नियमों के उल्लंघन के चलते प्राइवेट सेक्टर के दो दिग्गज बैंकों पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने तगड़ा जुर्माना लगाया है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) नियमों में कोताही बरतने वालों के खिलाफ बेहद सख्त है. RBI लगातार ऐसे बैंक और वित्तीय संस्थानों पर जुर्माना लगाता रहता है, जो नियमों के पालन को लेकर गंभीर नहीं हैं. अब रिजर्व बैंक के निशाने पर देश के दो बड़े प्राइवेट बैंक आए हैं. इन बैंकों पर इतना भारी जुर्माना लगाया गया है कि भविष्य में गलती से भी गलती करने की भूल नहीं करेंगे.
किस पर कितना जुर्माना?
निजी सेक्टर के दिग्गज एक्सिस बैंक और एचडीएफसी बैंक के खिलाफ RBI ने कड़ी कार्रवाई की है. इन बैंकों पर कुल 2.91 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, RBI का कहना है कि नियमों का पालन न करने के चलते दोनों बैंकों पर कार्रवाई हुई है. एक्सिस बैंक पर 1.91 करोड़ और HDFC बैंक पर 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगा है.
कर बैठे ये गलती
वैधानिक और नियामकीय अनुपालन में कुछ खामियों को चलते ये निजी बैंक RBI के निशाने पर आए हैं. RBI की तरफ से बताया गया है कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम के कुछ प्रावधानों के उल्लंघन, जमा पर ब्याज दर, KYC के अलावा कृषि कर्ज से जुड़े नियमों का पालन न करने के लिए एक्सिस बैंक पर 1.91 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया गया है.
प्रभावित नहीं होगा काम
वहीं, जमा पर ब्याज दर, बैंकों के वसूली एजेंट और बैंकों में ग्राहक सेवा पर RBI के निर्देशों का पालन न करने के लिए HDFC बैंक पर कार्रवाई हुई है. रिज़र्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि इस कार्रवाई से बैंकों की सामान्य गतिविधियां प्रभावित नहीं होंगी. गौरतलब है कि हाल के दिनों में आरबीआई ने कई बैंकों पर कार्रवाई की है. इसके अलावा, कुछ वित्तीय संस्थान भी उसके रडार पर आए हैं.
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी डिफेंस एक्सपो के दौरान इस साझेदारी पर मुहर लगी. समझौते का उद्देश्य दुनियाभर की सेनाओं के लिए अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए भारत फोर्ज की रक्षा इकाई कल्याणी स्ट्रैटेजिक सिस्टम्स लिमिटेड (KSSL) ने अमेरिकी रक्षा कंपनी AM General के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. दोनों कंपनियां मिलकर अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी गन सिस्टम विकसित करेंगी, जिसे दुनिया भर की सेनाओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा. इस समझौते को भारत के रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है.
पेरिस डिफेंस एक्सपो में हुआ समझौता
फ्रांस की राजधानी पेरिस में आयोजित यूरोसैटरी डिफेंस एक्सपो के दौरान इस साझेदारी पर मुहर लगी. समझौते का उद्देश्य दुनियाभर की सेनाओं के लिए अत्याधुनिक 155mm मोबाइल आर्टिलरी प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराना है.
AM General ने अमेरिकी सेना के मोबाइल टैक्टिकल कैनन (MTC) कार्यक्रम के लिए प्रस्ताव भी सौंपा है. इस परियोजना में भारत फोर्ज के MArG (Mounted Artillery Gun) प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हुए नया हथियार सिस्टम विकसित किया जाएगा. यदि अमेरिकी सेना से मंजूरी मिलती है, तो इसकी आपूर्ति 2027 से शुरू हो सकती है.
40 किलोमीटर से ज्यादा मारक क्षमता
इस साझेदारी के केंद्र में भारत फोर्ज का MArG प्लेटफॉर्म है, जिसमें 52-कैलिबर की 155mm तोप लगाई गई है. यह सिस्टम 40 किलोमीटर से अधिक दूरी तक उच्च-विस्फोटक गोले दागने में सक्षम है. तोप में अत्याधुनिक सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक, ऑटोमेटेड लोड-असिस्ट सिस्टम और आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम दिया गया है, जिससे हर मौसम और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी सटीक निशाना लगाया जा सकता है. यह प्लेटफॉर्म 20 से अधिक गोले और आवश्यक बारूद अपने साथ ले जाने की क्षमता रखता है, जिससे युद्ध के दौरान तेजी से कार्रवाई संभव हो सकेगी.
वैश्विक रक्षा बाजार पर नजर
भारत फोर्ज के वाइस चेयरमैन और जॉइंट मैनेजिंग डायरेक्टर अमित कल्याणी ने कहा कि यह साझेदारी कंपनी की उन्नत रक्षा तकनीकों पर बढ़ते वैश्विक भरोसे को दर्शाती है. उनके अनुसार, कंपनी ऐसे युद्ध-सिद्ध और आधुनिक हथियार प्रणालियों के विकास पर फोकस कर रही है जो भविष्य की सैन्य जरूरतों को पूरा कर सकें.
वहीं AM General के प्रेसिडेंट और सीईओ जॉन चैडबोर्न ने कहा कि उनकी कंपनी की पेटेंटेड सॉफ्ट रिकॉइल तकनीक और KSSL के मोबाइल प्लेटफॉर्म का संयोजन सेनाओं को अधिक प्रभावी और लचीली युद्ध क्षमता प्रदान करेगा.
दोनों कंपनियों की नजर केवल अमेरिकी बाजार तक सीमित नहीं है. वे वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ रही मोबाइल आर्टिलरी सिस्टम की मांग को भी भुनाना चाहती हैं.
भारत की रक्षा निर्माण क्षमता को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना अमेरिकी सेना के लिए चयनित होती है, तो यह भारतीय रक्षा उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित होगी. इससे न केवल भारत की तकनीकी क्षमता को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी, बल्कि रक्षा निर्यात बढ़ाने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका मजबूत करने में भी मदद मिलेगी.
निवेशकों की नजर भारत फोर्ज पर
इस बड़े रक्षा समझौते के बाद निवेशकों की नजर भारत फोर्ज के शेयर पर भी बनी हुई है. 18 जून को एनएसई पर कंपनी का शेयर 0.85 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 2,017.20 रुपये पर बंद हुआ था. हालांकि लंबी अवधि में स्टॉक का प्रदर्शन मजबूत रहा है.
पिछले एक वर्ष में भारत फोर्ज के शेयर में 43 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज की गई है, जबकि कुल रिटर्न लगभग 55 प्रतिशत रहा है. कंपनी का बाजार पूंजीकरण करीब 96,670 करोड़ रुपये है.
आगे क्या रहेगा फोकस
बाजार की नजर अब अमेरिकी सेना के मोबाइल टैक्टिकल कैनन कार्यक्रम पर रहेगी. यदि इस परियोजना को मंजूरी मिलती है, तो भारत फोर्ज और KSSL के लिए यह न केवल बड़ा कारोबारी अवसर होगा, बल्कि भारतीय रक्षा उद्योग को वैश्विक स्तर पर नई पहचान भी दिला सकता है.
NSE के आईपीओ से शुरुआती निवेशकों की खुलेगी किस्मत, SBI, बैंक ऑफ बड़ौदा और बीमा कंपनियों को मिल सकता है हजारों करोड़ रुपये का लाभ
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का बहुप्रतीक्षित आईपीओ कई सरकारी वित्तीय संस्थानों के लिए बड़ी कमाई का अवसर लेकर आ रहा है. एनएसई के ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) से पता चलता है कि शुरुआती दौर में निवेश करने वाले संस्थानों को इस आईपीओ से हजारों करोड़ रुपये का लाभ हो सकता है. अगरआईपीओ का मूल्य 2,000 रुपये प्रति शेयर तय होता है, तो देश के सबसे बड़े बैंक SBI को अकेले लगभग 4,950 करोड़ रुपये की राशि प्राप्त हो सकती है. यह भारतीय वित्तीय क्षेत्र के सबसे सफल दीर्घकालिक निवेशों में से एक माना जा रहा है.
SBI को मिल सकता है सबसे बड़ा फायदा
SBI ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए 2.475 करोड़ शेयर बेचने की योजना बना रहा है. 2,000 रुपये प्रति शेयर के अनुमानित मूल्य पर इससे बैंक को करीब 4,950 करोड़ रुपये प्राप्त हो सकते हैं. दिलचस्प बात यह है कि इन शेयरों की औसत खरीद लागत महज 0.80 रुपये प्रति शेयर रही है. यानी बैंक ने कुल मिलाकर करीब 1.98 करोड़ रुपये का निवेश किया था और अब उसे लगभग 4,948 करोड़ रुपये का अनुमानित लाभ मिल सकता है.
बैंक ऑफ बड़ौदा और अन्य संस्थानों को भी भारी मुनाफा
सार्वजनिक क्षेत्र के अन्य संस्थानों को भी एनएसई आईपीओ से उल्लेखनीय लाभ होने की संभावना है. बैंक ऑफ बड़ौदा ने एनएसई में अपनी हिस्सेदारी औसतन 0.54 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदी थी. अब वह लगभग 2,197 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेच सकता है, जबकि उसकी मूल निवेश लागत करीब 59 लाख रुपये रही थी.
इसी तरह, स्टॉक होल्डिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने 0.46 रुपये प्रति शेयर की औसत लागत पर निवेश किया था. कंपनी की हिस्सेदारी की मौजूदा अनुमानित कीमत करीब 2,178 करोड़ रुपये है, जबकि उसका मूल निवेश लगभग 50 लाख रुपये था.
बीमा कंपनियों की भी खुलेगी किस्मत
एनएसई के शुरुआती निवेशकों में शामिल सरकारी बीमा कंपनियों को भी इस आईपीओ से बड़ा फायदा मिलने वाला है. न्यू इंडिया एश्योरेंस और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी ने अपने शेयर औसतन 0.32 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे. अनुमानित मूल्यांकन के आधार पर न्यू इंडिया एश्योरेंस को करीब 2,100 करोड़ रुपये और नेशनल इंश्योरेंस कंपनी को लगभग 1,200 करोड़ रुपये मिल सकते हैं.
यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी, जिसने 0.50 रुपये प्रति शेयर के भाव पर निवेश किया था, उसे भी करीब 1,200 करोड़ रुपये की प्राप्ति होने की संभावना है.
GIC Re को भी होगा बड़ा लाभ
जनरल इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (GIC Re) ने अपेक्षाकृत ऊंचे मूल्य पर निवेश किया था. उसकी औसत खरीद लागत 5.26 रुपये प्रति शेयर रही है. इसके बावजूद कंपनी 2,131 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के शेयर बेच सकती है, जबकि उसका मूल निवेश करीब 5.6 करोड़ रुपये था.
विदेशी निवेशकों को भी मिलेगा मल्टीबैगर रिटर्न
घरेलू संस्थानों की तुलना में विदेशी निवेशकों ने एनएसई में कहीं अधिक कीमत पर निवेश किया था, फिर भी उन्हें आईपीओ से शानदार रिटर्न मिलने की संभावना है. MS Strategic (Mauritius) ने अपनी हिस्सेदारी 66.54 रुपये प्रति शेयर की औसत लागत पर खरीदी थी, जबकि Aranda Investments (Mauritius) की खरीद लागत 62.38 रुपये प्रति शेयर रही थी.
खुलासे के अनुसार, Canada Pension Plan Investment Board की खरीद लागत सबसे अधिक 324.13 रुपये प्रति शेयर रही है. इसके बावजूद 2,000 रुपये प्रति शेयर के संभावित आईपीओ मूल्य पर उसे भी कई गुना रिटर्न मिलने की उम्मीद है.
तीन दशक की वैल्यू क्रिएशन की मिसाल
एनएसई की स्थापना 1992 में हुई थी. डीआरएचपी में सामने आए आंकड़े बताते हैं कि पिछले तीन दशकों में एक्सचेंज ने अपने निवेशकों के लिए जबरदस्त संपत्ति का सृजन किया है. SBI और अन्य शुरुआती संस्थानों के लिए यह आईपीओ न केवल निवेश भुनाने का अवसर है, बल्कि भारतीय पूंजी बाजार के विकास और एनएसई की सफलता की कहानी का भी प्रतीक माना जा रहा है.
गुरुवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 82.30 अंक बढ़कर 24,168 अंक पर बंद हुआ.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
घरेलू शेयर बाजार ने गुरुवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में बढ़त दर्ज की. अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते तथा कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई, जिसके दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 254.36 अंक चढ़कर 77,409.98 अंक और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 82.30 अंक बढ़कर 24,168 अंक पर बंद हुआ. अब शुक्रवार के कारोबार में बाजार की नजर वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की चाल और चुनिंदा शेयरों से जुड़ी खबरों पर रहेगी.
गुरुवार को अंतिम घंटे में लौटी थी तेजी
गुरुवार को बाजार की शुरुआत कमजोर रही थी और दिनभर उतार-चढ़ाव देखने को मिला. हालांकि अंतिम कारोबारी घंटे में बैंकिंग, एविएशन और पावर शेयरों में खरीदारी बढ़ने से बाजार मजबूत बढ़त के साथ बंद हुआ. सेंसेक्स के 30 में से 20 शेयर हरे निशान में बंद हुए थे. इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), ट्रेंट, एनटीपीसी, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), HDFC Bank, SBI और Power Grid के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई थी. वहीं Infosys, Tech Mahindra, TCS और HCL Tech जैसे आईटी शेयरों में दबाव देखने को मिला था.
कच्चे तेल की कीमतों पर रहेगी नजर
बाजार को सबसे बड़ा सहारा अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम समझौते से मिला है. समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंकाएं कम हुई हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई. गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 77 डॉलर प्रति बैरल के करीब और डब्ल्यूटीआई क्रूड 75 डॉलर प्रति बैरल से नीचे कारोबार करता दिखा.
तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे बड़े आयातक देश के लिए सकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे महंगाई और चालू खाता घाटे पर दबाव कम हो सकता है. यदि कच्चे तेल में गिरावट का रुख जारी रहता है तो इसका असर आज के कारोबार में भी सकारात्मक दिखाई दे सकता है.
आईटी शेयरों पर रह सकता है दबाव
वैश्विक आईटी कंपनी Accenture के ताजा नतीजे बाजार की उम्मीदों से कमजोर रहे हैं. ऐसे में शुक्रवार को Infosys, TCS, Wipro, HCL Tech और Tech Mahindra जैसे आईटी शेयरों पर निवेशकों की विशेष नजर रहेगी.
इन शेयरों में दिख सकती है हलचल
आज के कारोबार में HDFC Bank, Wipro, Bharat Forge, Manappuram Finance, Brigade Enterprises, Tata Capital, Quick Heal Technologies, Diamond Power Infrastructure, MSP Steel & Power और Rajratan Global Wire जैसे शेयर खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं.
HDFC Bank को RBI से चेयरमैन के कार्यकाल विस्तार की मंजूरी मिली है. Bharat Forge की सहयोगी कंपनी ने अमेरिकी रक्षा कंपनी के साथ रणनीतिक साझेदारी की है. Wipro ने यूरोप में बड़ा डेटा सेंटर प्रोजेक्ट पूरा किया है, जबकि Quick Heal Technologies ने नए CEO की नियुक्ति की है. Manappuram Finance फंड जुटाने के प्रस्ताव पर विचार करने वाली है. इसके अलावा Diamond Power Infrastructure को 2,000 करोड़ रुपये तक जुटाने की मंजूरी मिली है, MSP Steel & Power में प्रमोटर समूह ने हिस्सेदारी बढ़ाई है और Brigade Enterprises की चेन्नई परियोजना की पर्यावरण मंजूरी रद्द होने से उसके शेयर पर नजर रहेगी.
निवेशकों की रणनीति क्या हो?
विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तनाव में कमी और कच्चे तेल की नरम कीमतें फिलहाल बाजार को सहारा दे रही हैं. हालांकि पांच दिनों की लगातार तेजी के बाद निवेशक मुनाफावसूली भी कर सकते हैं. ऐसे में आज का कारोबार वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और खबरों वाले शेयरों की चाल से प्रभावित रह सकता है.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
मजबूत तिमाही नतीजों, बेहतर एसेट क्वालिटी और रणनीतिक साझेदारी के दम पर चढ़ा बैंक का शेयर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्राइवेट सेक्टर के प्रमुख बैंकों में शामिल यस बैंक के शेयरों में हाल के दिनों में शानदार तेजी देखने को मिली है. गुरुवार को बैंक का शेयर 52 हफ्तों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया. बीएसई पर शेयर करीब 3 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25.77 रुपये तक पहुंच गया. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में शेयर करीब 16 प्रतिशत उछल चुका है, जिससे निवेशकों को मजबूत रिटर्न मिला है.
मार्केट कैप में 8,600 करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा
शेयर में आई तेजी का असर बैंक के बाजार पूंजीकरण पर भी दिखाई दिया है. पिछले पांच सत्रों में यस बैंक का मार्केट कैप 8,662 करोड़ रुपये से अधिक बढ़कर 80,912 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. पिछले कारोबारी सत्र में शेयर 25.11 रुपये पर बंद हुआ था, जबकि गुरुवार को यह 25.27 रुपये पर खुला.
एक महीने में 17%, तीन महीने में 50% की छलांग
यस बैंक के शेयर ने हाल के महीनों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. पिछले एक सप्ताह में शेयर करीब 15 प्रतिशत, एक महीने में 17 प्रतिशत और वर्ष 2026 में अब तक 19 प्रतिशत चढ़ चुका है. वहीं, पिछले तीन वर्षों में इसमें 56 प्रतिशत और पांच वर्षों में 85 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.
मार्च 2026 में बैंक का शेयर 17.20 रुपये के 52-सप्ताह के निचले स्तर तक फिसल गया था. इसके बाद तीन महीने से भी कम समय में इसमें करीब 50 प्रतिशत की तेजी देखने को मिली है.
नॉर्दर्न आर्क कैपिटल के साथ साझेदारी बनी ट्रिगर
विश्लेषकों का मानना है कि शेयर में तेजी का दौर बैंक द्वारा नॉर्दर्न आर्क कैपिटल के साथ रणनीतिक साझेदारी की घोषणा के बाद शुरू हुआ. इस साझेदारी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया और बैंक के विकास की संभावनाओं को लेकर सकारात्मक माहौल बनाया.
मार्च तिमाही में दमदार प्रदर्शन
वित्त वर्ष 2025-26 की जनवरी-मार्च तिमाही में यस बैंक का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा. बैंक का शुद्ध लाभ (नेट प्रॉफिट) सालाना आधार पर 45 प्रतिशत बढ़कर 1,068 करोड़ रुपये पहुंच गया. इसी दौरान बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 16 प्रतिशत बढ़कर 2,638 करोड़ रुपये रही. बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) 20 बेसिस प्वाइंट बढ़कर 2.7 प्रतिशत हो गया, जो परिचालन प्रदर्शन में सुधार का संकेत देता है.
एसेट क्वालिटी में भी सुधार
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है. ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) अनुपात घटकर 1.3 प्रतिशत रह गया, जबकि नेट एनपीए (NNPA) अनुपात घटकर 0.2 प्रतिशत पर आ गया. इससे बैंक की बैलेंस शीट और जोखिम प्रबंधन क्षमता मजबूत हुई है.
आगे क्या कहते हैं तकनीकी संकेत?
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यस बैंक का तकनीकी ढांचा फिलहाल सकारात्मक बना हुआ है. हालांकि शेयर अब 26 रुपये के आसपास एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस जोन के करीब पहुंच गया है, जहां मुनाफावसूली का दबाव देखने को मिल सकता है.
विश्लेषकों के अनुसार 23-24 रुपये का दायरा अब शेयर के लिए प्रमुख सपोर्ट जोन है. जब तक स्टॉक इस स्तर के ऊपर बना रहता है, तब तक इसकी निकट अवधि की चाल सकारात्मक मानी जा सकती है.
निवेशकों की नजर अगले ट्रिगर्स पर
मजबूत वित्तीय प्रदर्शन, बेहतर एसेट क्वालिटी और रणनीतिक साझेदारियों के कारण यस बैंक एक बार फिर निवेशकों के रडार पर आ गया है. हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि हालिया तेजी के बाद निवेशकों को आगे के कारोबारी प्रदर्शन और बैंक की विकास रणनीति पर भी नजर बनाए रखनी चाहिए.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
युवा प्रतिभाओं की पहचान, प्रशिक्षण और ग्रासरूट लीग्स को मिलेगा समर्थन, 2034 तक भारत को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करने का लक्ष्य
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मीडिया एवं मनोरंजन कंपनी जी एंटरटेंमेंट एंटरप्राइसेज (ZEEL) ने भारतीय फुटबॉल के विकास को गति देने के लिए एक नई पहल की घोषणा की है. कंपनी ने कहा है कि Zee5 के फुटबॉल से जुड़े सब्सक्रिप्शन राजस्व का 15 प्रतिशत हिस्सा देशभर में प्रतिभा पहचान, प्रशिक्षण और ग्रासरूट फुटबॉल कार्यक्रमों पर खर्च किया जाएगा.
कंपनी का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर से पहचानना और उन्हें पेशेवर अवसर उपलब्ध कराना है. इसके जरिए शहर, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक एक मजबूत फुटबॉल इकोसिस्टम तैयार किया जाएगा.
युवा प्रतिभाओं को मिलेगा मंच
ZEEL के अनुसार यह कार्यक्रम देशभर में फुटबॉल प्रतिभाओं की खोज और उनके विकास पर केंद्रित होगा. इसके तहत संरचित प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रतियोगिताएं और लीग प्रारूप विकसित किए जाएंगे ताकि खिलाड़ियों को बेहतर अवसर मिल सकें. कंपनी अपने Zee5 सब्सक्राइबर्स को भी इस मिशन का हिस्सा बनाएगी, जिससे दर्शकों की भागीदारी सीधे युवा खिलाड़ियों के विकास में योगदान दे सके.
FIFA साझेदारी से मिलेगा लाभ
यह पहल ZEEL और FIFA के बीच 2034 तक के लिए हुए साझेदारी समझौते के बाद शुरू की गई है. कंपनी का मानना है कि वैश्विक फुटबॉल संस्थाओं के अनुभव और मॉडल का उपयोग कर भारत में प्रतिभा खोज, कोचिंग, खिलाड़ी विकास और लीग संरचना को मजबूत किया जा सकता है.
देशभर में शुरू होंगी ग्रासरूट लीग्स
कार्यक्रम के तहत विभिन्न शहरों, जिलों और राज्यों में ग्रासरूट फुटबॉल लीग्स और विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे. इनका उद्देश्य उभरते खिलाड़ियों को प्रतिस्पर्धी माहौल और पेशेवर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है. कंपनी फुटबॉल विशेषज्ञों, अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों तथा राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय फुटबॉल संघों के साथ मिलकर प्रतिभा पहचान और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगी.
राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की तैयारी
ZEEL का लक्ष्य ऐसा तंत्र विकसित करना है जो खिलाड़ियों को स्थानीय स्तर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक पहुंचने का अवसर प्रदान करे. कंपनी का मानना है कि मजबूत आधारभूत ढांचा तैयार कर भारत फुटबॉल में वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर सकता है.
2034 तक विश्व कप में भारत की मजबूत मौजूदगी का लक्ष्य
कंपनी ने कहा कि उसकी दीर्घकालिक योजना पुरुष और महिला दोनों वर्गों में विभिन्न आयु समूहों के FIFA विश्व कप में भारत की भागीदारी को मजबूत करने की है. इसके लिए जमीनी स्तर पर प्रतिभा विकास को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है.
'भारत में फुटबॉल प्रतिभा की कोई कमी नहीं'
ZEEL के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पुनीत गोयंका ने कहा कि भारत में फुटबॉल प्रतिभाओं का विशाल भंडार मौजूद है, जिसे सही अवसर और संसाधन मिलने पर वैश्विक मंच तक पहुंचाया जा सकता है. उन्होंने कहा कि यह पहल केवल खेल विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि लाखों युवा भारतीयों के सपनों को साकार करने का प्रयास है. कंपनी का लक्ष्य दर्शकों की रुचि को वास्तविक सामाजिक प्रभाव में बदलना और भविष्य की पीढ़ियों के नेतृत्व में भारत को वैश्विक फुटबॉल मानचित्र पर स्थापित करना है.
स्वामी विवेकानंद के संदेश से प्रेरित पहल
कंपनी ने बताया कि यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद के उस संदेश से प्रेरित है जिसमें युवाओं को शक्ति, अनुशासन, आत्मविश्वास और कर्मशीलता विकसित करने के लिए फुटबॉल जैसे खेल अपनाने की प्रेरणा दी गई थी.
ZEEL का कहना है कि यह पहल भारत में फुटबॉल की बुनियाद को मजबूत करने और दीर्घकालिक प्रतिभा विकास मॉडल तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी.
बारिश की भारी कमी से धान और सोयाबीन की बुआई प्रभावित, सूखे की आशंका ने बढ़ाई सरकार और किसानों की चिंता
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश में मानसून की शुरुआत उम्मीदों के विपरीत बेहद कमजोर रही है. भारतीय मौसम विभाग (IMD) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 18 जून तक देशभर में मानसूनी बारिश सामान्य से करीब 40 प्रतिशत कम दर्ज की गई है. मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि विकसित हो रहा अल-नीनो प्रभाव मानसून को कमजोर कर रहा है, जिससे कृषि उत्पादन, जल आपूर्ति और औद्योगिक गतिविधियों पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
शुरुआती मानसून ने बढ़ाई चिंता
जून से सितंबर तक चलने वाला मानसून भारत की वार्षिक वर्षा का प्रमुख स्रोत है. लेकिन इस बार मानसून की कमजोर शुरुआत ने किसानों और नीति-निर्माताओं दोनों की चिंता बढ़ा दी है. धान, सोयाबीन और मूंगफली जैसी खरीफ फसलों की बुआई प्रभावित हो रही है, जबकि निर्माण क्षेत्र समेत कई उद्योगों की गतिविधियों पर भी असर पड़ने लगा है.
सबसे शक्तिशाली अल-नीनो में से एक बनने के संकेत
अंतरराष्ट्रीय मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा अल-नीनो हाल के वर्षों के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक साबित हो सकता है. विभिन्न मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि जुलाई और अगस्त में भी उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हो सकती है.
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल ऐसा कोई मजबूत संकेत नहीं दिख रहा है जिससे देशभर में वर्षा की कमी की भरपाई हो सके. अगले कुछ दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश बढ़ सकती है, लेकिन इससे पूरे देश में मानसून की स्थिति सामान्य होने की उम्मीद नहीं है.
कृषि और खाद्य सुरक्षा पर मंडराया खतरा
भारत दुनिया के सबसे बड़े चावल, चीनी और कपास उत्पादक देशों में शामिल है. देश का कृषि क्षेत्र बड़े पैमाने पर मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है. यदि बारिश की कमी लंबे समय तक बनी रहती है तो फसल उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे खाद्य कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका है.
विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर उत्पादन की स्थिति में सरकार को कुछ कृषि उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं, ताकि घरेलू आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.
जल संकट के संकेत भी दिखने लगे
कमजोर मानसून का असर अब शहरी क्षेत्रों में भी दिखाई देने लगा है. मुंबई की जलापूर्ति एजेंसी ने निर्माण स्थलों को पानी की आपूर्ति रोक दी है. पिछले 12 वर्षों में यह पहली बार है जब ऐसा कदम उठाया गया है. इसके अलावा व्यवसायों, कारखानों और खेल क्लबों के लिए जल आपूर्ति में कटौती की गई है, जबकि स्विमिंग पूलों को पानी देना भी बंद कर दिया गया है.
अगले सप्ताह बारिश में सुधार की उम्मीद
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार अगले सप्ताह कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. दक्षिण-पश्चिमी नम हवाएं मानसून को आगे बढ़ाने में मदद करेंगी और इसके जुलाई की शुरुआत तक उत्तर भारत तक पहुंचने की संभावना है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून के समग्र प्रदर्शन को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है और व्यापक मौसम परिस्थितियां पूरी तरह अनुकूल नहीं दिख रही हैं.
सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक क्षेत्रों में सूखे की चेतावनी
कृषि मौसम विशेषज्ञों ने देश के प्रमुख सोयाबीन और मूंगफली उत्पादक इलाकों के लिए गंभीर सूखे की चेतावनी जारी की है. उनका मानना है कि यदि जुलाई तक पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो सोयाबीन की बुआई में देरी हो सकती है और फसल की वृद्धि अवधि भी कम हो सकती है.
खरीफ सीजन के लिए निर्णायक साबित होंगे अगले कुछ सप्ताह
वर्तमान में किसान साल के सबसे बड़े बुआई सीजन के बीच हैं. ऐसे में अगले कुछ सप्ताह खरीफ फसलों के भविष्य के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं. यदि जल्द बारिश में सुधार होता है तो स्थिति संभल सकती है, लेकिन मौसम विभाग और वैश्विक एजेंसियों के पूर्वानुमान एक दशक से अधिक समय में सबसे कमजोर मानसून की आशंका जता रहे हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत होता अल-नीनो भारतीय मानसून को कमजोर और असमान बना सकता है, जिससे कृषि उत्पादन और आर्थिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ने का जोखिम बढ़ गया है.
मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत आवासीय-व्यावसायिक संपत्तियों, निवेश और शेयरहोल्डिंग पर कार्रवाई, PMLA के तहत जारी हुआ अटैचमेंट ऑर्डर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत कारोबारी विकास गर्ग, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों की विभिन्न संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर लिया है. यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत 5 जून 2026 को जारी किए गए प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (PAO) के आधार पर की गई है.
आवासीय और व्यावसायिक संपत्तियां जांच के दायरे में
ईडी के अनुसार कुर्क की गई संपत्तियों में आवासीय और व्यावसायिक रियल एस्टेट, शेयरहोल्डिंग, वित्तीय निवेश और अन्य चल-अचल परिसंपत्तियां शामिल हैं. एजेंसी का दावा है कि ये संपत्तियां कथित तौर पर अपराध से अर्जित आय से जुड़ी हो सकती हैं.
Eraaya-Ebix सौदे से जुड़े निवेश भी अटैच
जांच एजेंसी ने Eraaya Lifespaces और अमेरिकी सॉफ्टवेयर एवं ई-कॉमर्स कंपनी Ebix के अधिग्रहण से जुड़े निवेशों और प्रतिभूतियों को भी अटैच किया है. आदेश में कहा गया है कि समूह से जुड़े विभिन्न निवेश और वित्तीय लेनदेन जांच के दायरे में हैं.
परिवार के सदस्यों और सहयोगियों के नाम भी शामिल
अटैचमेंट ऑर्डर में विकास गर्ग के कई रिश्तेदारों और सहयोगियों का भी उल्लेख किया गया है. ईडी का कहना है कि जांच के दौरान ऐसे कई परिसंपत्तियों की पहचान हुई है, जो परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर हैं. एजेंसी का आरोप है कि इन परिसंपत्तियों में निवेश के लिए संदिग्ध धन का इस्तेमाल किया गया हो सकता है.
फंड रूटिंग के नेटवर्क की जांच
ईडी के मुताबिक जांच में कंपनियों और निवेश संरचनाओं का एक ऐसा नेटवर्क सामने आया है, जिसके जरिए धन को विभिन्न माध्यमों से रियल एस्टेट, इक्विटी निवेश और अन्य वित्तीय साधनों में लगाया गया. एजेंसी इन लेनदेन की वैधता और धन के स्रोत की जांच कर रही है.
संपत्तियों के हस्तांतरण को रोकने के लिए कार्रवाई
ईडी ने कहा कि जांच के दौरान संपत्तियों को बेचे जाने, हस्तांतरित किए जाने या ठिकाने लगाए जाने की आशंका को देखते हुए यह अटैचमेंट जरूरी था. PMLA के प्रावधानों के तहत इस तरह के अस्थायी अटैचमेंट ऑर्डर को बाद में निर्णायक प्राधिकरण (Adjudicating Authority) की मंजूरी की आवश्यकता होती है.
कारोबारी समूह पर बढ़ी नियामकीय निगरानी
यह कार्रवाई विकास गर्ग से जुड़े कारोबारी समूह पर बढ़ती नियामकीय निगरानी का संकेत मानी जा रही है. विकास गर्ग का नाम सूचीबद्ध कंपनियों Eraaya Lifespaces, Vikas Lifecare और समूह की अन्य कंपनियों से जुड़ा रहा है. इससे पहले भी ईडी समूह से जुड़े परिसरों पर तलाशी अभियान चला चुकी है.
जांच जारी, दोष तय होना बाकी
ईडी ने स्पष्ट किया है कि यह कार्रवाई चल रही जांच का हिस्सा है और अभी किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया गया है. कुर्क की गई संपत्तियां PMLA के तहत आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक ईडी के नियंत्रण में रहेंगी.
एजेंसी ने जांच पूरी होने की कोई समय-सीमा सार्वजनिक नहीं की है. हालांकि अटैचमेंट ऑर्डर में कहा गया है कि जांचकर्ताओं को प्रथम दृष्टया ऐसे पर्याप्त साक्ष्य मिले हैं, जो चिन्हित परिसंपत्तियों और जांच के दायरे में मौजूद कथित धन के बीच संबंध की ओर इशारा करते हैं.
30 सितंबर तक बैंकों को अधिक ब्याज दरें देने की छूट, एनआरआई निवेशकों के लिए बढ़ेंगे कमाई के अवसर
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने और देश में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के उद्देश्य से बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय बैंक ने 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक) यानी FCNR(B) डिपॉजिट्स पर लागू ब्याज दर की ऊपरी सीमा को 30 सितंबर 2026 तक अस्थायी रूप से हटा दिया है. इसके साथ ही तीन वर्ष या उससे अधिक अवधि वाले नॉन-रेसिडेंट एक्सटर्नल (NRE) डिपॉजिट्स पर ब्याज दरों से जुड़ी पाबंदियों में भी राहत दी गई है. इस फैसले से भारतीय बैंकों को एनआरआई ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए अधिक प्रतिस्पर्धी ब्याज दरें देने का अवसर मिलेगा.
RBI ने जारी किया सर्कुलर
आरबीआई ने एक सर्कुलर जारी कर कहा कि 17 जून 2026 से 30 सितंबर 2026 तक की अवधि के लिए नए FCNR(B) डिपॉजिट्स पर ब्याज दर की सीमा हटाई जा रही है. यह छूट उन डिपॉजिट्स पर भी लागू होगी जिन्हें मैच्योरिटी के बाद रिन्यू किया गया है. यह व्यवस्था तीन वर्ष से अधिक और पांच वर्ष तक की अवधि वाले जमा खातों के लिए लागू रहेगी.
क्या होते हैं FCNR(B) डिपॉजिट?
FCNR(B) डिपॉजिट विशेष रूप से गैर-निवासी भारतीयों (NRI) के लिए उपलब्ध एक टर्म डिपॉजिट अकाउंट है. इसके जरिए एनआरआई अपनी विदेशी कमाई को डॉलर, यूरो, पाउंड जैसी विदेशी मुद्राओं में भारत के बैंकों में जमा कर सकते हैं. इस खाते की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मुद्रा विनिमय दरों के उतार-चढ़ाव का जोखिम नहीं होता.
NRE डिपॉजिट्स को भी मिली राहत
केंद्रीय बैंक ने तीन वर्ष और उससे अधिक अवधि वाले NRE डिपॉजिट्स पर ब्याज दर संबंधी प्रतिबंधों को भी अस्थायी रूप से हटाने का फैसला किया है. हालांकि आरबीआई ने स्पष्ट किया है कि NRE और NRO डिपॉजिट्स पर दी जाने वाली ब्याज दरें संबंधित बैंक की समान अवधि वाली घरेलू रुपया टर्म डिपॉजिट दरों से अधिक नहीं होनी चाहिए.
रुपये को सहारा देने की रणनीति
आरबीआई का यह कदम ऐसे समय आया है जब डॉलर के मुकाबले रुपये पर दबाव बना हुआ है. विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और डॉलर की आमद बढ़ाने के लिए केंद्रीय बैंक लगातार उपाय कर रहा है. ब्याज दरों में यह छूट विदेशी निवेशकों और एनआरआई जमाकर्ताओं को भारतीय बैंकों की ओर आकर्षित करने में मदद कर सकती है.
महीने की शुरुआत में भी उठाए थे कदम
इस महीने की शुरुआत में भी आरबीआई ने विदेशी पूंजी जुटाने के लिए कई घोषणाएं की थीं. इनमें अधिकृत डीलर (AD) बैंकों को 3-5 वर्ष की अवधि वाले नए FCNR(B) डिपॉजिट्स जुटाने पर पूरी हेजिंग लागत वहन करने की स्थिति में रियायती फॉरेक्स स्वैप सुविधा उपलब्ध कराने का फैसला शामिल था. यह सुविधा भी 30 सितंबर 2026 तक लागू रहेगी.
बैंकों को मिलेगा प्रतिस्पर्धी लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों की सीमा हटने से बैंक विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करने के लिए बेहतर रिटर्न की पेशकश कर सकेंगे. इससे न केवल बैंकिंग प्रणाली में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ेगा, बल्कि देश के विदेशी मुद्रा भंडार को भी मजबूती मिलेगी.
को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटारे की तैयारी, MSEI ने भी 857 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा किया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) से पहले वर्षों पुराने कानूनी विवादों को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. एक्सचेंज ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) के साथ चल रहे को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटारे के लिए 1,491.21 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही प्रतिद्वंद्वी मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MSEI) की ओर से 856.99 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा भी एनएसई के सामने चुनौती बना हुआ है. हालांकि, एनएसई ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित राशि का पूरा बोझ उस पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह पहले ही विभिन्न आदेशों के तहत बड़ी रकम सेबी के पास जमा करा चुका है.
वास्तविक वित्तीय बोझ कितना होगा?
पहली नजर में 1,491 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव काफी बड़ा दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक वित्तीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है. एनएसई पहले ही विभिन्न मामलों में सेबी के पास करीब 1,107 करोड़ रुपये जमा करा चुका है. ऐसे में यदि सेबी संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो एक्सचेंज को केवल शेष राशि का भुगतान करना होगा. फिलहाल को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.
क्या है डार्क फाइबर विवाद?
डार्क फाइबर मामला ट्रेडिंग में कथित अनुचित लाभ से जुड़ा है. आरोप था कि कुछ चुनिंदा ट्रेडिंग सदस्यों को एक अनधिकृत इंटरनेट सेवा प्रदाता के माध्यम से तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें अन्य निवेशकों की तुलना में बाजार संबंधी जानकारी पहले प्राप्त हो जाती थी.
इस मामले में सेबी ने 2019 में एनएसई को ब्याज सहित 62.58 करोड़ रुपये लौटाने और 2022 में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया था. हालांकि, बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने दोनों आदेशों को रद्द कर दिया. इसके बाद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. विवाद के निपटारे के लिए एनएसई ने मार्च 2026 में 267.65 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव पेश किया.
को-लोकेशन मामला क्यों है अहम?
को-लोकेशन विवाद को एनएसई के इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है. आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के सर्वर के करीब अपने सिस्टम स्थापित करने की विशेष सुविधा दी गई थी, जिससे उन्हें बाजार का डेटा अन्य प्रतिभागियों से पहले मिल जाता था.
इस मामले में सेबी ने 2019 में एनएसई पर 624.89 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था. हालांकि, 2023 में SAT ने इस आदेश को रद्द करते हुए एनएसई को केवल निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (IEPF) में 100 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया.
सेबी ने इस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. मामले को समाप्त करने के लिए एनएसई ने मार्च 2026 में 1,223.56 करोड़ रुपये के भुगतान का संशोधित प्रस्ताव दिया.
MSEI का 857 करोड़ रुपये का दावा
एनएसई की कानूनी चुनौतियां केवल सेबी तक सीमित नहीं हैं. एक्सचेंज ने अपने आईपीओ दस्तावेजों में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MSEI) के साथ करीब 15 वर्ष पुराने विवाद का भी उल्लेख किया है.
MSEI का आरोप है कि एनएसई ने करेंसी डेरिवेटिव्स बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग करते हुए फीस को अत्यधिक कम रखा, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और अन्य एक्सचेंजों को नुकसान पहुंचा.
वर्ष 2011 में प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने एनएसई पर 55.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे 2014 में COMPAT ने भी बरकरार रखा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस जुर्माने की वसूली पर रोक लगा रखी है.
इसके अलावा MSEI ने कथित कारोबारी नुकसान के लिए 856.99 करोड़ रुपये के मुआवजे और उस पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग की है.
IPO से पहले पारदर्शिता पर जोर
एनएसई द्वारा दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में इन सभी लंबित विवादों का विस्तृत उल्लेख किया गया है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ से पहले कानूनी मामलों का खुलासा और उनके निपटारे की पहल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
एनएसई का यह प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब बाजार लंबे समय से देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित आईपीओ का इंतजार कर रहा है.
प्रभु ने ED को बताया कि डायवर्ट किए गए फंड को उनके Zerodha खाते के माध्यम से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में निवेश किया गया था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑनलाइन गेमिंग यूनिकॉर्न Gameskraft से कथित 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन का मामला संभवतः किसी एक अधिकारी द्वारा की गई व्यक्तिगत गड़बड़ी नहीं था. यह बात पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) रमेश प्रभु से जुड़े एक बयान से सामने आती है, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश में उद्धृत किया गया है.
प्रभु, जिन पर पहले Gameskraft ने कंपनी के फंड को व्यक्तिगत फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में लगाने का आरोप लगाया था, ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बताया कि ये ट्रांसफर कंपनी के संस्थापकों के निर्देश पर किए गए थे और इन्हें आंतरिक रूप से ऐसे निवेश के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिन्हें बाद में व्यवसाय में वापस लाया जाना था.
ED द्वारा की गई गिरफ्तारियों की वैधता की जांच करने वाले 16 जून के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले में उद्धृत यह बयान, Gameskraft के प्रमोटरों के खिलाफ एजेंसी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का एक प्रमुख आधार बन गया है.
आदेश के अनुसार, प्रभु ने 18 नवंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत ED द्वारा भेजे गए समन का जवाब ईमेल के माध्यम से दिया था. उस संचार में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि फंड का डायवर्जन संस्थापकों विकास तनेजा, दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वीराज सिंह और दीपक कुमार झा के "निर्देशों के तहत" किया गया था.
'कंपनी का पैसा सुरक्षित रखने' की योजना
अदालत द्वारा उद्धृत बयान में प्रभु ने इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2019 से बताई है, जब RummyCircle संचालित करने वाली Games24x7 ने Gameskraft के कुछ संस्थापकों के खिलाफ सोर्स कोड और ग्राहक डेटाबेस की कथित चोरी को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी.
प्रभु का दावा है कि इस मुकदमेबाजी के कारण संस्थापकों को कंपनी में जमा हो रहे फंड को लेकर चिंता हुई. उनके बयान के अनुसार, उनसे कहा गया था कि धीरे-धीरे कंपनी से पैसा बाहर निकालकर उसे शेयर बाजार में निवेश किया जाए, ताकि बाद में उसे वापस लाया जा सके. अदालत में उद्धृत संचार के अनुसार प्रभु ने कथित रूप से कहा, "उन्होंने मुझसे कहा था कि जब हमें मुनाफा होगा, तो हम पैसा वापस कंपनी में ले आएंगे."
व्यक्तिगत खातों के जरिए F&O ट्रेडिंग
प्रभु ने ED को बताया कि डायवर्ट किए गए फंड को उनके Zerodha खाते के माध्यम से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग में निवेश किया गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी पत्नी की जानकारी के बिना उनके नाम पर एक और ट्रेडिंग खाता खोला था. बयान के अनुसार, Gameskraft से ट्रांसफर किया गया पूरा पैसा अंततः डेरिवेटिव ट्रेडिंग में डूब गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें इन लेन-देन से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं हुआ.
यह दावा Gameskraft की पहले की पुलिस शिकायत से बिल्कुल अलग है, जिसमें इस मामले को एक वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी द्वारा अकेले किए गए अनधिकृत फंड डायवर्जन के रूप में पेश किया गया था.
म्यूचुअल फंड एंट्री और कथित फर्जीवाड़ा
प्रभु के बयान का संभवतः सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन लेन-देन को कंपनी की पुस्तकों में किस प्रकार दर्ज किया गया. प्रभु ने दावा किया कि उनके खातों में ट्रांसफर की गई राशि को Gameskraft के वित्तीय विवरणों में म्यूचुअल फंड निवेश के रूप में दिखाया गया था. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि संस्थापकों ने उनसे ऑडिट के लिए फर्जी म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट तैयार करने को कहा था. आदेश में उद्धृत बयान के अनुसार, उन्होंने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान ऐसा करने से इनकार कर दिया.
यह आरोप Gameskraft की अपनी पुलिस शिकायत से मेल खाता है, जिसमें कहा गया था कि फंड डायवर्जन छिपाने के लिए फर्जी निवेश रिकॉर्ड और नकली म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट का इस्तेमाल किया गया.
'दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को अलर्ट मिलते थे'
पूर्व CFO ने इस संभावना को भी खारिज किया कि ये ट्रांसफर किसी की नजर से बच सकते थे. प्रभु ने ED को बताया कि जिस RBL बैंक खाते से फंड ट्रांसफर किया गया, उसके लिए दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की आवश्यकता थी, वह स्वयं और सह-संस्थापक पृथ्वीराज सिंह. उनका दावा है कि हर लेन-देन होने पर दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को ईमेल और SMS अलर्ट प्राप्त होते थे. यह दावा जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वे यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि फंड की आवाजाही की जानकारी किसे थी और कब थी.
IPO का दबाव
प्रभु के बयान में आगे आरोप लगाया गया है कि जब Gameskraft संभावित पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही थी, तब गायब हुए पैसे को वापस दिखाने का दबाव बढ़ गया. अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, उनका दावा है कि कंपनी दो वर्षों के भीतर IPO लाने की योजना बना रही थी और उसे अपने खातों में यह राशि दिखाने की आवश्यकता थी. चूंकि पैसा पहले ही F&O ट्रेडिंग में डूब चुका था, इसलिए उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थापकों ने नुकसान का दोष उन पर मढ़ दिया और बाद में उन्हें यह आश्वासन देते हुए देश छोड़ने के लिए कहा कि वे "स्थिति संभाल लेंगे." उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संस्थापक लिखित संचार से बचते थे और लेन-देन से संबंधित निर्देश मौखिक रूप से देते थे.
ED की मनी लॉन्ड्रिंग थ्योरी
ED ने अपना मामला तैयार करने में प्रभु के बयान पर काफी हद तक भरोसा किया है. हाईकोर्ट द्वारा उद्धृत गिरफ्तारी के आधारों में एजेंसी ने आरोप लगाया कि Gameskraft के संस्थापक और पूर्व CFO आपस में "मिलीभगत" से काम कर रहे थे और उन्होंने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस तथा म्यूचुअल फंड निवेश के नाम पर 250 करोड़ रुपये का डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग की. एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि अपराध से अर्जित आय का एक हिस्सा निवेश संरचनाओं और डिविडेंड भुगतान के माध्यम से धन शोधन कर परिवार-नियंत्रित संस्थाओं और संपत्तियों में पहुंचाया गया.
कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में इन आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. फैसले का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि क्या ED के पास PMLA के तहत गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी. हालांकि, प्रभु का बयान इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. जहां Gameskraft की मूल शिकायत में उन्हें वर्षों से चल रहे कथित धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड के रूप में पेश किया गया था, वहीं पूर्व CFO ने अब आरोप लगाया है कि यह निवेश योजना कंपनी के शीर्ष नेतृत्व की जानकारी और निर्देश पर चलाई गई थी. यही दावा ED की विस्तारित जांच के केंद्र में है.
संस्थापकों को जेल से रिहाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ा झटका देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को Gameskraft के संस्थापक दीपक सिंह, पृथ्वीराज सिंह और विकास तनेजा की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया और उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारी से जुड़े वैधानिक सुरक्षा प्रावधानों का पालन करने में विफल रही.
यह आदेश न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पारित किया. उन्होंने 7 और 8 मई को ED द्वारा की गई तलाशी के बाद संस्थापकों की गिरफ्तारी की वैधता पर दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.