SIP में निवेशकों ने बनाया रिकॉर्ड, अप्रैल में पहली बार 20 हजार करोड़ पहुंचा निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार अप्रैल महीने में लार्जकैप स्कीमों में आने वाला निवेश कम हुआ है. 

Last Modified:
Thursday, 09 May, 2024
BWHindi

म्यूचुअल फंड्स में सिस्टमैटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए आने वाला निवेश अप्रैल महीने में पहली बार 20 हजार करोड़ रुपये के आंकड़ों को पार कर गया और कुल 20,371 करोड़ रुपये रहा. एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (AMFI) ने गुरुवार 9 मई को म्यूचुअल फंड्स के आंकड़ों की एक रिपोर्ट जारी की है. आंकड़ों के अनुसार मार्च में यह निवेश 19,271 करोड़ रुपये और फरवरी में 19,187 करोड़ रुपये था. म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट अप्रैल 2024 के अंत में 57.26 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया.   

अप्रैल में 2.29 लाख करोड़ का शुद्ध निवेश
म्यूचुअल फंड्स में मार्च महीने के दौरान 1.59 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई थी. हालांकि, डेट फंड और इक्विटी फंड में अप्रैल के दौरान निवेश बढ़ने के कारण इसमें 2.29 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया. आंकड़ों के अनुसार इक्विटी म्यूचुअल फंड्स (EMF) में अप्रैल महीने के दौरान करीब 18.917.08 करोड़ रुपये का निवेश आया. वहीं, डेट फंड में अप्रैल महीने के दौरान 1.90 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश देखा गया, जबकि इससे पहले मार्च महीने के दौरान 1.98 लाख करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी देखी गई थी.

इसे भी पढ़ें-सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आखिर क्यों घबराए बैंक कर्मचारी, आप भी जानिए

लार्जकैप में घटा, मिडकैप और स्मॉलकैप में बढ़ा निवेश
आंकड़ों के अनुसरा खासतौर से लार्जकैप स्कीमों में आने वाला निवेश कम हुआ है. लार्जकैप स्कीमों में शुद्ध निवेश अप्रैल महीने के दौरान 83 प्रतिशत घटकर 358 करोड़ रुपये रहा. वहीं, मिडकैप फंड्स में शुद्ध निवेश 76.19 प्रतिशत बढ़कर 1,793 करोड़ रुपये रहा. इसके अलावा स्मॉलकैप फंड्स में अप्रैल महीने के दौरान करीब 2,208.70 करोड़ रुपये का निवेश आया. इससे पहले मार्च महीने के दौरान स्मॉलकैप फंड्स से थोड़ी निकासी देखी गई थी


RBI का बड़ा कदम: लोन की ब्याज दर और छिपे चार्ज पर लगेगी लगाम, ग्राहकों के लिए नए नियमों का प्रस्ताव

रिजर्व बैंक ने लोन की कीमत तय करने के लिए एक समान फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जारी किया है. इसमें फ्लोटिंग रेट वाले रिटेल और MSME लोन को बाहरी बेंचमार्क से जोड़ने, स्प्रेड में मनमानी रोकने और छोटे कर्ज पर APR की सीमा तय करने का प्रस्ताव है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों और अन्य रेगुलेटेड लेंडर्स के लिए लोन की ब्याज दर तय करने का एक समान फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है. इसका मकसद कर्ज की कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना, अलग-अलग संस्थानों के बीच ब्याज दर तय करने के तरीकों में अंतर कम करना और उधार लेने वालों को मनमाने शुल्क या ब्याज से बचाना है.

RBI के ड्राफ्ट नियमों में बोर्ड से मंजूर प्राइसिंग पॉलिसी, बेंचमार्क आधारित ब्याज दर और रिस्क के आधार पर स्प्रेड तय करने की व्यवस्था का प्रस्ताव है. साथ ही कम वैल्यू वाले और माइक्रोफाइनेंस लोन में बहुत ज्यादा ब्याज वसूलने से बचाने के लिए भी सुरक्षा उपाय सुझाए गए हैं. ड्राफ्ट पर 11 सितंबर 2026 तक लोगों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं. प्रस्तावित नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू किए जाने हैं.

फ्लोटिंग रेट लोन पर बड़ा बदलाव

RBI के प्रस्ताव के मुताबिक, कमर्शियल बैंकों के सभी फ्लोटिंग रेट वाले रिटेल या पर्सनल लोन और MSME लोन को किसी बाहरी बेंचमार्क से जोड़ना जरूरी होगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि RBI की नीतिगत दरों में बदलाव का असर ग्राहकों तक ज्यादा पारदर्शी तरीके से पहुंचे.

बाहरी बेंचमार्क किसी एक बैंक के नियंत्रण में नहीं होता. ऐसे में रेपो रेट या अन्य संबंधित बेंचमार्क में बदलाव होने पर लोन की ब्याज दर में बदलाव का असर ग्राहकों तक अपेक्षाकृत स्पष्ट तरीके से पहुंच सकेगा. हालांकि, NBFCs, ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस, रीजनल रूरल बैंक और कोऑपरेटिव बैंकों के लिए बाहरी बेंचमार्क अपनाना अनिवार्य नहीं होगा. उन्हें इस बारे में फैसला लेने की छूट रहेगी.

बैंक मनमाने तरीके से स्प्रेड नहीं बढ़ा सकेंगे

प्रस्तावित फ्रेमवर्क में लोन की ब्याज दर को बेंचमार्क और रिस्क-बेस्ड स्प्रेड से जोड़ने की व्यवस्था है. स्प्रेड में क्रेडिट रिस्क प्रीमियम, ऑपरेटिंग कॉस्ट, टर्म प्रीमियम और बिजनेस स्ट्रैटेजी प्रीमियम जैसे हिस्से शामिल हो सकते हैं.

RBI ने प्रस्ताव दिया है कि अगर उधार लेने वाले की क्रेडिट प्रोफाइल में बदलाव आता है, तभी क्रेडिट रिस्क प्रीमियम में बदलाव किया जा सके. वहीं स्प्रेड के अन्य हिस्सों में आम तौर पर तीन साल से पहले बदलाव नहीं किया जा सकेगा, हालांकि कुछ विशेष परिस्थितियों में छूट दी जा सकती है.

फ्लोटिंग रेट वाले लोन में बेंचमार्क, रीसेट की अवधि और रीसेट की तारीख की जानकारी लोन एग्रीमेंट में स्पष्ट रूप से देनी होगी. प्रस्ताव के तहत बेंचमार्क को आम तौर पर तीन महीने से ज्यादा के अंतराल पर रीसेट नहीं किया जा सकेगा.

छोटे लोन पर APR की सीमा का प्रस्ताव

RBI ने कम वैल्यू वाले और माइक्रोफाइनेंस लोन के लिए अलग सुरक्षा उपाय का भी प्रस्ताव रखा है. रेगुलेटेड संस्थाओं को एनुअल परसेंटेज रेट यानी APR पर स्पष्ट सीमा तय करनी होगी. इसमें ब्याज के साथ अन्य शुल्क भी शामिल होंगे, ताकि छोटे कर्ज लेने वालों पर अत्यधिक लागत का बोझ न पड़े.

प्रस्ताव के मुताबिक, ₹50,000 तक के पर्सनल लोन को कम वैल्यू वाला लोन माना जाएगा. छोटे और सीमांत किसानों को दिए जाने वाले शॉर्ट-टर्म एग्रीकल्चरल लोन में कुल ब्याज और शुल्क मूल राशि से अधिक नहीं होने का भी प्रस्ताव है.

पुराने लोन को भी नए फ्रेमवर्क में लाने की तैयारी

ड्राफ्ट के अनुसार, मौजूदा लोन को 1 अप्रैल 2029 तक एक बार की मैपिंग प्रक्रिया के जरिए प्रस्तावित नए फ्रेमवर्क में शामिल किया जाना होगा. इससे पुराने और नए दोनों तरह के लोन पर ब्याज दर तय करने की व्यवस्था को धीरे-धीरे एक समान किया जा सकेगा.

₹1,000 करोड़ से ज्यादा डिपॉजिट वाले लेंडर्स के लिए अलग व्यवस्था

जिन लेंडर्स के पास कुल डिपॉजिट ₹1,000 करोड़ से अधिक है, उनके लिए प्रस्तावित इंटरनल बेंचमार्क मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स पर आधारित होगा. इसकी गणना घरेलू डिपॉजिट और उधारी की मार्जिनल कॉस्ट के तीन महीने के मूविंग एवरेज के आधार पर की जाएगी. ऐसे लेंडर्स को हर महीने के पहले कैलेंडर दिन अपना इंटरनल बेंचमार्क सार्वजनिक करना होगा.

RBI ने कहा है कि बैंकों के बीच MCLR तय करने की मौजूदा प्रक्रिया में काफी अंतर पाया गया है. इसी वजह से ज्यादा स्पष्ट और सिद्धांत आधारित फ्रेमवर्क की जरूरत महसूस हुई है.

ग्राहकों के लिए क्या बदलेगा?

नए प्रस्ताव से लोन लेने वालों के लिए सबसे बड़ा फायदा पारदर्शिता के रूप में सामने आ सकता है. ग्राहक यह बेहतर तरीके से समझ सकेंगे कि उनके लोन की ब्याज दर किस बेंचमार्क से जुड़ी है, स्प्रेड किन हिस्सों से बना है और ब्याज दर कब और कैसे रीसेट होगी.

खासकर फ्लोटिंग रेट वाले बैंक लोन में RBI की नीतिगत दरों में बदलाव का असर ग्राहकों तक ज्यादा स्पष्ट तरीके से पहुंचने की उम्मीद है. वहीं छोटे कर्ज और माइक्रोफाइनेंस लोन में APR की सीमा से अत्यधिक ब्याज और शुल्क पर लगाम लगाने में मदद मिल सकती है.

RBI के प्रस्तावित निर्देश बैंक, NBFC, कोऑपरेटिव बैंक, हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों और ऑल इंडिया फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस पर लागू होंगे. हालांकि, अलग-अलग संस्थानों और लोन कैटेगरी के लिए कुछ विशेष प्रावधान और छूट भी तय की गई हैं.
 


भारत-SACU व्यापार वार्ता का खाका तैयार, एक साल में समझौता पूरा करने का लक्ष्य

भारत और दक्षिण अफ्रीका के नेतृत्व वाले पांच देशों के समूह साउदर्न अफ्रीकन कस्टम्स यूनियन यानी SACU ने प्रस्तावित ट्रेड डील के लिए बातचीत का औपचारिक खाका तय कर लिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

भारत और पांच सदस्यीय दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU) के बीच प्रस्तावित प्रेफरेंशियल ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बुधवार को टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) पर हस्ताक्षर किए गए. इसके साथ ही दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत का दायरा, उद्देश्य और बुनियादी नियम औपचारिक रूप से तय हो गए हैं. केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि बातचीत में तेजी जरूरी है, लेकिन जल्दबाजी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि वार्ता को वर्षों तक खींचने के बजाय एक तय और सीमित समयसीमा में पूरा किया जाना चाहिए. दोनों पक्षों ने एक महीने के भीतर बातचीत शुरू करने और एक साल में इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा है.

किन मुद्दों पर होगी बातचीत?

प्रस्तावित समझौते के शुरुआती चरण में वस्तुओं के व्यापार से जुड़े आठ प्रमुख क्षेत्रों को शामिल किया गया है. इनमें बाजार तक पहुंच, मूल स्थान के नियम (Rules of Origin), सीमा शुल्क प्रक्रिया और व्यापार सुगमता, व्यापार उपचार, सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी उपाय, तकनीकी व्यापार बाधाएं, विवाद निपटान तथा कानूनी और अन्य सामान्य प्रावधान शामिल हैं. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि बातचीत आगे बढ़ने के साथ इन क्षेत्रों में कुछ नए मुद्दे जोड़े या कुछ प्रावधान हटाए भी जा सकते हैं. ToR पर वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह और SACU की मुख्य वार्ताकार न्दीताह न्घीपोंडोका-रोबियाती ने हस्ताक्षर किए. यह दस्तावेज दोनों पक्षों के बीच आगे होने वाली बातचीत का औपचारिक रोडमैप उपलब्ध कराता है.

2025-26 में भारत-SACU व्यापार $16.81 अरब

भारत और SACU के बीच व्यापार तेजी से बढ़ रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में दोनों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 16.81 अरब डॉलर रहा. इसमें भारत का निर्यात 7.55 अरब डॉलर रहा. SACU में दक्षिण अफ्रीका के अलावा बोत्सवाना, नामीबिया, लेसोथो और इस्वातिनी शामिल हैं. पीयूष गोयल ने कहा कि भारत SACU के संवेदनशील माने जाने वाले क्षेत्रों का सम्मान करेगा. इसके साथ ही भारत को भी अपने संवेदनशील क्षेत्रों को लेकर SACU से समान सहयोग और विचार की उम्मीद है.

हेल्थकेयर और IT में सहयोग बढ़ाने पर जोर

वाणिज्य मंत्री ने कहा कि प्रस्तावित समझौता दोनों पक्षों को मौजूदा बाजारों से आगे बढ़ने और वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी भागीदारी मजबूत करने में मदद कर सकता है. उन्होंने हेल्थकेयर और सूचना प्रौद्योगिकी यानी IT को सहयोग बढ़ाने वाले अहम क्षेत्रों के तौर पर रेखांकित किया. भारत SACU देशों को किफायती दवाइयों, तकनीकी क्षमताओं और प्रतिभा विकास के क्षेत्र में सहयोग दे सकता है. गोयल ने कहा कि शुरुआत उन क्षेत्रों से की जानी चाहिए जहां दोनों पक्ष एक-दूसरे की क्षमताओं के पूरक हैं और आगे चलकर सहयोग का दायरा बढ़ाया जा सकता है.

ग्लोबल ट्रेड अनिश्चितता के बीच अहम कदम

SACU की मुख्य वार्ताकार न्दीताह न्घीपोंडोका-रोबियाती ने कहा कि समूह एक संतुलित, पारस्परिक रूप से लाभकारी और विकास-केंद्रित समझौता चाहता है. वहीं, वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि तय समयसीमा में समझौते को पूरा करना वैश्विक व्यापार में बढ़ती अनिश्चितता के बीच सकारात्मक संकेत देगा. उनके मुताबिक, समय पर होने वाली ऐसी साझेदारियां वैश्विक व्यापार को गति देने में मदद कर सकती हैं.
 


ओडिशा का सेमीकंडक्टर सेक्टर पर बड़ा दांव, परियोजनाओं को मिलेगा 25% अतिरिक्त कैपेक्स सपोर्ट

ओडिशा सरकार ने अपनी सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और फैबलेस पॉलिसी में संशोधन को मंजूरी दे दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

ओडिशा सरकार ने सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए अपनी प्रोत्साहन नीति का दायरा बढ़ा दिया है. राज्य सरकार अब इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन यानी ISM से मंजूर सेमीकंडक्टर परियोजनाओं को पात्र पूंजीगत खर्च यानी कैपेक्स का 25% तक अतिरिक्त वित्तीय समर्थन देगी. ओडिशा कैबिनेट ने राज्य की सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग एंड फैबलेस पॉलिसी में संशोधनों को मंजूरी दे दी है. यह वित्तीय सहायता केंद्र सरकार की मदद के साथ दी जाएगी और परियोजनाओं की तय प्रगति के चरणों तथा ISM द्वारा मंजूर फंड जारी होने के अनुरूप वितरित की जाएगी.

अब उपकरण, केमिकल और सप्लाई चेन कंपनियां भी दायरे में

संशोधित नीति के तहत पात्र निवेश का दायरा केवल सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग तक सीमित नहीं रहेगा. अब सेमीकंडक्टर उपकरण, सेमीकंडक्टर-ग्रेड केमिकल्स, विशेष गैसों, एडवांस्ड मटेरियल और सप्लाई चेन के अन्य महत्वपूर्ण घटकों से जुड़ी परियोजनाओं को भी प्रोत्साहन के दायरे में शामिल किया गया है.

राज्य की मौजूदा नीति में पहले से सेमीकंडक्टर निर्माण, असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग शामिल हैं. इसके अलावा आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट यानी ATMP/OSAT, डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग और फैबलेस चिप डिजाइन से जुड़ी गतिविधियां भी इस नीति के तहत आती हैं.

बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए मिलेगा कस्टमाइज्ड पैकेज

ओडिशा सरकार अब सेमीकंडक्टर उपकरण, कच्चे माल और अन्य महत्वपूर्ण इनपुट से जुड़े बड़े या मेगा प्रोजेक्ट्स के लिए विशेष और कस्टमाइज्ड इंसेंटिव पैकेज भी दे सकेगी. इसके लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली हाई-लेवल कमेटी की सिफारिश के बाद राज्य कैबिनेट की मंजूरी जरूरी होगी.

मुख्य सचिव अनु गर्ग ने कहा कि इस संशोधन से राज्य को महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े निवेश के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से प्रोत्साहन पैकेज तैयार करने की सुविधा मिलेगी. ऐसे मामलों में सामान्य इंसेंटिव बड़े निवेश के आकार और जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकते हैं.

पांच कंपनियों ने दिए प्रस्ताव

ओडिशा ने पहली बार सितंबर 2023 में अपनी सेमीकंडक्टर नीति को अधिसूचित किया था. इसके बाद मार्च 2024 और जुलाई 2025 में इसमें संशोधन किए गए. राज्य सरकार के अनुसार, अब तक पांच कंपनियां सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश के प्रस्ताव दे चुकी हैं, जिनमें से दो परियोजनाओं को इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत समर्थन मिल चुका है.

मजबूत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम बनाने पर फोकस

नई नीति के जरिए ओडिशा केवल चिप मैन्युफैक्चरिंग परियोजनाओं तक सीमित रहने के बजाय एक व्यापक और एकीकृत सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम विकसित करना चाहता है. इसके तहत अपस्ट्रीम और सपोर्टिंग इंडस्ट्रीज को भी प्रोत्साहन ढांचे में शामिल किया गया है.

सरकार का कहना है कि विस्तारित नीति ISM 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप है. इसका मकसद निवेशकों का भरोसा बढ़ाना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना और उच्च मूल्य वाली नौकरियों का सृजन करना है. इससे स्किल डेवलपमेंट को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, साथ ही सेमीकंडक्टर उद्योग को सामान और सेवाएं उपलब्ध कराने वाले माइक्रो, स्मॉल और मीडियम एंटरप्राइजेज यानी MSMEs के लिए भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं.
 


₹401 करोड़ के GST गोलमाल का खुलासा, CAG ऑडिट में 1,334 मामले सामने आए

CAG की ऑडिट रिपोर्ट में वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में GST नियमों के उल्लंघन के 1,334 मामले सामने आए हैं. इनमें से 903 मामलों में विभाग ने आपत्तियां स्वीकार की हैं.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (CAG) ने वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर में GST नियमों के उल्लंघन से जुड़े ₹401.42 करोड़ के 1,334 मामलों का पता लगाया है. इनमें से सेंट्रल बोर्ड ऑफ इनडायरेक्ट टैक्सेज एंड कस्टम्स यानी CBIC ने 903 मामलों में ₹268.36 करोड़ की ऑडिट टिप्पणियों को स्वीकार कर लिया है. हालांकि, इन मामलों में अब तक सिर्फ ₹15.88 करोड़ की वसूली की जा सकी है.

मार्च 2024 को समाप्त अवधि के लिए तैयार CAG की राजस्व विभाग से जुड़ी रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गई. ऑडिट के दौरान 850 टैक्सपेयर्स और GST विभाग के 71 कार्यालयों के GST रिटर्न और अन्य रिकॉर्ड की जांच की गई. मुख्य रूप से 2020-21 और 2021-22 की अवधि की पड़ताल की गई, जबकि कुछ मामलों में यह जांच 2023-24 तक बढ़ाई गई, ताकि यह देखा जा सके कि पुरानी कमियां अब भी जारी हैं या नहीं.

गलत टैक्स छूट और ITC दावों में मिली गड़बड़ी

ऑडिट में सड़कों, पुलों, रेलवे और मिट्टी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में रियायती GST दरों या छूट के गलत दावे सामने आए. सरकारी निकायों के लिए किए गए कार्यों पर टैक्स का कम भुगतान, बिल्डर्स और डेवलपर्स द्वारा रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत कम टैक्स जमा करना, इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC के अनियमित दावे और टैक्स भुगतान व ITC दावों के बीच बेमेल जैसी कई गड़बड़ियां पाई गईं. CAG के मुताबिक, केवल 123 मामलों में इन अनियमितताओं का राजस्व पर ₹190.98 करोड़ का असर पड़ा. वहीं, 522 टैक्सपेयर्स से जुड़ी 1,057 अन्य कमियों में ₹188.98 करोड़ का राजस्व प्रभाव सामने आया.

392 टैक्सपेयर्स के रिकॉर्ड अधूरे मिले

ऑडिट के दौरान रिकॉर्ड हासिल करने में भी कई मुश्किलें सामने आईं. 392 टैक्सपेयर्स से जुड़े 431 मामलों में जरूरी दस्तावेज पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए गए. इन मामलों में टैक्स देनदारी, ITC और रियायती GST दरों से जुड़े करीब ₹2,732.56 करोड़ के बेमेल की पहचान हुई. इसके अलावा 22 मामलों में विभागीय सिस्टम से मूल रिटर्न और अन्य जरूरी विवरण ही उपलब्ध नहीं थे, जिससे ₹36.09 करोड़ के संभावित बेमेल का संकेत मिला.

71 में से 57 GST कार्यालयों में मिलीं कमियां

CAG की रिपोर्ट में GST विभाग के आंतरिक नियंत्रण और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं. जांच किए गए 71 कार्यालयों में से 57 में कमियां पाई गईं. कई जगह टैक्सपेयर्स की जांच समय पर नहीं हुई या प्रक्रिया में खामियां रहीं. ऑडिट और जोखिम प्रबंधन महानिदेशालय से जारी जोखिम अलर्ट पर भी कई मामलों में जरूरी कार्रवाई पूरी नहीं की गई. CAG ने इसे राजस्व की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया है.

GSTN की 56 पुरानी समस्याओं में से 38 का समाधान

रिपोर्ट में GST नेटवर्क यानी GSTN के IT सिस्टम के CAG ऑडिट के तीसरे चरण का भी जिक्र किया गया है. पिछले ऑडिट में बताई गई 56 लंबित समस्याओं में से GSTN ने 38 का समाधान कर दिया है. एक समस्या का आंशिक समाधान किया गया है और तीन पर काम जारी है, जबकि बाकी मुद्दे अभी भी पूरी तरह दूर नहीं हुए हैं.

रजिस्ट्रेशन मॉड्यूल में कमजोर वेरिफिकेशन, मंजूरी या रजिस्ट्रेशन कैंसिलेशन में देरी, रिटर्न मॉड्यूल में ITC पात्रता और ब्याज गणना से जुड़ी अधूरी जांच जैसी समस्याएं बनी हुई हैं. IGST सेटलमेंट और कंपोजीशन लेवी स्कीम के तहत टैक्सपेयर्स की निगरानी में भी कमियां सामने आई हैं.

CAG ने दी निगरानी और वेरिफिकेशन बढ़ाने की सलाह

CAG ने विभाग को सलाह दी है कि सड़क, पुल, रेलवे और मिट्टी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स में रियायत का दावा करने वाले सब-कॉन्ट्रैक्टर्स की जांच और आंतरिक ऑडिट को मजबूत किया जाए. ऐसे दावों की जांच के लिए सिस्टम में बेहतर वेरिफिकेशन कंट्रोल लगाए जाएं.

रिपोर्ट में रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म वाले मामलों पर विशेष ध्यान देने और आयकर विभाग के साथ बेहतर समन्वय की भी सिफारिश की गई है, ताकि CBDT द्वारा पकड़ी गई बेहिसाब आय के मामलों में संभावित GST देनदारी की भी जांच की जा सके.

रिपोर्ट से साफ है कि GST कलेक्शन में बढ़ोतरी के बावजूद कंस्ट्रक्शन और वर्क्स कॉन्ट्रैक्ट सेक्टर में टैक्स अनुपालन से जुड़ी खामियां अब भी राजस्व के लिए जोखिम बनी हुई हैं. विभाग ने कई मामलों में CAG की टिप्पणियां स्वीकार भी कर ली हैं और वसूली की प्रक्रिया शुरू की है, लेकिन बड़ी राशि से जुड़े मामलों में वसूली की रफ्तार अभी भी काफी धीमी दिखाई देती है.
 


चश्मों की बढ़ती मांग से Lenskart के मुनाफे में 270% का उछाल, पहली तिमाही में ₹222 करोड़ कमाए

कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 270% बढ़कर ₹222 करोड़ पहुंच गया, जबकि रेवेन्यू 43.3% बढ़कर ₹2,714 करोड़ से ज्यादा रहा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

चश्मा बनाने और बेचने वाली प्रमुख कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय नतीजे पेश किए हैं. अप्रैल-जून तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर करीब 270% बढ़कर ₹222 करोड़ पहुंच गया. एक साल पहले की समान तिमाही में कंपनी का मुनाफा करीब ₹60 करोड़ था.

इस दौरान कंपनी का कुल रेवेन्यू भी 43.3% की बढ़ोतरी के साथ ₹2,714.2 करोड़ हो गया. प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती बिक्री, खुद के उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग और बेहतर ऑपरेटिंग मार्जिन ने कंपनी के प्रदर्शन को मजबूती दी.

EBITDA में 75% की बढ़ोतरी, मार्जिन भी सुधरा

कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 75.1% बढ़कर ₹588.5 करोड़ रहा. EBITDA मार्जिन भी एक साल पहले के 17.7% से बढ़कर 21.7% हो गया. कंपनी का कंसोलिडेटेड प्रोडक्ट मार्जिन पहली बार 70% के स्तर को पार कर गया. कंपनी की रणनीति अपने उत्पादों की मैन्युफैक्चरिंग बढ़ाने और प्रीमियम सेगमेंट पर फोकस करने की रही है. इसका फायदा कंपनी को बेहतर मार्जिन के रूप में मिला है.

छोटे शहरों में तेजी से बढ़ा नेटवर्क

लेंसकार्ट अब सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं है और टियर-2 व छोटे शहरों में तेजी से अपना नेटवर्क बढ़ा रही है. अप्रैल-जून तिमाही के दौरान कंपनी ने कुल 132 नए स्टोर खोले, जिनमें से 116 भारत में हैं. कंपनी ने इस दौरान देश के 50 नए शहरों में भी एंट्री की. भारत में खुले नए स्टोर्स में से 83 टियर-2 और उससे छोटे शहरों में हैं. इसके साथ ही कंपनी के कुल एक्टिव स्टोर्स की संख्या बढ़कर 3,459 हो गई. भारत में प्रति स्टोर बिक्री में 24.3% की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

लेंसकार्ट गोल्ड के सदस्य 93 लाख के पार

कंपनी के लॉयल्टी प्रोग्राम लेंसकार्ट गोल्ड के सदस्यों की संख्या बढ़कर 93.5 लाख हो गई है. इस मेंबरशिप से होने वाली आय 57.4% बढ़कर ₹66 करोड़ रही. वहीं, इस तिमाही में कंपनी ने दुनियाभर में करीब 70 लाख आई टेस्ट किए, जो पिछले साल की तुलना में लगभग 40% अधिक है. भारत में करीब 60 लाख लोगों ने आंखों की जांच कराई. इनमें से लगभग आधे ऐसे ग्राहक थे, जिन्होंने पहली बार अपनी आंखों का टेस्ट कराया.

चश्मों की बिक्री बढ़ी, औसत कीमत भी ऊपर गई

कंपनी की कुल बिक्री की मात्रा 25.7% बढ़ी. भारत में चश्मों की औसत बिक्री कीमत 6.4% बढ़कर ₹1,856 हो गई. इससे यह संकेत मिलता है कि ग्राहकों का रुझान बेहतर और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की ओर बढ़ रहा है.

विदेशों में भी मजबूत हुई पकड़

लेंसकार्ट का अंतरराष्ट्रीय कारोबार भी तेजी से बढ़ रहा है. जापान, मिडिल ईस्ट और दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों से कंपनी का रेवेन्यू 38% बढ़कर ₹1,203 करोड़ पहुंच गया. सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए कंपनी चीन की अपनी जॉइंट वेंचर फ्रेमकार्ट में हिस्सेदारी 51% से बढ़ाकर 70% करने की तैयारी में है. इसके लिए करीब ₹10.6 करोड़ का निवेश किया जाएगा. फ्रेमकार्ट कंपनी की 30% से अधिक जरूरतों को पूरा करती है. इसके अलावा, लेंसकार्ट दक्षिण कोरिया में ओनडेज़ कोरिया के जरिए भी अपने कारोबार का विस्तार कर रही है.

शेयर का प्रदर्शन

मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद 12 अगस्त को लेंसकार्ट का शेयर 0.71% की मामूली गिरावट के साथ ₹585 पर बंद हुआ. हालांकि, पिछले छह महीनों में शेयर 14.04% चढ़ा है, जबकि एक साल में इसमें 45.13% की तेजी दर्ज की गई है. कंपनी का मार्केट कैप करीब ₹1.02 लाख करोड़ है.
 


सस्ते 5G फोन हुए महंगे, ₹9,000 से कम वाले स्मार्टफोन की बिक्री 74% गिरी

स्मार्टफोन के मेमोरी और दूसरे कंपोनेंट्स महंगे होने से कंपनियों के लिए बजट फोन बनाना मुश्किल होता जा रहा है. वहीं, महंगे 5G फोन की कीमत बढ़ने के बीच कंपनियों ने पुराने 4G मॉडल को फिर से बाजार में उतारना शुरू कर दिया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

भारत में सस्ते स्मार्टफोन का बाजार तेजी से सिकुड़ रहा है. फोन बनाने में इस्तेमाल होने वाली मेमोरी और अन्य कंपोनेंट्स की कीमत बढ़ने से कंपनियों के लिए 9,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन बनाना मुश्किल हो गया है. नतीजतन, कंपनियां इस सेगमेंट में नए मॉडल लॉन्च करने से पीछे हट रही हैं और कम बजट वाले ग्राहकों के लिए पुराने 4G मॉडल फिर से अहम विकल्प बनकर उभरे हैं.

IDC की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में 9,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन की बिक्री पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 74.3% घट गई. इस कैटिगरी की बाजार हिस्सेदारी भी 15.6% से घटकर सिर्फ 4.5% रह गई है.

स्मार्टफोन की कीमत क्यों बढ़ रही है?

स्मार्टफोन बाजार में कुल बिक्री भी दबाव में रही. अप्रैल-जून तिमाही में कुल स्मार्टफोन शिपमेंट 11.1% घटकर 3.32 करोड़ यूनिट रह गई. हालांकि, इस दौरान स्मार्टफोन की औसत बिक्री कीमत यानी ASP 14.4% बढ़कर करीब 28,400 रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. इसकी बड़ी वजह मेमोरी और अन्य कंपोनेंट्स की बढ़ती कीमतें हैं. कंपनियों ने बढ़ती लागत का असर कम करने के लिए डिस्काउंट और ऑफर्स में भी कटौती की है. इसका सीधा असर सस्ते स्मार्टफोन सेगमेंट पर पड़ा है.

महंगे फोन की तरफ बढ़ रहा ग्राहकों का रुझान

एक तरफ 9,000 रुपये से कम कीमत वाले फोन की बिक्री तेजी से घट रही है, वहीं दूसरी ओर ग्राहक प्रीमियम स्मार्टफोन की ओर बढ़ रहे हैं. 36,000 रुपये से 54,000 रुपये के प्राइस सेगमेंट में स्मार्टफोन की मांग 60.3% बढ़ी है.

इससे साफ है कि बाजार में ग्राहकों की पसंद तेजी से बदल रही है. लोग अब सस्ते फोन के बजाय बेहतर फीचर्स और नई तकनीक वाले महंगे स्मार्टफोन पर ज्यादा खर्च करने को तैयार हैं.

4G फोन को मिला नया जीवन

एंट्री-लेवल 5G स्मार्टफोन महंगे होने के बाद कई ब्रैंड्स ने एक बार फिर 4G मॉडल पर ध्यान देना शुरू कर दिया है. अप्रैल-जून तिमाही में 4G स्मार्टफोन की हिस्सेदारी बढ़कर 11.1% हो गई. कम कीमत वाले 5G फोन की बढ़ती लागत के कारण 4G मॉडल बजट ग्राहकों के लिए एक विकल्प बनकर उभरे हैं.

हालांकि, यह राहत लंबे समय तक रहने की संभावना कम है. जानकारों का मानना है कि पुराने 4G मॉडल का स्टॉक खत्म होने के बाद ग्राहकों के पास महंगे 5G स्मार्टफोन खरीदने के अलावा सीमित विकल्प रह सकते हैं.

चीनी स्मार्टफोन ब्रैंड्स की बिक्री पर भी असर

बाजार में आई गिरावट का असर कई बड़े चीनी स्मार्टफोन ब्रैंड्स पर भी पड़ा है. वीवो की बिक्री 13.9%, शाओमी की 10% और रियलमी की 14.2% घट गई. वहीं, iQoo की बिक्री में सबसे ज्यादा 61% की गिरावट दर्ज की गई.

आने वाले त्योहारों के सीजन में स्मार्टफोन की कीमतों पर और दबाव देखने को मिल सकता है. जैसे-जैसे पुरानी और कम कीमत वाली इन्वेंट्री खत्म होगी, कंपनियों के लिए बढ़ी हुई लागत को कीमतों में शामिल करना जरूरी हो सकता है. ऐसे में बजट स्मार्टफोन खरीदने वाले ग्राहकों को आने वाले महीनों में ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है.
 


बैंक ऑफ अमेरिका का जियो क्रेडिट पर बड़ा दांव, ₹18,268 करोड़ में खरीदेगा 49.9% हिस्सेदारी

इस निवेश से जियो क्रेडिट को अपने लेंडिंग कारोबार और विभिन्न क्रेडिट प्रोडक्ट्स के विस्तार के लिए लंबी अवधि की पूंजी मिलेगी.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा बाजार पर बैंक ऑफ अमेरिका ने बड़ा दांव लगाया है. अमेरिकी बैंक की पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई एनबी होल्डिंग्स कॉरपोरेशन, जियो फाइनैंशियल सर्विसेज की लेंडिंग यूनिट जियो क्रेडिट में 49.9% तक हिस्सेदारी खरीदेगी. यह सौदा इक्विटी शेयरों और वारंट के तरजीही आवंटन के जरिए 18,268.22 करोड़ रुपये में होगा. जियो फाइनैंशियल सर्विसेज ने स्टॉक एक्सचेंज को इसकी जानकारी दी है.

इस समझौते के तहत बैंक ऑफ अमेरिका शुरुआत में जियो क्रेडिट में 26.5% हिस्सेदारी खरीदेगा. इसके बाद वारंट के इस्तेमाल के जरिए उसकी हिस्सेदारी बढ़कर अधिकतम 49.9% तक पहुंच सकती है. हालांकि, यह सौदा जरूरी नियामकीय और कानूनी मंजूरियों पर निर्भर करेगा. जियो क्रेडिट में बाकी हिस्सेदारी जियो फाइनैंशियल सर्विसेज के पास रहेगी.

दो साल में 30,667 करोड़ रुपये का AUM

जियो क्रेडिट ने अपना कारोबार शुरू करने के महज दो साल के भीतर तेजी से विस्तार किया है. 30 जून, 2026 तक कंपनी का एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM 30,667 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है.

इस निवेश से जियो क्रेडिट को अपने लेंडिंग कारोबार और विभिन्न क्रेडिट प्रोडक्ट्स के विस्तार के लिए लंबी अवधि की पूंजी मिलेगी. वहीं, बैंक ऑफ अमेरिका को भारत के तेजी से बढ़ते वित्तीय सेवा बाजार में अपनी मौजूदगी और मजबूत करने का मौका मिलेगा.

भारत के भविष्य पर भरोसा: बैंक ऑफ अमेरिका

बैंक ऑफ अमेरिका के चेयरमैन और CEO ब्रायन मोयनिहान ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ग्रोथ मार्केट्स में से एक है. उन्होंने कहा कि जियो क्रेडिट में निवेश भारत के भविष्य को लेकर बैंक के भरोसे को दर्शाता है. मोयनिहान के मुताबिक, बैंक ऑफ अमेरिका भारत को अच्छी तरह समझता है और कई दशकों से देश के बाजार को समर्थन देता रहा है. अब जियो क्रेडिट में यह निवेश बैंक को भारत के वित्तीय क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाने का बड़ा अवसर देगा.
 


लगातार दो दिन की गिरावट के बाद आज कैसी रहेगी बाजार की चाल? TCS समेत इन शेयरों पर नजर

बुधवार को सेंसेक्स 188 अंक टूटकर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी गिरावट के साथ 24,435 के स्तर पर बंद हुआ. पश्चिम एशिया में तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच निवेशकों की धारणा प्रभावित रही.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Thursday, 13 August, 2026
Last Modified:
Thursday, 13 August, 2026
BWHindia

घरेलू शेयर बाजार लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट के बाद गुरुवार को नए संकेतों के साथ कारोबार की शुरुआत करेगा. बुधवार को बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान तेज बिकवाली देखने को मिली थी और सेंसेक्स एक समय 600 अंक से अधिक टूट गया था. हालांकि बाद में निचले स्तरों से कुछ रिकवरी आई. अंत में बॉम्बे स्टॉक एक्सटचेंज(BSE) बीएसई सेंसेक्स 187.90 अंक यानी 0.24% की गिरावट के साथ 77,966.35 अंक पर बंद हुआ. वहीं,नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 35.75 अंक यानी 0.15% गिरकर 24,435.95 अंक पर बंद हुआ.

कल बाजार पर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और कमजोर वैश्विक संकेतों का दबाव रहा. हालांकि, कुछ बैंकिंग शेयरों में खरीदारी से बाजार को निचले स्तरों से सहारा मिला. अब गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर वैश्विक बाजारों, क्रूड ऑयल की चाल और कंपनियों से जुड़े नए कॉरपोरेट अपडेट्स पर रहेगी.

टाटा ग्रुप के शेयरों में रही तेज बिकवाली

बुधवार के कारोबार में टाटा ग्रुप के कई शेयरों में दबाव देखने को मिला. TCS सबसे ज्यादा गिरने वाले सेंसेक्स शेयरों में शामिल रहा और कारोबार के दौरान इसमें 5% से अधिक की गिरावट भी देखने को मिली. अंत में TCS का शेयर 3.71% गिरकर बंद हुआ. टाटा स्टील, ट्रेंट और टाइटन के शेयरों में भी कमजोरी रही. ऐसे में गुरुवार को भी निवेशकों की नजर टाटा ग्रुप के शेयरों की चाल पर रहेगी. बाजार यह देखेगा कि इन शेयरों में निचले स्तरों पर खरीदारी लौटती है या बिकवाली का दबाव जारी रहता है.

इन शेयरों में रही गिरावट

सेंसेक्स के 30 में से 21 शेयर बुधवार को गिरावट के साथ बंद हुए. महिंद्रा एंड महिंद्रा, एलएंडटी, इटरनल, इन्फोसिस, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, मारुति, टेक महिंद्रा, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इंडिगो, सन फार्मा, एक्सिस बैंक, एनटीपीसी, अडानी पोर्ट्स, एचसीएल टेक, बजाज फिनसर्व और एशियन पेंट्स के शेयर भी लाल निशान में बंद हुए. वहीं, एसबीआई, भारतीय एयरटेल, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावरग्रिड, रिलायंस, बीईएल, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एचडीएफसी बैंक के शेयरों में तेजी रही.

आईटी शेयरों पर रहा सबसे ज्यादा दबाव

सेक्टोरल इंडेक्स में निफ्टी आईटी सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाला सेक्टर रहा और इसमें 1.54% की गिरावट दर्ज की गई. निफ्टी 50 में TCS के अलावा मैक्स हेल्थकेयर इंस्टीट्यूट और अपोलो हॉस्पिटल्स एंटरप्राइजेज के शेयर भी सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे.

दूसरी ओर, निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में करीब 2% की तेजी देखने को मिली. ब्रॉडर मार्केट में निफ्टी मिडकैप 0.28% चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 0.18% की गिरावट के साथ बंद हुआ.

आज इन शेयरों पर रहेगी नजर

आज के कारोबार में कुछ कंपनियों के शेयर बड़े सौदों, हिस्सेदारी बिक्री, निवेश और नए ऑर्डर के चलते फोकस में रह सकते हैं. UltraTech Cement में करीब 1,909 करोड़ रुपये का बड़ा ब्लॉक डील होने की संभावना है, जिसमें Pilani Investment करीब 17 लाख शेयर बेच सकती है. वहीं, Jio Financial Services की NBFC इकाई Jio Credit में Bank of America के निवेश की खबर के चलते शेयर पर नजर रहेगी. समझौते के तहत Bank of America अधिकतम 49.9% हिस्सेदारी के लिए 18,268 करोड़ रुपये तक का निवेश कर सकता है.

इसके अलावा RPP Infra Projects में प्रमोटर पक्ष की हिस्सेदारी बिक्री हुई है, जबकि Tenneco Clean Air India में करीब 15% हिस्सेदारी की बड़ी बिक्री देखने को मिली है. वहीं, Vascon Engineers को महाराष्ट्र के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट से 126.39 करोड़ रुपये का नया ऑर्डर मिला है, जिसके चलते इसके शेयर में भी हलचल देखने को मिल सकती है.

आज किन फैक्टर्स पर रहेगी बाजार की नजर?

गुरुवार को बाजार की दिशा तय करने में वैश्विक बाजारों का रुख, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां अहम रहेंगी. इसके अलावा लगातार दो दिन की गिरावट के बाद निवेशक यह भी देखेंगे कि निचले स्तरों पर खरीदारी बाजार को सहारा देती है या बिकवाली का दबाव आगे भी जारी रहता है. TCS समेत टाटा ग्रुप के शेयरों के साथ UltraTech Cement, Jio Financial, RPP Infra Projects, Tenneco Clean Air India और Vascon Engineers आज के कारोबार में निवेशकों के रडार पर रह सकते हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


Shiprocket IPO: आज से खुला ₹1,617 करोड़ का IPO, एंकर निवेशकों से जुटाए ₹727 करोड़

12 से 14 अगस्त तक चलेगा सब्सक्रिप्शन, ₹92-97 प्रति शेयर तय किया गया प्राइस बैंड; कर्ज चुकाने में खर्च होंगे ₹210 करोड़

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 12 August, 2026
BWHindia

ई-कॉमर्स टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म शिपरॉकेट (Shiprocket) का ₹1,617.5 करोड़ का इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) आज यानी 12 अगस्त से सब्सक्रिप्शन के लिए खुल गया है. यह IPO 14 अगस्त को बंद होगा. कंपनी को Bertelsmann, Temasek, Tribe Capital और Eternal जैसे बड़े निवेशकों का समर्थन हासिल है. IPO खुलने से पहले Shiprocket ने एंकर निवेशकों को 7.50 करोड़ इक्विटी शेयर आवंटित किए और अपर प्राइस बैंड ₹97 प्रति शेयर के हिसाब से ₹727.41 करोड़ जुटाए. कंपनी ने IPO के लिए ₹92 से ₹97 प्रति शेयर का प्राइस बैंड तय किया है. निवेशक कम से कम 154 शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं और इसके बाद इसी के गुणकों में बोली लगानी होगी.

पहले प्रस्तावित IPO से छोटा हुआ इश्यू

Shiprocket का मौजूदा IPO आकार दिसंबर 2025 में दाखिल अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में प्रस्तावित ₹2,342.3 करोड़ के इश्यू से काफी कम है. पहले प्रस्ताव में ₹1,100 करोड़ का फ्रेश इश्यू और ₹1,242.3 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS) शामिल था. कंपनी ने अपने IPO दस्तावेज गोपनीय माध्यम से दाखिल किए थे और नवंबर 2025 में भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी हासिल की थी.

₹365.6 करोड़ से कारोबार का विस्तार

फ्रेश इश्यू से मिलने वाली रकम में से ₹365.6 करोड़ कंपनी के मुख्य और नए बिजनेस प्लेटफॉर्म के विस्तार पर खर्च किए जाएंगे. वहीं, ₹210 करोड़ का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में किया जाएगा. 10 जुलाई 2026 तक कंपनी पर ₹244.5 करोड़ का बकाया कर्ज था. बाकी रकम का इस्तेमाल इनऑर्गेनिक ग्रोथ के अवसरों और सामान्य कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए किया जाएगा.

Bertelsmann सबसे बड़ा शेयरधारक

Bertelsmann के पास Shiprocket की 21.32% हिस्सेदारी है और वह कंपनी का सबसे बड़ा शेयरधारक है. इसके बाद Tribe Capital की 14.14%, Eternal की 6.85%, KDT Venture Holdings की 5.49% और Temasek समर्थित MacRitchie Investments की 5.29% हिस्सेदारी है. Shiprocket एक टेक्नोलॉजी आधारित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म है, जो MSME और बड़े रिटेलर्स को लॉजिस्टिक्स, चेकआउट, पेमेंट्स, फाइनेंसिंग, फुलफिलमेंट और क्रॉस-बॉर्डर कॉमर्स जैसी सेवाएं उपलब्ध कराता है.

FY26 में 24% बढ़ा रेवेन्यू

वित्त वर्ष 2025-26 में Shiprocket का ऑपरेशनल रेवेन्यू सालाना आधार पर 24% बढ़कर ₹2,024.1 करोड़ हो गया. कंपनी ने FY25 में भी रेवेन्यू में करीब 24% की बढ़ोतरी दर्ज की थी. हालांकि, FY26 में कंपनी का नेट लॉस बढ़कर ₹79.2 करोड़ हो गया, जो FY25 में ₹74.4 करोड़ था. हालांकि, यह FY24 में दर्ज ₹595.1 करोड़ के नुकसान से काफी कम है. ब्रोकरेज फर्मों ने कंपनी की एडजस्टेड प्रॉफिटेबिलिटी और ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार को सकारात्मक संकेत माना है.

Geojit Investments ने मध्यम से लंबी अवधि के निवेशकों के लिए IPO को 'Subscribe' रेटिंग दी है. ब्रोकरेज के मुताबिक, ₹97 के अपर प्राइस बैंड पर IPO के बाद Shiprocket का वैल्यूएशन FY26 EV/Sales के आधार पर 3.6 गुना है, जो लिस्टेड पीयर की तुलना में डिस्काउंट पर है.

19 अगस्त को हो सकती है लिस्टिंग

IPO के शेयरों का अलॉटमेंट 17 अगस्त को फाइनल होने की उम्मीद है. वहीं, Shiprocket के शेयर 19 अगस्त को स्टॉक एक्सचेंजों पर लिस्ट हो सकते हैं. इस इश्यू के बुक-रनिंग लीड मैनेजर Axis Capital, BofA Securities India, JM Financial और Kotak Mahindra Capital Company हैं.

(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


जुलाई में फिर बढ़ी महंगाई की मार, 4.45% पर पहुंची खुदरा महंगाई; खाने-पीने की चीजों ने बिगाड़ा बजट

लगातार दूसरे महीने RBI के 4% लक्ष्य से ऊपर रही खुदरा महंगाई. जुलाई में खाद्य महंगाई 5.52% पर पहुंची, जबकि ट्रांसपोर्ट, कपड़े-जूते और पर्सनल केयर से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Wednesday, 12 August, 2026
Last Modified:
Wednesday, 12 August, 2026
BWHindia

जुलाई में खुदरा महंगाई ने एक बार फिर आम आदमी की जेब पर दबाव बढ़ा दिया. जून के 4.38% के मुकाबले जुलाई में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.45% हो गई. इसके साथ ही महंगाई लगातार दूसरे महीने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर रही. नई CPI सीरीज लागू होने के बाद यह खुदरा महंगाई का अब तक का सबसे ऊंचा स्तर भी है.

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में तेजी रही. प्याज, लहसुन और अदरक की बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया, जबकि ट्रांसपोर्ट, रेस्तरां, कपड़े-जूते और पर्सनल केयर से जुड़े खर्चों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई.

खाद्य महंगाई 5.52% पर पहुंची

कंज्यूमर फूड प्राइस इंडेक्स (CFPI) के आधार पर खाद्य महंगाई जून के 5.32% से बढ़कर जुलाई में 5.52% हो गई. शहरों के मुकाबले ग्रामीण इलाकों में खाने-पीने की चीजों की महंगाई ज्यादा रही. जुलाई में शहरी क्षेत्रों में खाद्य महंगाई 5.05%, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 5.79% दर्ज की गई.

सब्जियों में प्याज, लहसुन और अदरक की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. प्याज की महंगाई दर जून के 4.73% से बढ़कर जुलाई में 22.54% पहुंच गई. वहीं, लहसुन की महंगाई 17.93% से बढ़कर 35.36% हो गई. अदरक की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी रही और इसकी महंगाई दर 50.41% से बढ़कर 83.62% तक पहुंच गई. हालांकि, कुछ सब्जियों की कीमतों में गिरावट से उपभोक्ताओं को राहत भी मिली. आलू की कीमतों में सालाना आधार पर 16.56% की कमी दर्ज की गई. भिंडी, मटर और टमाटर के दाम भी घटे हैं.

सफर से लेकर पर्सनल केयर तक बढ़े खर्च

महंगाई का असर केवल रसोई तक सीमित नहीं रहा. ट्रांसपोर्ट से जुड़े खर्चों की महंगाई जून के 4.31% से बढ़कर जुलाई में 4.43% हो गई, जबकि माल ढुलाई सेवाओं में महंगाई दर 7.77% दर्ज की गई. आवास क्षेत्र में महंगाई 2.22% रही. वहीं, रेस्तरां और आवास सेवाओं में 7.72% की महंगाई दर्ज की गई. कपड़े और जूतों की महंगाई दर 3.38% रही.

पर्सनल केयर और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े सामान एवं सेवाओं में महंगाई सबसे ऊंचे स्तरों में रही और यह 14.77% दर्ज की गई. स्वास्थ्य सेवाओं में 1.34% और शिक्षा सेवाओं में 3.64% की महंगाई दर्ज की गई.

RBI ने FY27 के लिए घटाया महंगाई अनुमान

महंगाई में हालिया तेजी के बावजूद RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 5.1% से घटाकर 5% कर दिया है. केंद्रीय बैंक का मानना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का महंगाई पर सकारात्मक असर पड़ सकता है.

RBI के अनुमान के अनुसार, चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में महंगाई अपने उच्च स्तर पर पहुंच सकती है, जिसके बाद इसमें धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है. हालांकि, जुलाई के आंकड़े साफ संकेत देते हैं कि फिलहाल खाद्य कीमतें और रोजमर्रा के बढ़ते खर्च आम उपभोक्ता के बजट पर दबाव बनाए रख सकते हैं.