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मार्च में सर्विस सेक्टर को झटका, 14 महीने के निचले स्तर पर पहुंचा PMI
मार्च में कंपनियों के लिए लागत का दबाव बढ़ गया. ईंधन, ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और मजदूरी महंगी होने से इनपुट कॉस्ट लगभग चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
मार्च 2026 में भारत के सर्विस सेक्टर की ग्रोथ थोड़ी धीमी पड़ती दिखी है. HSBC और S&P ग्लोबल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सर्विस PMI 57.5 पर आ गया. जो पिछले 14 महीनों का सबसे निचला स्तर है. हालांकि, यह आंकड़ा अभी भी 50 के ऊपर है जो दर्शाता है कि सेक्टर में विस्तार जारी है.
फरवरी में यह आंकड़ा 58.1 था, जिससे साफ है कि ग्रोथ लगातार दूसरे महीने कमजोर हुई है. इसके बावजूद लंबी अवधि के औसत 54.4 के मुकाबले स्थिति अभी भी बेहतर बनी हुई है. HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी ने कहा कि विदेशी ऑर्डर्स में मजबूती के कारण मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है. कंपनियों का भरोसा आने वाले समय को लेकर अभी भी मजबूत है.
इनपुट लागत में उछाल
मार्च में कंपनियों के लिए लागत का दबाव बढ़ गया. ईंधन, ट्रांसपोर्ट, खाद्य सामग्री और मजदूरी महंगी होने से इनपुट कॉस्ट लगभग चार साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई. कंपनियों ने कुछ लागत ग्राहकों पर ट्रांसफर की, जिससे सेवाओं की कीमतों में सात महीने की सबसे तेज बढ़ोतरी देखने को मिली. फिर भी पूरी लागत ट्रांसफर नहीं हो पाई और कंपनियों के मुनाफे पर दबाव बना रहा.
नौकरियों में बढ़त और कारोबारियों का भरोसा
सेवा क्षेत्र में रोजगार का माहौल मजबूत बना हुआ है. लगातार तीसरे महीने नौकरियों में बढ़ोतरी हुई और यह रफ्तार 2025 के मध्य के बाद सबसे तेज रही. कंपनियों का भरोसा भी उच्च स्तर पर बना हुआ है. कारोबारियों का उत्साह लगभग 12 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है. जिससे उम्मीद है कि आने वाले समय में मांग और बाजार की स्थिति में सुधार होगा.
ग्रोथ की गति थोड़ी धीमी
निजी क्षेत्र की गतिविधियां कुल मिलाकर बढ़ रही हैं, लेकिन रफ्तार धीमी हुई है. HSBC का इंडिया कंपोजिट PMI मार्च में 57.0 पर आ गया, जो फरवरी के 58.9 के मुकाबले घटा है. यह नवंबर 2022 के बाद सबसे धीमी विस्तार दर को दर्शाता है.
विशेषज्ञों के अनुसार. पश्चिम एशिया में जारी तनाव से मांग और टूरिज्म प्रभावित हुए हैं. जिससे घरेलू बाजार में थोड़ी सुस्ती आई है. इस तरह, मार्च में सर्विस सेक्टर की ग्रोथ धीमी हुई. लागत बढ़ने के बावजूद मांग और रोजगार मजबूत रहे और कारोबारियों का भरोसा आने वाले महीनों के लिए सकारात्मक संकेत देता है.
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