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भारत-ईरान ऊर्जा व्यापार की वापसी, LPG का पहला बड़ा जहाज इस हफ्ते पहुंचेगा
भारत और ईरान के बीच LPG व्यापार की वापसी ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से एक अहम कदम है. भले ही शुरुआती सप्लाई सीमित हो, लेकिन यह भविष्य में बड़े स्तर पर सहयोग की संभावना का संकेत देती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 month ago
करीब छह साल बाद भारत और ईरान के बीच ऊर्जा व्यापार फिर से पटरी पर लौटता दिख रहा है. इस हफ्ते ईरान से LPG (लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस) की पहली बड़ी खेप भारत पहुंचने की उम्मीद है. यह कदम न सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर करेगा, बल्कि आयात दबाव कम करने में भी मददगार साबित हो सकता है.
2018-19 के बाद पहली बार LPG की बड़ी खेप
साल 2018-19 के बाद यह पहला मौका है जब ईरान से LPG की सप्लाई भारत आ रही है. उस समय संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण भारत को ईरान से तेल आयात लगभग पूरी तरह रोकना पड़ा था. अब हालिया भू-राजनीतिक बदलावों के बाद कुछ प्रतिबंधों में ढील दी गई है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार फिर शुरू होता दिख रहा है.
होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर आएगी सप्लाई
ईरान से आने वाली यह LPG सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते भारत पहुंचेगी. यह दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है. हालिया तनाव और संघर्ष के चलते यह रास्ता कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ था, जिससे सप्लाई बाधित हो गई थी.
सीमित मात्रा, लेकिन बड़ा संकेत
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस पहली खेप में करीब 43,000 टन ब्यूटेन और प्रोपेन गैस शामिल होगी. यह मात्रा भारत की केवल आधे दिन की जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त है, लेकिन इसका महत्व प्रतीकात्मक और रणनीतिक दोनों रूपों में है. आने वाले समय में कच्चे तेल और LPG की और खेप आने की उम्मीद जताई जा रही है.
भारत की LPG जरूरत और आयात पर निर्भरता
भारत अपनी कुल LPG जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, जबकि करीब दो-तिहाई खपत बाहरी सप्लाई से पूरी होती है. इसमें से लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा मध्य-पूर्व देशों से आता है. फरवरी 2026 में देश की कुल LPG खपत 2.82 मिलियन मीट्रिक टन रही.
हालांकि युद्ध के बाद घरेलू उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जिससे कुल जरूरत का लगभग 56 प्रतिशत हिस्सा पूरा हो रहा है, लेकिन आयात पर निर्भरता अब भी बनी हुई है.
कच्चे तेल के आयात में गिरावट
एनर्जी डेटा के अनुसार, 1 मार्च से 18 मार्च के बीच भारत का कच्चे तेल का आयात पिछले महीने की तुलना में करीब 23 प्रतिशत कम रहा. अगर होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो पूरे मार्च में आयात में लगभग 20 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है.
भारतीय रिफाइनरी कंपनियां नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के साथ बातचीत कर रही हैं, ताकि कच्चे तेल और LPG की सप्लाई को तेजी से बढ़ाया जा सके. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि आने वाले समय में सप्लाई कितनी बढ़ पाएगी.
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