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महंगाई के जख्मों पर RBI छिड़क सकता है नमक, जानें कैसे बढ़ने वाली है आपकी परेशानी

रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत अगर महंगाई के लिए तय लक्ष्य को लगातार तीन तिमाहियों तक हासिल नहीं किया जाता, तो RBI को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण देना होता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 3 years ago

महंगाई पहले से ही आम आदमी का बजट बिगाड़े हुए है. पेट्रोल-डीजल से लेकर LPG सिलेंडर तक के दाम आसमान पर हैं और अब RBI भी उसे तगड़ा झटका दे सकता है. आज से रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी RBI की मौद्रिक समीक्षा की बैठक शुरू होने जा रही है. तीन दिनों तक चलने वाली इस बैठक के अंत में नीतिगत दरों पर फैसले की घोषणा की जाएगी. पूरी संभावना है कि RBI एक बार फिर से रेपो रेट (Repo Rate) में इजाफा कर दे. यदि ऐसा होता है, तो सभी तरह के लोन महंगे हो जाएंगे और EMI का बोझ भी बढ़ जाएगा.

लगातार बढ़ रही हैं ब्याज दरें
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि खुदरा महंगाई के छह फीसदी के संतोषजनक स्तर से ऊपर बने रहने और अमेरिकी फेडरल रिजर्व सहित कई केंद्रीय बैंकों के आक्रामक रुख के बीच RBI रेपो रेट में 0.25 फीसदी की वृद्धि कर सकता है. बता दें कि महंगाई नियंत्रित करने के नाम पर रिजर्व बैंक मई, 2022 से लगातार ब्याज दरों में इजाफा कर रहा है. इस दौरान रेपो दर 4 फीसदी से बढ़कर 6.50 फीसदी पर पहुंच चुकी है. फरवरी में हुई पिछली बैठक में भी रेपो दर में 0.25 फीसदी का इजाफा किया गया था.

संतोषजनक स्तर से ऊपर
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की द्विमासिक समीक्षा बैठक आज शुरू होगी और छह अप्रैल को नीतिगत दर संबंधी फैसले के साथ खत्म होगी. इस बैठक में मौद्रिक नीति से जुड़े तमाम घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पहलुओं की व्यापक समीक्षा के बाद फैसला लिया जाएगा कि रेपो रेट बढ़ानी है या नहीं. उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई जनवरी में 6.52 फीसदी और फरवरी में 6.44 फीसदी रही है. जो RBI के संतोषजनक स्तर से अधिक है. लिहाजा, माना जा रहा है कि इस बार भी रेपो रेट में इजाफा हो सकता है.

क्या है RBI की जिम्मेदारी?
RBI के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि उसे महंगाई को नियंत्रित करने में अपनी असफलता पर सरकार को स्पष्टीकरण देने पड़ा है. दरअसल, रिजर्व बैंक अधिनियम के तहत अगर महंगाई के लिए तय लक्ष्य को लगातार तीन तिमाहियों तक हासिल नहीं किया जाता, तो RBI को केंद्र सरकार के समक्ष स्पष्टीकरण देना होता है. उसे बताना होता है कि महंगाई नीचे नहीं आने के क्या कारण हैं और उसने अब तक क्या कदम उठाए हैं. मौद्रिक नीति रूपरेखा के 2016 में प्रभाव में आने के बाद से यह पहली बार हुआ है जब RBI को इस संबंध में केंद्र को रिपोर्ट भेजनी पड़ी. आरबीआई को केंद्र की तरफ से खुदरा महंगाई दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर बनाए रखने की जिम्मेदारी मिली हुई है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद आरबीआई मुद्रास्फीति को नियंत्रित रखने में नाकाम रहा है.


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