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35 अरब डॉलर के माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो पर संकट, कमजोर मानसून बढ़ा सकता है डिफॉल्ट

ग्रामीण आय पर दबाव से माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की रिकवरी को झटका लगने की आशंका

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago

कमजोर मानसून और बढ़ती महंगाई ने भारत के माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की चिंताएं फिर बढ़ा दी हैं. ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ने से करीब 35 अरब डॉलर (लगभग 3 लाख करोड़ रुपये) के माइक्रोफाइनेंस लोन पोर्टफोलियो पर डिफॉल्ट का जोखिम गहराने लगा है. रेटिंग एजेंसी S&P Global Ratings का कहना है कि यदि बारिश सामान्य से कम रहती है, तो कर्ज चुकाने की क्षमता कमजोर होगी और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की लोन ग्रोथ भी प्रभावित हो सकती है.

कमजोर मानसून से लोन ग्रोथ पर असर

रिपोर्ट्स के अनुसार, कमजोर मानसून की स्थिति में माइक्रोफाइनेंस कंपनियां अंडरराइटिंग मानकों को और सख्त कर सकती हैं. वहीं, ग्रामीण आय घटने से कर्जदारों की पुनर्भुगतान क्षमता भी कमजोर होगी. उन्होंने बताया कि लगभग 20 फीसदी माइक्रोफाइनेंस उधारकर्ताओं ने दो या उससे अधिक संस्थानों से कर्ज लिया हुआ है. ऐसे कर्जदारों में डिफॉल्ट की दर अपेक्षाकृत अधिक देखी जा रही है.

दो वर्षों से दबाव में रहा सेक्टर

पिछले दो वर्षों में तेज कर्ज वितरण के कारण कई उधारकर्ता अत्यधिक कर्ज के बोझ तले दब गए थे, जिससे डिफॉल्ट बढ़ा और माइक्रोफाइनेंस कंपनियों को जोखिम प्रबंधन के लिए कड़े कदम उठाने पड़े. हालांकि, उद्योग संगठनों के दिशानिर्देशों के बाद कंपनियों ने कर्ज वितरण में सावधानी बरतनी शुरू की, जिससे हाल के महीनों में स्थिति कुछ स्थिर होती दिखाई दी थी. लेकिन कमजोर मानसून ने इस सुधार की रफ्तार पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं.

इन कंपनियों का सबसे अधिक एक्सपोजर

माइक्रोफाइनेंस क्षेत्र में प्रमुख संस्थानों में बंधन बैंक, CreditAccess Grameen, Satin Creditcare Network और Muthoot Microfin शामिल हैं. मार्च 2026 के अंत तक बंधन बैंक की कुल लोन बुक का लगभग 23 फीसदी हिस्सा माइक्रोफाइनेंस और माइक्रो-लेंडिंग से जुड़ा था.

मानसून और महंगाई दोनों बने चुनौती

सेंट्रल बैंक की जून रिपोर्ट के मुताबिक, लगातार सात तिमाहियों की गिरावट के बाद जनवरी-मार्च तिमाही में माइक्रोफाइनेंस क्रेडिट में सुधार दर्ज किया गया था. इससे सेक्टर की रिकवरी की उम्मीद बढ़ी थी. हालांकि, 12 वर्षों के सबसे सूखे जून के बाद जुलाई में भी सामान्य से कम बारिश की आशंका जताई जा रही है. कमजोर मानसून से फसल उत्पादन और कृषि आय प्रभावित हो सकती है, जिससे ग्रामीण परिवारों की खर्च करने और कर्ज चुकाने की क्षमता कमजोर पड़ सकती है.

इसके अलावा, पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी तनाव के कारण ईंधन, उर्वरक और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का जोखिम भी बना हुआ है, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सबसे अधिक निर्भर माइक्रोफाइनेंस

गीता चुघ के अनुसार, माइक्रोफाइनेंस कंपनियों का करीब 80 फीसदी एक्सपोजर ग्रामीण क्षेत्रों में है. इसमें लगभग 35 फीसदी कर्ज सीधे कृषि क्षेत्र, 9 फीसदी कृषि-आधारित उद्यमों और 20 फीसदी पशुपालन से संबंधित गतिविधियों में दिया गया है.

सेंट्रल बैंक की रिपोर्ट के अनुसार, अन्य क्षेत्रों में क्रेडिट क्वालिटी में सुधार देखने को मिला है, लेकिन कृषि क्षेत्र में सुधार अपेक्षाकृत धीमा रहा है और इसी क्षेत्र में सबसे अधिक नॉन-परफॉर्मिंग लोन (NPL) दर्ज किए गए हैं.

आगे क्या है जोखिम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कमजोर मानसून और ऊंची महंगाई दोनों स्थितियां लंबे समय तक बनी रहती हैं, तो ग्रामीण आय पर दबाव और बढ़ेगा. इसका सीधा असर माइक्रोफाइनेंस कंपनियों की रिकवरी, लोन ग्रोथ और एसेट क्वालिटी पर पड़ सकता है. ऐसे में आने वाली तिमाहियों में इस सेक्टर पर निवेशकों और नियामकों की नजर बनी रहेगी.


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