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बिना कोई कारण बताए कि SEBI ने तोड़ दिया इस कंपनी का ख्वाब, उठाया ये कदम

बाजार नियामक सेबी ने लोन देने वाली एक कंपनी को करारा झटका देते हुए उसके आईपीओ लाने पर्रोक लगा दी है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

शेयर बाजार में लिस्ट होने की कोशिश में लगी एक दिग्गज कंपनी को बड़ा झटका लगा है. कमर्शियल ऑटो और बिज़नेस लोन देने वाली एसके फाइनेंस (SK Finance) के प्रस्तावित 2200 करोड़ रुपए के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ को बाजार नियामक सेबी ने रोक दिया है. जयपुर स्थित कंपनी ने इस साल मई में सेबी के समक्ष आईपीओ के लिए अपने शुरुआती कागजात दाखिल किए थे. एसके फाइनेंस की आईपीओ के तहत 500 करोड़ रुपए के नए शेयर जारी करने की योजना थी. इसके अलावा प्रमोटर और मौजूदा शेयरधारक 1700 करोड़ रुपए तक की बिक्री पेशकश (OFS) करने वाले थे.

नहीं बताया कारण 
जानकारी के मुताबिक, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने कहा कि एसके फाइनेंस के आईपीओ के संबंध में ‘निष्कर्ष' जारी करने पर रोक लगाई गई है. हालांकि, सेबी ने ऐसा करने की वजह नहीं बताई गई है. SEBI की भाषा में ‘निष्कर्ष’ जारी होने का मतलब आईपीओ के लिए हरी झंडी मिलने से होता है. चूंकि सेबी ने निष्कर्ष जारी करने पर रोक की बात कही है, इसका मतलब है कि उसने SK फाइनेंस को आईपीओ लाने पर रोक लगा दी है. 

ये थी कंपनी की योजना
एसके फाइनेंस के प्रस्ताव में बताया गया था कि बिक्री पेशकश यानी OFS के हिस्से के रूप में, नॉरवेस्ट वेंचर पार्टनर्स एक्स-मॉरीशस और टीपीजी ग्रोथ IV एसएफ पीटीई लिमिटेड 700-700 करोड़ रुपए मूल्य के शेयर बेचेंगे. इसी तरह, इवॉल्वेंस कॉइनवेस्ट I 75 करोड़ और इवॉल्वेंस इंडिया फंड III लिमिटेड 25 करोड़ रुपए के शेयर बेचेगा. जबकि प्रमोटर राजेंद्र कुमार सेतिया और राजेंद्र कुमार सेतिया को क्रमशः 180 करोड़ और 20 करोड़ रुपए के शेयर बेचने थे. एसके फाइनेंस आईपीओ से हासिल राशि का उपयोग पूंजी आधार बढ़ाने, कंपनी की भविष्य की व्यावसायिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सामान्य कॉर्पोरेट उद्देश्यों पर करने वाली थी.

आखिर क्या होता है IPO?
जब कोई कंपनी इक्विटी मार्केट से यानी शेयर बाजार से पैसे जुटाना चाहती है तो उसके पास बहुत से तरीके होते हैं. उसी में से एक तरीका होता है IPO. दूसरे शब्दों में कहें तो जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर पब्लिक में बेचने के लिए ऑफर करती है, तो उसे Initial Public Offering या IPO कहते हैं. ये शेयर BSE और NSE जैसे स्टॉक एक्सचेंज के जरिए निवेशकों की खरीद के लिए रखे जाते हैं. जब ये शेयर निवेशकों द्वारा खरीद लिए जाते हैं तो वो कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्ट हो जाती है. सरल शब्दों में कहें तो कंपनी शेयरों के रूप में अपनी कुछ हिस्सेदार निवेशकों को बेच देती है और उससे पैसा जुटाती है.


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