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RBI ब्याज दरों में बदलाव से कर सकता है परहेज, पश्चिम एशिया तनाव और महंगाई चिंता बढ़ी: SBI रिसर्च
रिपोर्ट के अनुसार आर्थिक वृद्धि भले ही महत्वपूर्ण बनी हुई है, लेकिन मौजूदा समय में भू-राजनीतिक तनाव, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और बढ़ती महंगाई के जोखिमों को देखते हुए RBI के लिए ब्याज दरों में बदलाव की बजाय फिलहाल उन्हें स्थिर रखना ही बेहतर विकल्प हो सकता है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अपनी आगामी मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रख सकता है. एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव और बढ़ती महंगाई के जोखिमों के बीच केंद्रीय बैंक सतर्क रुख अपना सकता है. 6 से 8 अप्रैल के बीच होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक, पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद पहली समीक्षा होगी. रिपोर्ट के अनुसार हालात अभी भी तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए RBI इस बार “स्टेटस क्वो” यानी दरों में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला ले सकता है.
तेल बाजार में झटका, भारत पर भी असर
रिपोर्ट में कहा गया है कि युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा बाजार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाधित होने जैसी स्थिति ने 1973 के बाद का सबसे बड़ा तेल झटका पैदा किया है. इसका सीधा असर भारत पर भी देखने को मिल रहा है, जहां रुपया 93 प्रति डॉलर के पार कमजोर हुआ है, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है और आयातित महंगाई में लगातार बढ़ोतरी हो रही है.
मौसम का खतरा बढ़ा सकता है महंगाई
रिपोर्ट में संभावित सुपर एल नीनो का भी जिक्र किया गया है. यदि यह स्थिति बनती है तो खाद्य कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे महंगाई और ऊपर जा सकती है और RBI के लिए मौद्रिक नीति से जुड़े फैसले लेना और जटिल हो सकता है.
घरेलू स्तर पर महंगाई का दबाव
एसबीआई रिसर्च के अनुसार आयातित महंगाई पहले ही 5.4 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है और अगले तीन तिमाहियों में उपभोक्ता महंगाई 4.5 प्रतिशत से ऊपर रह सकती है. ऐसे में RBI अपनी नीति घोषणा में बेहद सावधानी बरतेगा, खासकर यह युद्ध शुरू होने के बाद पहली समीक्षा बैठक है.
बाहरी जोखिम बढ़े, पूंजी निकासी तेज
रिपोर्ट में बाहरी क्षेत्र को लेकर भी चिंता जताई गई है. रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है और विदेशी निवेशकों की निकासी FY26 में 16.6 अरब डॉलर रही है, जो 1991 के बाद सबसे ज्यादा मानी जा रही है. इसके साथ ही FY27 में भारत का भुगतान संतुलन घाटे में रहने का अनुमान भी जताया गया है.
लिक्विडिटी और बॉन्ड बाजार पर रहेगा फोकस
हालांकि ब्याज दरों में बदलाव की संभावना कम है, लेकिन RBI बाजार में तरलता और बॉन्ड यील्ड को संतुलित रखने पर ध्यान दे सकता है. रिपोर्ट में “ऑपरेशन ट्विस्ट” जैसे उपाय अपनाने की संभावना जताई गई है, जिससे बाजार की स्थिति को स्थिर बनाए रखा जा सके.
बैंकों के लिए चुनौती बन सकते हैं नए नियम
रुपये को स्थिर रखने के लिए हाल में उठाए गए नियामकीय कदम, जैसे करेंसी बाजार में सट्टा पोजिशन पर अंकुश, बैंकों के लिए संचालन संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकते हैं और उनकी कार्यप्रणाली पर असर डाल सकते हैं.
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