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SBI रिसर्च: भारत के लिए गोल्ड नीति जरूरी, देगी आर्थिक और रणनीतिक मजबूती
SBI रिसर्च का मानना है कि भारत को अब यह तय करना होगा कि सोना “सामान” है या “मुद्रा”, रिपोर्ट का सुझाव है कि देश को एक राष्ट्रीय गोल्ड पॉलिसी लानी चाहिए, जो सोने की खनन, ट्रेडिंग, रीसाइक्लिंग और वित्तीय योजनाओं को एकीकृत करे.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत में सोने की मांग हमेशा से खास रही है, लेकिन अब यह सिर्फ गहनों या पारंपरिक निवेश का साधन नहीं रह गया है. दरअसल, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की हालिया रिपोर्ट में भी बताया गया है कि सोना अब देश की आर्थिक सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय ताकत का अहम हिस्सा बन गया है. रिपोर्ट के अनुसार, चीन की तरह भारत भी सोने को अपनी आर्थिक और रणनीतिक योजना का केंद्र बना सकता है, ताकि वित्तीय स्थिरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती लाई जा सके. ऐसे में भारत को भी अब एक मजबूत और दीर्घकालिक राष्ट्रीय गोल्ड पॉलिसी बनानी चाहिए, ताकि यह धातु देश की आर्थिक सुरक्षा और नीति का हिस्सा बन सके.
सोना: गहनों से आगे, अब रणनीति का हिस्सा
SBI रिसर्च रिपोर्ट कहती है कि सोना अब केवल परंपरा या सजावट का साधन नहीं रहा. यह देश की आर्थिक शक्ति, विदेशी मुद्रा भंडार और अंतरराष्ट्रीय स्थिति को मजबूत करने वाला प्रमुख घटक बन गया है. 1930 के दशक में दुनिया में गोल्ड स्टैंडर्ड लागू था, जब डॉलर की कीमत सोने से तय होती थी. 1974 में अमेरिका ने डॉलर को सोने से अलग कर दिया, जिसके बाद सोना निवेश का अहम साधन बन गया. भारत ने 2009 में IMF से 6.7 अरब डॉलर का सोना खरीदा था, और तब से रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है.
भारत की पिछली गोल्ड पहलें
1978 से अब तक कई समितियां बनाई गईं, डॉ. आई.जी. पटेल, डॉ. सी. रंगराजन और के.यू.बी. राव की कमेटियां, जिनका मकसद लोगों को सोने की बजाय अन्य निवेश साधनों की ओर प्रोत्साहित करना था. साल 2015 में सरकार ने तीन प्रमुख योजनाएं शुरू कीं – गोल्ड मॉनेटाइजेशन स्कीम (GMS), सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) और इंडियन गोल्ड कॉइन. हालांकि, SBI रिपोर्ट का कहना है कि ये पहलें पर्याप्त नहीं हैं. अब समय है कि देश एक व्यापक नीति लाए, जो सोने को वित्तीय तंत्र, व्यापार और सामाजिक सुरक्षा से जोड़े.
चीन का मॉडल: आर्थिक ताकत के केंद्र में सोना
SBI की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने सोने को अपनी आर्थिक और रणनीतिक ताकत का अभिन्न हिस्सा बना लिया है. वह अपने गोल्ड वॉल्ट, ट्रेडिंग सिस्टम और घरेलू भंडारण व्यवस्था को मजबूत कर रहा है, ताकि डॉलर की पकड़ कमजोर की जा सके. रिपोर्ट का सुझाव है कि भारत भी सोने को "आर्थिक कवच" बनाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी स्थिति और सुदृढ़ कर सकता है.
भारत की मांग, आयात और भंडार
2024 में भारत की कुल सोने की मांग 802.8 टन रही, जो दुनिया की कुल मांग का लगभग 26% है. चीन (815 टन) के बाद भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है. हालांकि, 2025 की तीसरी तिमाही में कीमतें बढ़ने के कारण मांग में 16% की गिरावट आई, जबकि गहनों की बिक्री 31% घट गई. देश की सोने की खनन क्षमता सीमित है, जिसके कारण भारत को लगभग 86% सोना आयात करना पड़ता है. FY26 (अप्रैल–सितंबर) में सोने का आयात $26.5 अरब रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 9% कम है.
रिपोर्ट बताती है कि ओडिशा, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश में नए सोने के भंडार मिले हैं, जो भविष्य में आयात निर्भरता घटा सकते हैं.
बढ़ता आरबीआई का गोल्ड रिजर्व
रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पास अब लगभग 880 टन सोना है, जो देश के विदेशी मुद्रा भंडार का 15.2% हिस्सा है. FY24 में यह केवल 9% था. अब RBI की रणनीति यह है कि अधिकतर सोना भारत में ही सुरक्षित रखा जाए, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों या संकट की स्थिति में जोखिम कम किया जा सके.
निवेशकों की वापसी: गोल्ड ETF में बढ़त
वित्त वर्ष 2026 (अप्रैल–सितंबर) के दौरान गोल्ड ETF में निवेश 2.6 गुना बढ़ा है. सितंबर 2025 तक इन फंड्स का कुल मूल्य ₹90,136 करोड़ तक पहुंच गया. इसके अलावा, सरकार पेंशन फंड में भी सोने को निवेश विकल्प के रूप में शामिल करने पर विचार कर रही है.
सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर सरकार को नुकसान
SBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि नवंबर 2015 से फरवरी 2024 तक सरकार ने 67 ट्रेंच में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड जारी किए. अक्टूबर 2025 तक इन बॉन्ड्स के तहत कुल 125 टन सोना बकाया है. बढ़ती कीमतों के चलते सरकार को लगभग ₹93,284 करोड़ का नुकसान हो सकता है. यानी, जहां निवेशकों को फायदा मिल रहा है, वहीं सरकार के लिए यह घाटे का सौदा बन गया है.
सोने की कीमतों और रुपये का रिश्ता
SBI रिसर्च के मुताबिक, सोने की कीमतों और रुपये के बीच 0.73 का मजबूत संबंध है. यानी जब सोना महंगा होता है, तो रुपया कमजोर पड़ता है. अगर 2025 के बाकी महीनों में सोने की कीमत लगभग $4000 प्रति औंस रहती है, तो भारत के चालू खाते के घाटे (CAD) पर 0.3% GDP तक का असर हो सकता है. फिर भी, FY26 में CAD 1% से 1.1% GDP के बीच रहने का अनुमान है, जिसे “आरामदेह स्तर” माना जा सकता है.
क्या सोना सच में महंगाई से बचाता है?
रिपोर्ट कहती है कि सोना हर स्थिति में महंगाई से सुरक्षा नहीं देता. हालांकि अल्पकाल में यह भारत और अमेरिका जैसे देशों में महंगाई से आंशिक सुरक्षा प्रदान करता है. पिछले कुछ वर्षों में सोने का रिटर्न सेंसेक्स से भी अधिक रहा है, जिससे निवेशकों का भरोसा और मजबूत हुआ है.
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