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मिलेनियम मैनेजमेंट पर SEBI की नजर: क्या एक और ट्रेडिंग दिग्गज होगा धाराशायी?

SEBI की सख्ती भारत के डेरिवेटिव बाजार में भरोसा बहाल करेगी, या यह वॉल स्ट्रीट के क्वांट दिग्गजों के खिलाफ एक बड़े संघर्ष की शुरुआत है. इसका जवाब सिर्फ समय और SEBI का अगला आदेश ही देगा.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago

पालक शाह

भारतीय शेयर बाजार, जो दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव्स का मैदान है, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की जबरदस्त कार्रवाई से हिल गया है. अमेरिका स्थित जेन स्ट्रीट ग्रुप पर प्रतिबंध लगाने और भारत के डेरिवेटिव बाजार में हेराफेरी के लिए 4,843 करोड़ रुपये की कथित अवैध कमाई जब्त करने के बाद, SEBI की नजर अब वॉल स्ट्रीट के एक और दिग्गज मिलेनियम मैनेजमेंट पर टिक गई है. नियामक से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मिलेनियम a hedge fund behemoth भारत के तेजी से बढ़ते ऑप्शन्स बाजार का फायदा उठाने वाली हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडिंग (HFT) कंपनियों की जांच में अगला बड़ा नाम हो सकता है. अन्य HFT दिग्गज जैसे ग्रेविटॉन, जंप ट्रेडिंग, अल्फाग्रेप, टॉवर कैपिटल और सिटाडेल सिक्योरिटीज भी जांच के घेरे में हैं, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि SEBI दलाल स्ट्रीट की अंधेरी दुनिया को साफ करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है.

मिलेनियम का जटिल जाल: क्या यह नकल का मामला है?
यह मामला अमेरिका की एक कड़वी अदालत लड़ाई से जुड़ा है, जिसमें जेन स्ट्रीट ने मिलेनियम मैनेजमेंट पर एक “गुप्त” ट्रेडिंग रणनीति चुराने का आरोप लगाया था, जिसके जरिए 2023 में भारत के डेरिवेटिव बाजार से कथित तौर पर $1 बिलियन की कमाई की गई थी. अदालत के दस्तावेजों से पता चला कि जेन स्ट्रीट के दो पूर्व ट्रेडर्स, डगलस शैडवाल्ड और डैनियल स्पॉटिसवुड, मिलेनियम में शामिल हो गए थे और साथ में ट्रेडिंग की वह रणनीति भी ले गए थे, जिसे अब SEBI भ्रामक मानता है. इसका नतीजा? मार्च 2024 में जेन स्ट्रीट की भारत में कमाई 50% तक गिर गई, जबकि मिलेनियम का भारतीय कारोबार तेजी से बढ़ा.

SEBI द्वारा 3 जुलाई 2025 को जारी किए गए 105 पृष्ठों के अंतरिम आदेश में जेन स्ट्रीट के खिलाफ “इंट्रा-डे इंडेक्स मैनिपुलेशन” और “एक्सटेंडेड मार्किंग द क्लोज” जैसी जटिल रणनीतियों का खुलासा किया गया, खासकर इंडेक्स ऑप्शन्स में. इन रणनीतियों के जरिए कथित रूप से एक्सपायरी के दिनों में इंडेक्स की कीमतों को विकृत किया गया, जिससे जेन स्ट्रीट ने जनवरी 2023 से मार्च 2025 के बीच ₹36,502 करोड़ का मुनाफा कमाया, जिसमें अकेले ऑप्शन्स ट्रेडिंग से 43,289 करोड़ रुपये की कमाई हुई.

SEBI की जांच से यह भी सामने आया कि जेन स्ट्रीट की संस्थाएं जैसे JSI इन्वेस्टमेंट्स और जेन स्ट्रीट सिंगापुर ने समन्वित ट्रेड्स के जरिए भारत के ऑप्शन्स बाजार में हावी रिटेल निवेशकों को गुमराह किया.

अब, मुंबई की वित्तीय गलियों में यह चर्चा है कि मिलेनियम ने भी इसी तरह की रणनीतियों को अपनाया हो सकता है. सूत्रों का कहना है कि जेन स्ट्रीट की मिलेनियम के खिलाफ दायर मुकदमे से प्रेरित होकर शुरू हुई SEBI की जांच ने मिलेनियम के ट्रेडिंग पैटर्न में चौंकाने वाली समानताएं उजागर की हैं. नियामक से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, SEBI मिलेनियम के इंडिया डेस्क से ऑप्शन्स पोजीशन सहित ट्रेड डेटा की जांच कर रहा है.

भले ही मिलेनियम किसी भी गड़बड़ी से इनकार करे, लेकिन सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे द्वारा स्पष्ट किए गए ‘जीरो टॉलरेंस’ रुख से संकेत मिलता है कि संकट गहराता जा रहा है.

HFT दिग्गजों की गहराई से जांच
मिलेनियम अकेला नहीं है. भारत का डेरिवेटिव्स बाजार, जो वैश्विक इक्विटी डेरिवेटिव ट्रेडिंग वॉल्यूम का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा है, Graviton, Jump Trading, Alphagrep, Tower Capital और Citadel Securities जैसी HFT कंपनियों के लिए एक चुंबक बन गया है. ये गुप्त एल्गोरिदम-चालित शिकारी उस बाजार में पनपते हैं जो खुदरा निवेशकों की भीड़ पर निर्भर है, जहां SEBI के अपने अध्ययनों के अनुसार 35 प्रतिशत ट्रेड शौकिया निवेशकों द्वारा किए जाते हैं और 93 प्रतिशत खुदरा ऑप्शंस ट्रेडर्स को नुकसान होता है.

मुंबई के एक ब्रोकरेज ने मई 2023 में सबसे पहले चेतावनी दी थी, जब उसने जेन स्ट्रीट के असामान्य ट्रेड्स की ओर इशारा किया, जो प्रमुख शेयरों में प्रतिदिन के वॉल्यूम का 12-20 प्रतिशत नियंत्रित कर रहे थे और सूचकांकों में हेरफेर के लिए जानबूझकर 1-2 करोड़ रुपये का नुकसान उठा रहे थे.

SEBI की जांच तब से विस्तारित हो गई है और अब इन अन्य HFT खिलाड़ियों पर भी निगाह रखी जा रही है. सूत्रों का कहना है कि नियामक यह जांच कर रहा है कि क्या ये कंपनियां एक वास्तविक कार्टेल की तरह काम कर रही हैं, जो उन्नत एल्गोरिदम के जरिए खुदरा निवेशकों की अनुभवहीनता का फायदा उठाती हैं. खुदरा निवेशकों को होने वाले नुकसान सिर्फ दुर्भाग्य नहीं हैं, वे एक प्रणालीगत समस्या हैं, जो समन्वित हेरफेर से उत्पन्न होती है. उदाहरण के लिए, 17 जनवरी 2024 को, Bank Nifty ऑप्शंस में 16 लाख से अधिक यूनिक संस्थाओं ने ट्रेड किया, जबकि शीर्ष घटक शेयरों के कैश मार्केट में केवल 4,675 ने, जो दर्शाता है कि डेरिवेटिव्स सेगमेंट किस हद तक खुदरा-प्रधान है.

Citadel Securities, IMC Trading, Optiver और अन्य भी SEBI की निगरानी में हैं, जहां नियामक निगरानी और एल्गोरिदम ऑडिट को तेज कर रहा है. Reuters की एक रिपोर्ट में बताया गया कि ये कंपनियां भारत में आक्रामक रूप से विस्तार कर रही हैं, प्रतिभा की भर्ती कर रही हैं और तकनीक को उन्नत कर रही हैं ताकि 2018 के बाद से डेरिवेटिव्स टर्नओवर में आए 48 गुना उछाल का लाभ उठाया जा सके. लेकिन SEBI के नए निर्देश के साथ, जो 1 जुलाई 2025 से प्रभावी है और डेरिवेटिव पोजिशनों पर कड़ी निगरानी अनिवार्य करता है, इन कंपनियों को अब बढ़ते अनुपालन जोखिम का सामना करना पड़ रहा है.

एक कार्टेल या चालाक खिलाड़ी?
दलाल स्ट्रीट में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ये HFT कंपनियां एक शिकार करने वाला कार्टेल हैं जो खुदरा निवेशकों का खून चूस रही हैं, या बस चालाक ऑपरेटर हैं जो एक ढीले-ढाले विनियमित बाजार का फायदा उठा रही हैं. जैसे-जैसे SEBI अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, इसका असर पहले से ही बाजार में देखा जा रहा है. 4 जुलाई 2025 को, Nuvama Wealth Management जैसे कैपिटल मार्केट से जुड़े स्टॉक्स, जो Jane Street के स्थानीय साझेदार हैं, 11.26 प्रतिशत गिर गए, जबकि BSE, Angel One और CDSL ने मिलाकर 12,000 करोड़ रुपये के बाजार मूल्य का नुकसान झेला.

इस कार्रवाई ने भारत की प्रॉपर्टाय ट्रेडिंग कंपनियों पर निर्भरता को उजागर कर दिया है, जो बाजार वॉल्यूम का एक बड़ा हिस्सा पैदा करती हैं. फिर भी, जैसे ही एक खिलाड़ी बाहर होता है, Citadel और Jump Trading जैसे अन्य कंपनियां उस खाली स्थान को भरने के लिए तैयार दिखती हैं, जिससे यह चिंता बढ़ती है कि क्या SEBI नियामक खामियों को समय पर भर पाएगा.

फिलहाल, Millennium Management अपने भाग्य का इंतजार कर रहा है क्योंकि SEBI ट्रेड डेटा के विशाल ढेर को छान रहा है. अगर सेबी को कोई दोष मिला तो इस कंपनी को प्रतिबंध, भारी जुर्माने और Jane Street की तरह परिसंपत्ति फ्रीज का सामना करना पड़ सकता है. ऑप्शंस में जहां 93 प्रतिशत खुदरा निवेशकों को नुकसान होता है, वहां जले हुए निवेशक अब उम्मीद लगाए बैठे हैं.

क्या SEBI की सख्ती भारत के डेरिवेटिव बाजार में भरोसा बहाल करेगी, या यह वॉल स्ट्रीट के क्वांट दिग्गजों के खिलाफ एक बड़े युद्ध की शुरुआत भर है? इसका जवाब सिर्फ समय और SEBI का अगला आदेश ही देगा.
 


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