एक्सपो में एक 'इनोवेशन गैलरी' तैयार की गई है, जिसमें 200 से अधिक प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया गया है. इस गैलरी उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उभरती तकनीकों, नए विचारों और इनोवेटिव समाधानों को सामने लाना है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो ।।
भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इंडस्ट्री 4.0, स्मार्ट ऑटोमेशन और डिजिटल तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने के साथ एमएसएमई के तकनीकी उन्नयन पर जोर बढ़ रहा है. नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित 'टूल्स एंड इक्विपमेंट एक्सपो 2026' में हैंड और पावर टूल्स से लेकर कटिंग एवं वेल्डिंग तकनीक और स्मार्ट ऑटोमेशन तक के समाधान प्रदर्शित किए जा रहे हैं. इस बार एक्सपो में खास तौर पर 'इनोवेशन गैलरी' भी तैयार किया गया है, जहां नई तकनीकों और इनोवेटिव समाधानों को एक अलग मंच दिया गया है. उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक, तकनीक के साथ कौशल विकास और कार्यस्थल सुरक्षा को मजबूत करना भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए अहम होगा.
इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया द्वारा आयोजित इस एक्सपो में 300 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा ले रहे हैं. जर्मनी, चीन, ताइवान और हांगकांग की भागीदारी भी देखने को मिल रही है. प्रदर्शनी में टूल्स और उपकरणों के साथ मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं को अधिक स्मार्ट, ऑटोमेटेड और कुशल बनाने वाली तकनीकों पर भी फोकस किया गया है.
इनोवेशन गैलरी में नई तकनीकों पर फोकस
एक्सपो में तैयार किया गया 'इनोवेशन गैलरी' इस आयोजन की प्रमुख विशेषताओं में शामिल है. इसमें 200 से अधिक प्रोडक्ट्स को लॉन्च किया गया है. इस गैलरी उद्देश्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में उभरती तकनीकों, नए विचारों और इनोवेटिव समाधानों को सामने लाना है. इससे उद्योग जगत, एमएसएमई और तकनीकी विशेषज्ञों को नई तकनीकों को समझने और उनके संभावित इस्तेमाल पर चर्चा करने का अवसर मिल रहा है.
एमएसएमई में इंडस्ट्री 4.0 का बढ़ता दायरा
एनपीसी-डीपीआईआईटी, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उप निदेशक यदु कुमार यादव के मुताबिक, भारत के विनिर्माण विकास का अगला चरण एमएसएमई को लीन मैन्युफैक्चरिंग से इंडस्ट्री 4.0 और आईओटी आधारित प्रणालियों की ओर ले जाने पर निर्भर करेगा. पिछले एक दशक में एमएसएमई के उत्पादों, प्रक्रियाओं और प्रणालियों को एकीकृत करने पर जोर रहा है, जबकि अब डिजिटल एकीकरण अगला कदम है. उन्होंने बताया कि एमएसएमई मंत्रालय की RAMP योजना के तहत गुजरात में 750 से अधिक इकाइयों को इंडस्ट्री 4.0 इकोसिस्टम से जोड़ा जा रहा है. इसी तरह के इकोसिस्टम देश के अन्य हिस्सों में भी विकसित करने की योजना है.
कटिंग टूल बाजार में भारत के लिए अवसर
इंडियन कटिंग टूल मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के कार्यकारी सचिव पीजी सुब्रमण्यम ने कहा कि बढ़ते घरेलू मैन्युफैक्चरिंग बाजार से भारतीय कटिंग टूल उद्योग के लिए नए अवसर पैदा हो रहे हैं. उनके मुताबिक, वैश्विक कटिंग टूल बाजार करीब 23 अरब डॉलर का है और 2030 तक इसके करीब 30 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है. भारत की मौजूदा हिस्सेदारी करीब 15% है.
उन्होंने कहा कि इससे भारतीय कंपनियों के लिए घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात बढ़ाने की भी संभावनाएं हैं. साथ ही, एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध करीब 40 सरकारी योजनाओं की जानकारी और आसान पहुंच बढ़ाने की जरूरत है.
आधुनिक मशीनरी अपनाने पर जोर
चैंबर ऑफ इंडियन माइक्रो स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज के अध्यक्ष मुकेश मोहन गुप्ता ने कहा कि नई तकनीक और आधुनिक मशीनरी को अपनाना एमएसएमई की उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. उन्होंने सरकारी सहायता और वित्तीय योजनाओं तक आसान पहुंच की जरूरत पर जोर दिया.
उनके मुताबिक, 9.5 करोड़ से अधिक एमएसएमई देश की जीडीपी में 30% से अधिक योगदान देते हैं और 42 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देते हैं. ऐसे में एमएसएमई आधारित मैन्युफैक्चरिंग में तकनीकी उन्नयन का असर उत्पादन और रोजगार दोनों पर पड़ सकता है.
टेक्नोलॉजी के साथ स्किल्स भी जरूरी
ऑटोमोटिव स्किल्स डेवलपमेंट काउंसिल के चेयरपर्सन विनकेश गुलाटी ने कहा कि टूल्स और उपकरण मैन्युफैक्चरिंग इंडस्ट्री की उत्पादकता और उत्पादन क्षमता का अहम हिस्सा हैं. भारत के लिए मशीनरी, तकनीक और कलपुर्जों के स्थानीयकरण का बड़ा अवसर है, लेकिन इसके लिए कुशल कार्यबल भी जरूरी है. उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी सप्लाई चेन तैयार करने के लिए तकनीक अपनाने के साथ स्किल और टैलेंट डेवलपमेंट पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा.
उपकरणों की डिजाइन में ही हो सुरक्षा
औद्योगिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य निदेशालय (DISH), राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार के निदेशक एसपी राणा ने औद्योगिक उपकरणों के सुरक्षित डिजाइन, रखरखाव और इस्तेमाल को महत्वपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि मशीनों और उपकरणों से जुड़े जोखिमों की पहचान और उनका आकलन शुरुआत में ही किया जाना चाहिए.
उनके मुताबिक, 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, 2020' के तहत दुर्घटना रोकथाम और सुरक्षित कार्यस्थल पर जोर दिया गया है. सुरक्षा को बाद में जोड़ने के बजाय उपकरणों के डिजाइन और कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना जरूरी है.
बड़े पैमाने पर उत्पादन और एक्सपोर्ट की तैयारी
चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग्स के उपाध्यक्ष दीदारजीत सिंह लोटे ने कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने के लिए बड़े पैमाने पर उत्पादन, लीन मैन्युफैक्चरिंग और क्लस्टर आधारित विकास पर ध्यान देना होगा. उन्होंने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचे और बेहतर उत्पादन प्रणालियों के साथ भारतीय कंपनियां वैश्विक बाजारों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता बढ़ा सकती हैं.
2035 तक 25 अरब डॉलर से ज्यादा टूल्स एक्सपोर्ट की क्षमता
इन्फॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा कि भारत का टूल्स और इक्विपमेंट सेक्टर विकास के महत्वपूर्ण दौर में है. उनके मुताबिक, भारत का हैंड और पावर टूल्स निर्यात फिलहाल करीब 1 अरब डॉलर है और इसमें 2035 तक 25 अरब डॉलर से अधिक तक पहुंचने की क्षमता है.
ऐसे में इंडस्ट्री 4.0, स्मार्ट ऑटोमेशन, आधुनिक टूलिंग, इनोवेशन और कुशल श्रमबल का विस्तार भारत के लिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ वैश्विक निर्यात बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का आधार बन सकता है.
17 सितंबर तक नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन 13% बढ़ा, एडवांस टैक्स में भी 16.18% की तेज वृद्धि
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
चालू वित्त वर्ष में 17 सितंबर तक केंद्र सरकार के नेट डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 13% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस अवधि में सरकार ने रिफंड को घटाने के बाद ₹12.12 लाख करोड़ से अधिक का प्रत्यक्ष कर संग्रह किया. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, कलेक्शन में इस बढ़ोतरी के पीछे एडवांस टैक्स से हुई अधिक कमाई प्रमुख वजह रही.
कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन में करीब 19.5% की बढ़ोतरी
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के आंकड़ों के अनुसार, 17 सितंबर तक कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन 19.48% बढ़कर करीब ₹5.56 लाख करोड़ हो गया. वहीं, नॉन-कॉरपोरेट टैक्स, जिसमें व्यक्तिगत करदाताओं और हिंदू अविभाजित परिवारों (HUF) से मिलने वाला टैक्स शामिल है, 6% बढ़कर ₹6.16 लाख करोड़ से अधिक रहा.
STT से ₹40,214 करोड़ की कमाई
शेयर बाजार में लेनदेन पर लगने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) से सरकार की कमाई में भी तेज बढ़ोतरी हुई है. 1 अप्रैल से 17 सितंबर के बीच STT कलेक्शन 53% बढ़कर ₹40,214 करोड़ पहुंच गया. इस दौरान सरकार की ओर से जारी टैक्स रिफंड भी बढ़े हैं. 17 सितंबर तक कुल टैक्स रिफंड 29.19% बढ़कर ₹2.20 लाख करोड़ से अधिक हो गया.
ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन ₹14.32 लाख करोड़ के पार
रिफंड को शामिल करने से पहले यानी ग्रॉस डायरेक्ट टैक्स कलेक्शन में 15% की वृद्धि हुई है. यह बढ़कर ₹14.32 लाख करोड़ से अधिक हो गया. आंकड़ों से पता चलता है कि एडवांस टैक्स कलेक्शन में भी अच्छी वृद्धि दर्ज की गई है. 17 सितंबर तक एडवांस टैक्स कलेक्शन 16.18% बढ़कर करीब ₹5.22 लाख करोड़ हो गया.
कॉरपोरेट एडवांस टैक्स में 18% की बढ़ोतरी
कुल एडवांस टैक्स कलेक्शन में कॉरपोरेट टैक्स की हिस्सेदारी प्रमुख रही. कॉरपोरेट एडवांस टैक्स कलेक्शन 18% बढ़कर ₹4.16 लाख करोड़ से अधिक हो गया. वहीं, नॉन-कॉरपोरेट एडवांस टैक्स कलेक्शन 9.24% की वृद्धि के साथ ₹1.06 लाख करोड़ तक पहुंच गया. आंकड़ों से संकेत मिलता है कि चालू वित्त वर्ष के शुरुआती महीनों में प्रत्यक्ष कर संग्रह को कॉरपोरेट टैक्स और एडवांस टैक्स में हुई बढ़ोतरी से खासा समर्थन मिला है.
ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की कर्ज सुविधा, भारत में UPI भुगतान कर सकेंगे भूटानी नागरिक; रेल कनेक्टिविटी और ईंधन आपूर्ति पर भी फैसले
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारत और भूटान ने द्विपक्षीय आर्थिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए ऊर्जा, कनेक्टिविटी, डिजिटल भुगतान, व्यापार और शिक्षा से जुड़े कई फैसले किए हैं. भूटान के ऊर्जा प्रोजेक्ट्स के लिए भारत ने ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा देने की घोषणा की है. इसके अलावा भूटानी नागरिकों के लिए भारत में UPI के जरिए भुगतान की सुविधा और दोनों देशों के बीच रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने से जुड़े कदम भी उठाए गए हैं.
ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की कर्ज सुविधा
भारत ने भूटान में ऊर्जा परियोजनाओं के लिए ₹4,000 करोड़ की रियायती ऋण सुविधा देने की घोषणा की है. इसके साथ 500 किलोवाट क्षमता वाले लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की आधारशिला भी रखी गई है. दोनों देश पुनात्सांगछू-I और पुनात्सांगछू-II जैसी जलविद्युत परियोजनाओं पर भी काम कर रहे हैं. ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग दोनों देशों के आर्थिक संबंधों का एक प्रमुख हिस्सा है.
रेल संपर्क बढ़ाने पर जोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत और भूटान के बीच व्यापार और आवाजाही को बढ़ाने के लिए रेल संपर्क से जुड़ी परियोजनाओं पर भी काम आगे बढ़ाया जा रहा है. गेलिफू-कोकराझार और समत्से-बनारहाट रेल लिंक प्रस्तावों के अलावा असम के हातिसार में नया इमिग्रेशन चेक पोस्ट बनाने की योजना है. असम के समरांग में लैंड कस्टम्स स्टेशन भी शुरू किया गया है. इन कदमों से भारत-भूटान के बीच माल और लोगों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने का लक्ष्य है.
भारत में UPI से भुगतान कर सकेंगे भूटानी नागरिक
डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ा है. अब भूटानी नागरिक भारत में अपने मोबाइल फोन के जरिए UPI से भुगतान कर सकेंगे. इससे भारत आने वाले भूटानी पर्यटकों और छात्रों के लिए डिजिटल भुगतान का विकल्प उपलब्ध होगा.
शिक्षा के क्षेत्र में भारत ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की छात्रवृत्ति सीटों की संख्या 30 से बढ़ाकर 60 करने का फैसला किया है. नालंदा विश्वविद्यालय में भूटानी छात्रों के लिए सीटों की संख्या भी 30 से बढ़ाकर 55 की गई है.
भूटान से 17 प्रकार की लकड़ी के निर्यात को मंजूरी
व्यापार के मोर्चे पर भारत ने भूटान से 17 प्रकार की लकड़ी के निर्यात को अनुमति दी है. दोनों देशों के बीच आपूर्ति व्यवस्था को लेकर भी सहमति बनी है. भारत ने भूटान को पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की लगातार आपूर्ति जारी रखने का भरोसा दिया है. इसके अलावा भूटान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2028-29 के लिए भारत की गैर-स्थायी सदस्यता की उम्मीदवारी का समर्थन किया है. ऊर्जा, परिवहन, डिजिटल भुगतान और व्यापार से जुड़े ये फैसले भारत और भूटान के बीच आर्थिक सहयोग के अलग-अलग क्षेत्रों में कनेक्टिविटी और कारोबार को बढ़ाने पर केंद्रित हैं.
2020 में निजी क्षेत्र की भागीदारी शुरू होने के बाद अब तक 147 कोयला खदानों की नीलामी, छह पहले आवंटित खदानों के लिए विकास एवं उत्पादन समझौते भी हुए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
कोयला मंत्रालय ने वाणिज्यिक कोयला खनन की 16वीं नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी है. इस चरण में नौ कोयला उत्पादक राज्यों में 25 खदानों को नीलामी के लिए रखा गया है. इनमें 21 पूरी तरह खोजी जा चुकी खदानें और चार आंशिक रूप से खोजी गई खदानें शामिल हैं. नीलामी में अरुणाचल प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल की खदानें शामिल हैं. यह प्रक्रिया 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए निजी क्षेत्र को अनुमति दिए जाने के बाद लगातार आगे बढ़ रही नीलामी प्रक्रिया का हिस्सा है.
छह खदानों के लिए विकास एवं उत्पादन समझौते
मंत्रालय ने इससे पहले की नीलामी में आवंटित छह खदानों के लिए कोयला खदान विकास एवं उत्पादन समझौते (CMDPA) भी किए हैं. इन समझौतों के बाद सफल बोलीदाताओं को खदानों के विकास और उन्हें उत्पादन के लिए तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता मिलेगा.
इन छह खदानों में तारा (संशोधित), मारगो वेस्ट, मारगो ईस्ट, मंडला साउथ, डोंगेरी ताल-II और पीकेओसी का डिप साइड शामिल हैं.
इन खदानों का संयुक्त भूगर्भीय भंडार करीब 1,504 मिलियन टन है, जबकि इनकी अधिकतम अनुमानित उत्पादन क्षमता 11.62 मिलियन टन सालाना है. इनके परिचालन में आने के बाद करीब ₹1,984 करोड़ सालाना राजस्व और लगभग ₹1,743 करोड़ के पूंजी निवेश का अनुमान है.
इन परियोजनाओं से कोयला उत्पादक क्षेत्रों में करीब 16,000 रोजगार अवसर पैदा होने की संभावना भी जताई गई है.
25 खदानों की नीलामी
नई नीलामी में शामिल 25 खदानों में से छह की नीलामी कोयला खान (विशेष प्रावधान) अधिनियम के तहत और 19 खदानों की नीलामी खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम के तहत की जाएगी.
वाणिज्यिक कोयला खनन व्यवस्था के तहत स्थापित खनन कंपनियों के साथ नए कारोबारी भी नीलामी में हिस्सा ले सकते हैं. इस व्यवस्था में कोयले के अंतिम उपयोग से जुड़ी पाबंदियां हटाई गई हैं, जिससे सफल बोलीदाताओं को कोयले के व्यावसायिक इस्तेमाल में अधिक लचीलापन मिलता है.
इस व्यवस्था के तहत स्वचालित मार्ग से 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति है. साथ ही शुरुआती भुगतान की जरूरत अपेक्षाकृत कम रखी गई है. इन भुगतानों को भविष्य में राजस्व हिस्सेदारी के तहत देय राशि के साथ समायोजित किया जा सकता है.
अब तक 147 खदानों की नीलामी
16वीं नीलामी के साथ 2020 में वाणिज्यिक कोयला खनन के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी शुरू होने के बाद से अब तक 16 नीलामी चरण पूरे हो जाएंगे. इस दौरान वाणिज्यिक विकास के लिए उपलब्ध कोयला ब्लॉकों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है.
सरकार के अनुसार, अब तक नौ कोयला उत्पादक राज्यों में कुल 147 कोयला खदानों की नीलामी की जा चुकी है. इन खदानों से सालाना ₹47,500 करोड़ से अधिक राजस्व और ₹55,000 करोड़ से अधिक के संभावित पूंजी निवेश का अनुमान है.
नई नीलामी में शामिल 25 ब्लॉक से वाणिज्यिक कोयला खनन की परियोजनाओं की संख्या और बढ़ेगी, जबकि पहले आवंटित छह खदानों के लिए समझौते होने से उनके विकास और उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ होगा.
31 मार्च 2026 तक दिल्ली में 3.69 लाख लोगों को बीमा सुरक्षा, बीमित राशि ₹1.30 लाख करोड़; कंपनी ने पिछले सात साल में ग्राहकों को ₹6,087 करोड़ के लाभ दिए.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
आईसीआईसीआई (ICICI) प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान दिल्ली में 100% दावा निपटान अनुपात दर्ज किया है. कंपनी के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में दिल्ली में टर्म प्लान यानी खुदरा सुरक्षा कारोबार में साल-दर-साल 53.89% की वृद्धि हुई. 31 मार्च 2026 तक कंपनी ने दिल्ली में 3,69,550 लोगों को बीमा सुरक्षा प्रदान की थी.
कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक दिल्ली में उसकी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां (AUM) ₹18,427 करोड़ थीं, जबकि कुल बीमित राशि ₹1,30,274 करोड़ रही. पिछले सात वर्षों में कंपनी ने दिल्ली के ग्राहकों को विभिन्न श्रेणियों में कुल ₹6,087 करोड़ के लाभ का भुगतान किया. इनमें ₹1,832 करोड़ बीमाधारकों की मृत्यु से जुड़े दावों के रूप में दिए गए.
बचत और सेवानिवृत्ति उत्पादों की मांग
कंपनी ने कहा कि दिल्ली में लिंक्ड, गैर-लिंक्ड और वार्षिकी सहित उसके बचत कारोबार के उत्पादों की भी मांग बनी हुई है. कंपनी के अनुसार, ग्राहक वित्तीय सुरक्षा के साथ दीर्घकालिक बचत और सेवानिवृत्ति योजना को भी अपने वित्तीय लक्ष्यों में प्राथमिकता दे रहे हैं. 31 मार्च 2026 तक दिल्ली में कंपनी की 9 शाखाएं थीं. इसके अलावा 7,252 सलाहकार, 2,963 साझेदार शाखाएं और 5,049 निर्दिष्ट व्यक्तियों का नेटवर्क था.
एआई और डिजिटल तकनीक पर जोर
ICICI प्रूडेंशियल लाइफ के मुख्य वितरण अधिकारी अमीश बैंकर ने कहा कि दिल्ली कंपनी के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बाजार है. उन्होंने कहा कि वितरण, डिजिटल क्षमताओं, विभिन्न उत्पादों और ग्राहकों के साथ जुड़ाव में निवेश के जरिए कंपनी क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है.
कंपनी के अनुसार, वह ग्राहकों के पूरे बीमा चक्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा एनालिटिक्स और डिजिटलीकरण का इस्तेमाल कर रही है. वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में पूरी कंपनी के स्तर पर करीब 54% बचत पॉलिसियां आवेदन वाले दिन जारी की गईं, जबकि करीब 58% बीमा पॉलिसियां डिजिटल केवाईसी के जरिए जारी हुईं. कंपनी की करीब 97% सेवाएं स्वयं-सेवा या डिजिटल माध्यमों से उपलब्ध कराई गईं.
कंपनी ने डिजिटल प्लेटफॉर्म ‘ICICI Pru Partner Stack’ भी शुरू किया है, जिसमें डिजिटल टूल और डेटा एनालिटिक्स शामिल हैं. वहीं, ‘Advisor Stack - IPRU Edge’ के जरिए देशभर में 2.44 लाख से अधिक एजेंटों को कारोबार बढ़ाने, कामकाज प्रबंधित करने और आवेदन वाले दिन पॉलिसी जारी करने में मदद मिलने का कंपनी ने दावा किया है.
पहली तिमाही में दावा निपटान अनुपात 99.3%
पूरी कंपनी के स्तर पर वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में दावा निपटान अनुपात 99.3% रहा. कंपनी के अनुसार, बिना जांच वाले व्यक्तिगत दावों के लिए औसत निपटान समय एक दिन था. दावा अनुरोध वेबसाइट, ईमेल, एसएमएस, व्हाट्सऐप, शाखा या 24 घंटे उपलब्ध ग्राहक सेवा के माध्यम से किया जा सकता है. कंपनी ने बताया कि उसका शुरुआती दावा अनुपात 22% रहा. कंपनी के मुताबिक, यह उसके कारोबार की गुणवत्ता पर ध्यान देने को दर्शाता है.
कंपनी का नाम बदलने को मंजूरी
कंपनी के निदेशक मंडल ने आवश्यक स्वीकृतियों के अधीन कंपनी का नाम बदलकर ‘ICICI Life Insurance Limited’ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है. ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस ने वित्त वर्ष 2001 में अपना परिचालन शुरू किया था. कंपनी सुरक्षा और बचत श्रेणी में विभिन्न जीवन चरणों की जरूरतों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराती है. इसके डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पेपरलेस खरीद, डिजिटल भुगतान, स्वयं-सेवा लेनदेन और दावा निपटान की सुविधा उपलब्ध है.
30 जून 2026 तक कंपनी की प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियां ₹3.34 लाख करोड़ और कुल प्रभावी बीमित राशि ₹48.06 लाख करोड़ थी. कंपनी के अनुसार, वह भारत की पहली बीमा कंपनी है जो नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों पर सूचीबद्ध है.
दिल्ली में विस्तार की योजना
कंपनी ने कहा कि वह दिल्ली में अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए शाखाओं के विस्तार, सलाहकारों की नियुक्ति और लक्षित ग्राहक संपर्क पर काम करेगी. कंपनी के मुताबिक, इसका उद्देश्य बीमा की पहुंच बढ़ाने और ग्राहकों की बदलती जरूरतों के अनुरूप सेवाएं उपलब्ध कराना है.
17 सितंबर को हुई टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने समूह की एक सदी से अधिक पुरानी संरचना को बनाए रखने के पक्ष में ट्रस्ट्स का रुख दोहराया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा संस की संभावित सार्वजनिक सूचीबद्धता को लेकर टाटा ट्रस्ट्स और कंपनी के निदेशक मंडल के बीच चर्चा तेज हो गई है. टाटा ट्रस्ट्स ने टाटा संस की सूचीबद्धता पर सहमति नहीं दी है और कंपनी से सूचीबद्धता के अलावा सभी उपलब्ध विकल्पों का तत्काल आधार पर विस्तृत आकलन करने को कहा है. 17 सितंबर को हुई टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने समूह की एक सदी से अधिक पुरानी संरचना को बनाए रखने के पक्ष में ट्रस्ट्स का रुख दोहराया.
आरबीआई के पत्र पर निदेशक मंडल की बैठक में चर्चा
टाटा संस के निदेशक मंडल की बैठक में 11 सितंबर 2026 को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से मिले पत्र पर चर्चा की गई. बैठक में तय किया गया कि केवल सूचीबद्धता के विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय सभी उपलब्ध विकल्पों की व्यापक समीक्षा और उनका आकलन किया जाए. इस समीक्षा के निष्कर्ष और सिफारिशें टाटा संस के निदेशक मंडल के सामने रखी जाएंगी. इसके बाद इस मुद्दे पर अलग से निदेशक मंडल की बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें समीक्षा के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी.
2024 में सूचीबद्धता के खिलाफ लिया गया था फैसला
टाटा ट्रस्ट्स ने अपने बयान में कहा कि टाटा संस की सार्वजनिक सूचीबद्धता के मुद्दे पर निदेशक मंडल पहले ही मार्च 2024 में विचार कर चुका है. उस समय दिवंगत रतन टाटा के मार्गदर्शन में निदेशक मंडल ने सर्वसम्मति से कंपनी को गैर-सूचीबद्ध रखने का फैसला किया था.
इसके बाद जुलाई 2025 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट और सर रतन टाटा ट्रस्ट ने भी सर्वसम्मति से टाटा संस को गैर-सूचीबद्ध रखने के पक्ष में प्रस्ताव पारित किए थे. इन प्रस्तावों की जानकारी आवश्यक कार्रवाई के लिए टाटा संस को दी गई थी. टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, इस मुद्दे पर उसका रुख लगातार एक जैसा रहा है और इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है.
टाटा मॉडल को लेकर नोएल टाटा ने क्या कहा
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन. टाटा ने टाटा समूह की मौजूदा संरचना को समूह के कामकाज का महत्वपूर्ण आधार बताया. उन्होंने कहा कि टाटा समूह की परिकल्पना कारोबार के माध्यम से राष्ट्रीय सेवा के उद्देश्य से की गई थी और एक सदी से अधिक समय से समूह इसी सोच के साथ काम करता आया है. उन्होंने कहा कि समूह की स्वामित्व संरचना ने टाटा संस को ऐसे फैसले लेने में सक्षम बनाया है, जिन्हें केवल व्यावसायिक लाभ-हानि के आधार पर लेना संभव नहीं होता.
टाटा ट्रस्ट्स की हिस्सेदारी को बताया अहम
नोएल टाटा के मुताबिक, टाटा समूह की मौजूदा परिचालन संरचना की खासियत यह है कि यह ट्रस्ट पर आधारित है और इसका बहुमत हिस्सेदार एक परोपकारी संस्था है. इन ट्रस्ट्स को मिलने वाले लाभांश का इस्तेमाल अस्पतालों, विश्वविद्यालयों और अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में किया जाता है.
उन्होंने कहा कि यह संरचना सार्वजनिक उद्देश्य और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी गतिविधियों को समर्थन देती है. उनके मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स का मानना है कि सूचीबद्धता से इस मौजूदा मॉडल और उसकी प्रकृति पर असर पड़ सकता है.
सभी वैध विकल्पों की समीक्षा पर जोर
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा है कि वह ऐसी रचनात्मक, सूचित और कानूनी प्रक्रिया का समर्थन करता है, जिसमें सभी अनुमत विकल्पों की व्यापक समीक्षा की जा सके. ट्रस्ट्स के मुताबिक, इस पूरी प्रक्रिया में दीर्घकालिक सार्वजनिक हित को ध्यान में रखा जाना चाहिए.
ट्रस्ट्स ने कहा कि वह टाटा संस और संबंधित अधिकारियों के साथ आगे भी बातचीत जारी रखेगा, ताकि प्रक्रिया निष्पक्ष, पारदर्शी और कानूनी प्रावधानों के अनुरूप आगे बढ़ सके.
NCLT के जरिए चुनिंदा कैपिटल रिडक्शन की योजना, टाटा संस के शेयरों की इनकम टैक्स फेयर वैल्यू के आधार पर होगी गणना
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल एन टाटा ने शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप की ओर से मिले उस प्रस्ताव को टाटा संस के बोर्ड के सामने रखा है, जिसमें स्टर्लिंग इन्वेस्टमेंट्स कॉरपोरेशन (SICPL) और साइरस इन्वेस्टमेंट्स (CIPL) के पास मौजूद टाटा संस की हिस्सेदारी के एक हिस्से को बेचकर नकदी जुटाने की योजना है. प्रस्ताव के तहत इस हिस्सेदारी की बिक्री से कम से कम ₹25,000 करोड़ की सकल राशि जुटाने का अनुमान है.
यह प्रस्ताव 17 सितंबर को हुई टाटा संस की बोर्ड बैठक में रखा गया. इससे पहले नोएल टाटा, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और SP ग्रुप के चेयरमैन शापूर मिस्त्री के बीच इस मुद्दे पर चर्चा हो चुकी थी.
18 महीने में दो चरणों में होगा प्रस्तावित सौदा
प्रस्ताव के मुताबिक, टाटा संस के शेयरों की खरीद-बिक्री दो चरणों में पूरी की जाएगी और इसके लिए करीब 18 महीने की अवधि रखी गई है. साथ ही, टाटा संस नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के जरिए चुनिंदा कैपिटल रिडक्शन की प्रक्रिया शुरू कर सकता है.
टाटा संस के शेयरों का मूल्यांकन इनकम टैक्स रूल्स के तहत निर्धारित फेयर वैल्यू के आधार पर किया जाएगा. प्रस्ताव में कहा गया है कि Rule 11UA के तहत तय न्यूनतम वैल्यूएशन के आधार पर SICPL और CIPL के शेयरों की बिक्री से कम से कम ₹25,000 करोड़ की सकल राशि हासिल हो सकती है.
रकम जुटाने के लिए कई विकल्पों पर विचार
इस सौदे के लिए जरूरी रकम जुटाने के लिए कई विकल्पों पर विचार किया जा सकता है. इनमें टाटा संस के आंतरिक कैश फ्लो का इस्तेमाल, लिस्टेड कंपनियों के शेयरों की बिक्री, टाटा संस के नए कारोबारों में किसी निवेशक को हिस्सेदारी देना और कुछ कारोबारों को ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए लिस्ट करना शामिल है.
नोएल टाटा ने टाटा संस के बोर्ड से NCLT प्रक्रिया शुरू करने के लिए जरूरी कदम उठाने का अनुरोध किया है. इसके अलावा उन्होंने टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स की ऑपरेटिंग टीमों को SP ग्रुप और बैंकरों के साथ बातचीत जारी रखने तथा आगे की जानकारी बोर्ड के सामने रखने की मंजूरी देने का भी अनुरोध किया.
SP ग्रुप के साथ समाधान की दिशा में कदम
टाटा ट्रस्ट्स के मुताबिक, यह प्रस्ताव SP ग्रुप की टाटा संस में हिस्सेदारी से जुड़े मामले में उसके लिए एक निष्पक्ष और समान समाधान तलाशने की पहले से व्यक्त इच्छा को आगे बढ़ाता है.
टाटा संस में SP ग्रुप की हिस्सेदारी लंबे समय से टाटा समूह के लिए एक महत्वपूर्ण कॉरपोरेट मामला रही है. नए प्रस्ताव के तहत हिस्सेदारी के एक हिस्से के मौद्रीकरण के जरिए SP ग्रुप को तरलता उपलब्ध कराने की योजना पर विचार किया जा रहा है.
Moody’s के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और निजी क्षेत्र के निवेश में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
वैश्विक अर्थव्यवस्था में जारी अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक विकास दर को लेकर ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज रेटिंग्स (Moody’s Ratings) ने अपना अनुमान बढ़ा दिया है. एजेंसी ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भारत की रियल GDP ग्रोथ का अनुमान 6 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है. मूडीज के मुताबिक मजबूत घरेलू मांग, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च और निजी क्षेत्र के निवेश में सुधार से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है.
घरेलू मांग और सरकारी खर्च से मिल रही मजबूती
मूडीज के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था ने वैश्विक स्तर पर जारी चुनौतियों के बीच अपनी मजबूती दिखाई है. एजेंसी ने कहा कि देश में निजी खपत यानी प्राइवेट कंजम्पशन मजबूत बनी हुई है. इसके साथ ही सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगातार किए जा रहे खर्च से आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल रहा है.
निजी क्षेत्र का निवेश भी धीरे-धीरे गति पकड़ रहा है. वहीं सर्विस सेक्टर की गतिविधियां भी मजबूत बनी हुई हैं. इन कारकों को देखते हुए मूडीज ने भारत की आर्थिक वृद्धि के अपने अनुमान में बदलाव किया है.
2026 की पहली छमाही में 8.2% रही ग्रोथ
रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 के पहले छह महीनों में भारत की रियल GDP ग्रोथ 8.2 फीसदी रही. 2025 में पूरे साल की ग्रोथ 7.3 फीसदी दर्ज की गई थी. इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.7 फीसदी की दर से बढ़ी थी, जबकि इससे पिछले वित्त वर्ष में ग्रोथ 7.1 फीसदी रही थी.
IMF, RBI और S&P के अनुमान से ज्यादा
मूडीज का नया 7 फीसदी का अनुमान कई अन्य प्रमुख संस्थाओं के मौजूदा अनुमानों से अधिक है. IMF ने जुलाई में जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक अपडेट (World Economic Outlook Update) में FY27 के लिए भारत की ग्रोथ का अनुमान 6.4 फीसदी रखा था. वहीं S&P Global Ratings ने जून में 6.6 फीसदी ग्रोथ का अनुमान जताया था.
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी जून में FY27 के लिए अपने GDP ग्रोथ अनुमान को 6.9 फीसदी से घटाकर 6.6 फीसदी कर दिया था. ऐसे में मूडीज का 7 फीसदी का अनुमान इन अनुमानों से ऊपर है.
सरकारी निवेश और नीतियों पर जोर
मूडीज ने भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे सरकारी निवेश और घरेलू मांग को अहम कारकों में शामिल किया है. सरकार की ओर से इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े क्षेत्रों में निवेश पर जोर दिया जा रहा है.
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) जैसी योजनाओं के जरिए मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने और पीएम गति शक्ति के जरिए लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है.
बाहरी जोखिमों के बीच भारत की स्थिति
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई से जुड़े जोखिम बने हुए हैं. इसके बावजूद मूडीज के आकलन में भारत की बड़ी घरेलू अर्थव्यवस्था और घरेलू मांग को एक महत्वपूर्ण सहारा माना गया है.
एजेंसी ने भारत की Baa3 लॉन्ग-टर्म रेटिंग को स्टेबल आउटलुक के साथ बरकरार रखा है. मूडीज के आकलन के मुताबिक भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति और घरेलू फाइनेंसिंग बेस अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों के खिलाफ कुछ मजबूती प्रदान करते हैं.
राजकोषीय स्थिति पर भी नजर
मूडीज ने सरकार की राजकोषीय स्थिति और कर्ज को लेकर भी अपना आकलन दिया है. एजेंसी के मुताबिक सरकार राजकोषीय मजबूती की दिशा में आगे बढ़ रही है और टैक्स कलेक्शन में सुधार से सरकारी वित्त को समर्थन मिल रहा है. हालांकि, भारत की ग्रोथ पर वैश्विक ऊर्जा कीमतों, भू-राजनीतिक तनाव और बाहरी मांग से जुड़े जोखिम बने रह सकते हैं. ऐसे में आने वाले महीनों में इन कारकों का आर्थिक गतिविधियों पर असर महत्वपूर्ण रहेगा.
गुरुवार को बम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 21.86 अंक गिरकर 74,314.59 पर बंद हुआ, जबकि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 53 अंक की बढ़त के साथ 23,270.60 पर पहुंच गया.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को कारोबार की शुरुआत सपाट से हल्की बढ़त के साथ होने के संकेत मिल रहे हैं. गिफ्ट निफ्टी 23,345 के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जो गुरुवार के निफ्टी बंद स्तर से करीब 13 अंक ऊपर है. अमेरिकी बाजारों में तेजी, एशियाई बाजारों के सकारात्मक रुख और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से घरेलू बाजार को सपोर्ट मिल सकता है. हालांकि, निवेशकों की नजर पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बाजारों के रुझान पर रहेगी.
इससे पहले गुरुवार को घरेलू शेयर बाजार में मिला-जुला कारोबार हुआ. 30 शेयरों वाला बम्बे स्टक एक्सचेंज (BSE) सेंसेक्स 21.86 अंक यानी 0.03 फीसदी गिरकर 74,314.59 पर बंद हुआ, जबकि 50 शेयरों वाला नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) निफ्टी 53 अंक यानी 0.23 फीसदी की बढ़त के साथ 23,270.60 पर पहुंच गया. यानी सेंसेक्स में मामूली कमजोरी रही, जबकि निफ्टी ने लगातार दूसरे सत्र में बढ़त दर्ज की.
एशियाई बाजारों में तेजी
शुक्रवार सुबह एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्रमुख बाजारों में खरीदारी देखने को मिली. निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख से जुड़ी चिंताओं को फिलहाल पीछे रखते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI से जुड़ी कंपनियों में निवेश जारी रखा. जापान का Nikkei 225 करीब 0.56 फीसदी और दक्षिण कोरिया का Kospi करीब 2.06 फीसदी की बढ़त में कारोबार कर रहा था. एशियाई बाजारों की यह तेजी भारतीय बाजार के शुरुआती सेंटीमेंट के लिए अहम संकेत है.
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी
कच्चे तेल की कीमतों में शुक्रवार को नरमी देखने को मिली. पश्चिम एशिया से तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं कुछ कम होने और वैकल्पिक आपूर्ति मार्ग मिलने की उम्मीद के बीच कच्चे तेल पर दबाव रहा. एशियाई कारोबार के दौरान Intercontinental Exchange पर सितंबर Brent Futures करीब 104.02 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था.
इस बीच Gold Futures में 0.32 फीसदी की गिरावट रही, जबकि Silver Futures 0.21 फीसदी की बढ़त में रहा. कच्चे तेल की कीमतें भारतीय बाजार के लिए खास तौर पर अहम हैं, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है.
गुरुवार को सेंसेक्स के 21 शेयरों में तेजी
गुरुवार के कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 21 बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 9 शेयरों में गिरावट रही. टाटा स्टील 2.82 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहा. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 2.38 फीसदी, इंडिगो 2.32 फीसदी, इटरनल 2.24 फीसदी, मारुति 1.64 फीसदी और एशियन पेंट्स 1.45 फीसदी चढ़े.
दूसरी ओर, एचडीएफसी बैंक 1.30 फीसदी की गिरावट के साथ प्रमुख लूजर रहा. टाइटन 1.14 फीसदी, आईसीआईसीआई बैंक 1.03 फीसदी, एसबीआई 0.67 फीसदी, भारती एयरटेल 0.52 फीसदी और एक्सिस बैंक 0.47 फीसदी फिसले.
बैंकिंग शेयरों में दबाव
गुरुवार को बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला. बीएसई बैंक इंडेक्स 318.11 अंक गिरकर 63,330.49 पर बंद हुआ. एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एसबीआई और एक्सिस बैंक जैसे प्रमुख बैंकिंग शेयरों में गिरावट रही. निफ्टी में HDFC Life 5.05 फीसदी की तेजी के साथ टॉप गेनर रहा, जबकि ONGC 1.85 फीसदी की गिरावट के साथ प्रमुख लूजर रहा.
आज इन शेयरों पर रहेगी नजर
आज कई कंपनियों से जुड़ी अहम कारोबारी घोषणाओं का असर उनके शेयरों पर देखने को मिल सकता है. Bharat Forge ने QIP के जरिए फंड जुटाने की प्रक्रिया शुरू की है और इसका फ्लोर प्राइस 1,947.70 रुपये प्रति शेयर तय किया है. Coforge को अलग-अलग बिजनेस वर्टिकल और भौगोलिक क्षेत्रों से रेवेन्यू ग्रोथ की उम्मीद है, जबकि कंपनी की बड़ी डील्स की पाइपलाइन मजबूत बनी हुई है. Tata Trusts ने Tata Sons की संभावित लिस्टिंग को लेकर कहा है कि उन्होंने होल्डिंग कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने पर सहमति नहीं दी है और बोर्ड सभी विकल्पों पर विचार करेगा. Zee Entertainment के शेयरधारकों ने AGM में पांच निदेशकों की दोबारा नियुक्ति को मंजूरी दी है.
Bharat Electronics (BEL) को 26 अगस्त के बाद से 648 करोड़ रुपये के अतिरिक्त ऑर्डर मिले हैं, जिनमें लेजर आधारित IR जैमर, कम्युनिकेशन इक्विपमेंट, साइबर सिक्योरिटी सॉल्यूशंस और AI आधारित सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस शामिल हैं. InterGlobe Aviation (IndiGo) ने अतिरिक्त सामान, शिशु टिकट, बिना अभिभावक यात्रा करने वाले बच्चों और Fast Forward सुविधा से जुड़े शुल्क में बदलाव किया है. Gland Pharma में BofA Securities Europe SA ने करीब 42.4 करोड़ रुपये में 1.5 लाख शेयर खरीदे हैं.
Petronet LNG ने Gruner Renewable Energy के साथ 50:50 ज्वाइंट वेंचर बनाने को मंजूरी दी है. इसके तहत देशभर में 10 CBG प्लांट लगाने की योजना है और कुल अनुमानित पूंजीगत खर्च करीब 1,200 करोड़ रुपये बताया गया है. Wipro ने Aramco और SAP के साथ मिलकर एसेट-इंटेंसिव कंपनियों के लिए Wipro STO360 सॉल्यूशन लॉन्च किया है. GPT Infraprojects को RVNL से रेलवे ब्रिज के निर्माण के लिए 483.72 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है. Federal Bank के बोर्ड ने 500 मिलियन डॉलर तक के Medium-Term Note Programme को मंजूरी दी है. वहीं PTC India ने NLC India Renewables के साथ मिलकर NIRL PTC Renewables नाम से ज्वाइंट वेंचर बनाया है, जिसमें PTC India की 26 फीसदी और NLC India Renewables की 74 फीसदी हिस्सेदारी होगी.
आगे बाजार की दिशा किन संकेतों पर निर्भर करेगी?
शुक्रवार को घरेलू बाजार के लिए शुरुआती संकेत सकारात्मक से सपाट हैं. GIFT Nifty में मामूली बढ़त, एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी बाजारों की मजबूत क्लोजिंग बाजार को सपोर्ट दे सकती है. दूसरी ओर, कच्चे तेल, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, विदेशी निवेशकों की खरीद-बिक्री और वैश्विक ब्याज दरों से जुड़े संकेत कारोबार के दौरान बाजार की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए शुक्रवार के सत्र में निवेशकों की नजर शुरुआती कारोबार के साथ-साथ सेक्टर और शेयर आधारित गतिविधियों पर भी रहेगी.
(डिस्क्लेमर: शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है. 'BW हिंदी' इसकी कोई जिम्मेदारी नहीं लेता. सोच-समझकर, अपने विवेक के आधार पर और किसी सर्टिफाइड एक्सपर्ट से सलाह के बाद ही निवेश करें, अन्यथा आपको नुकसान उठाना पड़ सकता है.)
रूस और अमेरिका से आए जन्मदिन संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब बदलते वैश्विक आर्थिक संबंधों के बीच भारत रणनीतिक रिश्तों, व्यापार हितों और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साध रहा है.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुभकामनाएं दीं. दोनों नेताओं के संदेशों में अंतरराष्ट्रीय मामलों में मोदी की भूमिका और भारत के साथ रूस तथा अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के महत्व को रेखांकित किया गया. प्रधानमंत्री मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर, 2026 को है.
पुतिन ने अपने संदेश में कहा कि मोदी अपने देशवासियों के बीच “सही मायने में गहरे सम्मान” का आनंद लेते हैं और “वैश्विक मंच पर उनका काफी प्रभाव” है. रूसी राष्ट्रपति ने भारत और रूस के बीच मॉस्को द्वारा “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी” के रूप में वर्णित संबंधों को मजबूत करने में प्रधानमंत्री मोदी की भूमिका का भी उल्लेख किया. पुतिन का यह संदेश 11 सितंबर को नई दिल्ली में मोदी के साथ हुई उनकी बैठक के कुछ दिनों बाद आया है. इस बैठक में दोनों देशों ने द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की थी.
भारत और रूस ने 2030 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार को करीब 70 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है.
अमेरिका के साथ रिश्तों पर नजर
ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं अमेरिकी दूतावास के माध्यम से दी गईं. दूतावास ने संदेश में कहा, “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देते हैं.” संदेश में आने वाले वर्ष के लिए मोदी के अच्छे स्वास्थ्य और खुशियों की भी कामना की गई.
यह संदेश ऐसे समय आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार को लेकर बातचीत जारी है और वॉशिंगटन रूस से भारत की ऊर्जा खरीद को लेकर दबाव बना रहा है. हालिया अमेरिकी विधायी कार्रवाई के बाद रूस से पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ की संभावना भी सामने आई है.
आर्थिक रिश्तों पर बढ़ा फोकस
कारोबारी क्षेत्र के लिए इन घटनाक्रमों का व्यापक महत्व इस बात में है कि भारत अपनी ऊर्जा और व्यापारिक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखते हुए दोनों प्रमुख शक्तियों के साथ आर्थिक संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.
उद्योग जगत के विशेषज्ञों का कहना है कि आपूर्ति श्रृंखलाओं, ऊर्जा बाजारों और टैरिफ नीतियों में लगातार बदलाव के बीच भारत की विभिन्न देशों के साथ विविध साझेदारियां बनाए रखने की क्षमता महत्वपूर्ण बनी रहेगी.
भारत-रूस संबंधों में ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है, जबकि अमेरिका भारत के लिए एक अहम बाजार और निवेश साझेदार बना हुआ है. ऐसे में कारोबारी जगत राजनयिक घटनाक्रमों के साथ-साथ टैरिफ में बदलाव, ऊर्जा के प्रवाह और सीमा-पार निवेश से जुड़े घटनाक्रमों पर भी नजर रख रहा है.
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन ने कहा- चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला पहले ही स्वीकार किया जा चुका था.
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बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो
टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने गुरुवार को कंपनी की बोर्ड बैठक में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति का विरोध किया. उन्होंने तर्क दिया कि चंद्रशेखरन का पहले दूसरा कार्यकाल नहीं लेने का फैसला बहुमत शेयरधारक द्वारा पहले ही स्वीकार किया जा चुका था और अब उत्तराधिकार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाना चाहिए.
बोर्ड के समक्ष पेश किए गए एक बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को बोर्ड को सूचित किया था कि 20 फरवरी, 2027 को उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त होने के बाद वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे.
नोएल टाटा ने कहा, “यह उनका अपना फैसला था. यह स्वतंत्र रूप से लिया गया था और स्पष्ट रूप से व्यक्त किया गया था.” उन्होंने कहा कि “यह फैसला इस बोर्ड ने उनसे नहीं मांगा था, न ही यह इस बोर्ड के किसी प्रस्ताव का विषय था और न ही यह किसी समीक्षा प्रक्रिया का परिणाम था.”
इसके बाद टाटा ट्रस्ट्स ने चंद्रशेखरन के फैसले को स्वीकार कर लिया और टाटा संस से कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी नियुक्त करने के लिए एक चयन समिति गठित करने को कहा.
नोएल टाटा ने कहा कि इस फैसले को सार्वजनिक भी किया गया था और “ग्रुप के कर्मचारियों, उसके ऋणदाताओं, उसके कारोबारी साझेदारों और बाजार ने इसी आधार पर आगे कदम बढ़ाया है. बहुमत शेयरधारक ने भी ऐसा ही किया है. अब पिछला पन्ना पलट चुका है.”
नोएल टाटा ने दोबारा नियुक्ति पर उठाई आपत्ति
नोएल टाटा ने कहा, “इस बैठक में दोबारा नियुक्ति के लिए अब कोई प्रस्ताव लाना इस बोर्ड से एक साथ तीन चीजों को दरकिनार करने के लिए कहेगा: चेयरमैन का खुद का स्पष्ट रूप से बताया गया फैसला, बहुमत शेयरधारक द्वारा उस फैसले की स्वीकृति और वह आगे की प्रक्रिया जिसे उस शेयरधारक ने इस कंपनी को शुरू करने के लिए कहा है.”
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या बोर्ड चेयरमैन पद पर विचार कर सकता है, जबकि टाटा संस के निदेशक के रूप में चंद्रशेखरन की स्थिति का समाधान अभी नहीं हुआ है. उनके बयान के अनुसार, जिस आम बैठक में इस सवाल का फैसला होना था, वह कोरम पूरा नहीं होने के कारण आगे नहीं बढ़ सकी.
नोएल टाटा ने यह भी कहा कि अगर बाद में यह पाया गया कि चंद्रशेखरन के निदेशक पद की स्थिति अनसुलझी रहने के दौरान चेयरमैन पद पर फैसला लिया गया था, तो यह फैसला “गंभीर कानूनी चुनौती के दायरे में आ सकता है.”
बाद में टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति के लिए लाया गया बोर्ड प्रस्ताव “कानूनी रूप से शून्य” था. ट्रस्ट्स ने कहा कि चार निदेशकों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जबकि नोएल टाटा ने इसके खिलाफ वोट दिया. ट्रस्ट्स ने तर्क दिया कि आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार चेयरमैन की नियुक्ति या दोबारा नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों के बहुमत का समर्थन जरूरी है.
ट्रस्ट्स ने आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन का दिया हवाला
ट्रस्ट्स के बयान के अनुसार, संबंधित प्रक्रिया चेयरमैन की पहली नियुक्ति और मौजूदा चेयरमैन की दोबारा नियुक्ति, दोनों पर लागू होती है. इसमें आगे कहा गया कि बोर्ड द्वारा ऐसे प्रस्ताव पर विचार किए जाने के समय दोनों ट्रस्ट नामित निदेशकों का मौजूद रहना जरूरी है और प्रस्ताव को वैध होने के लिए दोनों का पक्ष में मतदान करना आवश्यक है.
नोएल टाटा ने भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ से प्राप्त एक कानूनी राय भी बोर्ड के समक्ष पेश की, जिसमें ट्रस्ट्स के रुख की शुद्धता से संबंधित राय दी गई थी. टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि बोर्ड ने इस राय पर ध्यान नहीं दिया.
अपने बयान में नोएल टाटा ने कहा कि चंद्रशेखरन के फैसले को ट्रस्ट्स की स्वीकृति औपचारिक रूप से कंपनी को बता दी गई थी और अब कंपनी को उत्तराधिकार की प्रक्रिया आगे बढ़ानी चाहिए. उन्होंने कहा, “पन्ना पलट चुका है. अब आगे बढ़ने का समय है.”
टाटा ट्रस्ट्स ने कहा कि वह व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के अनुसार उत्तराधिकारी की नियुक्ति के लिए प्रतिबद्ध हैं.