BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026: 59 श्रेणियों में होगा मार्केटिंग उत्कृष्टता का सम्मान, उद्योग जगत के दिग्गज जूरी में शामिल

एयर इंडिया एक्सप्रेस, TCS, JSW, पॉलिसीबाजार और HDFC लाइफ समेत कई दिग्गज कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी जूरी में शामिल होंगे.

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Wednesday, 17 June, 2026
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मार्केटिंग, ब्रांडिंग और कम्युनिकेशन क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों को सम्मानित करने वाला BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 अपने चौथे संस्करण के साथ 18 जून को मुंबई में आयोजित होने जा रहा है. यह आयोजन देश के प्रमुख मार्केटिंग पेशेवरों, ब्रांड लीडर्स और कम्युनिकेशन विशेषज्ञों को एक मंच पर लाएगा. अवॉर्ड्स का उद्देश्य उन अभियानों, ब्रांड्स और व्यक्तियों को सम्मानित करना है जिन्होंने उपभोक्ता जुड़ाव और व्यवसायिक विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया है.

मार्केटिंग उत्कृष्टता को मिलेगा सम्मान

BW मेरिट अवॉर्ड्स उन पहलों को पहचान देता है जो केवल दृश्यता तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि वास्तविक प्रभाव भी पैदा करती हैं. पुरस्कारों के माध्यम से रचनात्मकता, नवाचार, रणनीतिक सोच और मापनीय परिणामों को महत्व दिया जाता है. इसका लक्ष्य ऐसे विचारों और अभियानों को सामने लाना है जो पारंपरिक सोच को चुनौती देते हुए मार्केटिंग के नए मानक स्थापित करते हैं.

उद्योग के दिग्गजों से सजी जूरी

अवॉर्ड्स के मूल्यांकन को निष्पक्ष, पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए इस वर्ष एक मजबूत जूरी पैनल का गठन किया गया है. इसमें विभिन्न क्षेत्रों की अग्रणी कंपनियों के वरिष्ठ मार्केटिंग और ब्रांड विशेषज्ञ शामिल हैं.

जूरी में एफी लायंस फाउंडेशन के बोर्ड सदस्य शुभ्रांशु सिंह, JSW स्टील के हेड मार्केटिंग तरुण झा, TCS के ग्लोबल हेड-मार्केटिंग डिमांड सेंटर अमित तिवारी, एयर इंडिया एक्सप्रेस के मुख्य विपणन अधिकारी सिद्धार्थ बुटालिया, पॉलिसीबाजार के मुख्य विपणन अधिकारी साई नारायण और HDFC लाइफ की हेड मार्केटिंग एवं CSR प्रितिका शाह सहित कई प्रमुख नाम शामिल हैं.

इसके अलावा मोटरोला मोबिलिटी, JSW MG मोटर इंडिया, ITC, MRF टायर्स, वोडाफोन आइडिया, वुडलैंड और नारायणा हेल्थ जैसी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी भी जूरी का हिस्सा होंगे.

59 श्रेणियों में दिए जाएंगे पुरस्कार

BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 में कुल 59 श्रेणियों में पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे. इन्हें पांच प्रमुख वर्गों में विभाजित किया गया है:

बेस्ट यूज ऑफ चैनल्स एंड प्लेटफॉर्म्स- इस श्रेणी में कंटेंट, मीडिया, डिजिटल और सोशल मीडिया, इन्फ्लुएंसर मार्केटिंग तथा इवेंट्स के प्रभावी उपयोग को सम्मानित किया जाएगा.

बेस्ट इन सेक्टर्स- ऑटोमोबाइल, BFSI, कंज्यूमर टेक, इलेक्ट्रॉनिक्स, शिक्षा, ऊर्जा, FMCG, हेल्थकेयर, मीडिया एवं एंटरटेनमेंट, रियल एस्टेट, रिटेल, ई-कॉमर्स, स्पोर्ट्स और ट्रैवल जैसे क्षेत्रों में बेहतरीन मार्केटिंग पहलों को पुरस्कृत किया जाएगा.

बेस्ट ऑफ कैंपेन- इस श्रेणी में CSR कैंपेन, रीजनल मार्केटिंग, स्मॉल बजट कैंपेन, टेक्नोलॉजी-सक्षम अभियान, डिजिटल कैंपेन, SEO, ऑर्गेनिक कंटेंट, वायरल इन्फ्लुएंसर कैंपेन, फेस्टिव मार्केटिंग और वर्ष के सर्वश्रेष्ठ मार्केटिंग अभियान जैसी श्रेणियां शामिल हैं.

युवा पेशेवरों को भी मिलेगा मंच -अवॉर्ड्स में व्यक्तिगत उत्कृष्टता को भी मान्यता दी जाएगी. इसके तहत 35 वर्ष से कम आयु के पेशेवरों के लिए 'मार्केटिंग इनोवेटर ऑफ द ईयर', 'बेस्ट मार्केटिंग कम्युनिकेशन प्रोफेशनल' और 'बेस्ट डिजिटल मार्केटिंग प्रोफेशनल' जैसी श्रेणियां रखी गई हैं.

ब्रांड निर्माण के विभिन्न चरणों पर फोकस

'स्टेजेज ऑफ ब्रांडिंग' श्रेणी के तहत कैटेगरी क्रिएशन, नए उत्पाद का लॉन्च, ब्रांड एक्सटेंशन, ब्रांड री-जुवेनेशन, ट्रांसफॉर्मेशनल ग्रोथ, कस्टमर एक्सपीरियंस, कस्टमर रिलेशनशिप मार्केटिंग और डेटा एवं AI के उपयोग जैसी पहलों को सम्मानित किया जाएगा.

सीखने और नेटवर्किंग का भी मिलेगा अवसर

BW मेरिट अवॉर्ड्स 2026 केवल पुरस्कार समारोह तक सीमित नहीं रहेगा. यह कार्यक्रम उद्योग जगत के पेशेवरों, एजेंसियों, ब्रांड्स और नवोन्मेषकों को एक-दूसरे से सीखने, विचार साझा करने और सहयोग के अवसर भी प्रदान करेगा.

आयोजकों के अनुसार, यह मंच उन दूरदर्शी नेताओं और प्रभावशाली अभियानों का जश्न मनाएगा जो लगातार मार्केटिंग उत्कृष्टता की परिभाषा को नया स्वरूप दे रहे हैं और उद्योग के भविष्य को दिशा प्रदान कर रहे हैं.
 


आंध्र प्रदेश में बनेगा 12 लाख ग्रॉस टनेज क्षमता वाला मेगा शिपयार्ड, ₹15 हजार करोड़ निवेश

इस पूरे क्लस्टर के लिए आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी ने मिलकर NSHIP-AP नाम की विशेष कंपनी बनाई है. इस परियोजना के लिए MDL को एंकर शिपयार्ड के तौर पर चुना गया है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Saturday, 19 September, 2026
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Saturday, 19 September, 2026
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भारत के जहाज निर्माण उद्योग को बड़े पैमाने पर विस्तार देने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है. आंध्र प्रदेश के दुगाराजपट्टनम में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) एक आधुनिक ग्रीनफील्ड मेगा शिपयार्ड विकसित करेगा. प्रस्तावित परियोजना में अगले 5 से 7 वर्षों के दौरान करीब 15,000 करोड़ रुपये के निवेश की योजना है. इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 45 हजार रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है. यह परियोजना भारत को 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल करने के लक्ष्य के अनुरूप है.

MDL और NSHIP-AP के बीच हुआ समझौता

इस परियोजना के लिए MDL और नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क-आंध्र प्रदेश (NSHIP-AP) के बीच 18 सितंबर 2026 को समझौता हुआ. यह करार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की मौजूदगी में किया गया. MDL के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर कैप्टन जगमोहन (रिटायर्ड) और NSHIP-AP के मैनेजिंग डायरेक्टर सीवी प्रवीण आदित्य ने समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए.

7 साल में 15 हजार करोड़ रुपये का निवेश

दुगाराजपट्टनम में प्रस्तावित शिपयार्ड में अगले 5 से 7 वर्षों के दौरान करीब 15,000 करोड़ रुपये निवेश किए जाने की योजना है. हालांकि, निवेश की योजना जरूरी मंजूरियों और नियामकीय क्लीयरेंस पर निर्भर करेगी. परियोजना के पूरी तरह विकसित होने पर करीब 45 हजार लोगों के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बनने की उम्मीद है.

सालाना 12 लाख ग्रॉस टनेज की क्षमता

प्रस्तावित शिपयार्ड की डिजाइन क्षमता सालाना 12 लाख ग्रॉस टनेज होगी. बाजार की मांग और जरूरतों के आधार पर भविष्य में इसकी क्षमता का विस्तार भी किया जा सकेगा. यहां टैंकर, बल्क कैरियर, कंटेनर जहाज, LNG कैरियर समेत कई तरह के बड़े और विशेष व्यावसायिक जहाज बनाए जाएंगे.

29,254 करोड़ रुपये का शिपबिल्डिंग और पोर्ट क्लस्टर

आंध्र प्रदेश सरकार दुगाराजपट्टनम में एक बड़े शिपबिल्डिंग और पोर्ट क्लस्टर के विकास की योजना पर काम कर रही है. टेक्नो-इकोनॉमिक फिजिबिलिटी रिपोर्ट (TEFR) के मुताबिक, शिपबिल्डिंग और शिप रिपेयर यार्ड की अनुमानित लागत करीब 29,254 करोड़ रुपये है. वहीं, पोर्ट के विकास पर लगभग 9,513 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है.

पोर्ट को केंद्र सरकार की ओर से विकसित किए जाने का प्रस्ताव है. इस पूरे क्लस्टर के लिए आंध्र प्रदेश मैरीटाइम बोर्ड और विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी ने मिलकर NSHIP-AP नाम की विशेष कंपनी बनाई है. इस परियोजना के लिए MDL को एंकर शिपयार्ड के तौर पर चुना गया है.

युद्धपोत से कमर्शियल शिपबिल्डिंग तक MDL का विस्तार

यह परियोजना MDL के लिए व्यावसायिक जहाज निर्माण के क्षेत्र में विस्तार का महत्वपूर्ण कदम है. MDL अब तक मुख्य रूप से युद्धपोतों और पनडुब्बियों के निर्माण के लिए जाना जाता रहा है. दुगाराजपट्टनम परियोजना के जरिए कंपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए बड़े कमर्शियल जहाजों के निर्माण की क्षमता विकसित करेगी.

यह परियोजना केंद्र सरकार की शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SbDS) और मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 के अनुरूप है. इससे जहाज निर्माण के साथ मरीन इंजीनियरिंग, शिप रिपेयर और इससे जुड़े सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

भारत को टॉप 5 शिपबिल्डिंग देशों में लाने का लक्ष्य

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि भारत ने 2047 तक दुनिया के शीर्ष 5 जहाज निर्माण देशों में शामिल होने का लक्ष्य रखा है. उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश अपनी लंबी समुद्री तटरेखा, रणनीतिक स्थिति और औद्योगिक क्षमता के जरिए इस लक्ष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है.

दुगाराजपट्टनम में शिपबिल्डिंग क्लस्टर के विकास से आंध्र प्रदेश के एक प्रमुख जहाज निर्माण केंद्र के रूप में उभरने की उम्मीद है. इससे राज्य में सहायक उद्योगों, निवेश और रोजगार को भी बढ़ावा मिल सकता है.

MDL के CMD कैप्टन जगमोहन (रिटायर्ड) के मुताबिक, दुगाराजपट्टनम में वैश्विक स्तर का शिपयार्ड विकसित करने की क्षमता है. परियोजना से जहाज निर्माण के साथ मरीन इंजीनियरिंग और सहायक उद्योगों का एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित करने में मदद मिलेगी.

 


Infosys के सीनियर VP बोले, सेमीकंडक्टर में भारत के लिए ‘Invent in India’ का बड़ा मौका

Semicon India 2026 में मेघल ने कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की पारंपरिक सप्लाई चेन और डिजाइन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हो रहा है. खासकर AI आधारित वर्कलोड यह तय कर रहे हैं कि चिप्स को किस तरह डिजाइन किया जाए.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2026
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Friday, 18 September, 2026
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), वैश्विक सप्लाई चेन में बदलाव और चिप डिजाइन में हो रहे परिवर्तन भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के लिए नई मांग और अवसर पैदा कर रहे हैं. Infosys के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट विक्रम मेघल के मुताबिक, भारत इस समय सेमीकंडक्टर क्षेत्र में “एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाली मांग की खिड़की” का सामना कर रहा है. हालांकि, इस अवसर का लाभ उठाने के लिए भारत को केवल इंजीनियरिंग क्षमताओं तक सीमित रहने के बजाय पूरे सिस्टम और प्रोडक्ट के विकास में बड़ी भूमिका निभानी होगी.

Semicon India 2026 में बोलते हुए मेघल ने कहा कि सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की पारंपरिक सप्लाई चेन और डिजाइन प्रक्रिया में बड़ा बदलाव हो रहा है. खासकर AI आधारित वर्कलोड यह तय कर रहे हैं कि चिप्स को किस तरह डिजाइन किया जाए. इसके साथ ही इंडस्ट्री Moore's Law से आगे बढ़कर सिस्टम-लेवल स्केलिंग की दिशा में जा रही है.

AI बढ़ा रहा चिप्स की मांग

मेघल के मुताबिक, AI से सेमीकंडक्टर की मांग में बड़ा इजाफा हो रहा है. आने वाले वर्षों में डेटा सेंटर पर खर्च करीब 6.7 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. इसमें लगभग आधा खर्च कंप्यूट, मेमोरी और नेटवर्किंग चिप्स पर होने की उम्मीद है.

उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री ऐसे मॉडल की ओर बढ़ रही है, जहां चिप्स यह तय नहीं करते कि वर्कलोड किस तरह होगा, बल्कि वर्कलोड के आधार पर चिप डिजाइन किया जा रहा है. इससे उन देशों के लिए अवसर बढ़ रहे हैं, जो सिर्फ चिप इंजीनियरिंग ही नहीं, बल्कि खास एप्लिकेशन के लिए प्रोडक्ट और सिस्टम विकसित करने में भी सक्षम हैं. मेघल ने भारत के लिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र में तीन प्रमुख मांग के अवसर बताए हैं- 'Made for India', 'Engineered in India' और 'Invent in India'.

'Made for India' में लोकलाइजेशन का अवसर

'Made for India' के तहत घरेलू बाजार के लिए प्रोडक्ट और कंपोनेंट के लोकलाइजेशन पर जोर है. मेघल ने कहा कि मोबाइल फोन के क्षेत्र में लोकलाइजेशन की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन घरेलू कंटेंट फिलहाल करीब 23% है. ऐसे में अगले चार से पांच वर्षों में इस क्षेत्र में विस्तार की काफी गुंजाइश है.

'Engineered in India' से आगे बढ़ने की जरूरत

दूसरा अवसर 'Engineered in India' का है, जहां भारत अपनी मौजूदा इंजीनियरिंग और रिसर्च एंड डेवलपमेंट क्षमताओं का इस्तेमाल कर सकता है. मेघल के अनुसार, आने वाले वर्षों में इंजीनियरिंग और R&D पर खर्च मौजूदा स्तर से 1.8 गुना बढ़ने की उम्मीद है.

हालांकि, उन्होंने कहा कि इससे भी बड़ा अवसर 'Invent in India' में है. खासकर कस्टम चिप्स का वैश्विक बाजार बढ़ने के साथ भारतीय कंपनियों के लिए एप्लिकेशन-स्पेसिफिक सिलिकॉन विकसित करने की संभावनाएं बढ़ रही हैं. इससे भारतीय कंपनियां इनोवेशन और प्रोडक्ट ओनरशिप से जुड़े मूल्य का बड़ा हिस्सा हासिल कर सकती हैं.

इंजीनियरिंग से इनोवेशन की ओर बढ़े भारत

मेघल ने कहा कि भारत ने बड़े पैमाने पर इंजीनियरिंग क्षमताएं विकसित की हैं, लेकिन अब अगला चरण भारत से वैश्विक बाजारों के लिए प्रोडक्ट विकसित करने का होना चाहिए.

उन्होंने कहा कि अब तक भारत मुख्य रूप से 'Engineered in India' से मिलने वाली वैल्यू हासिल करता रहा है. अब वैश्विक प्रोडक्ट के जरिए इनोवेशन वैल्यू हासिल करने और भारत में ही नए प्रोडक्ट विकसित करने की क्षमता तैयार करने की जरूरत है. उनके मुताबिक, इससे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को तैयार करने में पिछले दशकों में किए गए निवेश का बेहतर इस्तेमाल हो सकेगा.

सेमीकंडक्टर निवेश में 'स्ट्रैटेजिक पेशेंस' जरूरी

मेघल ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों से 'स्ट्रैटेजिक पेशेंस' अपनाने की अपील की. उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में क्षमताएं विकसित करने के लिए बड़े निवेश और लंबी अवधि की जरूरत होती है.

उन्होंने कंपनियों से मजबूत प्रोडक्ट माइंडसेट अपनाने, रेगुलेटरी कंप्लायंस पर अधिक ध्यान देने और केवल सिलिकॉन तक सीमित रहने के बजाय पूरी टेक्नोलॉजी स्टैक पर स्वामित्व विकसित करने की दिशा में काम करने को कहा.
 


RBI की 50,000 करोड़ रुपये की OMO बिक्री में 66,590 करोड़ रुपये की बोलियां

RBI ने बाजार में चल रही यील्ड से अधिक यील्ड पर सरकारी प्रतिभूतियों को स्वीकार किया. इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने बॉन्ड खरीदने के लिए प्रीमियम यील्ड की मांग की.

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Published - Friday, 18 September, 2026
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Friday, 18 September, 2026
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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की 50,000 करोड़ रुपये की पहली ओपन मार्केट ऑपरेशन (OMO) बॉन्ड बिक्री को निवेशकों से मजबूत प्रतिक्रिया मिली. नीलामी में नोटिफाइड राशि के मुकाबले 66,590 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं. केंद्रीय बैंक ने बैंकिंग सिस्टम में मौजूद अतिरिक्त नकदी यानी सरप्लस लिक्विडिटी को कम करने के लिए सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री की.

RBI ने बाजार में चल रही यील्ड से अधिक यील्ड पर सरकारी प्रतिभूतियों को स्वीकार किया. इससे संकेत मिलता है कि निवेशकों ने बॉन्ड खरीदने के लिए प्रीमियम यील्ड की मांग की. यह सितंबर में RBI की कुल 1 लाख करोड़ रुपये की प्रस्तावित OMO बिक्री की पहली किस्त है.

सरप्लस लिक्विडिटी घटाने की कोशिश

RBI सीधे तौर पर सरकारी बॉन्ड बेचकर बैंकिंग सिस्टम से टिकाऊ लिक्विडिटी निकाल रहा है. इसका उद्देश्य वेटेड एवरेज कॉल रेट (WACR) को नीतिगत रेपो रेट 5.25% के करीब लाना है. गुरुवार को WACR करीब 5.05% रहा, जो जुलाई के अंत से लगातार रेपो रेट से नीचे बना हुआ है.

5 साल के बॉन्ड की यील्ड कट-ऑफ ज्यादा

8.28% GS 2032 बॉन्ड के लिए सबसे ज्यादा 19,700 करोड़ रुपये की बोलियां मिलीं. वहीं, 5 साल के 6.68% GS 2031 बॉन्ड के लिए 7,970 करोड़ रुपये की बोलियां आईं. 5 साल के सरकारी बॉन्ड की कट-ऑफ यील्ड 6.90% रही, जबकि गुरुवार को बाजार बंद होने पर इसकी यील्ड 6.78% थी. इसी तरह 6.79% GS 2029 को 6.70% की कट-ऑफ यील्ड पर स्वीकार किया गया, जबकि पिछली क्लोजिंग यील्ड 6.66% थी.

बाजार यील्ड से अधिक कट-ऑफ के बावजूद मजबूत मांग ने बॉन्ड यील्ड पर तत्काल दबाव को सीमित रखा. गुरुवार को बेंचमार्क 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड करीब 7.05% पर बंद हुई.

21 और 28 सितंबर को भी OMO बिक्री

16 सितंबर को बैंकिंग सिस्टम में नेट लिक्विडिटी सरप्लस करीब 7.37 लाख करोड़ रुपये रहा, जो एक दिन पहले 9.85 लाख करोड़ रुपये था. इस महीने की शुरुआत में सरप्लस रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचने के बाद हाल में टैक्स भुगतान और अन्य लिक्विडिटी गतिविधियों के चलते इसमें कमी आई है.

RBI अब 21 सितंबर को 25,000 करोड़ रुपये की एक और OMO बिक्री करेगा. इसके बाद 28 सितंबर को भी इतनी ही राशि की बॉन्ड बिक्री प्रस्तावित है. इसके अलावा केंद्रीय बैंक 2.25 लाख करोड़ रुपये की तीन दिवसीय वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑपरेशन भी कर रहा है.

RBI की ये लिक्विडिटी मैनेजमेंट कार्रवाइयां ऐसे समय में हो रही हैं जब लंबी अवधि वाली VRRR नीलामियों को अपेक्षाकृत सीमित मांग मिली है. केंद्रीय बैंक जरूरत पड़ने पर आगे भी OMO बिक्री कर सकता है, ताकि अतिरिक्त लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के साथ मौद्रिक नीति का असर मजबूत हो और शॉर्ट-टर्म बाजार दरें रेपो रेट के अनुरूप बनी रहें.
 


टूल एंड इक्विपमेंट एक्स्पो: हैंड टूल्स से स्मार्ट ऑटोमेशन तक, मैन्युफैक्चरिंग में तकनीक का नया दौर

एक्सपो में एक 'इनोवेशन गैलरी' तैयार की गई है, जिसमें 200 से अधिक प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया गया है. इस गैलरी उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उभरती तकनीकों, नए विचारों और इनोवेटिव समाधानों को सामने लाना है.

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Published - Friday, 18 September, 2026
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Friday, 18 September, 2026
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भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इंडस्ट्री 4.0, स्मार्ट ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ एमएसएमई के तकनीकी उन्नयन पर जोर बढ़ रहा है. नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 'टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026' में हैंड और पावर टूल्स से लेकर कटिंग एवं वेल्डिंग तकनीक और स्मार्ट ऑटोमेशन तक के समाधान प्रदर्शित किए जा रहे हैं. इस बार एक्सपो में खास तौर पर 'इनोवेशन गैलरी' भी तैयार किया गया है, जहां नई तकनीकों और इनोवेटिव समाधानों को एक अलग मंच दिया गया है. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, तकनीक के साथ कौशल विकास और कार्यस्थल सुरक्षा को मजबूत करना भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए अहम होगा.

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया द्वारा आयोजित इस एक्सपो में 300 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं. जर्मनी, चीन, ताइवान और हांगकांग की भागीदारी भी देखने को मिल रही है. प्रदर्शनी में टूल्स और उपकरणों के साथ मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को अधिक स्मार्ट, ऑटोमेटेड और कुशल बनाने वाली तकनीकों पर भी फोकस किया गया है.

इनोवेशन गैलरी में नई तकनीकों पर फोकस

एक्सपो में तैयार किया गया 'इनोवेशन गैलरी' इस आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है. इसमें 200 से अधिक प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया गया है. इस गैलरी उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उभरती तकनीकों, नए विचारों और इनोवेटिव समाधानों को सामने लाना है. इससे उद्योग जगत, एमएसएमई और तकनीकी विशेषज्ञों को नई तकनीकों को समझने और उनके संभावित इस्तेमाल पर चर्चा करने का अवसर मिल रहा है.

एमएसएमई में इंडस्ट्री 4.0 का बढ़ता दायरा

एनपीसी-डीपीआईआईटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उप निदेशक यदु कुमार यादव के मुताबिक, भारत के विनिर्माण विकास का अगला चरण एमएसएमई को लीन मैन्युफैक्चरिंग से इंडस्ट्री 4.0 और आईओटी आधारित प्रणालियों की ओर ले जाने पर निर्भर करेगा. पिछले एक दशक में एमएसएमई के उत्पादों, प्रक्रियाओं और प्रणालियों को एकीकृत करने पर जोर रहा है, जबकि अब डिजिटल एकीकरण अगला कदम है. उन्होंने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय की RAMP योजना के तहत गुजरात में 750 से अधिक इकाइयों को इंडस्ट्री 4.0 इकोसिस्टम से जोड़ा जा रहा है. इसी तरह के इकोसिस्टम देश के अन्य हिस्सों में भी विकसित करने की योजना है.

कटिंग टूल बाजार में भारत के लिए अवसर

इंडियन कटिंग टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव पीजी सुब्रमण्यम ने कहा कि बढ़ते घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बाजार से भारतीय कटिंग टूल उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं. उनके मुताबिक, वैश्विक कटिंग टूल बाजार करीब 23 अरब डॉलर का है और 2030 तक इसके करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. भारत की मौजूदा हिस्सेदारी करीब 15% है.

उन्होंने कहा कि इससे भारतीय कंपनियों के लिए घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने की भी संभावनाएं हैं. साथ ही, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध करीब 40 सरकारी योजनाओं की जानकारी और आसान पहुंच बढ़ाने की जरूरत है.

आधुनिक मशीनरी अपनाने पर जोर

चैंबर ऑफ इंडियन माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष मुकेश मोहन गुप्ता ने कहा कि नई तकनीक और आधुनिक मशीनरी को अपनाना एमएसएमई की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उन्होंने सरकारी सहायता और वित्तीय योजनाओं तक आसान पहुंच की जरूरत पर जोर दिया.

उनके मुताबिक, 9.5 करोड़ से अधिक एमएसएमई देश की जीडीपी में 30% से अधिक योगदान देते हैं और 42 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं. ऐसे में एमएसएमई आधारित मैन्युफैक्चरिंग में तकनीकी उन्नयन का असर उत्पादन और रोजगार दोनों पर पड़ सकता है.

टेक्नोलॉजी के साथ स्किल्स भी जरूरी

ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरपर्सन विनकेश गुलाटी ने कहा कि टूल्स और उपकरण मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की उत्पादकता और उत्पादन क्षमता का अहम हिस्सा हैं. भारत के लिए मशीनरी, तकनीक और कलपुर्जों के स्थानीयकरण का बड़ा अवसर है, लेकिन इसके लिए कुशल कार्यबल भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सप्लाई चेन तैयार करने के लिए तकनीक अपनाने के साथ स्किल और टैलेंट डेवलपमेंट पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा.

उपकरणों की डिजाइन में ही हो सुरक्षा

औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय (DISH), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के निदेशक एसपी राणा ने औद्योगिक उपकरणों के सुरक्षित डिजाइन, रखरखाव और इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि मशीनों और उपकरणों से जुड़े जोखिमों की पहचान और उनका आकलन शुरुआत में ही किया जाना चाहिए.

उनके मुताबिक, 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020' के तहत दुर्घटना रोकथाम और सुरक्षित कार्यस्थल पर जोर दिया गया है. सुरक्षा को बाद में जोड़ने के बजाय उपकरणों के डिजाइन और कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना जरूरी है.

बड़े पैमाने पर उत्पादन और एक्सपोर्ट की तैयारी

चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स के उपाध्यक्ष दीदारजीत सिंह लोटे ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन, लीन मैन्युफैक्चरिंग और क्लस्टर आधारित विकास पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचे और बेहतर उत्पादन प्रणालियों के साथ भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता बढ़ा सकती हैं.

2035 तक 25 अरब डॉलर से ज्यादा टूल्स एक्सपोर्ट की क्षमता

इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा कि भारत का टूल्स और इक्विपमेंट सेक्टर विकास के महत्वपूर्ण दौर में है. उनके मुताबिक, भारत का हैंड और पावर टूल्स निर्यात फिलहाल करीब 1 अरब डॉलर है और इसमें 2035 तक 25 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचने की क्षमता है.

ऐसे में इंडस्ट्री 4.0, स्मार्ट ऑटोमेशन, आधुनिक टूलिंग, इनोवेशन और कुशल श्रमबल का विस्तार भारत के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का आधार बन सकता है.
 


प्रत्यक्ष कर संग्रह ₹12.12 लाख करोड़ के पार, STT से सरकार की कमाई 53% बढ़ी

17 सितंबर तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 13% बढ़ा, एडवांस टैक्स में भी 16.18% की तेज वृद्धि

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Published - Friday, 18 September, 2026
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Friday, 18 September, 2026
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चालू वित्त वर्ष में 17 सितंबर तक केंद्र सरकार के नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 13% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस अवधि में सरकार ने रिफंड को घटाने के बाद ₹12.12 लाख करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष कर संग्रह किया. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कलेक्शन में इस बढ़ोतरी के पीछे एडवांस टैक्स से हुई अधिक कमाई प्रमुख वजह रही.

कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में करीब 19.5% की बढ़ोतरी

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर तक कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 19.48% बढ़कर करीब ₹5.56 लाख करोड़ हो गया. वहीं, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स, जिसमें व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) से मिलने वाला टैक्स शामिल है, 6% बढ़कर ₹6.16 लाख करोड़ से अधिक रहा.

STT से ₹40,214 करोड़ की कमाई

शेयर बाजार में लेनदेन पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से सरकार की कमाई में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच STT कलेक्शन 53% बढ़कर ₹40,214 करोड़ पहुंच गया. इस दौरान सरकार की ओर से जारी टैक्स रिफंड भी बढ़े हैं. 17 सितंबर तक कुल टैक्स रिफंड 29.19% बढ़कर ₹2.20 लाख करोड़ से अधिक हो गया.

ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ₹14.32 लाख करोड़ के पार

रिफंड को शामिल करने से पहले यानी ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 15% की वृद्धि हुई है. यह बढ़कर ₹14.32 लाख करोड़ से अधिक हो गया. आंकड़ों से पता चलता है कि एडवांस टैक्स कलेक्शन में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है. 17 सितंबर तक एडवांस टैक्स कलेक्शन 16.18% बढ़कर करीब ₹5.22 लाख करोड़ हो गया.

कॉरपोरेट एडवांस टैक्स में 18% की बढ़ोतरी

कुल एडवांस टैक्स कलेक्शन में कॉरपोरेट टैक्स की हिस्सेदारी प्रमुख रही. कॉरपोरेट एडवांस टैक्स कलेक्शन 18% बढ़कर ₹4.16 लाख करोड़ से अधिक हो गया. वहीं, नॉन-कॉरपोरेट एडवांस टैक्स कलेक्शन 9.24% की वृद्धि के साथ ₹1.06 लाख करोड़ तक पहुंच गया. आंकड़ों से संकेत मिलता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में प्रत्यक्ष कर संग्रह को कॉरपोरेट टैक्स और एडवांस टैक्स में हुई बढ़ोतरी से खासा समर्थन मिला है.

 


भारत-भूटान सहयोग: ₹4,000 करोड़ की ऊर्जा कर्ज सुविधा, UPI और रेल संपर्क पर बढ़ी साझेदारी

ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की कर्ज सुविधा, भारत में UPI भुगतान कर सकेंगे भूटानी नागरिक; रेल कनेक्टिविटी और ईंधन आपूर्ति पर भी फैसले

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो by
Published - Friday, 18 September, 2026
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Friday, 18 September, 2026
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भारत और भूटान ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ऊर्जा, कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान, व्यापार और शिक्षा से जुड़े कई फैसले किए हैं. भूटान के ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए भारत ने ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा देने की घोषणा की है. इसके अलावा भूटानी नागरिकों के लिए भारत में UPI के जरिए भुगतान की सुविधा और दोनों देशों के बीच रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने से जुड़े कदम भी उठाए गए हैं.

ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की कर्ज सुविधा

भारत ने भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा देने की घोषणा की है. इसके साथ 500 किलोवाट क्षमता वाले लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की आधारशिला भी रखी गई है. दोनों देश पुनात्सांगछू-I और पुनात्सांगछू-II जैसी जलविद्युत परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं. ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का एक प्रमुख हिस्सा है.

रेल संपर्क बढ़ाने पर जोर

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और भूटान के बीच व्यापार और आवाजाही को बढ़ाने के लिए रेल संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है. गेलिफू-कोकराझार और समत्से-बनारहाट रेल लिंक प्रस्तावों के अलावा असम के हातिसार में नया इमिग्रेशन चेक पोस्ट बनाने की योजना है. असम के समरांग में लैंड कस्टम्स स्टेशन भी शुरू किया गया है. इन कदमों से भारत-भूटान के बीच माल और लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य है.

भारत में UPI से भुगतान कर सकेंगे भूटानी नागरिक

डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है. अब भूटानी नागरिक भारत में अपने मोबाइल फोन के जरिए UPI से भुगतान कर सकेंगे. इससे भारत आने वाले भूटानी पर्यटकों और छात्रों के लिए डिजिटल भुगतान का विकल्प उपलब्ध होगा.

शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की छात्रवृत्ति सीटों की संख्या 30 से बढ़ाकर 60 करने का फैसला किया है. नालंदा विश्वविद्यालय में भूटानी छात्रों के लिए सीटों की संख्या भी 30 से बढ़ाकर 55 की गई है.

भूटान से 17 प्रकार की लकड़ी के निर्यात को मंजूरी

व्यापार के मोर्चे पर भारत ने भूटान से 17 प्रकार की लकड़ी के निर्यात को अनुमति दी है. दोनों देशों के बीच आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी सहमति बनी है. भारत ने भूटान को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की लगातार आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया है. इसके अलावा भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के लिए भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. ऊर्जा, परिवहन, डिजिटल भुगतान और व्यापार से जुड़े ये फैसले भारत और भूटान के बीच आर्थिक सहयोग के अलग-अलग क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और कारोबार को बढ़ाने पर केंद्रित हैं.

 


सरकार ने वाणिज्यिक कोयला खदानों की 16वीं नीलामी शुरू की, 9 राज्यों के 25 ब्लॉक शामिल

2020 में निजी क्षेत्र की भागीदारी शुरू होने के बाद अब तक 147 कोयला खदानों की नीलामी, छह पहले आवंटित खदानों के लिए विकास एवं उत्पादन समझौते भी हुए.

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कोयला मंत्रालय ने वाणिज्यिक कोयला खनन की 16वीं नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस चरण में नौ कोयला उत्पादक राज्यों में 25 खदानों को नीलामी के लिए रखा गया है. इनमें 21 पूरी तरह खोजी जा चुकी खदानें और चार आंशिक रूप से खोजी गई खदानें शामिल हैं. नीलामी में अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की खदानें शामिल हैं. यह प्रक्रिया 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए निजी क्षेत्र को अनुमति दिए जाने के बाद लगातार आगे बढ़ रही नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा है.

छह खदानों के लिए विकास एवं उत्पादन समझौते

मंत्रालय ने इससे पहले की नीलामी में आवंटित छह खदानों के लिए कोयला खदान विकास एवं उत्पादन समझौते (CMDPA) भी किए हैं. इन समझौतों के बाद सफल बोलीदाताओं को खदानों के विकास और उन्हें उत्पादन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता मिलेगा.

इन छह खदानों में तारा (संशोधित), मारगो वेस्ट, मारगो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगेरी ताल-II और पीकेओसी का डिप साइड शामिल हैं.

इन खदानों का संयुक्त भूगर्भीय भंडार करीब 1,504 मिलियन टन है, जबकि इनकी अधिकतम अनुमानित उत्पादन क्षमता 11.62 मिलियन टन सालाना है. इनके परिचालन में आने के बाद करीब ₹1,984 करोड़ सालाना राजस्व और लगभग ₹1,743 करोड़ के पूंजी निवेश का अनुमान है.

इन परियोजनाओं से कोयला उत्पादक क्षेत्रों में करीब 16,000 रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई गई है.

25 खदानों की नीलामी

नई नीलामी में शामिल 25 खदानों में से छह की नीलामी कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत और 19 खदानों की नीलामी खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत की जाएगी.

वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था के तहत स्थापित खनन कंपनियों के साथ नए कारोबारी भी नीलामी में हिस्सा ले सकते हैं. इस व्यवस्था में कोयले के अंतिम उपयोग से जुड़ी पाबंदियां हटाई गई हैं, जिससे सफल बोलीदाताओं को कोयले के व्यावसायिक इस्तेमाल में अधिक लचीलापन मिलता है.

इस व्यवस्था के तहत स्वचालित मार्ग से 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है. साथ ही शुरुआती भुगतान की जरूरत अपेक्षाकृत कम रखी गई है. इन भुगतानों को भविष्य में राजस्व हिस्सेदारी के तहत देय राशि के साथ समायोजित किया जा सकता है.

अब तक 147 खदानों की नीलामी

16वीं नीलामी के साथ 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी शुरू होने के बाद से अब तक 16 नीलामी चरण पूरे हो जाएंगे. इस दौरान वाणिज्यिक विकास के लिए उपलब्ध कोयला ब्लॉकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है.

सरकार के अनुसार, अब तक नौ कोयला उत्पादक राज्यों में कुल 147 कोयला खदानों की नीलामी की जा चुकी है. इन खदानों से सालाना ₹47,500 करोड़ से अधिक राजस्व और ₹55,000 करोड़ से अधिक के संभावित पूंजी निवेश का अनुमान है.

नई नीलामी में शामिल 25 ब्लॉक से वाणिज्यिक कोयला खनन की परियोजनाओं की संख्या और बढ़ेगी, जबकि पहले आवंटित छह खदानों के लिए समझौते होने से उनके विकास और उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा.
 


टर्म प्लान की बढ़ती मांग, दिल्ली में ICICI प्रूडेंशियल लाइफ का कारोबार 53.89% बढ़ा

31 मार्च 2026 तक दिल्ली में 3.69 लाख लोगों को बीमा सुरक्षा, बीमित राशि ₹1.30 लाख करोड़; कंपनी ने पिछले सात साल में ग्राहकों को ₹6,087 करोड़ के लाभ दिए.

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Published - Friday, 18 September, 2026
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आईसीआईसीआई (ICICI) प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान दिल्ली में 100% दावा निपटान अनुपात दर्ज किया है. कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में दिल्ली में टर्म प्लान यानी खुदरा सुरक्षा कारोबार में साल-दर-साल 53.89% की वृद्धि हुई. 31 मार्च 2026 तक कंपनी ने दिल्ली में 3,69,550 लोगों को बीमा सुरक्षा प्रदान की थी.

कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक दिल्ली में उसकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (AUM) ₹18,427 करोड़ थीं, जबकि कुल बीमित राशि ₹1,30,274 करोड़ रही. पिछले सात वर्षों में कंपनी ने दिल्ली के ग्राहकों को विभिन्न श्रेणियों में कुल ₹6,087 करोड़ के लाभ का भुगतान किया. इनमें ₹1,832 करोड़ बीमाधारकों की मृत्यु से जुड़े दावों के रूप में दिए गए.

बचत और सेवानिवृत्ति उत्पादों की मांग

कंपनी ने कहा कि दिल्ली में लिंक्ड, गैर-लिंक्ड और वार्षिकी सहित उसके बचत कारोबार के उत्पादों की भी मांग बनी हुई है. कंपनी के अनुसार, ग्राहक वित्तीय सुरक्षा के साथ दीर्घकालिक बचत और सेवानिवृत्ति योजना को भी अपने वित्तीय लक्ष्यों में प्राथमिकता दे रहे हैं. 31 मार्च 2026 तक दिल्ली में कंपनी की 9 शाखाएं थीं. इसके अलावा 7,252 सलाहकार, 2,963 साझेदार शाखाएं और 5,049 निर्दिष्ट व्यक्तियों का नेटवर्क था.

एआई और डिजिटल तकनीक पर जोर

ICICI प्रूडेंशियल लाइफ के मुख्य वितरण अधिकारी अमीश बैंकर ने कहा कि दिल्ली कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाजार है. उन्होंने कहा कि वितरण, डिजिटल क्षमताओं, विभिन्न उत्पादों और ग्राहकों के साथ जुड़ाव में निवेश के जरिए कंपनी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है.

कंपनी के अनुसार, वह ग्राहकों के पूरे बीमा चक्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटलीकरण का इस्तेमाल कर रही है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में पूरी कंपनी के स्तर पर करीब 54% बचत पॉलिसियां आवेदन वाले दिन जारी की गईं, जबकि करीब 58% बीमा पॉलिसियां डिजिटल केवाईसी के जरिए जारी हुईं. कंपनी की करीब 97% सेवाएं स्वयं-सेवा या डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध कराई गईं.

कंपनी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ICICI Pru Partner Stack’ भी शुरू किया है, जिसमें डिजिटल टूल और डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं. वहीं, ‘Advisor Stack - IPRU Edge’ के जरिए देशभर में 2.44 लाख से अधिक एजेंटों को कारोबार बढ़ाने, कामकाज प्रबंधित करने और आवेदन वाले दिन पॉलिसी जारी करने में मदद मिलने का कंपनी ने दावा किया है.

पहली तिमाही में दावा निपटान अनुपात 99.3%

पूरी कंपनी के स्तर पर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में दावा निपटान अनुपात 99.3% रहा. कंपनी के अनुसार, बिना जांच वाले व्यक्तिगत दावों के लिए औसत निपटान समय एक दिन था. दावा अनुरोध वेबसाइट, ईमेल, एसएमएस, व्हाट्सऐप, शाखा या 24 घंटे उपलब्ध ग्राहक सेवा के माध्यम से किया जा सकता है. कंपनी ने बताया कि उसका शुरुआती दावा अनुपात 22% रहा. कंपनी के मुताबिक, यह उसके कारोबार की गुणवत्ता पर ध्यान देने को दर्शाता है.

कंपनी का नाम बदलने को मंजूरी

कंपनी के निदेशक मंडल ने आवश्यक स्वीकृतियों के अधीन कंपनी का नाम बदलकर ‘ICICI Life Insurance Limited’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2001 में अपना परिचालन शुरू किया था. कंपनी सुरक्षा और बचत श्रेणी में विभिन्न जीवन चरणों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराती है. इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेपरलेस खरीद, डिजिटल भुगतान, स्वयं-सेवा लेनदेन और दावा निपटान की सुविधा उपलब्ध है.

30 जून 2026 तक कंपनी की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां ₹3.34 लाख करोड़ और कुल प्रभावी बीमित राशि ₹48.06 लाख करोड़ थी. कंपनी के अनुसार, वह भारत की पहली बीमा कंपनी है जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर सूचीबद्ध है.

दिल्ली में विस्तार की योजना

कंपनी ने कहा कि वह दिल्ली में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए शाखाओं के विस्तार, सलाहकारों की नियुक्ति और लक्षित ग्राहक संपर्क पर काम करेगी. कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य बीमा की पहुंच बढ़ाने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना है.


टाटा संस लिस्टिंग पर टाटा ट्रस्ट्स की असहमति, दूसरे विकल्प तलाशने का फैसला

17 सितंबर को हुई टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने समूह की एक सदी से अधिक पुरानी संरचना को बनाए रखने के पक्ष में ट्रस्ट्स का रुख दोहराया.

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Published - Friday, 18 September, 2026
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टाटा संस की संभावित सार्वजनिक सूचीबद्धता को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के निदेशक मंडल के बीच चर्चा तेज हो गई है. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की सूचीबद्धता पर सहमति नहीं दी है और कंपनी से सूचीबद्धता के अलावा सभी उपलब्ध विकल्पों का तत्काल आधार पर विस्तृत आकलन करने को कहा है. 17 सितंबर को हुई टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने समूह की एक सदी से अधिक पुरानी संरचना को बनाए रखने के पक्ष में ट्रस्ट्स का रुख दोहराया.

आरबीआई के पत्र पर निदेशक मंडल की बैठक में चर्चा

टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में 11 सितंबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले पत्र पर चर्चा की गई. बैठक में तय किया गया कि केवल सूचीबद्धता के विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय सभी उपलब्ध विकल्पों की व्यापक समीक्षा और उनका आकलन किया जाए. इस समीक्षा के निष्कर्ष और सिफारिशें टाटा संस के निदेशक मंडल के सामने रखी जाएंगी. इसके बाद इस मुद्दे पर अलग से निदेशक मंडल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.

2024 में सूचीबद्धता के खिलाफ लिया गया था फैसला

टाटा ट्रस्ट्स ने अपने बयान में कहा कि टाटा संस की सार्वजनिक सूचीबद्धता के मुद्दे पर निदेशक मंडल पहले ही मार्च 2024 में विचार कर चुका है. उस समय दिवंगत रतन टाटा के मार्गदर्शन में निदेशक मंडल ने सर्वसम्मति से कंपनी को गैर-सूचीबद्ध रखने का फैसला किया था.

इसके बाद जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने भी सर्वसम्मति से टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किए थे. इन प्रस्तावों की जानकारी आवश्यक कार्रवाई के लिए टाटा संस को दी गई थी. टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, इस मुद्दे पर उसका रुख लगातार एक जैसा रहा है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.

टाटा मॉडल को लेकर नोएल टाटा ने क्या कहा

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने टाटा समूह की मौजूदा संरचना को समूह के कामकाज का महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने कहा कि टाटा समूह की परिकल्पना कारोबार के माध्यम से राष्ट्रीय सेवा के उद्देश्य से की गई थी और एक सदी से अधिक समय से समूह इसी सोच के साथ काम करता आया है. उन्होंने कहा कि समूह की स्वामित्व संरचना ने टाटा संस को ऐसे फैसले लेने में सक्षम बनाया है, जिन्हें केवल व्यावसायिक लाभ-हानि के आधार पर लेना संभव नहीं होता.

टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी को बताया अहम

नोएल टाटा के मुताबिक, टाटा समूह की मौजूदा परिचालन संरचना की खासियत यह है कि यह ट्रस्ट पर आधारित है और इसका बहुमत हिस्सेदार एक परोपकारी संस्था है. इन ट्रस्ट्स को मिलने वाले लाभांश का इस्तेमाल अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में किया जाता है.

उन्होंने कहा कि यह संरचना सार्वजनिक उद्देश्य और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को समर्थन देती है. उनके मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि सूचीबद्धता से इस मौजूदा मॉडल और उसकी प्रकृति पर असर पड़ सकता है.

सभी वैध विकल्पों की समीक्षा पर जोर

टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह ऐसी रचनात्मक, सूचित और कानूनी प्रक्रिया का समर्थन करता है, जिसमें सभी अनुमत विकल्पों की व्यापक समीक्षा की जा सके. ट्रस्ट्स के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में दीर्घकालिक सार्वजनिक हित को ध्यान में रखा जाना चाहिए.

ट्रस्ट्स ने कहा कि वह टाटा संस और संबंधित अधिकारियों के साथ आगे भी बातचीत जारी रखेगा, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आगे बढ़ सके.

 


SP ग्रुप को राहत देने के लिए ₹25,000 करोड़ के प्रस्ताव पर टाटा ट्रस्ट्स की पहल, 18 महीने में पूरा हो सकता है सौदा

NCLT के जरिए चुनिंदा कैपिटल रिडक्शन की योजना, टाटा संस के शेयरों की इनकम टैक्स फेयर वैल्यू के आधार पर होगी गणना

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टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप की ओर से मिले उस प्रस्ताव को टाटा संस के बोर्ड के सामने रखा है, जिसमें स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉरपोरेशन (SICPL) और साइरस इन्वेस्टमेंट्स (CIPL) के पास मौजूद टाटा संस की हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचकर नकदी जुटाने की योजना है. प्रस्ताव के तहत इस हिस्सेदारी की बिक्री से कम से कम ₹25,000 करोड़ की सकल राशि जुटाने का अनुमान है.

यह प्रस्ताव 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में रखा गया. इससे पहले नोएल टाटा, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और SP ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी थी.

18 महीने में दो चरणों में होगा प्रस्तावित सौदा

प्रस्ताव के मुताबिक, टाटा संस के शेयरों की खरीद-बिक्री दो चरणों में पूरी की जाएगी और इसके लिए करीब 18 महीने की अवधि रखी गई है. साथ ही, टाटा संस नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के जरिए चुनिंदा कैपिटल रिडक्शन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है.

टाटा संस के शेयरों का मूल्यांकन इनकम टैक्स रूल्स के तहत निर्धारित फेयर वैल्यू के आधार पर किया जाएगा. प्रस्ताव में कहा गया है कि Rule 11UA के तहत तय न्यूनतम वैल्यूएशन के आधार पर SICPL और CIPL के शेयरों की बिक्री से कम से कम ₹25,000 करोड़ की सकल राशि हासिल हो सकती है.

रकम जुटाने के लिए कई विकल्पों पर विचार

इस सौदे के लिए जरूरी रकम जुटाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. इनमें टाटा संस के आंतरिक कैश फ्लो का इस्तेमाल, लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की बिक्री, टाटा संस के नए कारोबारों में किसी निवेशक को हिस्सेदारी देना और कुछ कारोबारों को ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए लिस्ट करना शामिल है.

नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड से NCLT प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है. इसके अलावा उन्होंने टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स की ऑपरेटिंग टीमों को SP ग्रुप और बैंकरों के साथ बातचीत जारी रखने तथा आगे की जानकारी बोर्ड के सामने रखने की मंजूरी देने का भी अनुरोध किया.

SP ग्रुप के साथ समाधान की दिशा में कदम

टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव SP ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी से जुड़े मामले में उसके लिए एक निष्पक्ष और समान समाधान तलाशने की पहले से व्यक्त इच्छा को आगे बढ़ाता है.

टाटा संस में SP ग्रुप की हिस्सेदारी लंबे समय से टाटा समूह के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट मामला रही है. नए प्रस्ताव के तहत हिस्सेदारी के एक हिस्से के मौद्रीकरण के जरिए SP ग्रुप को तरलता उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है.