को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटारे की तैयारी, MSEI ने भी 857 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा किया.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ (IPO) से पहले वर्षों पुराने कानूनी विवादों को समाप्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. एक्सचेंज ने बाजार नियामक सेबी (SEBI) के साथ चल रहे को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के निपटारे के लिए 1,491.21 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव दिया है. इसके साथ ही प्रतिद्वंद्वी मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MSEI) की ओर से 856.99 करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा भी एनएसई के सामने चुनौती बना हुआ है. हालांकि, एनएसई ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित राशि का पूरा बोझ उस पर नहीं पड़ेगा, क्योंकि वह पहले ही विभिन्न आदेशों के तहत बड़ी रकम सेबी के पास जमा करा चुका है.
वास्तविक वित्तीय बोझ कितना होगा?
पहली नजर में 1,491 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव काफी बड़ा दिखाई देता है, लेकिन वास्तविक वित्तीय प्रभाव अपेक्षाकृत कम हो सकता है. एनएसई पहले ही विभिन्न मामलों में सेबी के पास करीब 1,107 करोड़ रुपये जमा करा चुका है. ऐसे में यदि सेबी संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो एक्सचेंज को केवल शेष राशि का भुगतान करना होगा. फिलहाल को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं.
क्या है डार्क फाइबर विवाद?
डार्क फाइबर मामला ट्रेडिंग में कथित अनुचित लाभ से जुड़ा है. आरोप था कि कुछ चुनिंदा ट्रेडिंग सदस्यों को एक अनधिकृत इंटरनेट सेवा प्रदाता के माध्यम से तेज कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई गई, जिससे उन्हें अन्य निवेशकों की तुलना में बाजार संबंधी जानकारी पहले प्राप्त हो जाती थी.
इस मामले में सेबी ने 2019 में एनएसई को ब्याज सहित 62.58 करोड़ रुपये लौटाने और 2022 में 7 करोड़ रुपये का जुर्माना भरने का आदेश दिया था. हालांकि, बाद में सिक्योरिटीज अपीलेट ट्रिब्यूनल (SAT) ने दोनों आदेशों को रद्द कर दिया. इसके बाद सेबी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया. विवाद के निपटारे के लिए एनएसई ने मार्च 2026 में 267.65 करोड़ रुपये का सेटलमेंट प्रस्ताव पेश किया.
को-लोकेशन मामला क्यों है अहम?
को-लोकेशन विवाद को एनएसई के इतिहास के सबसे चर्चित मामलों में गिना जाता है. आरोप था कि कुछ चुनिंदा ब्रोकर्स को एक्सचेंज के सर्वर के करीब अपने सिस्टम स्थापित करने की विशेष सुविधा दी गई थी, जिससे उन्हें बाजार का डेटा अन्य प्रतिभागियों से पहले मिल जाता था.
इस मामले में सेबी ने 2019 में एनएसई पर 624.89 करोड़ रुपये जमा करने का आदेश दिया था. हालांकि, 2023 में SAT ने इस आदेश को रद्द करते हुए एनएसई को केवल निवेशक शिक्षा एवं संरक्षण कोष (IEPF) में 100 करोड़ रुपये जमा करने का निर्देश दिया.
सेबी ने इस फैसले को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. मामले को समाप्त करने के लिए एनएसई ने मार्च 2026 में 1,223.56 करोड़ रुपये के भुगतान का संशोधित प्रस्ताव दिया.
MSEI का 857 करोड़ रुपये का दावा
एनएसई की कानूनी चुनौतियां केवल सेबी तक सीमित नहीं हैं. एक्सचेंज ने अपने आईपीओ दस्तावेजों में मेट्रोपॉलिटन स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (MSEI) के साथ करीब 15 वर्ष पुराने विवाद का भी उल्लेख किया है.
MSEI का आरोप है कि एनएसई ने करेंसी डेरिवेटिव्स बाजार में अपनी मजबूत स्थिति का दुरुपयोग करते हुए फीस को अत्यधिक कम रखा, जिससे प्रतिस्पर्धा प्रभावित हुई और अन्य एक्सचेंजों को नुकसान पहुंचा.
वर्ष 2011 में प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने एनएसई पर 55.5 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे 2014 में COMPAT ने भी बरकरार रखा. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस जुर्माने की वसूली पर रोक लगा रखी है.
इसके अलावा MSEI ने कथित कारोबारी नुकसान के लिए 856.99 करोड़ रुपये के मुआवजे और उस पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज की मांग की है.
IPO से पहले पारदर्शिता पर जोर
एनएसई द्वारा दाखिल ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) में इन सभी लंबित विवादों का विस्तृत उल्लेख किया गया है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आईपीओ से पहले कानूनी मामलों का खुलासा और उनके निपटारे की पहल निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
एनएसई का यह प्रयास ऐसे समय में सामने आया है जब बाजार लंबे समय से देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित आईपीओ का इंतजार कर रहा है.
प्रभु ने ED को बताया कि डायवर्ट किए गए फंड को उनके Zerodha खाते के माध्यम से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में निवेश किया गया था.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ऑनलाइन गेमिंग यूनिकॉर्न Gameskraft से कथित 250 करोड़ रुपये के फंड डायवर्जन का मामला संभवतः किसी एक अधिकारी द्वारा की गई व्यक्तिगत गड़बड़ी नहीं था. यह बात पूर्व मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) रमेश प्रभु से जुड़े एक बयान से सामने आती है, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट के एक आदेश में उद्धृत किया गया है.
प्रभु, जिन पर पहले Gameskraft ने कंपनी के फंड को व्यक्तिगत फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग में लगाने का आरोप लगाया था, ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बताया कि ये ट्रांसफर कंपनी के संस्थापकों के निर्देश पर किए गए थे और इन्हें आंतरिक रूप से ऐसे निवेश के रूप में प्रस्तुत किया गया था, जिन्हें बाद में व्यवसाय में वापस लाया जाना था.
ED द्वारा की गई गिरफ्तारियों की वैधता की जांच करने वाले 16 जून के कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले में उद्धृत यह बयान, Gameskraft के प्रमोटरों के खिलाफ एजेंसी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच का एक प्रमुख आधार बन गया है.
आदेश के अनुसार, प्रभु ने 18 नवंबर 2025 को धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 50 के तहत ED द्वारा भेजे गए समन का जवाब ईमेल के माध्यम से दिया था. उस संचार में उन्होंने कथित तौर पर कहा कि फंड का डायवर्जन संस्थापकों विकास तनेजा, दीपक सिंह अहलावत, पृथ्वीराज सिंह और दीपक कुमार झा के "निर्देशों के तहत" किया गया था.
'कंपनी का पैसा सुरक्षित रखने' की योजना
अदालत द्वारा उद्धृत बयान में प्रभु ने इस व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 2019 से बताई है, जब RummyCircle संचालित करने वाली Games24x7 ने Gameskraft के कुछ संस्थापकों के खिलाफ सोर्स कोड और ग्राहक डेटाबेस की कथित चोरी को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू की थी.
प्रभु का दावा है कि इस मुकदमेबाजी के कारण संस्थापकों को कंपनी में जमा हो रहे फंड को लेकर चिंता हुई. उनके बयान के अनुसार, उनसे कहा गया था कि धीरे-धीरे कंपनी से पैसा बाहर निकालकर उसे शेयर बाजार में निवेश किया जाए, ताकि बाद में उसे वापस लाया जा सके. अदालत में उद्धृत संचार के अनुसार प्रभु ने कथित रूप से कहा, "उन्होंने मुझसे कहा था कि जब हमें मुनाफा होगा, तो हम पैसा वापस कंपनी में ले आएंगे."
व्यक्तिगत खातों के जरिए F&O ट्रेडिंग
प्रभु ने ED को बताया कि डायवर्ट किए गए फंड को उनके Zerodha खाते के माध्यम से फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग में निवेश किया गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने अपनी पत्नी की जानकारी के बिना उनके नाम पर एक और ट्रेडिंग खाता खोला था. बयान के अनुसार, Gameskraft से ट्रांसफर किया गया पूरा पैसा अंततः डेरिवेटिव ट्रेडिंग में डूब गया. उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें इन लेन-देन से कोई व्यक्तिगत लाभ नहीं हुआ.
यह दावा Gameskraft की पहले की पुलिस शिकायत से बिल्कुल अलग है, जिसमें इस मामले को एक वरिष्ठ वित्तीय अधिकारी द्वारा अकेले किए गए अनधिकृत फंड डायवर्जन के रूप में पेश किया गया था.
म्यूचुअल फंड एंट्री और कथित फर्जीवाड़ा
प्रभु के बयान का संभवतः सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इन लेन-देन को कंपनी की पुस्तकों में किस प्रकार दर्ज किया गया. प्रभु ने दावा किया कि उनके खातों में ट्रांसफर की गई राशि को Gameskraft के वित्तीय विवरणों में म्यूचुअल फंड निवेश के रूप में दिखाया गया था. उन्होंने आगे आरोप लगाया कि संस्थापकों ने उनसे ऑडिट के लिए फर्जी म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट तैयार करने को कहा था. आदेश में उद्धृत बयान के अनुसार, उन्होंने वित्त वर्ष 2023-24 और 2024-25 के दौरान ऐसा करने से इनकार कर दिया.
यह आरोप Gameskraft की अपनी पुलिस शिकायत से मेल खाता है, जिसमें कहा गया था कि फंड डायवर्जन छिपाने के लिए फर्जी निवेश रिकॉर्ड और नकली म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट का इस्तेमाल किया गया.
'दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को अलर्ट मिलते थे'
पूर्व CFO ने इस संभावना को भी खारिज किया कि ये ट्रांसफर किसी की नजर से बच सकते थे. प्रभु ने ED को बताया कि जिस RBL बैंक खाते से फंड ट्रांसफर किया गया, उसके लिए दो अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की आवश्यकता थी, वह स्वयं और सह-संस्थापक पृथ्वीराज सिंह. उनका दावा है कि हर लेन-देन होने पर दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं को ईमेल और SMS अलर्ट प्राप्त होते थे. यह दावा जांचकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि वे यह स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं कि फंड की आवाजाही की जानकारी किसे थी और कब थी.
IPO का दबाव
प्रभु के बयान में आगे आरोप लगाया गया है कि जब Gameskraft संभावित पब्लिक लिस्टिंग की तैयारी कर रही थी, तब गायब हुए पैसे को वापस दिखाने का दबाव बढ़ गया. अदालती रिकॉर्ड के अनुसार, उनका दावा है कि कंपनी दो वर्षों के भीतर IPO लाने की योजना बना रही थी और उसे अपने खातों में यह राशि दिखाने की आवश्यकता थी. चूंकि पैसा पहले ही F&O ट्रेडिंग में डूब चुका था, इसलिए उन्होंने आरोप लगाया कि संस्थापकों ने नुकसान का दोष उन पर मढ़ दिया और बाद में उन्हें यह आश्वासन देते हुए देश छोड़ने के लिए कहा कि वे "स्थिति संभाल लेंगे." उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संस्थापक लिखित संचार से बचते थे और लेन-देन से संबंधित निर्देश मौखिक रूप से देते थे.
ED की मनी लॉन्ड्रिंग थ्योरी
ED ने अपना मामला तैयार करने में प्रभु के बयान पर काफी हद तक भरोसा किया है. हाईकोर्ट द्वारा उद्धृत गिरफ्तारी के आधारों में एजेंसी ने आरोप लगाया कि Gameskraft के संस्थापक और पूर्व CFO आपस में "मिलीभगत" से काम कर रहे थे और उन्होंने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस तथा म्यूचुअल फंड निवेश के नाम पर 250 करोड़ रुपये का डायवर्जन और मनी लॉन्ड्रिंग की. एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया कि अपराध से अर्जित आय का एक हिस्सा निवेश संरचनाओं और डिविडेंड भुगतान के माध्यम से धन शोधन कर परिवार-नियंत्रित संस्थाओं और संपत्तियों में पहुंचाया गया.
कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश में इन आरोपों की सत्यता पर कोई निष्कर्ष नहीं निकाला गया है. फैसले का मुख्य उद्देश्य यह जांचना था कि क्या ED के पास PMLA के तहत गिरफ्तारी को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त सामग्री मौजूद थी. हालांकि, प्रभु का बयान इस मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है. जहां Gameskraft की मूल शिकायत में उन्हें वर्षों से चल रहे कथित धोखाधड़ी के मास्टरमाइंड के रूप में पेश किया गया था, वहीं पूर्व CFO ने अब आरोप लगाया है कि यह निवेश योजना कंपनी के शीर्ष नेतृत्व की जानकारी और निर्देश पर चलाई गई थी. यही दावा ED की विस्तारित जांच के केंद्र में है.
संस्थापकों को जेल से रिहाई
प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बड़ा झटका देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने मंगलवार को Gameskraft के संस्थापक दीपक सिंह, पृथ्वीराज सिंह और विकास तनेजा की गिरफ्तारी को अवैध करार दिया और उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया. अदालत ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत गिरफ्तारी से जुड़े वैधानिक सुरक्षा प्रावधानों का पालन करने में विफल रही.
यह आदेश न्यायमूर्ति एम. नागप्रसन्ना ने पारित किया. उन्होंने 7 और 8 मई को ED द्वारा की गई तलाशी के बाद संस्थापकों की गिरफ्तारी की वैधता पर दोनों पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था.
रक्षा क्षेत्र में तेज़ी से बढ़ रही स्वदेशी क्षमता, उत्पादन और निर्यात दोनों ने बनाया नया रिकॉर्ड
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का रक्षा उत्पादन वित्त वर्ष 2025-26 में अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, देश का कुल रक्षा उत्पादन 15.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 1.78 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह उपलब्धि न केवल देश की बढ़ती रक्षा विनिर्माण क्षमता को दर्शाती है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता का भी महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है.
एक साल में 15.6% और पांच साल में 110% की बढ़ोतरी
वित्त वर्ष 2024-25 में रक्षा उत्पादन का आंकड़ा 1.54 लाख करोड़ रुपये था, जो FY26 में बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये हो गया. वहीं, वर्ष 2020-21 के 84,643 करोड़ रुपये की तुलना में इसमें 110 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में रक्षा क्षेत्र में किए गए सुधारों और नीति समर्थन ने इस वृद्धि को गति दी है.
राजनाथ सिंह ने बताया सामूहिक प्रयासों का परिणाम
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन में हुई यह उल्लेखनीय वृद्धि रक्षा उत्पादन विभाग, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों तथा अन्य संबंधित पक्षों के संयुक्त प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश के तेजी से विकसित हो रहे रक्षा औद्योगिक आधार का स्पष्ट संकेत है. उनके अनुसार, सरकार की नीतिगत सहायता, नई पहल, निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निर्यात क्षमताओं में विस्तार से आने वाले वर्षों में भी रक्षा क्षेत्र की विकास गति मजबूत बनी रहेगी.
12 वर्षों में लगभग चार गुना हुआ रक्षा उत्पादन
रक्षा मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2013-14 में देश का रक्षा उत्पादन 43,746 करोड़ रुपये था. FY26 में यह बढ़कर 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है. यानी पिछले 12 वर्षों में रक्षा उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ चुका है. यह वृद्धि भारत को रक्षा उपकरणों के आयातक से एक उभरते हुए रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
रक्षा क्षेत्र में बढ़ रही निजी कंपनियों की भूमिका
रक्षा उत्पादन में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों का अभी भी प्रमुख योगदान है. FY26 में कुल उत्पादन में डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) और अन्य सार्वजनिक उपक्रमों की हिस्सेदारी लगभग 76 प्रतिशत रही. हालांकि, निजी क्षेत्र की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है. FY26 में निजी कंपनियों का योगदान बढ़कर 24 प्रतिशत हो गया, जो पिछले वर्ष 22 प्रतिशत था. मूल्य के लिहाज से निजी क्षेत्र का उत्पादन करीब 42,000 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति रक्षा क्षेत्र में बढ़ते निजी निवेश और तकनीकी क्षमताओं को दर्शाती है.
रक्षा निर्यात ने भी बनाया नया कीर्तिमान
रक्षा उत्पादन में वृद्धि का असर निर्यात पर भी दिखाई दिया है. वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. मंत्रालय का कहना है कि उत्पादन क्षमता में विस्तार और स्वदेशी रक्षा प्रणालियों के विकास ने भारतीय रक्षा उत्पादों को वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चलाए जा रहे 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता हासिल करने के प्रयासों को मजबूत करती है. विशेषज्ञों के अनुसार, उत्पादन और निर्यात दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि यह संकेत देती है कि भारत आने वाले वर्षों में वैश्विक रक्षा आपूर्ति श्रृंखला में अपनी भूमिका और मजबूत कर सकता है.
CETA लागू होने के साथ भारतीय निर्यातकों, आईटी पेशेवरों और MSME क्षेत्र को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद, ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीयों को 5 साल तक दोहरे सामाजिक सुरक्षा कर से राहत
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) के बीच आर्थिक सहयोग को नई ऊंचाई देने वाला व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है. इसके साथ ही सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (DCC) भी प्रभाव में आ जाएगा. इस समझौते के लागू होने के बाद ब्रिटेन में जाने वाले 99 प्रतिशत भारतीय उत्पादों पर आयात शुल्क समाप्त हो जाएगा, जबकि वहां कार्यरत हजारों भारतीय पेशेवरों को सामाजिक सुरक्षा योगदान से जुड़ी बड़ी राहत मिलेगी.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि भारत-यूके संबंधों के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि, यह बताते हुए प्रसन्नता हो रही है कि भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement) 15 जुलाई 2026 से प्रभावी हो जाएगा. यह समझौता हमारे द्विपक्षीय व्यापार और निवेश को उल्लेखनीय रूप से बढ़ावा देगा. यह भारतीय किसानों, श्रमिकों, एमएसएमई, स्टार्टअप्स और नवप्रवर्तकों के लिए अनेक अवसर भी खोलेगा तथा ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा. G7 शिखर सम्मेलन के लिए एवीयान में मौजूद प्रधानमंत्री स्टारमर और मैं, दोनों ही हमारे आर्थिक संबंधों में इस महत्वपूर्ण गति को लेकर स्वाभाविक रूप से बहुत प्रसन्न हैं.
भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेगा ब्रिटेन का बाजार
नए व्यापार समझौते के तहत अधिकांश भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के प्रवेश मिलेगा. इससे खाद्य प्रसंस्करण, समुद्री उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, ऑटो कंपोनेंट्स, चमड़ा एवं फुटवियर और वस्त्र उद्योग को विशेष लाभ मिलने की संभावना है.
अब तक प्रोसेस्ड फूड पर 70 प्रतिशत तक, समुद्री उत्पादों पर 21.5 प्रतिशत, इंजीनियरिंग और ऑटो पार्ट्स पर 18 प्रतिशत, चमड़ा एवं जूतों पर 16 प्रतिशत तथा कपड़ा उत्पादों पर 12 प्रतिशत तक लगने वाला शुल्क समाप्त हो जाएगा. इससे भारतीय उत्पाद ब्रिटेन के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे और निर्यात को नई गति मिलेगी. हालांकि, भारत ने डेयरी उत्पादों, अनाज और सेब जैसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों को इस समझौते से बाहर रखकर घरेलू किसानों के हितों की भी रक्षा की है.
सेवा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा अवसर
यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत के सेवा क्षेत्र के लिए भी नए अवसर लेकर आया है. ब्रिटेन ने 137 सेवा क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों और पेशेवरों को बेहतर बाजार पहुंच प्रदान की है. इनमें सूचना प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, दूरसंचार और पेशेवर सेवाएं शामिल हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय आईटी कंपनियों, कंसल्टिंग फर्मों और अन्य सेवा प्रदाताओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी.
भारतीय पेशेवरों को दोहरे टैक्स से राहत
समझौते का सबसे बड़ा लाभ ब्रिटेन में काम करने वाले भारतीय पेशेवरों को मिलेगा. नए सामाजिक सुरक्षा समझौते के तहत अस्थायी रूप से ब्रिटेन में कार्यरत भारतीय कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा योगदान के दोहरे भुगतान से 5 वर्षों तक छूट मिलेगी. पहले यह छूट केवल 3 वर्षों के लिए उपलब्ध थी. इस बदलाव से करीब 75,000 भारतीय पेशेवरों और लगभग 900 भारतीय कंपनियों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है.
इसके अलावा हर वर्ष 1,800 भारतीय शेफ, योग प्रशिक्षकों और शास्त्रीय संगीत कलाकारों को ब्रिटेन में विशेष कार्य अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे.
स्टील निर्यातकों के हितों की सुरक्षा
व्यापार समझौते में भारत के स्टील उद्योग के हितों का भी विशेष ध्यान रखा गया है. ब्रिटेन द्वारा 1 जुलाई 2026 से लागू किए जा रहे नए स्टील आयात नियमों के बावजूद भारत के लगभग 85 प्रतिशत स्टील निर्यात को उनके प्रभाव से बाहर रखा गया है. शेष निर्यात को विशेष कोटा व्यवस्था के माध्यम से संरक्षण दिया जाएगा, जिससे भारतीय स्टील उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बनी रहे.
MSME, स्टार्टअप और युवाओं को मिलेगा फायदा
सरकार का मानना है कि इस समझौते का लाभ केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं रहेगा. MSME, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों और युवा कारोबारियों को भी ब्रिटेन जैसे बड़े और विकसित उपभोक्ता बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलेगा. इससे रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
14 दौर की बातचीत के बाद मिली सफलता
भारत और ब्रिटेन के बीच इस व्यापार समझौते की प्रक्रिया मई 2021 में शुरू हुई थी. करीब 14 दौर की विस्तृत वार्ताओं के बाद दोनों देशों ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया. विशेषज्ञों के अनुसार, CETA भारत की वैश्विक व्यापार रणनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है और इससे देश को वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिलेगी.
बुधवार को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 347 अंक चढ़कर 77,155.62 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,085.70 के स्तर पर पहुंचकर बंद हुआ.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार ने बुधवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया. पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और आईटी शेयरों में खरीदारी के दम पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 347 अंक चढ़कर 77,155.62 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 24,085.70 के स्तर पर पहुंच गया. अब गुरुवार के कारोबार में निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि क्या बाजार तेजी का यह सिलसिला जारी रख पाएगा या फिर मुनाफावसूली हावी होगी.
वैश्विक संकेतों पर रहेगी नजर
बाजार की दिशा तय करने में आज भी वैश्विक संकेत अहम भूमिका निभा सकते हैं. निवेशक पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर नजर बनाए रखेंगे. यदि अंतरराष्ट्रीय बाजारों से सकारात्मक संकेत मिलते हैं, तो घरेलू बाजार में खरीदारी का माहौल बना रह सकता है.
आईटी और बैंकिंग शेयरों से उम्मीद
पिछले कारोबारी सत्र में आईटी और बैंकिंग शेयरों ने बाजार को मजबूती दी थी. इन्फोसिस, टीसीएस और अन्य आईटी कंपनियों में खरीदारी देखने को मिली थी. ऐसे में आज भी इन शेयरों की चाल बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में बने रह सकते हैं अवसर
हाल के दिनों में मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छे फंडामेंटल वाली कंपनियों में चुनिंदा खरीदारी जारी रह सकती है, हालांकि ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली से इनकार नहीं किया जा सकता.
आज इन शेयरों पर रखें नजर
रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) को ईस्ट कोस्ट रेलवे से 967.92 करोड़ रुपये का बड़ा ऑर्डर मिला है. कंपनी भद्रक-विजयनगरम सेक्शन में तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के लिए पुल निर्माण का काम करेगी. इस खबर का असर शेयर पर देखने को मिल सकता है. टेलीकॉम कंपनी HFCL को भारतनेट फेज-III परियोजना के तहत 2,666 करोड़ रुपये का कॉन्ट्रैक्ट मिला है.
फार्मा कंपनी Lupin ने अमेरिका में हाइपरटेंशन के इलाज के लिए Azilsartan Medoxomil टैबलेट लॉन्च की है. कंपनी को US FDA की मंजूरी भी मिल चुकी है, जिससे शेयर निवेशकों के रडार पर रह सकता है. स्टेशनरी कंपनी DOMS Industries में विदेशी प्रमोटर FILA ने 7 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर करीब 935 करोड़ रुपये जुटाए हैं. वहीं Axis Mutual Fund और SBI Mutual Fund ने कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाई है.
Corona Remedies में बड़े पैमाने पर ब्लॉक डील हुई है. ChrysCapital से जुड़ी Sepia Investments ने 7.07 प्रतिशत हिस्सेदारी बेची है. इस सौदे में कई घरेलू और विदेशी संस्थागत निवेशकों ने हिस्सा लिया. कंपनी के प्रमोटर Bosch Global Software Technologies ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए करीब 8 प्रतिशत हिस्सेदारी बेच रहे हैं. इसका असर शेयर की चाल पर देखने को मिल सकता है. Lemon Tree Hotels ने राजस्थान के श्रीगंगानगर में नया होटल शुरू किया है. वहीं Balkrishna Industries ने सरोज कुमार खुंटिया को नया CFO नियुक्त किया है. दोनों कंपनियों के शेयरों पर भी निवेशकों की नजर बनी रह सकती है.
निवेशकों के लिए क्या है रणनीति?
विश्लेषकों के अनुसार, बाजार फिलहाल सकारात्मक रुख में है, लेकिन लगातार चार दिन की तेजी के बाद ऊंचे स्तरों पर मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है. ऐसे में निवेशकों को चुनिंदा शेयरों पर फोकस रखते हुए वैश्विक संकेतों और सेक्टर-विशेष खबरों पर नजर बनाए रखनी चाहिए. आज RVNL, HFCL, Lupin, DOMS Industries, Corona Remedies, Bosch Home Comfort, Lemon Tree Hotels और Balkrishna Industries जैसे शेयर बाजार में चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
एयर इंडिया एक्सप्रेस, TCS, JSW, पॉलिसीबाजार और HDFC लाइफ समेत कई दिग्गज कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी जूरी में शामिल होंगे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
मार्केटिंग, ब्रांडिंग और कम्युनिकेशन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने वाला BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 अपने चौथे संस्करण के साथ 18 जून को मुंबई में आयोजित होने जा रहा है. यह आयोजन देश के प्रमुख मार्केटिंग पेशेवरों, ब्रांड लीडर्स और कम्युनिकेशन विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा. अवॉर्ड्स का उद्देश्य उन अभियानों, ब्रांड्स और व्यक्तियों को सम्मानित करना है जिन्होंने उपभोक्ता जुड़ाव और व्यवसायिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है.
मार्केटिंग उत्कृष्टता को मिलेगा सम्मान
BW मेरिट अवॉर्ड्स उन पहलों को पहचान देता है जो केवल दृश्यता तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वास्तविक प्रभाव भी पैदा करती हैं. पुरस्कारों के माध्यम से रचनात्मकता, नवाचार, रणनीतिक सोच और मापनीय परिणामों को महत्व दिया जाता है. इसका लक्ष्य ऐसे विचारों और अभियानों को सामने लाना है जो पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए मार्केटिंग के नए मानक स्थापित करते हैं.
उद्योग के दिग्गजों से सजी जूरी
अवॉर्ड्स के मूल्यांकन को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए इस वर्ष एक मजबूत जूरी पैनल का गठन किया गया है. इसमें विभिन्न क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ मार्केटिंग और ब्रांड विशेषज्ञ शामिल हैं.
जूरी में एफी लायंस फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य शुभ्रांशु सिंह, JSW स्टील के हेड मार्केटिंग तरुण झा, TCS के ग्लोबल हेड-मार्केटिंग डिमांड सेंटर अमित तिवारी, एयर इंडिया एक्सप्रेस के मुख्य विपणन अधिकारी सिद्धार्थ बुटालिया, पॉलिसीबाजार के मुख्य विपणन अधिकारी साई नारायण और HDFC लाइफ की हेड मार्केटिंग एवं CSR प्रितिका शाह सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं.
इसके अलावा मोटरोला मोबिलिटी, JSW MG मोटर इंडिया, ITC, MRF टायर्स, वोडाफोन आइडिया, वुडलैंड और नारायणा हेल्थ जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी जूरी का हिस्सा होंगे.
59 श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार
BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 में कुल 59 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. इन्हें पांच प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है:
बेस्ट यूज ऑफ चैनल्स एंड प्लेटफॉर्म्स- इस श्रेणी में कंटेंट, मीडिया, डिजिटल और सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग तथा इवेंट्स के प्रभावी उपयोग को सम्मानित किया जाएगा.
बेस्ट इन सेक्टर्स- ऑटोमोबाइल, BFSI, कंज्यूमर टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स, शिक्षा, ऊर्जा, FMCG, हेल्थकेयर, मीडिया एवं एंटरटेनमेंट, रियल एस्टेट, रिटेल, ई-कॉमर्स, स्पोर्ट्स और ट्रैवल जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन मार्केटिंग पहलों को पुरस्कृत किया जाएगा.
बेस्ट ऑफ कैंपेन- इस श्रेणी में CSR कैंपेन, रीजनल मार्केटिंग, स्मॉल बजट कैंपेन, टेक्नोलॉजी-सक्षम अभियान, डिजिटल कैंपेन, SEO, ऑर्गेनिक कंटेंट, वायरल इन्फ्लुएंसर कैंपेन, फेस्टिव मार्केटिंग और वर्ष के सर्वश्रेष्ठ मार्केटिंग अभियान जैसी श्रेणियां शामिल हैं.
युवा पेशेवरों को भी मिलेगा मंच -अवॉर्ड्स में व्यक्तिगत उत्कृष्टता को भी मान्यता दी जाएगी. इसके तहत 35 वर्ष से कम आयु के पेशेवरों के लिए 'मार्केटिंग इनोवेटर ऑफ द ईयर', 'बेस्ट मार्केटिंग कम्युनिकेशन प्रोफेशनल' और 'बेस्ट डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल' जैसी श्रेणियां रखी गई हैं.
ब्रांड निर्माण के विभिन्न चरणों पर फोकस
'स्टेजेज ऑफ ब्रांडिंग' श्रेणी के तहत कैटेगरी क्रिएशन, नए उत्पाद का लॉन्च, ब्रांड एक्सटेंशन, ब्रांड री-जुवेनेशन, ट्रांसफॉर्मेशनल ग्रोथ, कस्टमर एक्सपीरियंस, कस्टमर रिलेशनशिप मार्केटिंग और डेटा एवं AI के उपयोग जैसी पहलों को सम्मानित किया जाएगा.
सीखने और नेटवर्किंग का भी मिलेगा अवसर
BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 केवल पुरस्कार समारोह तक सीमित नहीं रहेगा. यह कार्यक्रम उद्योग जगत के पेशेवरों, एजेंसियों, ब्रांड्स और नवोन्मेषकों को एक-दूसरे से सीखने, विचार साझा करने और सहयोग के अवसर भी प्रदान करेगा.
आयोजकों के अनुसार, यह मंच उन दूरदर्शी नेताओं और प्रभावशाली अभियानों का जश्न मनाएगा जो लगातार मार्केटिंग उत्कृष्टता की परिभाषा को नया स्वरूप दे रहे हैं और उद्योग के भविष्य को दिशा प्रदान कर रहे हैं.
नए कॉमर्स समाधान के जरिए ग्राहक केवल दो चरणों में उत्पाद खोजने से लेकर खरीदारी तक पहुंच सकेंगे.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
ट्रूकॉलर ऐड्स (truecaller Ads) ने वैश्विक स्तर पर अपने नए कॉमर्स समाधान ‘कॉल-टू-कार्ट’ (Call-to-Cart) की शुरुआत की है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से संचालित यह प्लेटफॉर्म रोजमर्रा के संचार अनुभव को सीधे खरीदारी के अवसर में बदलने के लिए विकसित किया गया है. कंपनी का दावा है कि यह समाधान ग्राहकों को उत्पाद खोजने से लेकर खरीदारी पूरी करने तक की प्रक्रिया को केवल दो चरणों में पूरा करने में मदद करेगा.
खरीदारी प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर
कंपनी के अनुसार, ऑनलाइन खरीदारी के दौरान प्रत्येक अतिरिक्त क्लिक ग्राहक के खरीदारी प्रक्रिया छोड़ने की संभावना को बढ़ा देता है. अधिकांश मोबाइल कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर ग्राहकों को कई स्क्रीन, ऐप और सर्च प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है.
‘कॉल-टू-कार्ट’ का उद्देश्य इस जटिलता को कम करना है. यह समाधान ट्रूकॉलर के उस विशिष्ट स्थान का लाभ उठाता है जहां उपयोगकर्ता कॉल प्राप्त करते समय और कॉल समाप्त होने के तुरंत बाद सबसे अधिक सक्रिय और ध्यान केंद्रित रहते हैं.
कॉल के दौरान और बाद में दिखेंगे प्रासंगिक ऑफर
नई सेवा के तहत ब्रांड्स ग्राहकों तक उन क्षणों में पहुंच सकेंगे जब वे कॉल रिसीव कर रहे हों या कॉल समाप्त कर चुके हों. AI आधारित टार्गेटिंग और कॉमर्स इंटीग्रेशन की मदद से ग्राहकों को उनकी रुचि के अनुरूप ऑफर दिखाए जाएंगे, जिससे उत्पाद खोजने और खरीदने की प्रक्रिया तेज हो सकेगी.
FMCG, ब्यूटी, फिनटेक और मोबिलिटी ब्रांड्स को होगा फायदा
ट्रूकॉलर ऐड्स के वाइस प्रेसिडेंट और ग्लोबल हेड हेमंत अरोड़ा ने कहा कि लाखों खरीदारी निर्णय पारंपरिक ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के बाहर शुरू होते हैं. उनके अनुसार, संचार के दौरान मिलने वाले अवसर ब्रांड्स के लिए एक प्रभावी कॉमर्स स्पेस बन सकते हैं.
उन्होंने बताया कि यह समाधान विशेष रूप से FMCG, डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्यूटी, फार्मा, फिनटेक और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के विज्ञापनदाताओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जहां सही समय और प्रासंगिकता ग्राहक के निर्णय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.
AI प्लेटफॉर्म ‘adVantage’ करेगा अनुभव को बेहतर
‘कॉल-टू-कार्ट’ के पीछे ट्रूकॉलर का इन-हाउस विकसित इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म ‘adVantage’ काम करता है. यह प्लेटफॉर्म एडवांस्ड रिकमेंडेशन इंजन, AI-आधारित पर्सनलाइजेशन और फर्स्ट-पार्टी डेटा संकेतों का उपयोग करके ग्राहकों को सही समय पर उपयुक्त ऑफर उपलब्ध कराता है.
ट्रूकॉलर ऐड्स में adVantage के इंजीनियरिंग डायरेक्टर लिनिकर सिक्सास के अनुसार, यह तकनीक उपभोक्ताओं के लिए खरीदारी अनुभव को अधिक सहज बनाती है और विज्ञापनदाताओं को बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करती है.
150 से अधिक देशों में उपलब्ध होगा समाधान
कंपनी ने बताया कि ‘कॉल-टू-कार्ट’ ट्रूकॉलर ऐड्स का पहला ऐसा समाधान है जिसे वैश्विक स्तर पर सीधे विज्ञापनदाताओं के लिए लॉन्च किया गया है. ट्रूकॉलर के दुनिया भर में 50 करोड़ से अधिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं और प्लेटफॉर्म पर प्रतिदिन अरबों विज्ञापन अवसर उपलब्ध होते हैं.
शुरुआती चरण में चुनिंदा ब्रांड्स को मिलेगी सुविधा
पहले चरण में ट्रूकॉलर ने विभिन्न प्रमुख बाजारों में चुनिंदा ‘ऑलवेज-ऑन’ विज्ञापनदाताओं को इस कार्यक्रम के लिए व्हाइटलिस्ट किया है. इन भागीदारों को विशेष ऑनबोर्डिंग सहायता, कस्टम इंटीग्रेशन और adVantage प्लेटफॉर्म तक प्राथमिक पहुंच उपलब्ध कराई जाएगी. कंपनी का मानना है कि यह पहल मोबाइल कम्युनिकेशन और डिजिटल कॉमर्स के बीच की दूरी को कम करेगी तथा ब्रांड्स को ग्राहकों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचने में मदद करेगी.
ग्राहकों के अतिरिक्त बैंक बैलेंस को अब मिलेगा निवेश का विकल्प, बचत और लिक्विडिटी दोनों पर रहेगा फोकस
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
जियो फाइनेंशियल सर्विसेज (Jio Financial Services) और वैश्विक एसेट मैनेजमेंट कंपनी ब्लैकरॉक (BlackRock) के संयुक्त उपक्रम जियोब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट (Jio BlackRock AMC) ने डिजिटल निवेश को और सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. कंपनी ने अपने जियोब्लैकरॉक ओवरनाइट फंड को जियो पेमेंट्स बैंक के ‘सेविंग्स प्रो’ फीचर के साथ जोड़ दिया है. यह सुविधा जियोफाइनेंस ऐप के जरिए उपलब्ध होगी और ग्राहकों को अपने बैंक खाते में पड़ी अतिरिक्त राशि को आसानी से निवेश करने का विकल्प देगी.
अतिरिक्त राशि का होगा स्वतः निवेश
नए इंटीग्रेशन के तहत ग्राहक अपने खाते में तय सीमा से अधिकjiobl;ackrock मौजूद राशि को पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से ओवरनाइट म्यूचुअल फंड में निवेश कर सकेंगे. इसका उद्देश्य निष्क्रिय पड़ी रकम का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है, जबकि जरूरत पड़ने पर धन तक आसान पहुंच भी बनी रहेगी.
ऑटो और वन-टाइम निवेश दोनों की सुविधा
‘सेविंग्स प्रो’ फीचर ग्राहकों को दो तरह के निवेश विकल्प उपलब्ध कराता है. पहला, ऑटो इन्वेस्ट फीचर, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक राशि का निवेश प्रतिदिन स्वतः हो जाता है. दूसरा, वन-टाइम इन्वेस्टमेंट विकल्प, जिसके जरिए ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार तत्काल निवेश कर सकते हैं. ग्राहक 5,000 रुपये से लेकर 1.50 लाख रुपये तक की निवेश सीमा निर्धारित कर सकते हैं. प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिदिन अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है.
निवेश के साथ लिक्विडिटी भी बरकरार
इस सुविधा को इस तरह डिजाइन किया गया है कि ग्राहक अपने अतिरिक्त धन पर संभावित रिटर्न हासिल करने के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर उसे आसानी से निकाल भी सकें. ग्राहक तत्काल आधार पर 50,000 रुपये तक या निवेशित राशि के 90 प्रतिशत तक, जो भी कम हो, निकाल सकते हैं. इससे अधिक राशि की निकासी के अनुरोध नियामकीय नियमों के अनुसार T+1 आधार पर प्रोसेस किए जाएंगे, यानी धनराशि अगले कारोबारी दिन उपलब्ध होगी.
निवेश को लोकतांत्रिक बनाने की दिशा में कदम
जियोब्लैकरॉक एसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सिड स्वामीनाथन ने कहा कि आज ग्राहक अपने अतिरिक्त धन को प्रबंधित करने के लिए सरल और सुविधाजनक विकल्प चाहते हैं. उनके अनुसार यह इंटीग्रेशन डिजिटल बैंकिंग और निवेश को एक साथ लाकर ग्राहकों को पारदर्शी और सहज निवेश अनुभव प्रदान करेगा. उन्होंने कहा कि यह पहल अधिक से अधिक लोगों तक निवेश सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है.
ग्राहकों के लिए बेहतर डिजिटल बैंकिंग अनुभव
जियो पेमेंट्स बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विनोद ईश्वरन ने कहा कि बैंक लगातार ग्राहकों के लिए डिजिटल वित्तीय सेवाओं को बेहतर बनाने पर काम कर रहा है. उनके अनुसार ‘सेविंग्स प्रो’ फीचर ग्राहकों को अतिरिक्त धन का बेहतर प्रबंधन करने और जरूरत पड़ने पर आसान लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद करेगा.
पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से जुड़ सकेंगे ग्राहक
यह सुविधा जियो पेमेंट्स बैंक के बचत और सैलरी अकाउंट धारकों के लिए उपलब्ध है. ग्राहक आधार आधारित प्रमाणीकरण और वीडियो केवाईसी के जरिए जियोफाइनेंस ऐप पर पूरी तरह डिजिटल प्रक्रिया से खाता खोल सकते हैं और सेवा का लाभ उठा सकते हैं.
इसके अलावा ग्राहक अपनी निवेश सीमा तय करने या बदलने, निवेश की निगरानी करने और सभी लेनदेन को ट्रैक करने जैसी सुविधाओं का भी उपयोग कर सकेंगे.
एकीकृत वित्तीय इकोसिस्टम की ओर बढ़ता कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह इंटीग्रेशन बैंकिंग और निवेश सेवाओं को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. इससे ग्राहकों को रोजमर्रा की बैंकिंग जरूरतों के साथ-साथ निवेश संबंधी सुविधाएं भी एकीकृत रूप में उपलब्ध होंगी, जिससे डिजिटल वित्तीय सेवाओं का उपयोग और अधिक आसान बन सकेगा.
(नोट: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं. निवेश से पहले योजना से संबंधित सभी दस्तावेजों को ध्यानपूर्वक पढ़ें.)
भारत में निर्मित रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इनमें रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम, मिसाइल, गोला-बारूद, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और नौसैनिक उपकरण प्रमुख हैं.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत का रक्षा क्षेत्र तेजी से वैश्विक पहचान बना रहा है. 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन और निर्यात को बढ़ावा देने की नीति अब ठोस परिणाम देती नजर आ रही है. वित्त वर्ष 2025-26 में देश का रक्षा निर्यात 63 प्रतिशत की वृद्धि के साथ रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपये पर पहुंच गया. यह वित्त वर्ष 2016-17 की तुलना में करीब 25 गुना अधिक है. बढ़ते निर्यात और सरकारी प्रोत्साहन से रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं, जिस पर निवेशकों की भी पैनी नजर है.
80 से अधिक देशों तक पहुंच रहे भारतीय रक्षा उत्पाद
भारत में निर्मित रक्षा उपकरण अब दुनिया के 80 से ज्यादा देशों को निर्यात किए जा रहे हैं. इनमें रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, रडार सिस्टम, मिसाइल, गोला-बारूद, एयरोस्पेस कंपोनेंट्स और नौसैनिक उपकरण प्रमुख हैं.
रक्षा निर्यात में इस तेज बढ़ोतरी के पीछे सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. वित्त वर्ष 2025-26 में कुल रक्षा निर्यात में रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों (DPSU) की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले 43.8 प्रतिशत थी. वहीं निजी क्षेत्र का योगदान 45 प्रतिशत रहा, जो रक्षा उद्योग में उसकी बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है.
FY29 तक 50,000 करोड़ रुपये निर्यात का लक्ष्य
सरकार ने वित्त वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है. इसके लिए स्वदेशी तकनीक के विकास, स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देने और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की भागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है.
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारतीय रक्षा कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से बड़े ऑर्डर मिल सकते हैं, जिससे इस क्षेत्र की विकास गति और तेज हो सकती है.
Astra Microwave पर बढ़ी बाजार की नजर
रक्षा और एयरोस्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स् (Astra Microwave Products) इस उभरते अवसर का लाभ उठाने की स्थिति में दिखाई दे रही है. कंपनी रडार, टैक्टिकल सिस्टम और स्पेस इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्माण करती है तथा अमेरिका, इजराइल और सिंगापुर समेत कई देशों को निर्यात करती है.
वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी के कुल राजस्व का लगभग 12 प्रतिशत हिस्सा निर्यात से आया. कंपनी अब कम मार्जिन वाले कारोबार से हटकर बौद्धिक संपदा (IP) आधारित उत्पादों और उच्च मूल्य वाले प्रोजेक्ट्स पर फोकस कर रही है.
31 मार्च 2026 तक कंपनी की ऑर्डर बुक 2,600 करोड़ रुपये की थी. इसी अवधि में उसका राजस्व 10.6 प्रतिशत बढ़कर 1,163 करोड़ रुपये और EBITDA 24 प्रतिशत बढ़कर 334 करोड़ रुपये पर पहुंच गया.
निवेशकों के लिए क्यों अहम है डिफेंस सेक्टर
विश्लेषकों के अनुसार, रक्षा निर्यात में लगातार वृद्धि, आत्मनिर्भरता पर सरकार का जोर और वैश्विक स्तर पर बढ़ती मांग भारतीय डिफेंस सेक्टर के लिए लंबी अवधि के मजबूत अवसर तैयार कर रही है.
ऐसे में रक्षा कंपनियों के शेयर निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. यदि सरकार अपने निर्यात लक्ष्यों को हासिल करने में सफल रहती है, तो आने वाले वर्षों में डिफेंस सेक्टर भारतीय शेयर बाजार के सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में शामिल हो सकता है.
सुभाष चंद्रा ने यह संपत्ति वर्ष 2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी. प्रस्तावित बिक्री मूल्य के आधार पर पिछले एक दशक में इस संपत्ति का मूल्य चार गुना से अधिक बढ़ चुका है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
एस्सेल समूह (Essel Group) के चेयरमैन सुभाष चंद्रा ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित लुटियंस बंगला क्षेत्र में स्थित अपने 2.8 एकड़ के आवासीय परिसर को 1,260 करोड़ रुपये में बेचने पर सहमति जताई है. यह सौदा देश के आवासीय रियल एस्टेट क्षेत्र की सबसे बड़ी डील्स में से एक माना जा रहा है. इस लेनदेन के दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है.
2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी संपत्ति
सुभाष चंद्रा ने यह संपत्ति वर्ष 2015 में 304 करोड़ रुपये में खरीदी थी. प्रस्तावित बिक्री मूल्य के आधार पर पिछले एक दशक में इस संपत्ति का मूल्य चार गुना से अधिक बढ़ चुका है. यह वृद्धि दिल्ली के प्रीमियम रियल एस्टेट बाजार में तेजी से बढ़ती कीमतों को दर्शाती है.
लुटियंस बंगला क्षेत्र की दुर्लभ संपत्तियों में शामिल
भगवान दास रोड पर स्थित यह संपत्ति राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित और कड़े नियामकीय नियंत्रण वाले आवासीय इलाकों में से एक लुटियंस बंगला क्षेत्र का हिस्सा है. यहां बड़े भूखंडों वाली संपत्तियां बहुत कम बिक्री के लिए उपलब्ध होती हैं. इस इलाके में वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, न्यायाधीश, राजनयिक और चुनिंदा उद्योगपति निवास करते हैं.
सीमित आपूर्ति से बनी रहती है ऊंची मांग
विशेषज्ञों के अनुसार, लुटियंस क्षेत्र में जमीन की सीमित उपलब्धता और सख्त विकास नियमों के कारण संपत्तियों का मूल्य लगातार ऊंचा बना रहता है. यहां संपत्ति के सौदे कम होते हैं, इसलिए हर बड़ा लेनदेन देश के अल्ट्रा-लक्जरी आवासीय बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है.
हाई-वैल्यू एसेट मोनेटाइजेशन पर भी नजर
यह सौदा ऐसे समय में सामने आया है जब देश के कई प्रमुख कारोबारी परिवार अपनी उच्च-मूल्य वाली परिसंपत्तियों के मुद्रीकरण पर ध्यान दे रहे हैं. हालांकि भगवान दास रोड स्थित यह बंगला सुभाष चंद्रा की व्यक्तिगत संपत्ति है, फिर भी इतने बड़े पैमाने का लेनदेन धन प्रबंधन और पूंजी आवंटन के व्यापक रुझानों को लेकर चर्चा का विषय बनता है.
दिल्ली के लक्जरी हाउसिंग बाजार में नया बेंचमार्क
1,260 करोड़ रुपये के प्रस्तावित मूल्य के साथ यह सौदा दिल्ली के लक्जरी आवासीय बाजार में एक नया मानक स्थापित कर सकता है. साथ ही यह राष्ट्रीय राजधानी के केंद्र में स्थित दुर्लभ और सीमित भूमि परिसंपत्तियों की लगातार बनी हुई मांग को भी रेखांकित करता है.
रेल मंत्रालय ने इस कॉरिडोर को भारतीय रेलवे की मिशन 3000 एमटी और हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) कॉरिडोर पहल के तहत चिन्हित किया है.
by
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय रेलवे ने छत्तीसगढ़ में 42 किलोमीटर लंबी चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी है. लगभग 755 करोड़ रुपये की लागत वाली यह परियोजना देश के प्रमुख कोयला उत्पादक क्षेत्रों में माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और ऊर्जा क्षेत्र की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है. इस परियोजना का निर्माण साउथ ईस्ट सेंट्रल रेलवे द्वारा किया जाएगा. इसके तहत चांपा और कोरबा के बीच तीसरी रेलवे लाइन बिछाई जाएगी. हालांकि पहले से स्वीकृत मदवारानी-सरागबुंदिया खंड को इसमें शामिल नहीं किया गया है.
मिशन 3000 एमटी के तहत महत्वपूर्ण परियोजना
रेल मंत्रालय ने इस कॉरिडोर को भारतीय रेलवे की मिशन 3000 एमटी और हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN) कॉरिडोर पहल के तहत चिन्हित किया है. इन पहलों का उद्देश्य माल परिवहन क्षमता को बढ़ाना और देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं को समर्थन देना है.
कोयला परिवहन का प्रमुख केंद्र है कोरबा
Korba को अक्सर "भारत की पावर कैपिटल" कहा जाता है. यहां कई ताप विद्युत संयंत्र स्थित हैं और यह देश में कोयला परिवहन का एक प्रमुख केंद्र भी है. चांपा-कोरबा रेलखंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड (South Eastern Coalfields Limited) और महानदी कोलफील्ड (Mahanadi Coalfields Limited) द्वारा संचालित कोयला खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क तथा मुंबई-हावड़ा हाई डेंसिटी कॉरिडोर से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.
मौजूदा नेटवर्क पर बढ़ रहा दबाव
वर्तमान में इस रेलखंड पर प्रतिदिन लगभग 10 जोड़ी यात्री ट्रेनें और 55 जोड़ी मालगाड़ियां संचालित होती हैं. हालांकि क्षेत्र में लगातार बढ़ते कोयला उत्पादन के कारण रेलवे नेटवर्क पर दबाव भी बढ़ रहा है. रेलवे के अनुसार, SECL और MCL की संयुक्त कोयला उत्पादन क्षमता वर्तमान में लगभग 247 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) है, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर लगभग 450 एमटीपीए तक पहुंचने की संभावना है.
इस विस्तार से करीब 200 एमटीपीए अतिरिक्त कोयला यातायात उत्पन्न होगा, जिसके लिए रेलवे क्षमता का विस्तार आवश्यक माना जा रहा है.
माल ढुलाई और यात्री सेवाओं को मिलेगा लाभ
रेलवे अधिकारियों के अनुसार तीसरी रेल लाइन बनने से इस व्यस्त मार्ग की वहन क्षमता, परिचालन लचीलापन और ट्रेन संचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा. परियोजना पूरी होने के बाद प्रतिदिन दोनों दिशाओं में दो अतिरिक्त जोड़ी यात्री ट्रेनों का संचालन संभव हो सकेगा. इसके अलावा लगभग 5.95 एमटीपीए अतिरिक्त माल परिवहन की सुविधा भी उपलब्ध होगी.
रेलवे की आय में होगा इजाफा
रेलवे का अनुमान है कि इस परियोजना से सालाना लगभग 85 करोड़ रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय होगी. इसमें 82 करोड़ रुपये माल ढुलाई परिचालन से तथा 3 करोड़ रुपये यात्री सेवाओं से प्राप्त होने की संभावना है.
परिचालन लागत में भी होगी बचत
नई रेल लाइन से मालगाड़ियों की रुकावट और देरी में कमी आएगी. वर्तमान में इस मार्ग पर मालगाड़ियों को दोनों दिशाओं में औसतन पांच मिनट तक रुकना पड़ता है. रेलवे का मानना है कि परिचालन दक्षता बढ़ने से हर वर्ष करीब 1.30 करोड़ रुपये की बचत भी हो सकेगी.
ऊर्जा और बुनियादी ढांचे के विकास को मिलेगा बल
अधिकारियों के अनुसार यह परियोजना सरकार के रेल अवसंरचना विस्तार, लॉजिस्टिक्स दक्षता सुधार और बिजली उत्पादन के लिए निर्बाध कोयला आपूर्ति सुनिश्चित करने के व्यापक लक्ष्य के अनुरूप है. चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना के पूरा होने से देश के प्रमुख कोयला क्षेत्र में कनेक्टिविटी मजबूत होगी, माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी और भारत के दीर्घकालिक ऊर्जा एवं अवसंरचना विकास लक्ष्यों को समर्थन मिलेगा.