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RBI ने राज्यों के लिए Q1 उधारी का कैलेंडर जारी किया, 2.54 लाख करोड़ रुपये का लक्ष्य
इस वित्तीय वर्ष की एक प्रमुख पहल पायलट बेंचमार्क इश्यूअंस स्ट्रैटेजी (BIS) है, जिसका उद्देश्य उधार प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना और निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाना है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने गुरुवार को वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के उधार कार्यक्रम का संकेतात्मक कैलेंडर जारी किया. इस तिमाही में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 2,54,509 करोड़ रुपये की उधारी जुटाने का लक्ष्य रखा गया है.
तिमाही में उधारी का उद्देश्य
यह उधारी नियमित नीलामी के माध्यम से तिमाही के पहले तीन महीनों में होगी और इसका उद्देश्य राज्यों की वित्तीय जरूरतों को पूरा करना है. RBI, जो राज्य ऋण जारी करने का प्रबंधन करता है, ने नीलामी की समयसीमा तय की है, जबकि बाजार की स्थितियों के अनुसार तिथियों और राशियों को समायोजित करने की सुविधा भी रखी गई है.
बेंचमार्क इश्यूअंस रणनीति का परिचय
इस वित्तीय वर्ष की एक प्रमुख पहल पायलट बेंचमार्क इश्यूअंस स्ट्रैटेजी (BIS) है, जिसका उद्देश्य उधार प्रक्रियाओं को मानकीकृत करना और निवेशकों के लिए पारदर्शिता बढ़ाना है. इस पहल में नौ राज्य आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, केरल, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश शामिल होंगे.
इन राज्यों के माध्यम से इस तिमाही में कुल उधारी का लगभग 1,53,900 करोड़ रुपये जुटाया जाएगा. BIS के तहत, राज्य पूर्व-निर्धारित परिपक्वता बकेट में प्रतिभूतियों का निर्गमन करेंगे, जो पहले से घोषित कार्यक्रम के अनुसार होगा. इसका उद्देश्य राज्य ऋण बाजार को अधिक पूर्वानुमेय और तरल बनाना है.
संरचित उधारी प्रयास
बाकी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के माध्यम से इस अवधि में लगभग 1,00,609 करोड़ रुपये पारंपरिक उधारी मार्गों से जुटाए जाएंगे. RBI ने संकेत दिया कि समय के साथ बेंचमार्क रणनीति को और अधिक राज्यों तक विस्तारित किया जा सकता है, ताकि उप-राष्ट्रीय बांड बाजार को गहरा किया जा सके.
बाजार स्थिरता और समन्वय
केंद्रीय बैंक ने यह भी जोर दिया कि वह राज्यों के साथ समन्वय कर यह सुनिश्चित करेगा कि उधारी संचालन व्यापक वित्तीय बाजार स्थिरता को प्रभावित न करें. प्रत्येक नीलामी के कुछ दिन पहले अंतिम विवरण, जिसमें राशि और भाग लेने वाले संस्थान शामिल होंगे, सार्वजनिक किए जाएंगे.
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