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SIP का बढ़ता क्रेज: FY26 में ₹3.40 लाख करोड़ का रिकॉर्ड निवेश, छोटे राज्यों ने मारी बाजी

AMFI की रिपोर्ट बताती है कि देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में म्यूचुअल फंड AUM का 65% से अधिक हिस्सा खुदरा निवेशकों के पास है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago

भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. अब निवेश सिर्फ मुंबई और दिल्ली जैसे बड़े वित्तीय केंद्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. AMFI की FY26 वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में SIP के जरिए रिकॉर्ड 3.40 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ. दिलचस्प बात यह है कि SIP अपनाने के मामले में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्य आगे रहे, जबकि महाराष्ट्र और दिल्ली इस मामले में पीछे रह गए.

छोटे राज्यों में तेजी से बढ़ा SIP का दायरा

AMFI की रिपोर्ट के मुताबिक, भले ही महाराष्ट्र और दिल्ली के पास म्यूचुअल फंड उद्योग के कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) का सबसे बड़ा हिस्सा है, लेकिन SIP अपनाने के मामले में छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने उल्लेखनीय बढ़त हासिल की है. इन क्षेत्रों में निवेशक एकमुश्त निवेश के बजाय नियमित और लंबी अवधि के निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं.

इन राज्यों में सबसे ज्यादा SIP निवेश

SIP के जरिए निवेश के मामले में लक्षद्वीप देश में सबसे आगे रहा. यहां कुल म्यूचुअल फंड AUM का 40% से अधिक हिस्सा SIP के जरिए आया. इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दादरा एवं नगर हवेली और पुडुचेरी में भी कुल AUM का 40% से ज्यादा हिस्सा SIP के माध्यम से जुटाया गया. यह आंकड़े बताते हैं कि इन राज्यों के निवेशक छोटी-छोटी रकम नियमित रूप से निवेश कर लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की रणनीति अपना रहे हैं.

छोटे शहरों में बढ़ रही निवेशकों की जागरूकता

ऑप्टिमा मनी के फाउंडर पंकज मठपाल के मुताबिक, छोटे शहरों में म्यूचुअल फंड को लेकर जागरूकता तेजी से बढ़ी है. घटती ब्याज दरों के बीच निवेशकों का रुझान पारंपरिक बचत योजनाओं से हटकर SIP की ओर बढ़ा है. वहीं, इन क्षेत्रों में म्यूचुअल फंड की पहुंच अभी भी सीमित है, इसलिए आगे भी तेज वृद्धि की संभावना बनी हुई है.

दिल्ली और महाराष्ट्र क्यों रह गए पीछे?

रिपोर्ट के अनुसार, सभी राज्यों में SIP की रफ्तार समान नहीं रही. दिल्ली, महाराष्ट्र, मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और दमन एवं दीव में कुल म्यूचुअल फंड AUM में SIP की हिस्सेदारी 20% से भी कम रही. इससे संकेत मिलता है कि इन क्षेत्रों में निवेशकों का बड़ा वर्ग अब भी लंपसम निवेश या अन्य निवेश विकल्पों को प्राथमिकता देता है. वहीं, महाराष्ट्र और दिल्ली में संस्थागत निवेशकों की मजबूत मौजूदगी भी इसकी एक प्रमुख वजह मानी जा रही है.

FY26 में SIP निवेश ने बनाया नया रिकॉर्ड

वित्त वर्ष 2025-26 में SIP के जरिए निवेश 19% बढ़कर 3.40 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 2.86 लाख करोड़ रुपये था. यानी एक साल में SIP निवेश में 54,227 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी दर्ज की गई.

मार्च 2026 तक SIP के तहत कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट बढ़कर 14.83 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, एक्टिव SIP खातों की संख्या बढ़कर 9.72 करोड़ पहुंच गई. यह दर्शाता है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों का नियमित निवेश पर भरोसा मजबूत बना हुआ है.

FY26 में SIP से जुड़े प्रमुख आंकड़े

1. SIP निवेश: 3.40 लाख करोड़ रुपये
2. SIP AUM: 14.83 लाख करोड़ रुपये
3. एक्टिव SIP खाते: 9.72 करोड़
4. SIP हिस्सेदारी के मामले में सबसे आगे: लक्षद्वीप (AUM का 40% से अधिक SIP के जरिए)

खुदरा निवेशक बने म्यूचुअल फंड उद्योग की सबसे बड़ी ताकत

AMFI की रिपोर्ट बताती है कि देश के अधिकांश राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में म्यूचुअल फंड AUM का 65% से अधिक हिस्सा खुदरा निवेशकों के पास है. इससे स्पष्ट है कि म्यूचुअल फंड अब केवल बड़े संस्थागत निवेशकों का माध्यम नहीं रह गया, बल्कि आम परिवारों की वित्तीय योजना का भी अहम हिस्सा बन चुका है.

लक्षद्वीप, त्रिपुरा, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश और बिहार में कुल म्यूचुअल फंड AUM का 95% से अधिक हिस्सा व्यक्तिगत निवेशकों के पास है. दूसरी ओर, महाराष्ट्र और दिल्ली में व्यक्तिगत निवेशकों की हिस्सेदारी क्रमशः 48.28% और 44.36% रही, जो इन बाजारों में संस्थागत निवेशकों की मजबूत मौजूदगी को दर्शाती है.

बदल रहा है भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का भूगोल

AMFI की रिपोर्ट से साफ है कि भारत में म्यूचुअल फंड निवेश का दायरा तेजी से छोटे शहरों, कस्बों और राज्यों तक फैल रहा है. SIP के प्रति बढ़ता भरोसा और खुदरा निवेशकों की मजबूत भागीदारी इस बदलाव की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरी है. आने वाले वर्षों में म्यूचुअल फंड उद्योग की वृद्धि सिर्फ मुंबई और दिल्ली जैसे वित्तीय केंद्रों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि देश के करोड़ों आम निवेशकों की नियमित बचत और अनुशासित निवेश इसके विकास को नई दिशा देंगे.
 


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