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नहीं रहे Subrata Roy: एक चाहत ने सबकुछ दिलाया, दूसरी में सबकुछ गंवा दिया

सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय का निधन हो गया है. वह पिछले काफी समय से बीमार चल रहे थे. मंगलवार रात उन्होंने मुंबई के अस्पताल में आखिरी सांस ली.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

सहारा ग्रुप (Sahara Group) के प्रमुख सुब्रत रॉय (Subrata Roy) दुनिया से रुखसत हो गए हैं. 75 साल की उम्र में उन्होंने मुंबई के कोकिला बेन अस्पताल में मंगलवार को आखिरी सांस ली. किसी जमाने में सहारा ग्रुप देश के सबसे ताकतवर कारोबारी घरानों में शामिल था. रियल एस्टेट, मीडिया से लेकर एविएशन सेक्टर तक में सहारा ग्रुप की मौजूदगी थी. सालों तक ग्रुप भारतीय क्रिकेट टीम का स्पॉन्सर रहा. सुब्रत रॉय ने इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में एक टीम भी खरीदी. इसके अलावा, फॉर्मूला वन टीम फोर्स इंडिया में भी उन्होंने निवेश किया था. सियासी गलियारों में सुब्रत रॉय की तूती बोलती थी. लेकिन फिर धीरे-धीरे सबकुछ बदल गया. सुब्रत रॉय अर्श से सीधे फर्श पर पहुंच गए. राजा जैसी जिंदगी जीने वाले रॉय को जेल की हवा भी खानी पड़ी.

स्कूटर पर बेचा था नमकीन
सुब्रत रॉय मूलरूप से बिहार के अररिया जिले के रहने वाले थे. बताया जाता है कि उन्होंने स्कूटर पर नमकीन बेचकर अपने करियर की शुरुआत की थी. रॉय महत्वकांक्षी थे और कुछ बड़ा करना चाहते थे. इसी चाहत ने उन्हें सहारा ग्रुप का मालिक बना दिया. सुब्रत रॉय को सपनों का सौदागर कहा जाता था, उन्हें सपने बेचने में उन्हें महारात हासिल थी. उन्हें समझ आ गया था कि नमकीन बेचकर कुछ खास हासिल नहीं होगा, इसलिए उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ मिलकर चिट फंड कंपनी शुरू की. उनकी स्कीम जल्द ही पूरे देश में फेमस हो गई. लाखों की संख्या में लोग उनसे से जुड़ते चले गए. लेकिन 1980 में जब सरकार ने इस स्कीम पर रोक लगा दी, तो रॉय ने दूसरे बिजनेस का रुख किया. 

शादी पर 500 करोड़ खर्च
सुब्रत रॉय ने हाउसिंग डेवलपमेंट सेक्टर में एंट्री ली और फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने अपने कारोबार को रियल एस्टेट, फाइनेंस, इंफ्रास्ट्रक्चर, मीडिया, एंटरटेनमेंट, हेल्थ केयर, हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी तक फैलाया. साथ ही उन्होंने एविएशन सेक्टर में भी कदम रखा. ये वो दौर था जब सहारा प्रमुख पर लक्ष्मी बहुत ज्यादा मेहरबान थीं. रॉय की लाइफस्टाइल बताती थी कि उन्हें झोली भरकर मिल रहा है. अमेरिका के न्यूयार्क में उन्होंने 4400 करोड़ के 2 आलीशान होटल खरीदे. लखनऊ के गोमतीनगर में तो उन्होंने 170 एकड़ जमीन पर अपना पूरा शहर बसा डाला. इसके अलावा भी उन्होंने कई शहरों में निवेश किया. सुब्रत रॉय ने अपने बेटों की शादी की 500 करोड़ से ज्यादा का खर्च किया था.  

ऐसे हुई पतन की शुरुआत
सहारा ग्रुप कई लोगों का 'सहारा' बन गया था. 11 लाख से अधिक कर्मचारी सहारा परिवार का हिस्सा थे. सहारा के कर्मचारी गुड मॉर्निंग आदि नहीं बल्कि 'सहारा प्रमाण' कहकर अभिवादन करते थे. 2009-10 में सहारा ग्रुप और सुब्रत रॉय के पतन की शुरुआत हुई. हालात ऐसे बन गए कि सहारा प्रमुख को जेल की हवाल खानी पड़ी. उनका साम्राज्य पलभर में बिखर गया. 2009 में रॉय ने अपनी दो कंपनियों 'सहारा इंडिया रियल इस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड' और 'सहारा हाउसिंग इवेस्टेमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड' का आईपीओ लाने का प्रस्ताव बाजार नियामक सेबी के सामने रखा. SEBI ने सहारा के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाई. उस पर निवेशकों का पैसा गलत तरीके से इस्तेमाल करने का आरोप लगा. नियमों के उल्लघंन मामले में सहारा पर 12000 करोड़ का जुर्माना लगाया गया और यहीं से समूह के बुरे दिन शुरू हो गए.

कोर्ट ने भेज दिया था जेल
24 नवंबर, 2010 को SEBI ने सहारा ग्रुप के किसी भी रूप में पब्लिक से पैसा जुटाने पर पाबंदी लगा दी. इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और कोर्ट ने सहारा ग्रुप को निवेशकों के पैसे 15 फीसदी सालाना ब्याज के साथ लौटाने का आदेश दिया, यह रकम 24,029 करोड़ रुपए थी. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि सहारा समूह की कंपनियों ने SEBI कानूनों का उल्लंघन किया. कंपनियों ने ऐसे लाखों भारतीयों से पैसे जुटाए गए जो बैंकिंग सुविधाओं का लाभ नहीं उठा सकते थे. जब सहारा समूह निवेशकों को भुगतान करने में विफल रहा, तो कोर्ट ने रॉय को जेल भेज दिया. कुछ ज्यादा कमाने की ये चाहत सुब्रत रॉय को बहुत भारी पड़ी. वह दो साल से अधिक समय जेल में रहे. छह मई 2017 को रॉय पेरोल पर बाहर आ गए थे. 


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