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SIP और ETF से MF इंडस्ट्री को मजबूती, AUM तीसरे साल 20% से ज्यादा बढ़ा

सोने और चांदी के ETF ने भी इस साल निवेशकों को आकर्षित किया. कीमतों में तेजी और बेहतर रिटर्न के चलते इन फंड्स में निवेश बढ़ा है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 5 months ago

म्युचुअल फंड इंडस्ट्री (Mutual Funds) ने वित्त वर्ष 2026 में भी अपनी मजबूती साबित की है. उतार-चढ़ाव भरे इक्विटी बाजार के बावजूद इंडस्ट्री का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) लगातार तीसरे साल 20% से ज्यादा बढ़ा है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्रोथ के पीछे सबसे बड़ा हाथ सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और गैर-इक्विटी फंड्स में बढ़ती दिलचस्पी का है.

Q4 में AUM 81.5 लाख करोड़ के पार

रिपोर्ट के अनुसार FY26 की चौथी तिमाही में म्युचुअल फंड इंडस्ट्री का औसत AUM बढ़कर 81.5 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो पिछले साल की समान अवधि के 67 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 21% अधिक है. यह ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब इक्विटी बाजार का प्रदर्शन अपेक्षाकृत कमजोर रहा.

सेंसेक्स-निफ्टी दबाव में, फिर भी इंडस्ट्री मजबूत

पूरे वित्त वर्ष 2026 के दौरान शेयर बाजार दबाव में रहा. जहां निफ्टी 50 में 5.1% की गिरावट दर्ज की गई और सेंसेक्स 7.1% फिसला, जो FY20 के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन है.  वहीं, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा. मिडकैप में हल्की बढ़त देखने को मिली, जबकि स्मॉलकैप इंडेक्स में गिरावट दर्ज हुई. कुल बाजार पूंजीकरण भी सालभर लगभग स्थिर ही रहा.

SIP बना ग्रोथ का सबसे बड़ा इंजन

विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP के जरिए लगातार निवेश ने इंडस्ट्री को स्थिरता दी है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच SIP इनफ्लो ने बाजार को संभालने में अहम भूमिका निभाई. इसके अलावा, निवेशकों का रुझान अब केवल इक्विटी तक सीमित नहीं है, बल्कि वे डेट और अन्य वैकल्पिक निवेश विकल्पों की ओर भी बढ़ रहे हैं.

Gold-Silver ETF ने भी खींचा निवेश

सोने और चांदी के ETF ने भी इस साल निवेशकों को आकर्षित किया. कीमतों में तेजी और बेहतर रिटर्न के चलते इन फंड्स में निवेश बढ़ा है. जनवरी में गोल्ड और सिल्वर ETF में कुल निवेश रिकॉर्ड 33,500 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. बाजार की अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने इन्हें सुरक्षित विकल्प के रूप में चुना.

मल्टी-एसेट फंड्स में बढ़ी दिलचस्पी

इक्विटी, डेट और कमोडिटी का मिश्रण पेश करने वाले मल्टी-एसेट फंड्स में भी निवेशकों की रुचि बढ़ी है. FY26 के पहले 11 महीनों में इस कैटेगरी में करीब 60,000 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया.

इक्विटी फंड्स में सुस्ती, लेकिन SIP मजबूत

हालांकि इक्विटी फंड्स में निवेश की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है. फरवरी तक FY26 में करीब 3 लाख करोड़ रुपये का निवेश आया, जोकि यह पिछले साल के मुकाबले 27% कम है. बाजार में अस्थिरता के चलते लंपसम निवेश प्रभावित हुआ और नए फंड लॉन्च की गति भी धीमी रही. फिर भी, SIP के जरिए नियमित निवेश जारी रहा, जिसने बाजार गिरावट के असर को काफी हद तक संतुलित किया.

रिटेल निवेशक बने इंडस्ट्री की ताकत

विशेषज्ञों का कहना है कि म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की संरचना अब पहले से ज्यादा मजबूत हो गई है. रिटेल निवेशकों का AUM अपेक्षाकृत स्थिर रहता है, जबकि संस्थागत निवेश ज्यादा उतार-चढ़ाव वाला होता है. कुल मिलाकर म्युचुअल फंड इंडस्ट्री ने यह दिखाया है कि बाजार की कमजोरी के बावजूद यदि निवेश अनुशासित तरीके से किया जाए जैसे SIP के माध्यम से तो लंबी अवधि में ग्रोथ संभव है.

(डिस्क्लेमर: म्युचुअल फंड शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)


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