होम / बिजनेस / RBI ने बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान, घटाया महंगाई का आकलन; रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
RBI ने बढ़ाया GDP ग्रोथ का अनुमान, घटाया महंगाई का आकलन; रेपो रेट 5.25% पर बरकरार
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है, हालांकि वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 59 minutes ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अगस्त मौद्रिक नीति समीक्षा में लगातार दूसरी बार रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है. इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया, जबकि खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मजबूती से अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है, हालांकि वैश्विक जोखिमों को देखते हुए सतर्कता अभी भी जरूरी है.
रेपो रेट और पॉलिसी रुख में कोई बदलाव नहीं
तीन से पांच अगस्त तक चली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में छहों सदस्यों ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया. समिति ने मौद्रिक नीति का 'न्यूट्रल' रुख भी कायम रखा. इसके अलावा स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (SDF) रेट 5%, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (MSF) रेट और बैंक रेट 5.5% पर यथावत रखे गए हैं.
GDP ग्रोथ के अनुमान में बढ़ोतरी
RBI ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% से बढ़ाकर 6.7% कर दिया है. केंद्रीय बैंक के अनुसार पहली तिमाही में अर्थव्यवस्था का प्रदर्शन उम्मीद से बेहतर रहा, जिसके चलते पूरे साल के विकास अनुमान में संशोधन किया गया. RBI का अनुमान है कि पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7%, दूसरी तिमाही में 6.4%, तीसरी तिमाही में 6.5% और चौथी तिमाही में 6.8% रहेगी.
घरेलू मांग और मैन्युफैक्चरिंग बनी ताकत
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के शुरुआती नतीजे उत्साहजनक रहे हैं. निजी खपत मजबूत बनी हुई है और विवेकाधीन खर्च में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है. घरेलू मांग के दम पर सेवा क्षेत्र में भी अच्छी वृद्धि की संभावना बनी हुई है, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है.
महंगाई के मोर्चे पर राहत
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए खुदरा महंगाई (CPI) का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है. गवर्नर ने बताया कि पहली तिमाही में वास्तविक महंगाई RBI के अनुमान से थोड़ी कम रही, क्योंकि लागत बढ़ने का असर उपभोक्ताओं तक सीमित रहा. उन्होंने कहा कि खाद्य और ईंधन की कीमतों के कारण हेडलाइन महंगाई पर दबाव बना हुआ है, लेकिन कोर महंगाई अब भी नियंत्रण में है. RBI का अनुमान है कि दूसरी तिमाही में महंगाई 4.7%, तीसरी तिमाही में 5.9% और चौथी तिमाही में 5.5% रह सकती है. तीसरी तिमाही के बाद महंगाई में धीरे-धीरे नरमी आने की उम्मीद है.
वैश्विक जोखिमों पर RBI की नजर
RBI ने कहा कि अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत है, लेकिन वैश्विक अनिश्चितताएं अभी भी चिंता का विषय हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, वैश्विक व्यापार नीतियों में अनिश्चितता और मौसम संबंधी जोखिम आगे महंगाई और आर्थिक वृद्धि को प्रभावित कर सकते हैं. गवर्नर ने कहा कि केंद्रीय बैंक किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव से पहले महंगाई के रुख और आर्थिक आंकड़ों में अधिक स्पष्टता का इंतजार करेगा. इसलिए फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.
टैग्स