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RBI ने पेमेंट एग्रीगेटर नियमों में दी ढील, फिनटेक के लिए खुला अंतरराष्ट्रीय बाजार का रास्ता
RBI द्वारा पेमेंट एग्रीगेटर नियमों में ढील से भारत के फिनटेक सेक्टर को नई ऊर्जा मिलेगी. मंजूरी प्रक्रियाओं के सरलीकरण से कंपनियां तेजी से नए बाजारों में प्रवेश कर सकेंगी, जिससे सीमा पार भुगतान प्रणाली अधिक कुशल, सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 8 months ago
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने पेमेंट एग्रीगेटर (Payment Aggregator - PA) के लिए नियमों को आसान बनाते हुए फिनटेक कंपनियों को सीमा पार (Cross Border - CB) भुगतान सेवाओं में विस्तार की मंजूरी दी है. इससे पूरी तरह से लाइसेंस प्राप्त कंपनियां अपने कारोबार को तेजी से बढ़ा सकेंगी. नए दिशानिर्देशों का मकसद मंजूरी प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना और बाजार में प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना है.
अब केवल सूचना देकर शुरू हो सकेगा नया सेगमेंट
RBI के अनुसार, जो कंपनियां पहले से पूर्ण लाइसेंस प्राप्त हैं, वे किसी नए भुगतान सेगमेंट में प्रवेश करने से सिर्फ 30 दिन पहले सूचना देकर अपना काम शुरू कर सकती हैं. पहले इस प्रक्रिया में अलग से मंजूरी लेनी होती थी, जिसमें लगभग एक वर्ष का समय लग जाता था. नई व्यवस्था से कंपनियों को अपने राजस्व और बाजार विस्तार योजनाओं में तेजी लाने में मदद मिलेगी.
फिनटेक संस्थापकों ने जताई राहत
एक पेमेंट एग्रीगेटर स्टार्टअप के संस्थापक ने कहा कि “ज्यादातर फिनटेक कंपनियां पहले पीए लाइसेंस के साथ शुरुआत करती हैं और बाद में पीए-सीबी में विस्तार करती हैं. नए नियमों से हमारे गो-टू-मार्केट प्लान को गति मिलेगी.” दूसरे संस्थापक के अनुसार, “अधिकांश पीए पहले से ही RBI के घरेलू भुगतान मानदंडों का पालन कर रहे हैं, इसलिए उन्हें अन्य रेगुलेटेड बिजनेस में प्रवेश करने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा.”
सीओए प्रमाणपत्र अनिवार्य
RBI के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, किसी भी पीए को नया व्यवसाय शुरू करने से पहले Certificate of Authorisation (COA) का धारक होना अनिवार्य है. मानदंडों में स्पष्ट कहा गया है कि सीओए रखने वाला कोई भी पीए, अगर किसी अन्य श्रेणी में बिजनेस शुरू करना चाहता है, तो उसे 30 दिन पहले RBI को सूचित करना होगा. वर्तमान में देश में 56 ऑनलाइन पीए और 6 पीए-सीबी हैं जिन्हें RBI की पूरी मंजूरी प्राप्त है.
सीमा पार भुगतान में नए अवसर
पीए-सीबी ढांचे के तहत कंपनियां अब ऑनलाइन वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात के लिए सीमा पार भुगतान ट्रांजेक्शन की सुविधा प्रदान कर सकेंगी. अनुपालन मानदंडों में ढील दिए जाने से कारोबारी तेजी से इस ढांचे में प्रवेश कर सकेंगे. हालांकि RBI ने यह भी स्पष्ट किया है कि नया लाइसेंस जिम्मेदारी भी लाता है. कंपनियों को यह साबित करना होगा कि वे वास्तव में इस सेगमेंट में सक्रिय रूप से काम कर रही हैं.
फिनटेक उद्योग के विशेषज्ञों का मानना है कि RBI का यह कदम भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करेगा. यह न केवल निर्यातकों और ऑनलाइन व्यापारियों को लाभ देगा, बल्कि भारतीय फिनटेक कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में भी मदद करेगा.
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