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ग्लोबल रेटिंग एजेंसी से 14 साल बाद Bharat को मिली इस खुशी के क्या हैं मायने?
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने भारत के सॉवरेन रेटिंग आउटलुक को ‘स्थिर’ से बढ़ाकर ‘सकारात्मक’ कर दिया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
आर्थिक रूप से मजबूत होते भारत के लिए एक अच्छी खबर आई है. अमेरिकी एजेंसी एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने 14 साल बाद भारत की साख में इजाफा किया है. एसएंडपी के इस फैसले का मतलब है कि वैश्विक स्तर पर भारत की आर्थिक छवि में निखार आएगा और उसकी लोन लेने की कैपेसिटी में भी इजाफा होगा. पिछले पांच सालों में सार्वजनिक खर्च की बेहतर गुणवत्ता तथा सुधारों और राजकोषीय नीतियों में व्यापक निरंतरता की उम्मीद के बीच 14 साल के अंतराल के बाद S&P ने भारत की रेटिंग में बदलाव किया है.
आउटलुक स्टेबल से पॉजिटिव
एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग ने भारत के सॉवरेन रेटिंग आउटलुक को ‘स्थिर’ से बढ़ाकर ‘सकारात्मक’ कर दिया है. हालांकि, एसएंडपी ने भारत की सॉवरेन रेटिंग को लोएस्ट इन्वेस्टमेंट ग्रेड BBB- पर बरकरार रखा है. BBB- सबसे निचली इन्वेस्टमेंट कैटेगरी रेटिंग है. अमेरिकी एजेंसी ने पिछली बार 2010 में रेटिंग आउटलुक को ‘नेगेटिव’ से बढ़ाकर ‘स्टेबल’ किया था. S&P ने कहा कि यदि भारत सतर्क राजकोषीय और मौद्रिक नीति अपनाता है, तो सरकार के बढ़े हुए कर्ज तथा ब्याज के बोझ में कमी आएगी. इससे आर्थिक मोर्चे पर जुझारूपन बढ़ेगा. अगर ऐसा होता है, तो वह अगले 24 महीने में भारत की साख को और बढ़ा सकती है. बता दें कि एसएंडपी की रेटिंग भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा सरकार को 2.10 लाख करोड़ रुपए का रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर करने के एक सप्ताह के भीतर आई है. इस रकम का इस्तेमाल सरकार के राजकोषीय घाटे को कम करने के लिए किया जा सकता है.
क्या होती है सॉवरेन रेटिंग?
एसएंडपी ने आगे कहा कि मजबूत बढ़ोतरी और सरकारी खर्च की बढ़ती गुणवत्ता के दम पर भारत का आउटलुक संशोधित कर ‘पॉजिटिव’ किया गया है. गौरतलब है कि सॉवरेन रेटिंग किसी देश के इन्वेस्टमेंट आउटलुक के जोखिम स्तर को मापने का एक साधन है. साथ ही यह निवेशकों को देश की कर्ज चुकाने की क्षमता से अवगत कराती है. निवेशक इस रेटिंग को देश की साख के मापदंड के तौर पर देखते हैं और इसका उधार लेने की लागत पर असर पड़ता है. अमेरिकी एजेंसी ने कहा कि भारत के प्रति हमारा सकारात्मक परिदृश्य इसकी मजबूत आर्थिक बढ़ोतरी, सरकारी व्यय की गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार और राजकोषीय समावेशन के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता पर आधारित है.
तेज गति से दौड़ी GDP
ग्लोबल एजेंसी का अनुमान है कि पिछले 3 सालों में रियल जीडीपी की ग्रोथ रेट औसतन 8.1% सालाना रही है, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक है. एसएंडपी ने कहा कि यदि भारत का राजकोषीय घाटा कम होता है और परिणामस्वरूप सामान्य सरकारी लोन संरचनात्मक आधार पर सकल घरेलू उत्पाद के सात प्रतिशत से नीचे आ जाता है, तो वह रेटिंग बढ़ा सकती है. एजेंसी ने कहा कि भारत में पिछले चार से पांच सालों में सरकारी खर्च की गुणवत्ता में सुधार हुआ है. सार्वजनिक निवेश तथा उपभोक्ता गति अगले तीन से चार साल में ठोस वृद्धि संभावनाओं को आधार प्रदान करेगी.
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