होम / बिजनेस / धार्मिक भावनाओं को आहत करने पर 'Trikal' नामक शराब ब्रांड के खिलाफ विरोध, नाम बदलने की मांग
धार्मिक भावनाओं को आहत करने पर 'Trikal' नामक शराब ब्रांड के खिलाफ विरोध, नाम बदलने की मांग
हिंदू संगठन और राजनेता एकमत होकर मांग कर रहे हैं कि 'Trikal' नामक शराब ब्रैंड का नाम बदलकर धार्मिक प्रतीकों या शब्दों का व्यावसायिक उपयोग रोका जाए.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 1 year ago
एक प्रमुख शराब कंपनी द्वारा 'त्रिकाल' (TRIKAL) नाम से भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) ब्रांड लॉन्च करने पर धार्मिक गुरुओं, सनातन धर्म से जुड़ी संस्थाओं और राजनेताओं ने तीव्र विरोध जताया है. उनका कहना है कि 'त्रिकाल' नाम हिंदू देवता भगवान शिव से जुड़ा है, और इस नाम का शराब पर प्रयोग आस्था का अपमान है. आइए इस मामले के बारे में विस्तार से जानते हैं.
कंपनी पर आरोप
रेडिको खेतान कंपनी द्वारा 3,500 से 4,500 रुपये मूल्य की सिंगल मॉल्ट व्हिस्की बोतल पर 'त्रिकाल' नाम प्रयोग किया गया है. बोतल पर एक चित्र भी है जिसमें बंद आंखों वाला चेहरा और माथे पर एक वृत्त बना है, जिसे भगवान शिव की तीसरी आंख से जोड़ा जा रहा है.
अयोध्या धाम के महंत राजू दास महाराज ने कहा, "मैं रेडिको खेतान के मालिकों से अपील करता हूं कि कृपया सनातन धर्म को समझें, पहचानें और उसका सम्मान करें. भारत एक सनातन संस्कृति से जुड़ा देश है, जहां हर कण में इसकी व्यापकता झलकती है. यहां हर व्यक्ति इस संस्कृति के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति रखता है."
विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा, "यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे देश ही नहीं, विदेशों में भी हिंदू देवी-देवताओं, उनके प्रतीकों और हमारे आस्था केंद्रों का अपमान हो रहा है, कभी चप्पलों पर, कभी जूतों पर, कभी बिकिनी पर, और कभी कपड़ों पर. यह निंदनीय और शर्मनाक है." उन्होंने आगे कहा, "कम से कम भारत में तो निर्माताओं और प्रचारकों को संयम दिखाना चाहिए. यदि कोई ब्रांड हमारी आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़ा नाम लेता है, तो उसमें अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए."
बीजेपी सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने भी आपत्ति जताते हुए कहा, "यह अत्यंत गंभीर चिंता का विषय है कि कंपनियां हमारे धार्मिक नामों का प्रयोग अपने प्रचार और लाभ के लिए कर रही हैं." उन्होंने उत्पाद का नाम तुरंत बदलने की मांग की और कहा, "हमारी संस्कृति और विरासत से जुड़े किसी भी नाम के साथ इस प्रकार का व्यवहार हम सभी के लिए अपमानजनक है."
अखिल भारतीय संत समिति (उज्जैन) के अध्यक्ष महंत विशाल दास महाराज ने कहा, "हमारे शास्त्रों में भगवान महाकाल को 'त्रिकालदर्शी' कहा गया है, जो भूत, भविष्य और वर्तमान के ज्ञाता हैं. ऐसे नाम को नशे के उत्पाद से जोड़ना हमारी संस्कृति और सनातन धर्म के खिलाफ है." उन्होंने चेतावनी दी कि संत समाज और अखाड़ा परिषद इस ब्रांड का कड़ा विरोध करते हैं और कंपनी से तत्काल इसे बाज़ार से हटाने की मांग करते हैं.
महामंडलेश्वर स्वामी शैलेशनंद गिरी महाराज ने भी कंपनी की मार्केटिंग रणनीति की आलोचना करते हुए कहा, "आज के समय में कई उत्पादक 'त्रिकाल', 'त्रिदेव', 'त्रिदेवी' जैसे शब्दों का प्रयोग प्रचार में कर रहे हैं. यह बिल्कुल अनुचित है." उन्होंने कहा, "आज बात 'त्रिकाल' की है, कल 'त्रिदेव' की होगी. ऐसे शब्दों का इस्तेमाल केवल प्रचार के लिए करना नैतिक मूल्यों के खिलाफ है. कंपनियों को अपने लिए कुछ नैतिक सीमाएं तय करनी चाहिए."
उत्तराखंड आबकारी विभाग ने दिया स्पष्टीकरण
उत्तराखंड सरकार आबकारी विभाग के आयुक्त हरिचंद्र सेमवाल ने स्पष्ट किया है कि ‘त्रिकाल’ नामक मदिरा ब्रांड को उत्तराखंड में न तो निर्माण की अनुमति दी गई है और न ही बिक्री या पंजीकरण की. रेडिको खेतान द्वारा यह ब्रांड अन्य राज्यों में लॉन्च किया गया है, लेकिन इसे उत्तराखंड से जोड़ने वाली खबरें पूरी तरह भ्रामक और झूठी हैं. विभाग ने कहा कि ऐसी खबरें प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली हैं. आयुक्त ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड में किसी भी ऐसे उत्पाद की अनुमति नहीं दी जाएगी, जिसका नाम देवी-देवताओं या धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा हो. विभाग इस मामले में साइबर अपराध की धाराओं के अंतर्गत FIR दर्ज करवा रहा है और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. जनता से अपील की गई है कि ऐसी अफवाहों पर विश्वास न करें और संबंधित जानकारी तुरंत प्रशासन को दें ताकि समय पर कार्रवाई की जा सके.
टैग्स