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Raebareli में नाक की लड़ाई, यूपी की 'नाक' ऊंची रखने में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है ये शहर 

रायबरेली में BJP और कांग्रेस के बीच नाक की लड़ाई होगी. राहुल गांधी यहां से BJP के दिनेश प्रताप सिंह के खिलाफ लड़ रहे हैं. ये शहर आर्थिक रूप से यूपी की नाक ऊंची रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

कांग्रेस लीडर राहुल गांधी (Rahul Gandhi) अमेठी के बजाए रायबरेली (Raebareli) से चुनाव लड़ रहे हैं. पहले उनके अमेठी से मैदान में उतरने की खबर थी. रायबरेली उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित लोकसभा सीट है. सालों तक इस सीट पर कांग्रेस का कब्जा रहा, लेकिन अब स्थिति काफी अलग है. रायबरेली का जहां अपना एक दिलचस्प राजनीतिक इतिहास है. वहीं, ये शहर उत्तर प्रदेश की अर्थव्यस्था में अहम योगदान भी देता रहा है. यहां बहुत कुछ ऐसा है, जो इसे दूसरों से खास बनाता है. रायबरेली में पारंपरिक कलाओं का भी बहुत लंबा इतिहास है. सेमरौता के जूते, महराजगंज के पीतल के बर्तन और ककोरन के मिट्टी के खिलौने इस जिले की शान को हमेशा से बढ़ाते रहे हैं.

इतनी है इंडस्ट्रियल GDP
रायबरेली की अर्थव्यवस्था पहले केवल कृषि पर ही आधारित थी, लेकिन सत्तर के दशक में यह जिला देश के औद्योगिक मानचित्र पर नजर आने लगा. आजाद भारत की पहली पब्लिक सेक्टर यूनिट मेसर्स इंडियन टेलीफोन इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने यहां अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. इसके बाद कई औद्योगिक घरानों ने रायबरेली का रुख किया. कुछ वक्त पहले तक शहर इंडस्ट्रियल GDP प्रति वर्ष 4% की दर से बढ़ रही थी, जो राष्ट्रीय औसत के अनुकूल है. आज रायबरेली में कई मेजर और मिनी इंडस्ट्रियल एरिया हैं, जहां से कई कंपनियां कारोबार कर रही हैं. हालांकि, रायबरेली पेपर मिल्स, मित्तल फर्टिलाइजर्स, नेशनल स्विचगियर, वेस्पा कंपनी सहित कुछ उद्योग बंद भी हुए हैं. लेकिन योगी सरकार इस दिशा में सुधार के लिए तेजी से काम कर रही है.

NTPC सहित कई बड़े नाम
फिरोज गांधी थर्मल पावर प्रोजेक्ट की शुरुआत रायबरेली में 27 जून 1981 को की गई थी. यह यूनिट पूरे भारत में उच्चतम प्लांट लोड फैक्टर के लिए जानी जाती है. इस इकाई को 1992 में NTPC को सौंप दिया गया था. 840 मेगावाट की उत्पादन क्षमता अब 1500 मेगावाट पर अपग्रेड हो गई है. NTPC की यह यूनिट थर्मल पावर इकाइयों के लिए रोल मॉडल की तरह है. इस जिले में नंदगंज सिरोही चीनी मिल भी स्थित है. गन्ना किसानों की समस्याओं को समझने के बाद 1979 में इस मिल की स्थापना की गई थी. 1998 में मिल का विस्तार किया गया और तब से इसका दैनिक उत्पादन 1500 क्विंटल हो गया. यह चीनी मिल स्थानीय गन्ना उत्पादकों को एक अच्छा बाजार प्रदान करती है. साथ ही इस मिल से स्थानीय लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है. इसके अलावा, यहां बिड़ला सीमेंट फैक्ट्री, श्री भवानी पेपर मिल्स लिमिटेड, कॉन्सेप्टा केबल्स लिमिटेड भी मौजूद हैं. श्री भवानी पेपर मिल्स की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी. पेपर मिल प्रतिदिन लगभग 45 से 50 टन कागज का उत्पादन कर रही है. कागज के उत्पादन के लिए कच्चा माल जिले से ही खरीदा जाता है, जिससे जिले के चावल मिल मालिकों और व्यापारियों को लाभ होता है. जबकि कॉन्सेप्टा केबल्स की फैक्ट्री की स्थापना 1983 में हुई थी.

हैंडीक्राफ्ट बिजनेस काफी लोकप्रिय
रायबरेली में रेल कोच फैक्ट्री भी है. यहां देश की तीसरी रेल कोच निर्माण इकाई है, जिसे नवंबर 2012 में सोनिया गांधी द्वारा बतौर सांसद स्थापित किया गया था. रायबरेली, देश के औद्योगिक कारोबार में अपना एक अलग स्थान रखता है और उत्तर प्रदेश की इकॉनमी में महत्वपूर्ण योगदान देता है. Vishakha Industries Ltd, U. P. State Spinning Mill Company, Malwika Cement Pvt., Shri Niwasji Oil, Refiners और Shreya Engineering भी रायबरेली के प्रमुख उद्योगों में शामिल हैं. इसके अलावा, यहां कई स्मॉल स्केल इंडस्ट्री भी मौजूद हैं, जो जिले की बढ़ती अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान प्रदान करते हैं. यहां का हैंडीक्राफ्ट बिजनेस काफी लोकप्रिय है. जिले में कई बेहतरीन एजुकेशन इंस्टीटूट भी हैं. 

पर्यटन से कमाई में भी योगदान
उत्तर प्रदेश को पर्यटन से होने वाली कमाई में रायबरेली भी कॉन्ट्रिब्यूशन देता है. 250 से अधिक पक्षी प्रजातियों की विविधता वाला समसपुर पक्षी अभयारण्य, बेहटा ब्रिज और 1986 में स्थापित इंदिरा गांधी मेमोरियल बॉटनिकल गार्डन जैसे कुछ बेहतरीन पर्यटन स्थल यहां मौजूद हैं. इसके अलावा मुगल काल और अवध राजवंश के प्रमुख आकर्षण पर्याप्त संख्या में पर्यटकों को रायबरेली की ओर खींचते हैं. पिछले साल रायबरेली जिले में 1262 करोड़ रुपए की लागत से 80 उद्योग लगाने के लिए प्रस्ताव आए थे, जिससे बड़े पैमाने पर लोगों को रोजगार भी मिलेगा. योगी सरकार इस शहर के महत्व को समझती है, इसलिए इसे लगातार बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं. 


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