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रेपो रेट को लेकर बंटे RBI सदस्‍य, जानिए किसने क्‍या कहा? 

आरबीआई की हर दो महीने में होने वाली रेपो रेट की समीक्षा से पहले होने वाली ये बैठक बेहद अहम होती है इसी के आधार पर आने वाले दिनों रेपो रेट तय होती है. 

ललित नारायण कांडपाल 3 years ago

RBI बीते दो टर्म से लगातार रेपो रेट में इजाफा नहीं कर रहा है. रेपो रेट अभी भी 6.50 पर ही बनी हुई है. लेकिन इसमें इजाफा होगा या नहीं इसे लेकर RBI की छह-सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के सदस्यों की बैठक के बाद ही तय होता है. इसे लेकर आज हुई बैठक में निकलकर सामने आया है कि RBI के सदस्‍यों का इसे लेकर अलग-अलग मत है. कुछ जहां आगे इसे न बढ़ाने की बात कर रहे हैं वहीं कुछ का मत अलग है. अब ऐसे में रेपो रेट बढ़ेगी या नहीं ये अगली घोषणा पर ही पता चलेगा. 

क्‍या हुआ आज की बैठक में 
RBI की आज हुई बैठक में इस पर कई सदस्‍यों का रेपो रेट बढ़ाने को लेकर अलग-अलग प्‍वॉइंट सामने आया था. मीटिंग के कुछ सदस्‍यों का कहना था कि आगे अगर इसे बढ़ाया जाता है तो आर्थिक चक्र को इससे नुकसान हो सकता है जबकि कुछ का नजरिया दूसरा था. इससे पहले 8 जून को लगातार दूसरी बार अपनी प्रमुख उधार दर (रेपो रेट) को स्थिर रखा लेकिन संकेत दिया कि मौद्रिक स्थितियां कुछ समय के लिए सख्त हो सकती हैं, जिससे महंगाई और उसके असर पर नियंत्रण पाया जा सके. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार बाहरी सदस्य जयंत वर्मा ने आरबीआई द्वारा प्रकाशित मिनट ऑफ मीटिंग में लिखा है कि मौद्रिक नीति अब खतरनाक स्तर के करीब है, जिस पर यह अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण नुकसान पहुंचा सकती है.

एक अन्‍य सदस्‍य ने इसे लेकर क्‍या कहा 
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार एक अन्‍य बाहरी सदस्‍य आशिमा गोयल ने कहा कि मुद्रास्फीति उम्मीद के मुताबिक कम हो रही है और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि वास्तविक रेपो दर बहुत अधिक न बढ़े और इससे आर्थिक चक्र को नुकसान न पहुंचे. इसके लिए रेपो रेट को लंबे समय तक ऊंचा रखने की आवश्यकता नहीं है. हालाँकि आरबीआई के सभी तीन आंतरिक सदस्यों ने मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों पर ध्यान केंद्रित करना जारी रखने को लेकर अपनी बात कही और कहा कि जून में ठहराव केवल विशिष्ट नीति के लिए था और भविष्य की दर आर्थिक डेटा के विकास पर निर्भर करेगी.

क्‍या बोले RBI गवर्नर  
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा कि मुद्रास्फीति को सहनशीलता सीमा के भीतर लाकर एमपीसी का काम केवल आधा ही पूरा हुआ है. उन्होंने लिखा कि मुद्रास्फीति के खिलाफ हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है. हमें उभरती मुद्रास्फीति-विकास के दृष्टिकोण का दूरदर्शी आंकलन करने की जरूरत है और अगर स्थिति जरूरी हुई तो कार्रवाई करने के लिए तैयार रहना होगा.
वहीं डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने इसे लेकर कहा कि पहली तिमाही के बाद दूसरी तिमाही में सप्‍लाई चेन में में सामने आए बेमेल आंकड़ों से 2023-24 की दूसरी छमाही पर असर पड़ सकता है. इसलिए मौद्रिक नीति को 'ब्रेस' मोड में रहने की जरूरत है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि इन झटकों का प्रभाव अर्थव्यवस्था पर कोई निशान छोड़े बिना खत्म हो जाए.

मई में क्‍या रही है महंगाई दर 
भारत सरकार के आंकड़ों को देखें तो महंगाई दर फिलहाल RBI  के खतरनाक स्‍तर से नीचे ही बनी हुई है. महंगाई दर अप्रैल में जहां  4.7% थी, वो मई में 4.25% पर आ गई है. 6  प्रतिशत से ज्‍यादा को आरबीआई खतरनाक मानता है. RBI ने अपनी नीति में एमपीसी के मध्यम अवधि के लक्ष्य के रूप में 4% पर ध्यान केंद्रित किया, न कि केवल 2-6% बैंड पर.  RBI के कार्यकारी निदेशक राजीव रंजन ने कहा कि वृहद मोर्चों पर अधिक स्पष्टता के साथ, समझदारी की आवश्यकता है कि एमपीसी अब मुद्रास्फीति को 4% के लक्ष्य पर संरेखित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए. 


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