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मोदी सरकार का एक फैसला और कई देशों में 'टमाटर' जैसा रंग दिखा रहा चावल
भारत में चावल की किल्लत न हो और उसकी कीमतें हाथ से न निकलें, इसके लिए सरकार ने कुछ कदम उठाए हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
देशवासियों की थाली से चावल (Rice) गायब न हो, इसके लिए मोदी सरकार (Modi Government) ने कुछ कड़े कदम उठाए हैं. मसलन, सभी गैर-बासमती चावलों के निर्यात पर रोक लगा दी है. इसके अलावा, पक्के चावल (Parboiled Rice) के निर्यात पर 20% की एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाई गई है. माना जा रहा है कि सरकार के इन प्रयासों से देश में चावल की कोई किल्लत नहीं होगी और उसकी कीमत में आने वाले उछाल को भी रोका जा सकेगा. हालांकि, इससे ग्लोबल मार्केट में चावल के भाव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. वहां चावल की कीमतों में आग लग गई है.
40% जरूरत पूरी करता है भारत
मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो वैश्विक बाजारों में चावल के भाव 12 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गए हैं. मोदी सरकार ने सभी गैर-बासमती सफेद चावलों के निर्यात पर रोक लगा दी है. भारत से निर्यात होने वाले करीब 80% चावल इसी कैटेगरी में आते हैं. इसके साथ ही 25 अगस्त से Parboiled Rice के एक्सपोर्ट पर 20 फीसदी की ड्यूटी लगाई गई है. बता दें कि दुनिया की जरूरत का 40% चावल अकेले भारत निर्यात करता है. इसमें 40 लाख टन शेयर बासमती राइस का है.
इन देशों में जाता है चावल
भारत से बासमती चावल मुख्य रूप से ईरान, इराक, सऊदी अरब, UAE और अमेरिका एक्सपोर्ट किया जाता है. 2022-2023 में भारत ने 45.6 लाख टन बासमती निर्यात किया, जिसकी कुल वैल्यू 4.8 अरब डॉलर थी. जबकि इस दौरान 177.9 लाख टन गैर बासमती चावल दूसरे देशों में भेजा गया. 2022-2023 में भारत में कुल 13.54 करोड़ टन चावल का उत्पादन हुआ था. इससे पहले यानी 2021-2022 में यह आंकड़ा 12.94 टन था. भारत की तरफ से एक्सपोर्ट पर लगाए गए बैन के चलते भारत के चावल पर निर्भर देशों में डिमांड और सप्लाई के बीच का अंतर लगातार बढ़ रह है और इस वजह से चावल की कीमत भी बढ़ रही है. वहां चावल के दाम ऐसे भाग रहे हैं, जैसे कुछ वक्त पहले तक भारत में टमाटर महंगा हो रहा था
इसलिए सरकार ने उठाया कदम
वहीं, वित्त मंत्रालय के नोटिफिकेशन में बताया गया है कि Parboiled Rice पर 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी 25 अगस्त से 16 अक्टूबर, 2023 तक प्रभावी रहेगी. इस निर्यात शुल्क से उन पक्के चावलों को राहत मिलेगी, जिन्हें LEO (Let Export Order) नहीं मिला है और पोर्ट्स पर पहुंच चुके हैं. साथ ही ऐसे चावल भी जिन्हें 25 अगस्त से पहले के लेटर ऑफ क्रेडिट मिले हुए हैं, वो भी नई व्यवस्था के दायरे से बाहर रहेंगे. गौरतलब है कि महंगाई के मोर्चे पर सरकार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा है. इसी को ध्यान में रखते हुए उसने चावल पर ये कदम उठाए हैं, तो उसकी कीमतें बेलगाम न हो जाएं.
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