होम / बिजनेस / महंगाई की मारी जनता पर बढ़ेगा कर्ज का बोझ या मिलेगी राहत, जल्द चलेगा पता
महंगाई की मारी जनता पर बढ़ेगा कर्ज का बोझ या मिलेगी राहत, जल्द चलेगा पता
RBI की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिनों से चल रही बैठक आज समाप्त हो रही है. माना जा रहा है कि रेपो रेट में फिर से इजाफे की घोषणा की जा सकती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago
महंगाई की मार झेल रही जनता पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा या नहीं, कुछ देर में स्पष्ट हो जाएगा. दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मौद्रिक नीति समिति (RBI MPC) की बैठक आज खत्म हो रही है. RBI के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikant Das) सुबह 10 बजे बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देंगे. माना जा रहा है कि RBI रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है. यदि ऐसा होता है, तो न केवल सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे बल्कि आपकी EMI भी बढ़ जाएगी.
अब तक इतनी हुई वृद्धि
महंगाई को रोकने के लिए RBI पिछले साल मई से छह बार रेपो रेट में बढ़ोतरी कर चुका है. इस दौरान रेपो रेट चार फीसदी से बढ़कर 6.50 प्रतिशत पर जा पहुंच गई है. RBI की बैठक तीन अप्रैल को शुरू हुई थी. बता दें कि रिटेल महंगाई जनवरी में 6.52 फीसदी और फरवरी में 6.44 फीसदी पर रही थी. यह आरबीआई के छह फीसदी के संतोषजनक स्तर से अधिक है. RBI MPC की बैठक में मौद्रिक नीति से जुड़े तमाम घरेलू और अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की व्यापक समीक्षा के बाद रेपो रेट बढ़ाने का फैसला लिया जाएगा.
तब मिल सकती है राहत
एक्सपर्ट्स का मानना है कि रेपो रेट 0.25 प्रतिशत तक बढ़ाई जा सकती है. हालांकि, यदि महंगाई में आने वाले समय में कुछ कमी आती है, तो नीतिगत दरों में भी कटौती का फैसला लिया जा सकता है. बता दें कि RBI द्वारा पिछले कुछ समय से लगातार ब्याज दरों में इजाफा किया जा रहा है. जिसके चलते लोन भी महंगे हो रहे हैं. जिन लोगों ने पहले से कोई लोन ले रखा है, उसकी EMI भी लगातार बढ़ती जा रही है. बढ़ती महंगाई के बीच महंगे होते लोन ने लोगों को परेशान कर रखा है.
क्या कहता है अधिनियम?
गौरतलब है कि RBI के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि उसे महंगाई को नियंत्रित करने में अपनी असफलता पर सरकार को स्पष्टीकरण देने पड़ा है. दरअसल, रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत अगर महंगाई के लिए तय लक्ष्य को लगातार तीन तिमाहियों तक हासिल नहीं किया जाता, तो RBI को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण देना होता है. मौद्रिक नीति रूपरेखा के 2016 में प्रभाव में आने के बाद से यह पहली बार हुआ है जब RBI को इस संबंध में केंद्र को रिपोर्ट भेजनी पड़ी. आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में नाकाम रहा है.
टैग्स