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RBI ने शुरू किए तीन अहम सर्वे, महंगाई और ब्याज दरों पर नीतियां तय करने में होगी मदद
RBI के ये तीनों सर्वे अर्थव्यवस्था की असली नब्ज पकड़ने का प्रयास हैं. महंगाई से लेकर रोजगार तक, हर पहलू पर लोगों की सोच और अनुभव अब नीति निर्माण का आधार बनने जा रहे हैं.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अर्थव्यवस्था की असली तस्वीर समझने और आम जनता की आर्थिक उम्मीदों को परखने के लिए तीन बड़े सर्वेक्षण शुरू किए हैं. इन सर्वे से मिली जानकारी आगे चलकर यह तय करेगी कि महंगाई, ब्याज दरें और आपकी जेब पर असर डालने वाले फैसले किस दिशा में जाएंगे. यह घोषणा आरबीआई ने शुक्रवार को की है, तो आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं.
महंगाई पर लोगों की राय जानने के लिए सर्वे (IESH)
RBI का पहला सर्वे है Inflation Expectations Survey of Households (IESH) इसका उद्देश्य यह समझना है कि देश के अलग-अलग इलाकों में रहने वाले परिवार आने वाले महीनों में महंगाई को लेकर क्या सोचते हैं.
इस सर्वे में 19 प्रमुख शहरों के परिवारों से पूछा जाएगा कि उन्हें लगता है क्या कि दाल, तेल, कपड़े, ईंधन जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ेंगे या घटेंगे. इन आंकड़ों से RBI यह समझ पाता है कि आम जनता की महंगाई को लेकर क्या धारणा है, जो आगे चलकर मौद्रिक नीति और ब्याज दर तय करने में अहम भूमिका निभाती है.
शहरी उपभोक्ता विश्वास सर्वे (UCCS)
दूसरा सर्वे है Urban Consumer Confidence Survey (UCCS), जो शहरों में रहने वाले लोगों के आर्थिक आत्मविश्वास को मापता है. इसमें यह देखा जाता है कि लोग मौजूदा आर्थिक हालात, रोजगार के अवसर, आय और खर्च को लेकर कितना भरोसा महसूस कर रहे हैं.
सर्वे में यह भी पूछा जाता है कि क्या लोग अपनी नौकरी को लेकर सुरक्षित महसूस करते हैं, क्या उनकी आय बढ़ रही है और भविष्य में खर्च करने की क्षमता कैसी रहेगी. इस तरह के जवाब यह तय करने में मदद करते हैं कि शहरी इलाकों में उपभोक्ता खर्च का रुझान कैसा रहेगा, जो सीधे तौर पर अर्थव्यवस्था की रफ्तार को प्रभावित करता है.
ग्रामीण इलाकों की आर्थिक सोच पर फोकस (RCCS)
तीसरा सर्वे Rural Consumer Confidence Survey (RCCS) है, जो ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में लोगों की आर्थिक स्थिति और उम्मीदों का आकलन करेगा. यह सर्वे 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा.
इसमें ग्रामीण परिवारों से पूछा जाएगा कि वे अपनी आमदनी, रोजगार के अवसर, वस्तुओं की कीमतें और भविष्य की संभावनाओं को लेकर क्या सोचते हैं. इससे RBI को यह समझने में मदद मिलेगी कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार की गति कैसी है और वहां उपभोक्ता खर्च का माहौल कैसा बन रहा है.
नीति निर्माण में सर्वे की अहम भूमिका
RBI हर साल ऐसे सर्वे कराता है ताकि यह पता चल सके कि जनता की नजर में देश की आर्थिक स्थिति कैसी है. इन सर्वेक्षणों के नतीजे मौद्रिक नीति समिति (MPC) को भेजे जाते हैं, जो ब्याज दरों, महंगाई नियंत्रण और कर्ज नीति जैसे अहम फैसले लेती है.
इस बार भी इन सर्वेक्षणों के परिणाम 3 दिसंबर से शुरू होने वाली MPC बैठक** से पहले आने की उम्मीद है. यानी, आपकी जेब पर असर डालने वाले अगली ब्याज दरों के फैसले में इन सर्वे की भूमिका अहम रहने वाली है.
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