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शहर की फैक्ट्रियों ऑटोमेशन की रफ्तार तेज, रोजगार में सुस्ती : ASI रिपोर्ट
ASI की रिपोर्ट स्पष्ट संकेत देती है कि भारत का औद्योगिक परिदृश्य तेजी से तकनीकी होता जा रहा है. मशीनों पर बढ़ता भरोसा जहां उत्पादकता को बढ़ा रहा है, वहीं यह पारंपरिक श्रम-आधारित रोजगार पर दबाव भी बना रहा है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
देश के 10 प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में मशीनों और उपकरणों पर निवेश तेजी से बढ़ा है, लेकिन रोजगार की रफ्तार उससे काफी पीछे रह गई है. सालाना औद्योगिक सर्वेक्षण (Annual Survey of Industries – ASI) 2023-24 की रिपोर्ट के अनुसार, ये 10 उद्योग कुल फैक्ट्री रोजगार का लगभग 70% हिस्सा रखते हैं. इन क्षेत्रों में फिक्स्ड कैपिटल (मशीनें, जमीन, भवन आदि) में औसतन 12.6% की वृद्धि हुई, जबकि रोजगार केवल 7.8% बढ़ा.
मशीनों पर बढ़ता भरोसा
ASI की रिपोर्ट बताती है कि 10 में से 9 उद्योगों में मशीनों और उपकरणों पर खर्च की रफ्तार, नौकरियों की तुलना में कहीं ज्यादा रही. केवल वाहन और ट्रेलर निर्माण उद्योग में ऐसा देखने को मिला, जहां रोजगार वृद्धि (8.6%) निवेश वृद्धि (6.8%) से अधिक रही. वहीं कपड़ा उद्योग में मशीनों पर खर्च बढ़ने के बावजूद रोजगार घटा, यानी वहां लोगों की नौकरियां कम हो गईं.
कंपनियों की प्राथमिकता क्यों बदल रही है?
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां अब मशीनों में निवेश को ज्यादा फायदेमंद मानती हैं क्योंकि वे काम को तेज़, सटीक और बिना मानवीय त्रुटि के पूरा करती हैं. साथ ही, कड़े श्रम कानूनों की वजह से कंपनियां ज्यादा कर्मचारियों को नियुक्त करने से बचती हैं.
अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री अमित बसोले ने कहा, “अब यह रुझान स्थायी हो गया है. कपड़ा जैसे पारंपरिक उद्योगों में भी मशीनों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है.”
विशेषज्ञों के अनुसार, “कंपनियां नई तकनीकों और पर्यावरण नियमों के अनुरूप काम करने के लिए मशीनों का उपयोग बढ़ा रही हैं. अगर भारत सर्कुलर इकॉनमी की दिशा में आगे बढ़ता है, तो रोजगार के नए अवसर बन सकते हैं.”
क्या है सर्कुलर इकॉनमी?
सर्कुलर इकॉनमी एक ऐसी प्रणाली है जिसमें उत्पादों को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि उन्हें मरम्मत, पुनः उपयोग या रीसायकल किया जा सके. यह न केवल प्रदूषण घटाती है, बल्कि नए रोजगार अवसर भी पैदा करती है. इस मॉडल से उद्योगों में सतत विकास और श्रमिकों के लिए काम के नए रास्ते खुल सकते हैं.
निवेश और रोजगार में बढ़ता अंतर
रिपोर्ट के मुताबिक, निवेश और रोजगार वृद्धि के बीच का अंतर सात साल में सबसे ज्यादा है, करीब 6.3 प्रतिशत अंक. 10 में से 8 उद्योगों में पूंजी निवेश दो अंकों में बढ़ा, लेकिन केवल एक उद्योग में ही रोजगार वृद्धि दो अंकों में रही.
कौन से उद्योग आगे रहे?
कपड़ा उद्योग (Wearing Apparel) में मशीनों पर निवेश सबसे तेज़ी से बढ़ा, जिसमें 29.7% की वृद्धि दर्ज की गई. वहीं, मशीनरी और उपकरण निर्माण क्षेत्र (Machinery & Equipment Manufacturing) में रोजगार वृद्धि सबसे अधिक 12.9% रही.
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