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Apple जैसी टेक्नोलॉजी यूज करेगा रेलवे, अब रेल हादसों पर लगेगी रोक!
भारतीय रेलवे एक नई टेक्नोलॉजी को पेश करने जा रही है. इसके जरिए ट्रेन हादसों को रोकने में मदद मिलेगी.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
रेल दुर्घनाओं को रोकने के लिए भारतीय रेलवे (Indian Railway) एक खास टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है. इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल Apple अपने लेटेस्ट iPhone में करता है. इस टेक्नोलॉजी का नाम LiDAR है. इस लाइट डिटेक्टिंग एंड रेंजिंग (LiDAR) टेक्नोलॉजी के बाद ट्रेन को पटरियों से उतरने से रोका जा सकेगा. साथ ही अगर पटरी में कोई खराबी हुई या फिर किसी ने जानबूझकर ट्रेन की पटरियों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, तो उसे समय पर पकड़ा जा सकेगा. तो आइए आपको इस टेक्नोलॉजी के बारे में पूरी जानकारी देते हैं.
ऐसे काम करेगी रेलवे की LiDAR टेक्नोलॉजी
LiDAR टेक्नोलॉजी की मदद से पटरियों पर फ्रैक्चर, फॉल्ट और गायब सेक्शन का पता लगाया जा सकेगा. इस टेक्नोलॉजी में कई तरह के सेंसर यूज किये जाते हैं. इन सेंसर की मदद से रेलवे ट्रैक के 3D मॉडल बनाए जाते हैं. इस टेक्नोलॉजी में पटरियों की मैपिंग की जाकी जाती है. साथ ही पटरी की सेफ्टी और दूरी मापने के लिए लेजर बीम का यूज किया जाता है. इस टेक्नोलॉजी से ट्रैक की रियल टाइम जानकारी मिलती है. इसमें सेंसर को चलती ट्रेनों और नेटवर्क के साथ उचित लोकेशन पर लगयाा जाएगा. इससे ट्रेन दुर्घटनाओं का पता लगाया जा सकेगा.
इतने महीनों में पूरा होगा काम
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार LiDAR टेक्नोलॉजी को 1,000 ट्रेनों में लगाया जाएगा. साथ ही 1,500 किलोमीटर ट्रैक को कवर किया जाएगा. LiDAR सिस्टम लगाने का काम 18 से 24 महीने में पूरा किया जाएगा. मौजूदा वक्त में पटरियों की देखरेक का काम मैन्युअल तरीके से किया जाता है, जिसकी वजह से सही समय पर ट्रेन परटियों के खराब होने की जानकारी नहीं मिलती हैं, जो ट्रेन हादसे की वजह बनती है.
सही समय पर मिलेगी ट्रैक में खामियों की जानकारी
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव का दावा है कि LiDAR सिस्टम से ट्रैक की खामियों का सही समय पर पता लगाया जा सकेगा. LiDAR सिस्टम के साथ रेलवे कई अन्य हाईटेक प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जिसके तहत ट्रेन कोच और इंजन में 75 लाख रुपये के एआई बेस्ड सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे. इसके लिए 15,000 करोड़ रुपये खर्च किये जाएंगे.
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