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लोन ग्रोथ में निजी बैंकों की की रफ्तार धीमी, उद्योग में पब्लिक सेक्टर बैंकों का दबदबा बढ़ा
निजी बैंकों के लिए यह दौर चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि लगातार दो वर्षों से उनकी ग्रोथ दर उद्योग औसत से कमजोर रही है.
बिजनेस वर्ल्ड ब्यूरो 7 months ago
भारत के निजी क्षेत्र के बैंक इस वित्त वर्ष में बाजार हिस्सेदारी के मोर्चे पर दबाव में आ सकते हैं. लगातार दूसरे साल उनकी ऋण वृद्धि दर उद्योग की कुल ग्रोथ से नीचे रहने की आशंका जताई जा रही है. इससे पब्लिक सेक्टर बैंकों की बढ़त और तेज होती दिखाई दे रही है.
लोन बुक ग्रोथ उद्योग की तुलना में कमजोर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 2025-26 की पहली छमाही में निजी बैंकों की लोन बुक 9.9 फीसदी बढ़ी. इससे पहले 2024-25 में यह बढ़त केवल 8.9 फीसदी रही थी. इसके मुकाबले सभी सूचीबद्ध बैंकों की लोन बुक 2024-25 में 11.4 फीसदी और चालू वर्ष की पहली छमाही में 11.7 फीसदी बढ़ी. यह 15 वर्षों में पहली बार है जब निजी बैंक लगातार दो साल उद्योग की औसत ग्रोथ से पीछे हैं.
सितंबर 2025 तक निजी बैंकों की कुल लोन बुक बढ़कर 77.14 लाख करोड़ रुपये पहुंची, जबकि मार्च 2025 में यह 73.56 लाख करोड़ रुपये थी. सभी सूचीबद्ध बैंकों की लोन बुक इसी अवधि में 193.6 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई.
निजी बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में गिरावट
कमजोर ग्रोथ के चलते निजी बैंकों की बाजार हिस्सेदारी 2024 के अंत में 40.8 फीसदी से घटकर सितंबर 2025 में लगभग 39.8 फीसदी रह गई. इसके उलट सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की लोन ग्रोथ ने तेज गति पकड़ी है. 2020-25 के दौरान पीएसयू बैंकों की लोन बुक 13.9 फीसदी CAGR से बढ़ी, जबकि 2015-20 में यह केवल 2 फीसदी बढ़ी थी.
एचडीएफसी बैंक की धीमी गति का बड़ा असर
एचडीएफसी-एचडीएफसी बैंक विलय के बाद बैंक का फोकस लोन ग्रोथ की बजाय इंटीग्रेशन और जमा आधार बढ़ाने पर रहा. विशेषज्ञों के अनुसार, एचडीएफसी बैंक की बाजार में बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण इसकी सुस्त ग्रोथ ने पूरे निजी बैंकिंग सेक्टर की गति को प्रभावित किया है. मार्च 2025 में निजी बैंकों की कुल लोन बुक में एचडीएफसी बैंक का हिस्सा 35.6 फीसदी था. 2024-25 में बैंक की लोन बुक ग्रोथ केवल 5.4 फीसदी रही. अन्य निजी बैंक जैसे इंडसइंड, ऐक्सिस, येस बैंक, कर्नाटक बैंक और बंधन बैंक भी उद्योग औसत से नीचे रहे.
आय और मुनाफे में हिस्सेदारी घटी
निजी बैंकों की ब्याज आय और मुनाफे में हिस्सेदारी भी गिरावट में रही.
1. ब्याज आय में हिस्सा 2020 के 42.4 फीसदी से घटकर 2025-26 की पहली छमाही में 41.5 फीसदी रह गया.
2. कुल मुनाफे में हिस्सेदारी 2020 के 80.2 फीसदी से गिरकर 2025-26 की पहली छमाही में 49.8 फीसदी रह गई.
3. दूसरी ओर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की हिस्सेदारी बढ़कर 49.9 फीसदी हो गई है.
विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में एचडीएफसी बैंक की लोन ग्रोथ में तेजी देखने को मिल सकती है. यदि यह रफ्तार पकड़ती है तो निजी क्षेत्र के अन्य बैंक भी लाभान्वित हो सकते हैं और सेक्टर में संतुलन लौट सकता है.
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