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शशि बुधिराजा मेमोरियल डायलॉग: जवाबदेही और सुधार पर मंथन, नीति विशेषज्ञों की अहम भागीदारी
BW Businessworld के सहयोग से आयोजित इस संवाद ने न केवल श्रद्धांजलि दी, बल्कि एक ऐसे मंच के रूप में काम किया जहां सार्थक बहस और विचार-विमर्श के जरिए सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हुई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
राजधानी दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित “शशि बुधिराजा मेमोरियल डायलॉग” ने नीति-निर्माताओं, प्रशासकों और विचारकों को एक मंच पर लाकर सुशासन, जवाबदेही और संस्थागत सुधार जैसे अहम मुद्दों पर गंभीर चर्चा का अवसर दिया. यह आयोजन स्वर्गीय शशि बुधिराजा की स्मृति को समर्पित होने के साथ-साथ उनके मूल्यों ईमानदारी, संवेदनशीलता और मजबूत संबंधों को आगे बढ़ाने का प्रयास भी रहा.
विचारों के आदान-प्रदान का मंच
BW Businessworld के सहयोग से आयोजित इस संवाद ने न केवल श्रद्धांजलि दी, बल्कि एक ऐसे मंच के रूप में काम किया जहां सार्थक बहस और विचार-विमर्श के जरिए सार्वजनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उपायों पर चर्चा हुई. यह आयोजन शशि बुधिराजा की उस विरासत को दर्शाता है, जो संवाद और बौद्धिक आदान-प्रदान पर आधारित थी.
उद्घाटन में सुशासन पर जोर
कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. अनुराग बत्रा के स्वागत भाषण से हुई. उन्होंने राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक संवाद के लिए ऐसे मंचों की आवश्यकता पर बल दिया. उन्होंने कहा कि भारत के विकास की यात्रा में सुशासन की केंद्रीय भूमिका है और इसके लिए निरंतर आत्ममंथन और सुधार जरूरी हैं.
अनुभवी वक्ताओं ने रखे विचार
इस डायलॉग का मुख्य आकर्षण सुशासन पर केंद्रित एक पैनल चर्चा रही, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के अनुभवी वक्ताओं ने भाग लिया. यश सिन्हा ने पारदर्शिता और सार्वजनिक संस्थानों से बढ़ती अपेक्षाओं पर प्रकाश डाला. वहीं राज शुक्ला ने जटिल प्रशासनिक तंत्र में नेतृत्व, अनुशासन और निर्णय क्षमता के महत्व को रेखांकित किया.
अरुणा शर्मा ने तकनीक और नीति के समन्वय को सुशासन मजबूत करने के लिए आवश्यक बताया. वहीं त्रिपुरारी शरन ने प्रशासनिक सुधारों और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन की चुनौतियों को सामने रखा. इस चर्चा का संचालन राजीव बुद्धिराजा ने किया.
जवाबदेही और सुधार पर जोर
चर्चा के दौरान सुशासन में मौजूद खामियों, जवाबदेही की जरूरत और नीति व क्रियान्वयन के बीच की दूरी को कम करने पर विशेष जोर दिया गया. वक्ताओं ने संस्थागत विश्वास, नागरिक-केंद्रित नीतियों और भारत की वैश्विक आकांक्षाओं के अनुरूप ढांचे तैयार करने की आवश्यकता पर सहमति जताई.
स्किल डेवलपमेंट के लिए अहम पहल
कार्यक्रम की एक प्रमुख उपलब्धि “मनोरोमा और शशि बुधिराजा व्यावसायिक कौशल केंद्र” के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर रही. यह समझौता मनोरमा बुद्धिराजा और हिमाद्री दास के बीच हुआ. इस पहल का उद्देश्य कौशल विकास को बढ़ावा देना और समावेशी विकास को मजबूती देना है.
समापन सत्र में भविष्य की दिशा पर चर्चा
कार्यक्रम के अंत में “गवर्नेंस रीइमेजीन्ड : अनलॉकिंग इंडियाज ट्रू पोटेंशियल (Governance Reimagined: Unlocking India’s True Potential)” विषय पर राजीव बुद्धिराजा और डॉ. अनुराग बत्रा के बीच संवाद हुआ. इसमें नीति, मीडिया और नेतृत्व के अनुभवों के आधार पर सिस्टम में सुधार के लिए सामूहिक सोच की आवश्यकता पर जोर दिया गया.
संवाद की ताकत का संदेश
यह मेमोरियल डायलॉग केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं रहा, बल्कि इसने यह संदेश दिया कि विचारों का आदान-प्रदान और खुली बहस समाज और संस्थाओं को नई दिशा दे सकती है. शशि बुधिराजा की स्मृति में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह विश्वास दोहराया कि संवाद परिवर्तन का एक सशक्त माध्यम है और उनकी विरासत आगे भी प्रेरणा देती रहेगी.
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