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भारत में गेमिंग और इंटरएक्टिव मीडिया के विकास में तेजी, 2030 तक 7.7 बिलियन डॉलर का उद्योग

रिपोर्ट से साफ है कि आने वाले पांच वर्षों में भारत का गेमिंग और इंटरएक्टिव मीडिया सेक्टर नई ऊंचाइयों को छूएगा. नियामकीय बदलावों, तकनीकी प्रगति और बढ़ती डिजिटल आबादी के चलते भारत जल्द ही विश्व का एआई और गेमिंग हब बन सकता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago

वैश्विक स्तर पर गेमिंग और इंटरएक्टिव एंटरटेनमेंट में निवेश करने वाली प्रमुख संस्था BITKRAFT Ventures ने भारत में गेमिंग और इंटरएक्टिव मीडिया सेक्टर को लेकर एक नई रिपोर्ट जारी की है. यह रिपोर्ट Redseer Strategy Consultants के सहयोग से तैयार की गई है.

रिपोर्ट में बताया गया है कि रियल मनी गेमिंग (RMG) पर प्रतिबंध के बावजूद भारत का गेमिंग सेक्टर तेज़ी से बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 2030 तक इसका आकार तीन गुना बढ़कर 7.7 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.

रिपोर्ट का नाम और प्रमुख निष्कर्ष

रिपोर्ट का शीर्षक है “The Gaming and Interactive Media Opportunity in India”. इसमें कहा गया है कि गेमिंग और इंटरएक्टिव मीडिया सेक्टर भारत के डिजिटल मीडिया और एंटरटेनमेंट बाजार से करीब 1.5 गुना तेज़ी से बढ़ रहा है.

इस वृद्धि के पीछे भारत की युवा आबादी, सस्ते स्मार्टफोन, छोटे-छोटे डिजिटल लेनदेन (nano-transactions) और इंटरएक्टिव व पर्सनलाइज्ड कंटेंट की बढ़ती मांग को प्रमुख कारक बताया गया है.

कैज़ुअल और इंटरएक्टिव कंटेंट की ओर रुझान

रिपोर्ट बताती है कि भारत का डिजिटल इकोसिस्टम एक बड़े परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है. नियामकीय बदलावों के कारण अब कैज़ुअल गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स को मुख्यधारा में आने का मौका मिला है.

गेमिंग मार्केट की मजबूती

रिपोर्ट के अनुसार, रियल मनी गेमिंग पर पाबंदी के बावजूद डिजिटल गेमिंग सेक्टर तेजी से आगे बढ़ेगा.

1. यह मार्केट 2030 तक लगभग दोगुना होकर 4.5 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.

2. वहीं, ई-स्पोर्ट्स का बाजार तीन गुना बढ़कर 120 मिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना है.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाइब्रिड कैज़ुअल गेम्स यानी मिड-कोर गेम्स की तरह गहराई और प्रोग्रेशन वाले गेम्स आने वाले वर्षों में एक महत्वपूर्ण सेगमेंट बनेंगे.

बैटल रॉयल जैसे गेम्स अभी भी सबसे अधिक कमाई का जरिया बने हुए हैं. फिलहाल मार्केट में विज्ञापनों और इन-ऐप खरीदारी (IAP) का योगदान लगभग बराबर है, लेकिन आने वाले 5 वर्षों में IAP से होने वाली आय 6 गुना बढ़ने की संभावना है.

इंटरएक्टिव मीडिया में जबरदस्त उछाल

इंटरएक्टिव मीडिया के नए सेगमेंट्स आने वाले वर्षों में विस्फोटक वृद्धि दर्ज कर सकते हैं. यह मार्केट 2025 के 440 मिलियन डॉलर से बढ़कर 2030 तक 3.2 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है.

सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेक्टर इस प्रकार हैं:

1. एस्ट्रो और डिवोशनल टेक: 8 गुना वृद्धि के साथ 1.3 बिलियन डॉलर तक पहुंचने की संभावना. यह पारंपरिक धार्मिक सेवाओं को डिजिटल माध्यम से जोड़ रहा है.

2. माइक्रो ड्रामा: छोटे मोबाइल वीडियो कंटेंट का यह नया फॉर्मेट चीन की तरह भारत में भी लोकप्रिय हो रहा है. यह बाजार 1.1 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.

3. ऑडियो स्ट्रीमिंग: स्थानीय भाषाओं और उपयोगकर्ता-केंद्रित रणनीतियों के चलते यह बाजार 2030 तक चार गुना बढ़कर 300 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.

क्षेत्रीय भाषा और सोशल कनेक्शन की ताकत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वृद्धि अब ‘भारत ऑडियंस’ यानी टियर-2 और उससे नीचे के शहरों द्वारा संचालित हो रही है. ये उपयोगकर्ता स्थानीय भाषाओं में कंटेंट, गेमिंग कम्युनिटी के जरिये सामाजिक पहचान और नए डिजिटल कनेक्शन की तलाश में हैं. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, यह न केवल कंटेंट क्रिएशन की लागत घटा रहा है, बल्कि लोकल गेम डेवलपमेंट को भी गति दे रहा है.

विशेषज्ञों की राय

जेंस हिल्गर्स, BITKRAFT Ventures के फाउंडिंग जनरल पार्टनर ने कहा “भारत आज विश्व स्तर पर सबसे आकर्षक और तेज़ी से बढ़ने वाले बाजारों में से एक है. यहां की डिजिटल रूप से जागरूक युवा आबादी, मजबूत मोबाइल इंफ्रास्ट्रक्चर और विशाल स्केल मिलकर एक हाइपर-ग्रोथ माहौल बना रहे हैं. हमारा मानना है कि यह भारत को इंटरएक्टिव एंटरटेनमेंट का ग्लोबल पावरहाउस बनाने का निर्णायक क्षण है.”

अनुज टंडन, पार्टनर, इंडिया और यूएई, BITKRAFT Ventures ने कहा “भारत का गेमिंग सेक्टर अब स्थायी वृद्धि के दौर में प्रवेश कर रहा है. स्थानीय डेवलपर्स ऐसे इनोवेटिव और कमाई करने वाले अनुभव बना रहे हैं जो वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय हो रहे हैं. कैज़ुअल और हाइब्रिड गेम्स में तेजी, नए आईपी की रचना और आसान पेमेंट इकोसिस्टम मिलकर भारत के गेमिंग और इंटरएक्टिव मीडिया उद्योग का अगला अध्याय लिख रहे हैं.”

 

 


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