होम / बिजनेस / जियो–फेसबुक डील सूचना छुपाने पर रिलायंस को बड़ा झटका, SC ने जुर्माना चुनौती देने की अर्जी खारिज की
जियो–फेसबुक डील सूचना छुपाने पर रिलायंस को बड़ा झटका, SC ने जुर्माना चुनौती देने की अर्जी खारिज की
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ है कि बाजार नियामक सेबी कॉर्पोरेट गवर्नेंस और पारदर्शिता को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है. यह मामला अन्य कंपनियों के लिए भी चेतावनी है कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की लापरवाही भारी पड़ सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 6 months ago
रिलायंस इंडस्ट्रीज को जियो–फेसबुक सौदे से जुड़ी जानकारी समय पर सार्वजनिक न करने के मामले में बड़ा कानूनी झटका लगा है. सुप्रीम कोर्ट ने सेबी द्वारा लगाए गए ₹30 लाख के जुर्माने पर रोक लगाने से इनकार करते हुए रिलायंस और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों की अपील को खारिज कर दिया. इससे पहले एसएटी भी यह जुर्माना बरकरार रख चुका था. आइए जानते हैं आखिर ये पूरा मामला क्या है?
सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस की याचिका ठुकराई
मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) और उसके दो अधिकारियों सावित्री पारेख और के. सेथुरमन की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण (SAT) के फैसले को चुनौती दी थी. SAT ने बाजार नियामक सेबी द्वारा लगाए गए 30 लाख रुपये के जुर्माने को सही ठहराया था. अदालत ने स्पष्ट कहा कि SAT के निर्णय में न तो कोई कानूनी त्रुटि है और न ही हस्तक्षेप की आवश्यकता. इस तरह सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सेबी के निष्कर्षों की भी पुष्टि करता है.
क्या था मामला?
सेबी ने आरोप लगाया था कि रिलायंस इंडस्ट्रीज ने जियो–फेसबुक निवेश सौदे से जुड़ी अप्रकाशित मूल्य-संवेदनशील जानकारी (UPSI) को समय पर शेयर बाजार के साथ साझा नहीं किया. जानकारी पहले मीडिया रिपोर्टों के जरिए सार्वजनिक हुई थी, जबकि नियमों के मुताबिक कंपनी को ऐसी जानकारी तुरंत एक्सचेंज को देनी चाहिए. जून 2022 में सेबी के निर्णायक अधिकारी ने जांच के बाद पाया कि यह ‘इनसाइडर ट्रेडिंग रेगुलेशंस’ (PIT) के सिद्धांतों का उल्लंघन है. इसके बाद RIL और दोनों अधिकारियों पर कुल ₹30 लाख का संयुक्त जुर्माना लगाया गया.
SAT ने भी जुर्माना माना था सही
2 मई 2025 को SAT ने सेबी के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा था कि रिलायंस द्वारा UPSI का समय पर खुलासा न करना नियमों का उल्लंघन है. इसी फैसले को रिलायंस ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसे अब खारिज कर दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि SAT के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है. कोर्ट ने माना कि सेबी का निष्कर्ष तार्किक और नियमन के अनुरूप है, इसलिए जुर्माना यथावत रहेगा.
इस फैसले के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए कानूनी रास्ते लगभग बंद हो गए हैं. सेबी द्वारा लगाया गया ₹30 लाख का जुर्माना लागू रहेगा और कंपनी को PIT विनियमों के पालन को और मजबूत करना होगा. यह निर्णय भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए भी संकेत है कि मूल्य-संवेदनशील जानकारी छुपाने पर सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
टैग्स