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शेयर बाजार के लिए शुभ रह सकता है अक्टूबर! जानें क्या कहता है इतिहास
2011 से अब तक केवल दो मौकों पर सेंसेक्स ने अक्टूबर में निगेटिव रिटर्न दिया है. ऐसे में इस बार भी अच्छे रिटर्न की उम्मीद की जा रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
शेयर बाजार के लिए सितंबर खास अच्छा नहीं रहा. महीने के ज़्यादातर दिनों में बाजार में नरमी देखी गई. हालांकि, बीते शुक्रवार को मार्केट हरे निशान के साथ बंद हुआ. भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव विदेशी निवेशकों के रुख पर बहुत निर्भर करता है. एक रिपोर्ट बताती है कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का शेयर बाजार में बिकवाली का सिलसिला जारी है. उन्होंने ने सितंबर में 7600 करोड़ रुपए की निकासी की है. ऐसे में यह सवाल लाजमी हो जाता है कि अक्टूबर यानी इस महीने बाजार का मिजाज कैसा रहेगा?
अच्छे है पुराना रिकॉर्ड
वैसे तो शेयर बाजार के बारे में सटीक तौर पर कुछ भी नहीं कहा जा सकता. लेकिन यदि इतिहास पर नज़र डाली जाए तो शेयर बाजार के लिए अक्टूबर अपेक्षाकृत अच्छा ही रहा है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर शेयर बाजार के लिए अब तक का बेस्ट महीना साबित हो सकता है. 2011 से अब तक केवल दो मौकों पर सेंसेक्स ने अक्टूबर में निगेटिव रिटर्न दिया है. यानी इस बात की संभावना ज्यादा है कि निवेशकों को इस बार दिवाली पर अच्छा रिटर्न मिले.
ये रहे बेस्ट परफॉर्मर
रिपोर्ट में बताया गया है कि अक्टूबर इक्विटी मार्केट के लिए बेहद उत्साहजनक साबित होता है. पिछले 11 साल में इंडेक्स ने अक्टूबर में 9.2% तक का रिटर्न दिया है. वहीं, 2013 और 2011 बेस्ट परफॉर्मर रहे हैं. अगर पिछले तीन साल की बात करें तो इंडेक्स ने क्रमशः 3.78 प्रतिशत, 4 फीसदी और 0.3 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. हालांकि, 2012 और 2018 के अक्टूबर में इंडेक्स ने 1.37% और 4.9% का निगेटिव रिटर्न दिया था.
FPI बने चिंता का विषय
मासिक रिटर्न के तुलनात्मक विश्लेषण से पता चलता है कि 2011 से अब तक अक्टूबर में पॉजिटिव रिटर्न की संभावनाएं अधिक रहती हैं. वहीं, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) का भारतीय बाजार से निकलना चिंता ज़रूर बढ़ा रहा है. FPI इस कैलेंडर वर्ष में अब तक भारतीय बाजारों से कुल 1.68 लाख करोड़ रुपए की निकासी कर चुके हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले महीनों में भी एफपीआई की गतिविधियों में उतार-चढ़ाव का सिलसिला कायम रहने की संभावना है. उन्होंने इसके लिए वैश्विक कारकों के अलावा घरेलू कारणों को भी जिम्मेदार माना है. डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार, FPI ने सितंबर में 7,624 करोड़ रुपए मूल्य के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की है. जबकि अगस्त में उन्होंने 51,000 करोड़ और जुलाई में लगभग 5,000 करोड़ रुपए मूल्य की शुद्ध खरीदारी की थी.
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