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RBI ने सभी बैंकों को पर्सनल लोन पर फिक्स्ड ब्याज करने के दिए निर्देश, जानिए क्या होगा फायदा?
RBI ने देश के सभी बैंकों को पर्सनल लोन फिक्स्ड ब्याज दर पर देने के निर्देश दिए हैं. इससे लोन लेने वाले के लिए EMI एक जैसी रहती है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
अगर आप पर्सनल लोन लेने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो ये खबर आपके काम की है. दरअसल, अब आप अपनी ब्याज दर को फिक्स करवा सकते हैं. यानी आप अपने लोन की ईएमआई (EMI) एक फिक्स ब्याज दर पर दे सकते हैं. हालांकि बैंकों में यह नियम पहले से है लेकिन ज्यादातर जगह इस नियम का पालन नहीं हो रहा है. फिक्स्ड ब्याज दर पर लोन लेने से ब्याज दर बढ़ने पर ईएमआई नहीं बढ़ती. ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार यानी 10 जनवरी, 2025 को बैंकों के लिए यह अनिवार्य है कि वे ईएमआई पर आधारित सभी तरह के पर्सनल लोन फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट पर दें. तो आइए आपको इसकी विस्तार से जानकारी देते हैं.
पर्सनल लोन पर एक जैसी ईएमआई
ईएमआई आधारित पर्सनल लोन से जुड़े FAQs में यह भी कहा गया कि सर्कुलर के दायरे में ईएमआई आधारित सभी तरह के पर्सनल लोन आते हैं, भले ही इंटरेस्ट रेट किसी एक्सटर्नल बेंचमार्क से जुड़ी हो या इंटरनल बेंचमार्क से, FAQs में कहा गया है कि लोन मंजूर करते समय सालाना ब्याज दर या एनुअल परसेंटेज रेट में से जो भी अप्लाई हो रहा हो, उसके बारे में की फैक्ट स्टेटमेंट (KFS) और लोन एग्रीमेंट में पूरी जानकारी दी जानी चाहिए. इसमें कहा गया है कि कर्ज की अवधि के दौरान EMI में या कर्ज चुकाने की अवधि में अगर कोई बढ़ोतरी एक्सटर्नल बेंचमार्क रेट के आधार पर की जाती है, तो इसकी जानकारी उधारकर्ता को मिलनी चाहिए. साथ ही तिमाही स्टेटमेंट दिया जाना चाहिए, जिसमें उस समय तक के प्रिंसिपल और इंटरेस्ट रेट, ईएमआई अमाउंट, बची हुई ईएमआई और लोन की अवधि के लिए सालाना ब्याज दर की जानकारी होनी चाहिए.
फिक्स्ड रेट का विकल्प देना जरूरी
FAQs में कहा गया कि रेगुलेटेड इकाइयों और बैंकों को ईएमआई आधारित पर्सनल लोन की सभी कैटेगरीज के लिए फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट प्रोडक्ट अनिवार्य रूप से ऑफर करने होंगे. यानी ब्याज दर समान रखनी होगी. इन इकाइयों को कर्ज लेने वालों को यह विकल्प देना होगा कि वे इंटरेस्ट रेट में बदलाव के समय फिक्स्ड रेट का विकल्प चुन सकें. बता दें, अगस्त 2023 में आरबीआई ने बैंकों को निर्देश दिया था कि वे EMI के जरिए लोन चुकाने वाले लोगों को फिक्स्ड इंटरेस्ट रेट सिस्टम या लोन की अवधि बढ़ाने में से कोई विकल्प चुनने की इजाजत दें. आरबीआई के इस निर्देश का मकसद यह था कि ब्याज दरें बढ़ने के दौरान उधारकर्ता मुश्किल में न फंसें, लेकिन अभी भी कई बैंक इसका पालन नहीं कर रहे.
तेजी से बड़ रही बैड लॉस की संख्या
मई 2022 के बाद से ब्याज दरें बढ़ी हैं क्योंकि महंगाई पर काबू पाने के लिए आरबीआई ने इस दौरान बेंचमार्क लेडिंग रेट यानी रेपो रेट बढ़ाया. तब से लेकर फरवरी 2023 तक आरबीआई ने रेपो रेट 250 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाया था। इसके चलते कर्ज लेने वाले कई लोग ऐसी स्थिति में फंस गए, जिसमें इंटरेस्ट देनदारी के मुकाबले EMI कम हो गया और प्रिंसिपल अमाउंट बढ़ने लगा. वहीं, छोटे कर्ज लेने वाले करीब 50 लाख लोग ऐसे हैं जिन्होंने चार या उससे ज्यादा लैंडर्स से कर्ज लिए हैं. इनकी संख्या नवंबर तक कुल कर्ज लेने वालों के लगभग 6 प्रतिशत के करीब है. इससे पता चलता है कि वे कितने कर्ज में डूबे हुए हैं. वे कर्ज नहीं चुका पा रहे हैं और एक कर्ज चुकाने के लिए दूसरा लोन ले रहे हैं. इससे बैड लॉस की संख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है.
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