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बाढ़ के पानी में बही इतने हजार करोड़ की संपत्ति, SBI Ecowrap की रिपोर्ट में हुआ खुलासा

रिपोर्ट में साफतौर पर कहा गया है कि बार-बार आने वाली आपदाओं ने आर्थिक परेशानियों को बढ़ा दिया है. रिपोर्ट कहती है कि भारत में अमेरिका, चीन के बाद सबसे अधिक बाढ़ आती है.

बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 2 years ago

भारत में माॅनसून के सीजन में हर साल बाढ़ आती है. कभी किसी राज्‍य में समस्‍या होती है, तो कभी किसी राज्‍य को परेशानी का सामना करना पड़ता है. एसबीआई इकोरैप (SBI Ecowrap ) की रिपोर्ट बताती है कि इस साल भारत के कई राज्‍यों में आई बाढ़ ने हजारों करोड़ का नुकसान कर दिया है. रिपोर्ट साफतौर पर कहती है कि इस बाढ़ ने 15 हजारों करोड़ का नुकसान किया है. रिपोर्ट इस ओर भी इशारा कर रही है कि प्राकृतिक आपदाएं गंभीर चिंता का विषय हैं. 1990 के बाद से भारत को अमेरिका और चीन के बाद तीसरे सबसे ज्‍यादा  प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है. 

क्‍या कहती है रिपोर्ट 
एसबीआई इकोरैप की ये रिपोर्ट कहती है कि बाढ़ ने पूरे देश में बड़े स्‍तर पर तबाही मचाई है, खासकर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे राज्यों में ज्‍यादा नुकसान हुआ है. एसबीआई की शोध रिपोर्ट, इकोरैप के अनुसार, बाढ़ से तकरीबन 10,000-15,000 करोड़ रुपये के बीच आर्थिक नुकसान होने का अनुमान है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून में आने वाली बाढ़ों के कारण होने वाली भारी क्षति, साथ ही हाल ही में आए बिपरजॉय चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदाएं, देश के लिए गंभीर चिंता का विषय है. रिपोर्ट कहती है कि इस तरह की घटनाएं देश को कई प्राकृतिक खतरों के प्रति संवेदनशील बनाती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है, हालांकि बाढ़ के कारण आर्थिक नुकसान की वर्तमान स्थिति का अनुमान लगाया जाना अभी बाकी है, लेकिन हमारा मानना है कि यह 10,000-15,000 करोड़ रुपये के बीच हो सकता है.

ऐसी आपदाओं का सामना करने वाला भारत तीसरा देश
भारत को 1990 के बाद से लगातार इस तरह की प्राकृतिक आपदाओं का सामना करना पड़ा है.भारत में आने वाली इन आपदाओं में बाढ़, लैंडस्‍लाइड, तूफान, भूकंप और सूखे जैसी आपदाएं शामिल हैं. रिपोर्ट बताती है कि 1990 के बाद से भारत में अब तक प्राकृतिक आपदाओं के 764 मामले रिकॉर्ड हो चुके हैं. इनमें अगर देखें तो जबकि 1900 से 2000 तक, भारत में 402 घटनाएं देखी गईं जबकि 2001-2022 तक, भारत में 361 घटनाएं देखी गईं. रिपोर्ट कहती है कि ऐसी घटनाएं आर्थिक तनाव को बढ़ा देती हैं. अगर अकेले बाढ़ और तूफान के आने की घटनाओं का आंकलन करें तो ये 41 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. 

भारत में बहुत कम होता है बीमा 
मीडिया रिपोर्ट में SBI Ecowrap का कहना है भारत में बीमा कराने वाले और होने वाले नुकसान में बड़ा अंतर है. रिपोर्ट में बताया गया है कि 2022 में पूरी दुनिया में 275 बिलियन डॉलर का नुकसान हुआ था, लेकिन इस नुकसान में से 125 बिलियन बीमा के द्वारा कवर कर लिया गया. 2022 में ये सुरक्षा अंतर 151 बिलियन डॉलर हो गया था, लगभग 64 प्रतिशत. जबकि पिछले 10 सालों के रिकॉर्ड पर नजर डालें तो ये 130 बिलियन डॉलर रहा है. जोकि 54 प्रतिशत बनता है. अभी ये उससे कम है.वहीं भारत में सुरक्षा अंतर का आंकड़ा 92 प्रतिशत रहा है.

इसे ऐसे और आसान भाषा में समझा जा सकता है कि भारत में 100 रुपये में से सिर्फ 8 रुपये बीमा के तौर पर मिल पाते हैं, 92 रुपये नहीं मिलते हैं. रिपोर्ट में बीमा क्षेत्र से जुड़े प्राकृतिक आपदा जोखिमों के लिए एक 'आपदा पूल' की जरूरतों पर जोर दिया गया है. अगर हम भारत में 2020 की बाढ़ पर विचार करें, तो कुल आर्थिक नुकसान $7.5 बिलियन (52,500 करोड़ रुपये) का था, लेकिन बीमा कवर केवल 11 प्रतिशत था.

कोविड ने किया था अलर्ट 
रिपोर्ट में कोविड की बीमारी का भी जिक्र किया गया है. इस बीमारी ने हमें सामाजिक क्षेत्र में कई तरह के सुधार लागू करने के लिए सोचने पर मजबूर किया था. इसमें ये भी कहा गया था कि बीमा क्षेत्र और सरकारों को संभावित देनदारियों पर चर्चा करने की जरूरत है. इस रिपोर्ट में उदाहरण देते हुए समझाया गया है कि एमएसएमई क्षेत्र में केवल 5 प्रतिशत इकाइयां ऐसी हैं जिनका बीमा हुआ है, जबकि बाकी बिना बीमा के हैं. रिपोर्ट में एमएसएमई में काम करने वाले मजदूरों के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ से लेकर दूसरी तरह की सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए एक कार्यक्रम का भी सुझाव दिया गया है. 
 


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