होम / बिजनेस / बैंकों में सीमित लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए RBI ने उठाया ये कदम
बैंकों में सीमित लिक्विडिटी बनाए रखने के लिए RBI ने उठाया ये कदम
RBI ने बैंकों को अधिक तरलता को कम करने के लिए 12 अगस्त से CRR को 10 प्रतिशत तक बनाए रखना होगा. 2000 के नोट को बदलने से बैंकों में इस वक्त ज्यादा लिक्विडिटी हो गई है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
आरबीआई ने जब से 2000 रुपये के नोट को बदलने की प्रक्रिया शुरू की है तब से सभी बैंकों में पर्याप्त लिक्विडिटी या कहें तरलता बनी हुई है. ऐसी स्थिति में इस अत्यधिक तरलता को कम करने के लिए आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया है कि उन्हें 10 प्रतिशत आईसीआरआर(इंक्रीमेंटल कैश रिजर्व रेशियो) को बनाए रखना होगा. 19 मई को, RBI ने 2,000 रुपये के नोट को वापस लेने की घोषणा की, जिससे नागरिकों को या तो नोट बदलने या अपने खातों में जमा करने की अनुमति मिल गई. केंद्रीय बैंक ने 1 अगस्त को कहा था कि 31 जुलाई तक 2,000 रुपये के 3.14 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 88 प्रतिशत नोट बैंकिंग प्रणाली में वापस आ गए थे.
आखिर लिक्विडिटी को क्यों किया जाता है कम?
दरअसल लिक्विडिटी को लेकर आरबीआई का मानना है कि न तो बैंकों में ज्यादा लिक्विडिटी होनी चाहिए और न ही बैंकों में कम लिक्विडिटी होनी चाहिए. RBI का कहना है कि बैंकों में एक तय मात्रा में ही तरलता का स्तर बनाए रखा जाना चाहिए. क्योंकि अगर तरलता अधिक हो जाती है कि तो इससे मूल्य स्थिरता और वित्तीय स्थिरता के लिए जोखिम पैदा हो जाता है. इसलिए जब कभी भी ये बैंकों में ज्यादा हो जाए तो उसे कम करने का प्रयास किया जाता है. आरबीआई का ये फैसला उसी कड़ी में उठाया गया है. आरबीआई का मानना है कि इसका असर महंगाई पर भी पड़ेगा. दास ने कहा, यह पूरी तरह से अस्थायी उपाय है.
क्या कहते हैं इकोनॉमिस्ट?
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, बैंक ऑफ बड़ौदा के अर्थशास्त्री, मदन सबनवीस ने कहा कि अस्थायी आधार पर वृद्धिशील सीआरआर की शुरुआत, बैंकों के संसाधनों को जब्त कर लेगी और बाजार की दरों में इजाफा भी कर सकती है. वहीं एमके ग्लोबल की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आईसीआरआर लागू करने से अस्थायी तरलता में कमी लाने में मदद मिलेगी. यही नहीं एनडीटीएल पर आईसीआरआर लागू किया जाता है तो उसके 1.15 ट्रिलियन रुपये कम हो जाएंगे. लेकिन अरोड़ा ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि आईसीआरआर में मौजूदा सीआरआर को शामिल करने पर स्पष्टता की आवश्यकता है.
उन्होंने कहा कि हम इसे लेकर आरबीआई के स्पष्टता का इंतजार कर रहे हैं. लेकिन हमारा मानना है कि इसे पहले जैसा ही होना चाहिए. इससे पहले, नवंबर 2016 में, केंद्रीय बैंक ने बैंकों की शुद्ध मांग और समय पर देनदारियों (एनडीटीएल) में 100 प्रतिशत की वृद्धि के आईसीआरआर की घोषणा की थी. इसका उद्देश्य 500 रुपये और 1,000 रुपये मूल्यवर्ग के बैंक नोटों की कानूनी मुद्रा स्थिति को वापस लेने के बाद सिस्टम में तरलता में बड़ी वृद्धि के एक हिस्से को कम करना था.
रेपो रेट पर एमपीसी
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज रेपो रेट को एक बार फिर सर्वसम्मति से 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित छोड़ने के लिए मतदान किया है. स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी भी 6.25 प्रतिशत पर बरकरार रखी गई है और मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी रेट भी 6.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है. आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष में लगातार तीसरी बार ब्याज दरें अपरिवर्तित रखीं.
टैग्स