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इस बार 300 अंक फिसला Sensex, क्या आगे भी जारी रहेगी गिरावट?

पिछली बार सेंसेक्स (Sensex Index) में गिरावट देखने को मिली थी तो भारतीय बाजारों को 4 लाख करोड़ का नुकसान हुआ था.

पवन कुमार मिश्रा 2 years ago

BSE (बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज) के सेंसेक्स (Sensex Index) में आज एक बार फिर गिरावट देखने को मिली है. आपको बता दें कि 20 सितंबर को भी इसी तरह सेंसेक्स में एकाएक 800 अंकों की गिरावट देखने को मिली थी और उसके बाद यह गिरावट का दौर आने वाले 4 दिनों तक जारी रहा था. खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स में लगभग 300 अंकों की गिरावट दर्ज की जा चुकी थी. 

पिछली बार डूबे थे 4 लाख करोड़
आपको बता दें कि पिछली बार जब सेंसेक्स (Sensex Index) में गिरावट देखने को मिली थी तो इसकी वजह से भारतीय बाजारों को लगभग 4 लाख करोड़ रुपयों का नुकसान हुआ था. खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स में लगभग 0.47% की गिरावट देखने को मिली थी जिसके बाद सेंसेक्स 65,515.52 अंकों पर पहुंच गया था. दूसरी तरफ NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) के निफ्टी 50 (Nifty 50) इंडेक्स में भी 0.59% की गिरावट दर्ज की गई है और फिलहाल निफ्टी 19,522.40 अंकों पर ट्रेड कर रहा है.

क्यों आई Sensex में गिरावट?
डॉलर की मजबूती, इन्फ्लेशन की घबराहट और रूस एवं यूक्रेन के युद्ध जैसे विभिन्न कारकों को सेंसेक्स में आई गिरावट की प्रमुख वजह माना जा रहा है. भारतीय बाजारों में आई इस गिरावट के बारे में बात करते हुए इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल ने कहा कि कच्चे तेल के दाम उच्च स्तर पर बने हुए हैं और इससे इन्फ्लेशन का खतरा बढ़ जाता है. इन्फ्लेशन के बढ़ते खतरे की वजह से भारतीय बाजारों में यह गिरावट देखने को मिल रही है. आपको बता दें कि पिछले कुछ समय के दौरान डॉलर भी काफी मजबूत हुआ है और डॉलर में मजबूती हमेशा ही भारतीय इकॉनमी के लिए नकारात्मक साबित होती है क्योंकि भारत अपने कच्चे तेल का 75-80% हिस्सा इम्पोर्ट करता है. इसलिए कच्चे तेल और इन्फ्लेशन की संभावनाएं भी सेंसेक्स (Sensex Index)

रूस और युक्रेन का युद्ध भी है वजह?
इस विषय पर बात करते हुए इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल कहते हैं कि क्योंकि भारत कच्चे तेल का इतना बड़ा हिस्सा इम्पोर्ट करता है इसलिए कच्चे तेल के महंगे होने से इन्फ्लेशन का ख़तरा भारत के लिए और ज्यादा बढ़ जाता है और इसीलिए भारतीय इकॉनमी के लिए डॉलर की मजबूती भी नकारात्मक साबित होती है. इसके साथ ही आकाश जिंदल ने यह भी कहा है कि रूस और यूक्रेन युद्ध (Russia-Ukraine War) भी भारतीय बाजारों के लिए काफी निर्णायक साबित होगा और इस युद्ध पर हमें करीबी रूप से ध्यान रखना चाहिए. 

जारी रहेगी गिरावट?
जैसा कि हमने ऊपर बताया कि सेंसेक्स (Sensex Index) में 20 सितंबर को एक गिरावट का दौर देखने को मिला था जिसकी वजह से भारतीय बाजारों के लगभग 4 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए थे. ऐसे में यह सवाल उठना भी लाजमी है कि क्या आने वाले समय में भी सेंसेक्स में यह गिरावट जारी रहेगी? इस विषय पर बात करते हुए इकोनॉमिस्ट आकाश जिंदल कहते हैं कि डॉलर की मजबूती, इन्फ्लेशन की संभावना और रूस-यूक्रेन का युद्ध (Russia-Ukraine War) किस तरफ रुख करते हैं? सेंसेक्स में गिरावट या स्थिरता काफी हद तक इस बात पर ही निर्भर करेगी और इसीलिए हमें इन सभी कारकों पर करीबी रूप से नजर बनाकर रखनी होगी.
 

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