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निर्यातकों को राहत, वाणिज्य मंत्रालय ने RoDTEP स्कीम की टैरिफ सूची में किया बड़ा बदलाव
सरकार के अनुसार कुल 194 टैरिफ लाइनों में संशोधन किया गया है. इसमें 142 नई 8-अंकीय टैरिफ लाइनों को जोड़ा गया है. 50 पुरानी लाइनों को हटाया गया है और 2 टैरिफ लाइनों के विवरण में बदलाव किया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 hours ago
केंद्र सरकार ने निर्यात क्षेत्र को और सुगम बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातित उत्पादों पर शुल्क और कर वापसी योजना (RoDTEP) स्कीम के तहत टैरिफ शेड्यूल में संशोधन किया है. यह बदलाव कस्टम टैरिफ ढांचे में वित्त अधिनियम 2026 के जरिए किए गए संशोधनों के अनुरूप किया गया है.
1 मई 2026 से लागू हुए नए नियम
वाणिज्य विभाग ने अधिसूचना संख्या 15/2026-27 जारी करते हुए बताया कि संशोधित प्रावधान 1 मई 2026 से प्रभावी हो गए हैं. इन बदलावों का उद्देश्य कस्टम्स ऑटोमेटेड सिस्टम में नई संरचना को शामिल करना और निर्यात लाभ दावों की प्रक्रिया को आसान बनाना है.
किन निर्यातकों पर पड़ेगा असर?
यह संशोधन Appendix 4R और Appendix 4RE पर लागू होगा. Appendix 4R घरेलू टैरिफ क्षेत्र (DTA) से होने वाले निर्यात को कवर करता है, जबकि Appendix 4RE एडवांस ऑथराइजेशन (AA), एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स (EOUs) और स्पेशल इकोनॉमिक जोन (SEZs) के तहत काम करने वाले निर्यातकों पर लागू होगा.
194 टैरिफ लाइनों में बदलाव
सरकार के अनुसार कुल 194 टैरिफ लाइनों में संशोधन किया गया है. इसमें 142 नई 8-अंकीय टैरिफ लाइनों को जोड़ा गया है. 50 पुरानी लाइनों को हटाया गया है और 2 टैरिफ लाइनों के विवरण में बदलाव किया गया है.
तकनीकी बदलाव से मिलेगा बड़ा फायदा
मंत्रालय ने कहा कि यह संशोधन मुख्य रूप से तकनीकी प्रकृति का है, जिसका मकसद RoDTEP टैरिफ लाइनों को कस्टम टैरिफ एक्ट 1975 की अद्यतन पहली अनुसूची के साथ तालमेल में लाना है. इससे वर्गीकरण से जुड़ी अस्पष्टताएं कम होंगी और कस्टम्स तथा RoDTEP प्रविष्टियों में एकरूपता आएगी.
निर्यात लाभ दावों की प्रक्रिया होगी आसान
सरकार का मानना है कि नए बदलावों से सिस्टम स्तर की त्रुटियां कम होंगी और निर्यातकों को मिलने वाली ड्यूटी, टैक्स और लेवी की वापसी में निरंतरता बनी रहेगी. साथ ही दावों की प्रोसेसिंग पहले से अधिक तेज और पारदर्शी होगी.
क्या है RoDTEP स्कीम?
RoDTEP भारत सरकार की प्रमुख निर्यात प्रोत्साहन योजना है, जिसके तहत निर्यातित उत्पादों पर लगे ऐसे करों और शुल्कों की वापसी की जाती है, जो अन्य किसी योजना के तहत रिफंड नहीं होते. इसका उद्देश्य भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाना है.
कारोबार सुगमता पर सरकार का फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सरकार की Ease of Doing Business नीति को मजबूत करेगा. समय पर नीति और अनुपालन ढांचे में सामंजस्य से निर्यातकों को राहत मिलेगी और भारत के निर्यात क्षेत्र को नई गति मिल सकती है.
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