होम / बिजनेस / SEBI का बड़ा कदम: AIF स्कीमों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी, 30 दिन में फंड लॉन्च का रास्ता साफ
SEBI का बड़ा कदम: AIF स्कीमों के लिए फास्ट-ट्रैक मंजूरी, 30 दिन में फंड लॉन्च का रास्ता साफ
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी AIF स्कीम का पहला क्लोज उसकी लॉन्च पात्रता की तारीख से 12 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए. इससे फंड जुटाने की प्रक्रिया में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित होगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 hours ago
पूंजी बाजार को और तेज व कुशल बनाने की दिशा में भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (SEBI) ने बड़ा बदलाव किया है. अब ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड (AIF) स्कीमों के लिए फास्ट-ट्रैक अप्रूवल सिस्टम लागू किया गया है, जिसके तहत आवेदन के 30 दिनों के भीतर फंड लॉन्च करना संभव होगा. इससे निवेश प्रक्रिया में तेजी आएगी और बाजार में पूंजी का प्रवाह बेहतर होगा.
फास्ट-ट्रैक सिस्टम से क्या बदला?
नए फ्रेमवर्क के तहत AIF (एलवीएफ यानी बड़े वैल्यू फंड्स को छोड़कर) अपने प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPM) के साथ आवेदन करने के 30 दिन बाद स्कीम लॉन्च कर सकेंगे. इस दौरान यदि नियामक की ओर से कोई रोक या विशेष निर्देश नहीं आता है, तो फंड लॉन्च और निवेशकों को दस्तावेज जारी किए जा सकते हैं.
पहली बार लॉन्च होने वाली स्कीमों के लिए नियम
पहली बार फंड लॉन्च करने वाले AIF के लिए भी प्रक्रिया को सरल किया गया है. ऐसे फंड या तो SEBI से रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद या आवेदन के 30 दिन पूरे होने के बाद, जो भी बाद में हो अपनी स्कीम शुरू कर सकते हैं. हालांकि, SEBI की ओर से आने वाली टिप्पणियों या सुझावों को स्कीम लॉन्च से पहले शामिल करना अनिवार्य होगा.
पुराने सिस्टम से कैसे अलग है नया फ्रेमवर्क?
पहले SEBI PPM दस्तावेजों की विस्तार से समीक्षा करता था और अपनी टिप्पणियों के बाद ही स्कीम को आगे बढ़ने की अनुमति मिलती थी. इस प्रक्रिया में कई बार संशोधन के कारण देरी होती थी. नया फास्ट-ट्रैक सिस्टम इस देरी को कम करने और प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध बनाने के लिए लाया गया है.
मर्चेंट बैंकर और मैनेजर की बढ़ी जिम्मेदारी
अब खुलासों (disclosures) की सटीकता और पूर्णता की जिम्मेदारी पूरी तरह मर्चेंट बैंकरों और AIF मैनेजरों पर होगी. यानी नियामकीय भरोसे के साथ उद्योग पर जवाबदेही भी बढ़ाई गई है.
12 महीने में पूरा करना होगा पहला क्लोज
SEBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी AIF स्कीम का पहला क्लोज उसकी लॉन्च पात्रता की तारीख से 12 महीने के भीतर पूरा होना चाहिए. इससे फंड जुटाने की प्रक्रिया में अनुशासन और समयबद्धता सुनिश्चित होगी.
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम भारत के वैकल्पिक निवेश बाजार को और गति देगा. तेज मंजूरी से फंड मैनेजर जल्दी निवेश शुरू कर पाएंगे, जिससे स्टार्टअप्स, प्राइवेट इक्विटी और अन्य सेक्टरों को समय पर पूंजी मिल सकेगी. कुल मिलाकर, यह पहल भारतीय पूंजी बाजार को अधिक प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल बनाने की दिशा में अहम मानी जा रही है.
टैग्स