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आपकी EMI को लेकर RBI से आई बड़ी खबर, जानें क्या होगा आप पर असर
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में रेपो रेट को यथावत रखने का फैसला लिया गया है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने रेपो रेट (Repo Rate) को लेकर उम्मीद के अनुरूप ही फैसला सुनाया है. RBI ने रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव न करते हुए उसे स्थिर रखा है. रिजर्व बैंक की छह दिसंबर को शुरू हुई बैठक का आज आखिरी दिन था. मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के बाद RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने नतीजों का ऐलान किया. उन्होंने बताया कि रेपो रेट को 6.5 प्रतिशत पर यथावत रखा गया है. RBI के इस फैसले का मतलब है कि आपको सस्ते लोन के लिए अभी और इंतजार करना होगा. हालांकि, राहत की बात ये है कि आपकी EMI में इजाफा नहीं होगा.
5 सदस्य रहे पक्ष में
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, MCC के 6 में से 5 सदस्य ब्याज दरों में बदलाव न करने के फैसले के पक्ष में थे. रेपो रेट के साथ ही RBI ने स्थायी जमा सुविधा और सीमांत स्थायी सुविधा दरों को भी यथावत रखा है. ये लगातार पांचवीं बार है जब केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है. रिजर्व बैंक ऑफ ने अंतिम बार फरवरी में नीतिगत ब्याज दरों को बढ़ाकर 6.5 प्रतिशत किया था. शक्तिकांता दास कहा कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि RBI की निगाहें महंगाई पर बनीं हुई है. आने वाले दिनों में ब्याज दरों में बदलाव हो सकता है.
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पहले से थी उम्मीद
वैसे, कई एक्सपर्ट्स पहले से यह कह रहे थे कि नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा. 17 से 30 नवंबर के बीच आयोजित एक पोल में 64 अर्थशास्त्रियों से उनकी राय पूछी गई थी, जिनमें से अधिकांश ने कहा कि RBI रेपो दरों को 6.5 फीसदी पर स्थिर रख सकता है. अर्थशास्त्रियों का कहना था कि महंगाई दर में गिरावट देखने को मिल रही है और ये अक्टूबर में 5 प्रतिशत से नीचे आ गई है. हालांकि, इसके रिजर्व बैंक की 4% की तय सीमा से ऊपर बने रहने की संभावना है. लिहाजा इसे देखते हुए रिजर्व बैंक शायद अपनी मौजूदा रणनीति में कोई बदलाव न करे. पोल में शामिल सभी अर्थशास्त्रियों के औसत अनुमान के अनुसार, रेपो रेट में कटौती 2024 की तीसरी तिमाही (सितंबर तिमाही) से शुरू हो सकती है.
रेपो रेट से EMI से रिश्ता
चली अब जब बात रेपो रेट की निकली है, तो इसके बारे में भी जान लेते हैं. रेपो रेट (Repo Rate) वह दर होती है, जिस पर आरबीआई बैंकों को कर्ज देता है. वहीं, रिवर्स रेपो रेट उस दर को कहते हैं जिस दर पर बैंकों को आरबीआई के पास पैसा रखने पर ब्याज मिलता है. जब रेपो रेट में बढ़ोत्तरी होती है, तो बैंकों के लिए कर्ज महंगा हो जाता है और वो ग्राहकों के कर्ज को भी महंगा कर देते हैं. यानी वह अपना बढ़ा बोझ ग्राहकों पर लाद देते हैं. बैंक केवल नए लोन ही महंगे नहीं करते, बल्कि पुराने लोन भी महंगे कर देते हैं, जिससे आपकी EMI बढ़ जाती है.
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