरी देनदारी की वसूली अभी बाकी है.

माल्या ने बैंकों की रिकवरी पर उठाया था सवाल

विजय माल्या ने 2020 में बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था और अपने खिलाफ चल रहे आपराधिक मामलों को खत्म करने की मांग की थी. उन्होंने दावा किया था कि बैंकों ने उनकी देनदारी से अधिक रकम रिकवर कर ली है और बैंकिंग विवाद का निपटारा हो चुका है. हालांकि, बैंकों ने अपने ताजा हलफनामे में इस दावे का विरोध किया है. उनका कहना है कि माल्या से अभी भी बड़ी रकम की वसूली बाकी है.

कुछ अटैच शेयरों की बिक्री अभी बाकी

बैंकों ने कोर्ट को यह भी बताया कि मामले में अटैच की गई कुछ शेयर होल्डिंग्स अभी भी बरकरार हैं और उनकी बिक्री नहीं हुई है. इसका मतलब है कि रिकवरी की प्रक्रिया अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और अटैच संपत्तियों से आगे भी वसूली की प्रक्रिया जारी रह सकती है.

ED ने ₹14,131 करोड़ की संपत्तियों का दिया जिक्र

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट में अलग से बताया कि करीब ₹14,131.6 करोड़ की चल और अचल संपत्तियां SBI-led कंसोर्टियम को लौटाई गई हैं. हालांकि, ED ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक की देनदारी की रिकवरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आपराधिक मामलों को अलग-अलग आधार पर देखा जाना चाहिए. यानी बैंकों की ओर से कर्ज की वसूली और आपराधिक मामलों की कानूनी स्थिति एक-दूसरे से अलग मुद्दे हैं. विजय माल्या से जुड़े इस मामले में बैंकों की रिकवरी प्रक्रिया और कोर्ट में चल रही कानूनी कार्यवाही दोनों जारी हैं.